गुरुवार, 20 मई 2021
सोमवार, 28 दिसंबर 2020
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रविवार, 15 नवंबर 2020
📚 EID-MILADUN-NABI QURA'AN AUR SHARIYAT KI ROUSHNI ME
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*📜🅿 पोस्ट:-0⃣1⃣*
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🎆 *☞12 रबि उल अव्वल☜* 🎆
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*
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📖 *शरीअत की रौशनी में* 📚
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*_🌹💫☞पहले ये जानले की एहले सुन्नत के नज़्दीक ईदे मिलादुन्नबी ﷺ मनाना कोई फ़र्ज़ या वाजिब नहीं, ये मुस्तहब अ’मल है। जो करे उसको षवाब मिलेगा और जो न करे उस पर कोई गुनाह नहीं।अब बात ये आती है की क्या इस्लाम हमें इजाज़त देता है ईदे मिलादुन्नबी ﷺ मानाने की या नहीं_*
☞इसका जवाब ये है की क़ुरआनो हदिष की रौशनी में मिलादुन्नबी मनाना बिलकुल जाइज़ है।कोई भी दूसरे मसलक का आ’लिम आज तक शरई दलील मिलाद के हराम या नाजाइज़ होने की न आज तक ला सका है और न ला सकेगा। ان شاء الل📖
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🔄✨👉🏻आगे आने वाली पोस्ट में हम जानेंगे की किस तरह ईदे मिलाद ﷺ मनाना जाइज़ है क़ुरआनो हदिष की रौशनी में !🔄
*12वी शरीफ की निस्बत से ये 12 टॉपिक जो निचे दिये गये है और मजीद कुछ पॉइंट भी कवर करने की कोशिश की जायेगी।*
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*_{1}↬आक़ा ए करीम ﷺ की विलाद कब हुई✍……_*
*_{2}↬क़ुरआन क्या फरमाता है✍……_*
*_{3}↬आप ﷺ ने क्या अपना मिलाद मनाया_*
*_और आप ﷺ ने अपने मिलाद के मुतअल्लिक़ क्या फ़रमाया✍……_*
*_{4}↬क्या किसी सहाबी ने ईदे मिलादुन्नबी ﷺ मनाई है✍……_*
*_{5}↬अबू लहब ने भी मिलाद मनाया…✍……_*
*_{6}↬जुलूस निकालना किसकी सुन्नत✍……_*
*_{7}↬झंडे लगाना किसकी सुन्नत✍……_*
*_{8}↬नात शरीफ पढ़ना किसकी सुन्नत✍……_*
*_{9}↬मिलाद पर खर्च करना कैसा✍……_*
*_{10}↬शैतान की रुस्वाई…_*
*_{11}↬शबे क़द्र से भी अफ़्ज़ल रात….✍……_*
*_{12}↬किस किस आइम्ह व मुहद्दिसिन ने✍……_*
*_ मिलादुन्नबी ﷺ को जाइज़ कहा है✍……_*
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*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…*
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*🅿 पोस्ट:-0⃣2⃣*
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🎆 *☞12 रबि उल अव्वल☜* 🎆
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*
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📖 *शरीअत की रौशनी में* 📚
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🎍☞ *आक़ा-ए-करीम ﷺ की विलादत कब हुई* 12 रबी उल अव्वल पर तमाम उलमा ए इस्लाम का इज्मा है की इस दिन मुहम्मद ﷺ सारे आ’लम के लिये रहमत बनके दुन्या में तशरीफ़ लाये। और इसी दिन सारी दुन्या में मुसलमान अपने नबी ﷺ की विलादत का जस्न मानते है।
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📒इब्ने जवाज़ी, शफा 87
🌹इब्ने इस्हाक़ ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه
🗓85-151 हिजरी
📕इब्ने हिशाम, जी-1, शफा 158
🌹अल्लामा इब्ने हिशाम ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه
🗓213 हिजरी
📗तारीख अल-उमम व अल-मुलुक, जी-2, शफा 125
🌹इमाम इब्ने जारीर तबारी ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه
🗓224-310 हिजरी
📒आइलामुन नबुव्वत, शफा 192
🌹अल्लामा अबू अल-हसन अली बिन मुहम्मद अल-मवार्दी ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه
🗓370-480 हिजरी
📕आयुन अल-असर, जी-1, शफा 33
🌹इमाम अल-हाफ़िज़ अबू-उल-फतह अल-उन्दालासि ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه
🗓671-734 हिजरी
📗इब्ने खलदून, 2/394
🌹अल्लामा इब्न खलदून ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه
🗓732-808 हिजरी
📕मुहम्मद रसूलुल्लाह, 1/102
🌹मुहम्मद अस-सादिक़ इब्राहिम अर्जुन ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه
📗मदारिजुन नुबुव्वत, 2/14
🌹शैख़ अब्दुल-हक़ मुहद्दिस दहेल्वी ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه
🌹950-1052 हिजरी
📕अल-मुवाहिद अल-लदुन्य , 1/88
🌹इमाम क़ुस्तलानी ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه
