_*❤️मोअज़ेजा ए हुज़ूर صلى الله عليه وسلم*_
_*पोस्ट नंबर :- 01*_
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_*🗡️तलवार का ज़ख़्म अच्छा हो गया*_
_*💫ग़ज़वे ख़ैबर में हज़रते सलमा रोलिंग अकोअ रदियल्लाहु तआला अन्हु की टाँग (पैर) में तलवार का ज़ख़्म लग गया ! वो फौरन ही बारगाहे नुबुव्वत में हाजिर हो गए! आपने उन्हें ज़ख़्म पर तीन मर्तबा दम कर दिया ! फिर उन्हें दर्द की कोई शिकायत नहीं हुई, बस ज़ख़्म के निशान रह गए!*_
_*📕बुखारी शरीफ, ज़िल्द 2, स्पष्टा 605*_
_🖋 सरकार आला हजरत फरमाते हैं:—_
_*वाह क्या जूडो करम है शाहे बताहा टेरर,*_
_*नही गलत ही नहीं लगता है !!*_
_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*❤️मोअज़ेजा ए हुज़ूर صلى الله عليه وسلم*_
_*पोस्ट नंबर :- 02*_
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_*🌙चांद के दो टुकड़े हो गए🌙*_
_*✨रिवायतों में सबसे ज्यादा सही और मुस्तनाद हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसूद रदियल्लाहु तआला अन्हु की रिवायत है की जो बुखारी व मुस्लिम व तिर्मिज़ी वगैरह में मज़कूर है ! हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसूद रदियल्लाहु तआला अन्हु को मौका मिला था और उन्होंने इस मुअजिज़ा को अपनी आँखों से देखा! उनका कथन है कि :-*_
_*💫हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ज़माने में चाँद के दो टुकड़े हो गए ! ऊपर एक टुकड़े का पहाड़ और नीचे एक टुकड़े का पहाड़ दिख रहा था ! आप कुफ्फार को येंजर दिखा सकते हैं कि वे इरशाद फ़रमाया के गवाह हो गो, हो गवाह गो!*_
_*📕बुखारी शरीफ़, ज़िल्ड 2, सफ़ा 721*_
_🖋सरकार आला हजरत फरमाते है~_
_*सूरज उलटे पाँव पलटे, चाँद की आशंका से हो चाक!*_
_*अंधे नजदी देख ले, कुदरत रसुलुल्लाह की !!*_
_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*❤️मोअज़ेजा ए हुज़ूर صلى الله عليه وسلم*_
_*पोस्ट नंबर :- 03*_
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_*☀सूरज पलट गया ☀*_
_*🗒इसका वाकाया ये है कि हज़रते इब्ने अस्मा बिन्ते उमास रदियल्लाहु तआला अन्हा का बयान है कि "ख़ैबर" के करीब "मंजिल सहबा" में हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम नमाज़े अस्र पढ़ कर हजरत अली रदियल्लाहु अन्हु की गोद में सर रख कर सो सो गए और आप पर "वही" नाज़िल होने लगे ! हज़रते अली सरे अक़दस को अपने आगोश में लिए बेठे रहे यहाँ तक के सूरज गुरुब हो गए ! और आपकी नमाज़े अस्र क़ज़ा हो गई !*_
_*✨जब वही खत्म हुआ और आपने अपने सरे अकदस को उठाया और आपको ये आसानी से होने वाले हज़रते अली रदियल्लाहु अन्हु की नमाज़े अस्र क़ज़ा हो गई है ! तो आप दुआ फ़रमाई की "या अल्लाह! यक़ीन अली तेरी और तेरे रसूल की इताअत में थे बंधा तू सूरज को वापस लौटा दे ताकि अली नमाज़े अस्र अदा कर लें!"*_
_*💎हज़रते अबू असमा रोलिंग उमैस कहते हैं कि उपयोगकर्ता अपनी आंखों से डूबे हुए सूरज को पलटते हुए पकड़ें और पहाड़ की चोटियों पर और जमीं के ऊपर हर तरफ धूप फ़ैल गई!*_
_*📕शिफा शरीफ़, ज़िल्ड 1, सफ़ा 185*_
_🖋सरकार आला हजरत फरमाते है~_
_*साहिब रजाते शम्सो शुकुल क़मर,*_
_*नायब दस्ते कुदरत पे लाख सलाम !!*_
_*फ़र्श ता अर्श है जिस के ज़ेरे नगीं,*_
_*उसकी क़हिर रियासत पे लाख सलाम*_