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*_🔮👉🏻 इससे साबित हुआ की आक़ा-ए-करीम ﷺ की विलादत 12 रबी उल अव्वल को ही हुई…._*
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*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…*
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*🅿🄾🅂🅃►0⃣3⃣*
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🎆 *☞12 रबि उल अव्वल☜* 🎆
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*
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📖 *शरीअत की रौशनी में* 📚
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🎍👉🏻 *अल-क़ुरआन* तुम फ़रमाओ अल्लाह ही के फज़ल और उसी की रहमत और उसी पर चाहिये की खुशिया करे…*
*📖सूरह युनुस, आयत 58📚*
🔮👉🏻इस आयत में अल्लाह عزوجل ने अपने फ़ज़्ल और अपनी रहमत पर खुशिया मनाने का हुक्म दिया है। और हमने तुम्हे न भेजा मगर रहमत सारे जहांन के लिये…
*📖सूरह अम्बिया, आयत 10📚*
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*_📖👉🏻 इस आयत में अल्लाह عزوجل अपने प्यारे नबी ﷺ से फरमा रहा है की हमने तुम्हे सिर्फ 1 या 2 आलम के लिए नहीं बल्कि सारे आ’लम के लिये रहमत बना कर भेजा यहाँ गौर करे अल्लाह عزوجل ने नबीﷺ को रहमत कहा है और जो पहली आयत पेश की गई उसमे अल्लाह عزوجل ने अपनी रहमत पर ख़ुशी मनाने का हुक्म दिया है।_*
📖👉��जो इन आयतो का मुन्किर होगा, जो नबीﷺ को अपने लिये अल्लाह की रहमत और नेअमत नहीं संमजेगा वो नबी ए पाकﷺ की विलादत की ख़ुशी से ऐतराज़ करेगा, यानी वो गम मनायेगा नबीﷺ की विलादत पर मगर हम तो खुशिया ही मनायेंगे,,
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*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…*
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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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*🅿🄾🅂🅃►0⃣4⃣*
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🎆 *☞12 रबि उल अव्वल☜* 🎆
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*
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📖 *शरीअत की रौशनी में* 📚
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📖👉🏻 *क़ुरआन क्या फरमाता है* अपने रब की नेअमतों का खूब खूब चर्चा करो
*📖सूरह दूहा आयत 11📚*
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*🍁☞ इस आयत में अल्लाह ने हमें अपनी नेअमतों का चर्चा करने का हुक्म दिया। हर मोमिन ये जनता है की अल्लाह की सबसे बड़ी अज़ीम नेअमत हमारे लिये उसके रसूल है।*
📖☞इस बात को समझने के किये क़ुरआन की एक और आयत पेशे खिदमत है…
*✬बेशक अल्लाह का बड़ा ऐहसान हुआ मुसलमानो पर की उन्मे उन्ही मेसे एक रसूल भेजा जो उनपर उसकी आयते पढ़ता है और उन्हें पाक करता है,✍*
*📖सूरह अल-इमरान, आयत 164📚
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*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼*
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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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*🅿🄾🅂🅃►0⃣5⃣*
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🎆 *☞12 रबि उल अव्वल☜* 🎆
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*
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📖 *शरीअत की रौशनी में* 📚
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*_✬↬मेरे भाइयो आप सारा क़ुरआन पढ़ लीजिये किसी भी जगह अल्लाह ने ये नहीं कहा की हमने तुम्हे ये नेअमत दे कर तुम पे एहसान किया है सिवा अपने मेहबूब के।_*
*✍इससे मालूम हुआ की अल्लाह की सबसे बड़ी नेअमत हमारे लीये उसके नबी है…..*
📖 बेशक तुम्हारे पास तशरीफ़ लाये तुम में से वो रसूल जिन पर तुम्हारा मुशक्कत में पड़ना गवारा नहीं है, तुम्हारी भलाई के निहायत चाहने वाले मुसलमानो पर कमाले मेहरबान मेहरबान📚
*📜सूरह तौबा, आयात 128📕*
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🌸👍🏻इस आयत में अल्लाह तबारक-व-तआला खुद गवाही दे रहा है अपने रसूल की हम गुनाहगारो से बे-इन्तहा मुहब्बत और हम पर मेहरबान होने की…..
तो क्या पहली आयत में अल्लाह ने जो हुक्म दिया उस पर अमल करते हुए हम हमारे प्यारे प्यारे आक़ा की विलादत न मनाये ,,
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*💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍*
*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼*
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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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🅿️OST - 0️⃣6️⃣
📖12 रबि उल अव्वल📚
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🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦
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☞शरीअत की रौशनी में☜
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☞📖 आइये आप के सामने एक हदिष पेश करता हु अपने प्यारे आक़ा ﷺ के महेरबान होने की चुनान्चे आक़ा ए करीम ﷺ का फरमान मग्फिरत निशान है : जिसने मुज पर 100 मर्तबा दुरुद शरीफ पढ़ा अल्लाह عزوجل उसकी दोनों आँखों के दरमियान लिख देता है की ये निफ़ाक़ और जहन्नम की आग से आज़ाद है और उसे ब-रोज़े कियामत शोहदा के साथ रखूँगा।
📖मजमुअज़्ज़वायद् 10/253, हदिष 17298📕
✒ अब 100 बार दुरुद शरीफ पढ़ना कौनसी बड़ी बात है मगर फिर भी जहन्नम से निजात की बशारत दे दी गई अब ये मेहरबानी नहीं तो क्या है.✍
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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍
📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼
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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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🅿️OST -- 7️⃣
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📖12 रबि उल अव्वल 📚
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*☞मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद☜*
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शरीअत की रौशनी में
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📖👉🏻अब और क्या क्या सबुत चाहिये तुम्हे अपने प्यारे नबी ﷺ से मुहब्बत करने के लिये और उनकी विलादत की ख़ुशी मनाने के लिये ?
☞हुज़ूर ने अपनी विलादत खुद मनाई☜
✒ हज़रत अबू क़तादाرضي الله تعالي عنه से रिवायत है : रसूले करीम ﷺ से पिर का रोज़ा रखने के बारे में सवाल किया गया ओ आपﷺ ने फ़रमाया की
✒ इसी दिन मेरी विलादत हुई और इसी दिन मुझ पर क़ुरआन नाज़िल हुआ.✍
📖सहीह मुस्लिम, 2/1162, हदिष 819📕
📖नसाई अल-सुनाने कुब्रा, 2/2777, हदिष 146📗
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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍
📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼
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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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*🅿पोस्ट:-0⃣8️⃣*
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📖12 रबि उल अव्वल 📚
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🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦
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शरीअत की रौशनी में
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📖👉🏻 क्या किसी साहबा ने मिलादे मुस्तफा मनाई है हज़रत अबू सईद खुदरी से रिवायत है की मुआविया से रिवायत हे की आक़ा करीम ﷺ बाहिर निकले साहब के हल्के पर, आप ने फ़रमाया :
☞✮तुम यहाँ किस वजह से बेठे हो, उन्होंने कहा हम अल्लाह عزوجل से दुआ कर रहे है और उसका शुक्र अदा कर रहे है की उसने अपना दिन हम को बतलाया और हम पर एहसान किया आप को भेज कर।…..