_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*❤️मोअज़ेजा ए हुज़ूर صلى الله عليه وسلم*_
_*पोस्ट नंबर :- 04*_
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_*☁☁"मेराज "☁☁*_
_*💫जमहूर उल्माए मिल्लत का सही मज़हब यही है की मेराज बहलाते बेदारी जिस्मों रूह के साथ सिर्फ एक बार हुई ! जम्हूर सहाबा व ताबेईन और फ़ुक़हा मुहद्दिसिन नीज़ सुफियेकेराम यही मज़हब है ! चुनाँचे अल्लामा हज़रते मुल्ला अहमद जैवन रहमतुल्लाह अलैह (उस्ताद औरंगज़ेब आलमगिर बादशाह ने तहरीर फरमाया कि)—*_
_*✨और सबसे ज़्यादा सही कौल ये की मेराज़ बहलाते बेदारी जिस्मों रूह के साथ हुई ! यही अहले सुन्नत व जमाअत का मज़हब है ! लिहाज़ा जो शख्श ये कहे की मेराज़ फ़क़त रूहानी हुई या फ़क़त ख़्वाब में हुई वो सख़्श बिदती व गुमराह कुन फ़ासिक है !*_
_*📕सिरतुल मुस्तफ़ा, सफ़ा 530*_
_🖋सरकार आला हज़रत फरमाते है~_
_*लामकां तक जिसका उजाला वो है !*_
_*हर मकां का उजाला हमारा नबी !!*_
_*📮जारी रहेगा इन्शा'अल्लाह.....*_
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_*❤️मोअज़ेजा ए हुज़ूर صلى الله عليه وسلم*_
_*पोस्ट नम्बर :— 05*_
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_*📜तीस बरस ख़िलाफ़त फिर बादशाही👑*_
_*💫हज़रते सफ़ीना रदियल्लाहु अन्हु कहते है की हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया की मेरे बाद तीस बरस तक ख़िलाफ़त रहेगी ! उसके बाद बादशाही हो जायेगी ! इस हदीस को सुनाकर हज़रते सफ़ीना ने फ़रमाया तुम लोग गिन लो ! हज़रत अबूबक्र की ख़िलाफ़त 2 बरस और हज़रते उमर की ख़िलाफ़त 10 बरस और हज़रत उस्मान की ख़िलाफ़त 12 बरस और हज़रत अली की ख़िलाफ़त 6 बरस है ! ये कुल तीस बरस हो गए!*_
_*📕मिश्कात जिल्द, 2, सफा 463*_
_*70 हिज़री और लड़को की हुकूमत👑*_
_*✨हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया की 70 हिजरी के शुरू और लड़कों की हुकूमत से पनाह मांगो!*_
_*📕मिश्कात जिल्द2 सफा 463, किताबुल फ़ित्न*_
_*✨इसी तरह हुज़ूर ए अकरम ने फ़रमाया की मेरी उम्मत तबाही कुरैश के चन्द लड़को के हाथों होगी ! हज़रते अबु हुरेरह इस हदीस को सुनाकर फ़रमाया करते थे की अगर में चाहूँ तो उन लड़को के नाम बता सकता हूँ ! वो फुलाँ के बेटे और फुलाँ के बेटे है!*_
_*📕बुखारी जिल्द 1 सफा 509, बाब अलामाते नुबुव्वा*_
_🖋सरकार आला हज़रत फरमाते है~_
_*सरे अर्श पर है तेरी गुजर,*_
_*दिले फ़र्श पर है तेरी नज़र !*_
_*मलकुत व मुल्क में कोई शय,*_
_*वो नहीँ जो तूझ पे अयाँ नहीं !*_
_*📮जारी रहेगा इन्शा'अल्लाह.....*_
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_*❤️मोअज़ेजा ए हुज़ूर صلى الله عليه وسلم*_
_*पोस्ट नम्बर :— 06*_
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_*⛰पहाड़ का हिलना⛰*_
_*💎एक दिन हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने साथ हज़रते अबू बकर व हज़रत उमर हज़रते उस्मान रदियल्लाहु ताला अन्हु को लेकर उहद पहाड़ पर चढ़े ! पहाड़ (जोशे मुसर्रत) झूम कर हिलने लगा ! उस वक़्त आपने पहाड़ को ठोकर मारकर ये फ़रमाया की "ठहर जा" इस वक़्त तेरी पुश्त पर एक पैगम्बर है सिद्दीक़ है और दो (हज़रते उमर व उस्मान) शहीद है !*_
_*📕बुखारी जिल्द 1, सफा 519, बाब फज़ले अबी बकर*_
_🖋सरकार आला हज़रत फरमाते है~_
_*एक ठोकर में उहद का ज़लज़ला जाता रहा,*_