🌹👉🏻साहबा और ताबेईन और दीगर अहले इस्लाम ने पीर के दिन का रोज़ा रख कर भी मिलाद मनाया।
✒मक्का शरीफ के लोग नबी की पैदाइश की जगह को मिलादुन्नबी ﷺ के दिन हर साल ज़ियारत करते और महफ़िल मुनाकिद करते,✍
📖जवाहिर अल-बिहार सफा 1222📘
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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍
📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼
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*सुन्नियत का काम करेंगे!*
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!*
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*🅿पोस्ट:-0⃣9⃣*
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*📖12 रबि उल अव्वल 📚*
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*
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*☞शरीअत की रौशनी में☜*
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📖👉🏻 *आप ﷺ की विलादत को ईद कहना कैसा* आइये पहले हम ईद का मतलब समज लेते है, ईद के लूग्वि माना है ख़ुशी, अगर कोई अरबी ख़ुशी का लफ्ज़ अरबी में कहेगा तो वो यही कहेगा “”ईद” इसे समझने के लिये क़ुरआन की एक आयत पेशे खिदमत है
📖🇸🇦 *_अल-क़ुरआन_* ईशा इब्ने मरीयम ने अर्ज़ की या अल्लाह ! ऐ हमारे रब ! हम पर आसमान से एक कुवा उतार की वो (कुवा उतरने के दिन) हमारे लिये ईद हो, हमारे अग्लो और पिछलों की,
*📖सूरह माईदा, आयत 114📕*
*_☞🌹इस आयत से मालुम हुआ की जिस दिन अल्लाह عزوجل की खास रेहमत नाज़िल हो उस दिन को ईद मनाना और ख़ुशी मनाना अल्लाह عزوجل के शुक्र अदा करना अम्बिया का तरीका है, तभी तो हज़रत इसा अलैहिस्सलाम ने दुआ मांगी,✍_*
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*💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍*
*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼*
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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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*🅿पोस्ट:-1⃣0⃣*
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*📖12 रबि उल अव्वल 📚*
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*
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*☞शरीअत की रौशनी में☜*
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🌹👉🏻 आक़ा ﷺ ने फ़रमाया : जुमुआ का दिन सब दिनों का सरदार है, अल्लाह عزوجل के नज़्दीक सबसे बड़ा है और वो अल्लाह عزوجل के नज़्दीक “ईदुल अज़्हा” और ” ईदुल फ़ित्र” से बड़ा है।
💎👉🏻 अल्लाह عزوجل ने इसमें (यानि जुमुआ के दिन) हज़रते आदम को पैदा किया
इसी में ज़मीन पर उनको उतरा
इसी में उनको वफ़ात दी,,✍
*🇨🇨 सुनन इब्ने माजाह, 1/8 हदिष 1084
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*💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍*
*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼*
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[05/10, 11:23] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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🅿️OST -- 1️⃣1️⃣
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📖12 रबि उल अव्वल 📚
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मेरे मुस्तफा का मिलाद