_*रखतीं है कितना वक़ार अल्लाहु अकबर एडियां !*_
_*📮जारी रहेगा इन्शा'अल्लाह.....*_
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_*❤️मोअज़ेजा ए हुज़ूर صلى الله عليه وسلم*_
_*पोस्ट नम्बर :— 07*_
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_*⚰लड़की क़ब्र से निकल पड़ी ⚰*_
_*💎रिवायत है हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक शख्श को इस्लाम की दावत दी ! तो उसने कहा की मै उस वक़्त तक आप ईमान नही ला सकता जब तक की मेरी बच्ची ज़िंदा न हो जाये ! आपने फ़रमाया की तुम मुझे उसकी क़ब्र दिखाओ ? उसने अपनी लड़की की क़ब्र दिखा दी !*_
_*✨हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उस लड़की का नाम लेकर पुकारा ! तो उस लड़की ने क़ब्र से निकल कर जवाब दिया कि ए हुज़ूर! में आपके दरबार में हाजिर हूँ ! फिर आपने उस लड़की से फरमाया की "क्या तुम फिर दुनिया में लौट कर आना पसन्द करती हो !" लड़की ने जवाब दिया- "नही" या रसूलुल्लाह! मेने अल्लाह तआला को अपने माँ बाप से ज़्यादा मेहरबान और आख़िरत को दुनिया से बेहतर पाया !*_
_*📕शिफ़ा शरीफ़, जिल्द 1, सफा 211*_
_🖋सरकार आला हज़रत फरमाते है~_
_*जब आ गयी है जोशे रहमत में उनकी आँखें!*_
_*जलते बुझा दिए है रोते हंसा दिए है !!*_
_*इक दिन हमारा क्या है आज़ार उसका कितना !*_
_*तुमने तो चलते फिरते मुर्दे ज़िला दिए है !!*_
_*📮जारी रहेगा इन्शा'अल्लाह.....*_
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_*❤️मोअज़ेजा ए हुज़ूर صلى الله عليه وسلم*_
_*पोस्ट नम्बर :— 08*_
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_*💦अंगुश्ते मुबारक की नहरें 💦*_
_*📚अहादीस की तलाशो ज़ुस्तज़ु से पता चलता है की आपकी मुबारक ऊँगलीयों से तकरीबन तेरह मोके पर पानी की नहरें जारी हुईं ! उनमे से सिर्फ़ एक मोके का ज़िक़्र यहाँ तहरीर किया जा रहा है !*_
_*📆6 हिजरी में रसूलल्लाह सल्लल्लाहू तआ़ला अलैहि वसल्लम उमरा का इरादा करके मदीना मुनव्वरा से मक्कए मुकर्रमा के लिए रवाना हुए और हुदैबिया के मैदान में उतार पड़े ! आदमियों की कसरत की वजह से हुदैबिया का कुँआ ख़ुश्क हो गया और हाजिरिन पानी के एक एक कतरे के लिए मुहताज हो गए उस वक़्त रहमते आलम के दरियाये रहमत में जोश आ गया और आपने एक बड़े प्याले में अपना दस्ते मुबारक रख दिया ! तो आपकी मुबारक उंगलियों से इस तरह पानी की नहरें जारी हो गयी की पन्द्रह सौ का लश्कर सैराब हो गया !*_
_*🔹लोगों ने वज़ू व गुस्ल भी किया ! जानवरो को भी पिलाया और अपने मस्को और बर्तनों को भी भर लिया ! फिर आपने प्याला में से दस्ते मुबारक को उठा लिया और पानी ख़त्म हो गया !*_
_*💫हज़रत जाबिर से लोगों ने पूछा की उस वक़्त तुम लोग कितने आदमी थे तो उन्होंने फ़रमाया की हम लोग 1500 की तादाद थी ! मगर पानी इस क़दर ज़्यादा था की हम लोग एक लाख भी होते तो सबको काफ़ी हो जाता !*_
_*📕मिश्कात शरीफ़, जिल्द 2, सफा 532*_
_*📕बुखारी शरीफ, जिल्द1, सफा 504/505*_
_🖋 सुब्हान अल्लाह! इसी हसीन मंज़र की तसवीर कशी करते हुए सरकार आला हज़रत फरमाते है~_
_*उंगलिया हैं फ़ैज़ पर, टूटे हैं प्यासे झूम कर !*_
_*नदियां पंजात रहमत की हैं जारी वाह वाह !*_
_*📮जारी रहेगा इन्शा'अल्लाह.....*_
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