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☞शरीअत की रौशनी में☜
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📚👉🏻 इस हदिष में 3 खसल्ते हज़रत आदम के लिये बयान की गई जिसमे आप की वफ़ात ए ज़ाहिरी का भी ज़िक्र है। तो पता चला की एक नबी की पैदाइश उनका ज़मीन पर उतारना और उनकी वफ़ात के दिन के बावुजूद भी मोमिन के लिये अल्लाह ने उसे ईद बना दिया।
💎👉🏻 और तो और वो “ईदुल अज़्हा” और ” ईदुल फ़ित्र” से भी अफ़्ज़ल कर दिया। मेराज की रात आक़ा ﷺ ने तमाम अम्बिया की इमामत की थी
🌹👉🏻 जैसा की हदिष से पता चलता है की हमारे सरकार ﷺ तमाम अम्बिया के सरदार और इमाम है उनकी तशरीफ़ आवरी पर हम उस दिन को क्यू ईद न कहे। बल्कि हम तो उसे इदो की ईद कहेंगे की उनकी तशरीफ़ आवरी की वजह से ही तो हमें बाकि ईद मिली और हर हफ्ते में एक दिन करके पुरे साल में 52 इदो (जुमुआ) का तोहफा मिला इसी “राहमतुल्लिल आ’लमिन” की तशरीफ़ आवरी से मिला हैं तो हम क्यू उस दिन ख़ुशी न मनाये,
,✍ •────────────────────•
💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍
*_📲𝑮𝑹𝑶𝑼𝑷 𝑴𝑬𝑰𝑵 𝑱𝑶𝑰𝑵 𝑯𝑶𝑵𝑬 𝑲𝑬 𝑳𝑰𝒀𝑬 𝑰𝑺 𝑵𝑼𝑴𝑩𝑬𝑹 𝑷𝑨𝑹 𝑺𝑴𝑺 𝑲𝑨𝑹𝑬𝑵_*
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[05/10, 11:24] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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🅿️OST--1️⃣2️⃣
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📖12 रबि उल अव्वल 📚
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☞शरीअत की रौशनी में☜
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🌹👉🏻अबू लहब ने भी मिलादे मुस्तफा ﷺ मनाया जब हुज़ूर ﷺ की विलादत हुई तब अबू लहब की गुलाम सोबिया ने अबू लहब से कहा की तुजे भतीजा हुआ है, इस ख़ुशी में अबू लहब ने अपनी उस गुलाम को ऊँगली के इशारे से आज़ाद किया था।”*
💎💟👉🏻 जब अबू लहब मर गया तो उसके बाद अहले खाना ने उसे ख्वाब में बुरी हालत में देखा तो उससे पूछा : तेरा क्या हाल है
🌹🖤👉🏻 उसने कहा : मेने तुम्हारे बाद कोई भलाई नहीं पाई लेकिन मुझे हर पिर के रोज़ उस ऊँगली से पानी दिया जाता है जिस से मेने हज़रत मुहम्मद ﷺ की विलादत की ख़ुशी में सोबिया को आज़ाद किया था,,✍
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[06/10, 10:01] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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🅿️OST -- 1️⃣3️⃣
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📖12 रबि उल अव्वल 📚
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मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद<
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☞शरीअत की रौशनी में☜
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🌹📖 इस हदिष के तहत इमाम जिज़री फरमाते है : जब एक काफ़िर का ये हाल है तो वो उम्मती जो अपने रसूल ﷺ की मुहब्बत में मिलाद पे माल खर्च करता है उसका क्या सीला होगा
📚मुवाहिब अद-दुन्या, 1/27📕
💎🇨🇨👉🏻 ईदे मिलादुन्नबी ﷺ का एहतमाम और ख़ुशी ज़ाहिर करने वालो के लिये खुशखबरी है की वो जन्नती है…
💎🇨🇨👉🏻ईदे मिलादुन्नबी ﷺ के बारे में खुल्फा ऐ राशिदीन का क़ौल : हज़रते सिद्दिके अकबर رضي الله تعالي عنه ने फ़रमाया की जिसने नबी की मिलाद पाक पर 1 दिरहम भी खर्चा किया वो जन्नत में मेरे साथ होगा,✍
📖अन्नेअमतुल कुब्रा अलल आलम, सफा 7-12📕
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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍
*_📲𝑮𝑹𝑶𝑼𝑷 𝑴𝑬𝑰𝑵 𝑱𝑶𝑰𝑵 𝑯𝑶𝑵𝑬 𝑲𝑬 𝑳𝑰𝒀𝑬 𝑰𝑺 𝑵𝑼𝑴𝑩𝑬𝑹 𝑷𝑨𝑹 𝑺𝑴𝑺 𝑲𝑨𝑹𝑬𝑵_*
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[06/10, 10:01] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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*🅿पोस्ट:-1⃣4️⃣*
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📖12 रबि उल अव्वल 📚
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मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद<
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☞शरीअत की रौशनी में☜
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💎💟👉🏻 हज़रत उमर फ़ारुके आज़म رضي الله تعالي عنه ने फ़रमाया की जिसने इमामूल अम्बिया के मिलाद पाक की ताज़ीम की उस ने इस्लाम को ज़िन्दा किया
🌹👉🏻 हज़रते उष्मान गनी رضي الله تعالي عنه ने फ़रमाया की जिसने हुज़ूर के मिलाद पाक पर 1 दिरहम भी खर्च किया गोया की वो बदर व मुनाइन के जिहाद में शरीक हुआ।
💎👉🏻 मौला ए काएनात हज़रत अलीكَرَّمَ اللّٰهُ تَعَالٰى وَجْهَهُ الْكَرِيْم फरमाते है जो कोई मिलाद लाक की ताज़ीम और उस पर खर्च करे वो दुन्या से ईमान के साथ जायेगा। और बगैर हिसाब के जन्नत में दाखिल होगा..✍
📖 अन्नेअमतुल कुब्रा अलल आलम, सफा 7-12📕
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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍
*_📲𝑮𝑹𝑶𝑼𝑷 𝑴𝑬𝑰𝑵 𝑱𝑶𝑰𝑵 𝑯𝑶𝑵𝑬 𝑲𝑬 𝑳𝑰𝒀𝑬 𝑰𝑺 𝑵𝑼𝑴𝑩𝑬𝑹 𝑷𝑨𝑹 𝑺𝑴𝑺 𝑲𝑨𝑹𝑬𝑵_*
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[07/10, 11:41] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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*🅿पोस्ट:-1⃣5⃣* ••──────────────────────➻ *📖12 रबि उल अव्वल 📚* ••──────────────────────➻ *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦* *~~~~~~~✮~~~~~~~✮~~~~~~~* *☞शरीअत की रौशनी में☜* *~~~~~~~✮~~~~~~~✮~~~~~~~**🌹👉🏻ज़म ज़मो कौसरो तसनीम नहीं लिख सकता**♦या नबी आप की ताज़ीम नहीं लिख सकता* *♦मैं अगर लाख समंदर भी निचोड़ो भी अगर**♦आप के नाम की एक मीम नहीं लिख सकता*🌹👉🏻 12वी तारीख को अल्लाह ने प्यारे महबूब रहमतुलिल आलमीन ﷺ को पैदा फ़रमाया और मख्लुकात जहानों को पैदा फ़रमाया जैसा की अल्लाह ने अपनी मुक़द्दस किताब क़ुरआन में अलग अलग जगहों पर इरशाद फ़रमाया है! 💎👉🏻 *वरफअना लक ज़िकरक* ⚜ हमने बुलंद किया आपके लिये आपके ज़िक्र को 🌹👉🏻 *लकद जाअकुम रसूलुम मीन अन्फुसे कम* ⚜ ऐ मोमिनो तुम्हारे पास अज़मत वाला रसूल तशरीफ़ लाए जो तुम्हारे में से है! 💎👉🏻 *लक़द मन्नल्लाहो अलल मोअमिनिन इज़ बअष फिहिम रसुला* 🌹👉🏻 हमने मुसलमानो पर बड़ा एहसान किया की उनमे उन्ही में से एक रसूल भेजा ⚜ *वजकुरु निअमतल्लाहे अलैकुम* 🌹👉🏻 और अल्लाह के एहसान को याद करो 💟 *वमा अरसलनाक इल्ला राहमतलिल आलमीन* 💎👉🏻 हमने तुम्हे सारी कायनात के लिए रहमत बनाकर भेजा। 🌹👉🏻बेशक सरकार अल्लाह तआला की नेअमतें उज़्मा है। अल्लाह क़ुरआन में इरशाद फ़रमाता है! ⚜➡ *व अम्मा बे नेअमतें रब्बिक फहद्दीष* 💎👉🏻अपने रब की नेअमतों का खूब चर्चा करो और याद करो अल्लाह की नेअमतों को जो तुम पर है। *सूरए आले इमरान* 🌹👉🏻मिलाद शरीफ का माना ये है के सरकार ﷺ का ज़िक्र करना चर्चा करना। अल्लाह ने इन आयत में हुज़ूर ﷺ का ज़िक्र करने का और चर्चा करने का हुक्म फ़रमाया है। 💎👉🏻 इसी तरह अल्लाह ने अपने प्यारे महबूब ﷺ की तारीफ़ (मिलाद) तमाम आसमानी किताबो में फ़रमाया है। जिसका ज़िक्र ان شاء الله अगली पोस्ट में।…✍ *🔰फ़ज़िलते ईदे मिलादुन्नबी सफ़ह 5 📕* •────────────────────•*💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,
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[07/10, 11:41] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
*▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*
*📜🅿 पोस्ट:-1️⃣6️⃣*
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🎆 *☞12 रबि उल अव्वल☜* 🎆
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*
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📖 *शरीअत की रौशनी में* 📚
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⚜दो जहां के मालिकों मुख़्तार पर लाखों सलाम
🌹👉🏻किताबो में की है। हुज़ूर ﷺ की इस दुनियां में तशरीफ़ आवरी के मुतअल्लिक़ बहुत सी बशारते है के इन सबको लिखना न मुमकिन है यहाँ हम चन्द बशारतो का बयान करते है जो सही रिवायतों से है, हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की 9 किताबो में अल्लाह ने ये खिताब फ़रमाया है।
💎👉🏻अल्लाह फ़रमाता है ऐ आदम एक वक़्त आएगा जब तेरी औलाद में एक नरम दिल और लोगो पर तरस खाने वाला इंसान पैदा होगा। उसका नाम इब्राहीम होगा। वो मेरा एक घर बनाएगा। उस हरमे पाक में ज़मज़म का चश्मा निकल आएगा। ये सिलसिला तेरे उस फ़रज़न्द तक पहोचेगा जो सबसे अफ्ज़ल होगा। जिसका रुतबा सबसे बुलंद होगा। उसका नाम हज़रत मुहम्मद होगा। खूबसूरती में वो सबसे निराला होगा, अच्छाई में वो सबसे आला होगा, वो सबका इमाम होगा, इस शहेर कि इमामत उसी को दी जाएगी, वो पैगम्बर होगा, आली हिम्मत होगा, वो मेरे इस घर के ऐहतराम को फिर ज़िंदा करेगा और क़यामत तक इसे मेरी सिर्फ मेरी इबादत जगह बना देगा। मेरा ये बाँदा आखरी पैगम्बर होगा आखरी रसूल होगा के, इसके बाद फिर कोई पैगम्बर और कोई रसूल न होगा।
💟 ये इबारत हज़रते आदम के सहिफे यानी किताब में है।..✍
📚फ़ज़िलते ईदे मिलादुन्नबी सफ़ह 6 📕
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*💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍
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[08/10, 10:13] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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*📜🅿 पोस्ट:-1⃣7️⃣*
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🎆 *☞12 रबि उल अव्वल☜* 🎆
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*
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☞शरीअत की रौशनी में☜
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💟ला वा रब्बिल अर्श जिसको जो मिला उनसे मिला
🇨🇨बटती हैं क़ौनैंन में नेमत रसूल अल्लाह ﷺ की
🧕🏻👉🏻तौरेत अल्लाह ने अपने नबी हज़ारत मूसा अलैहिस्सलाम पर नाज़िल फ़रमाई है, इस मुक़द्दस किताब में भी अल्लाह ने हुज़ूर ﷺ की तारीफ़ (मिलाद बयान की है)
💎👉🏻 एक सहाबी क़अबूल फरमाते है की मेने तौरेत में पढ़ा है के, “हुज़ूरﷺ गुस्सा न करेंगे, आप का दिल सख्त न होगा, आप बाजारमें कभी किसीको उची आवाज़ से न बुलाएंगे, बुराई का बदला बुराई से न देंगे, बल्कि मुआफ़ फरमा देंगे। आप की उम्मत अल्लाह का ज़िक्र करती रहेगी। वो हाथ, पाउ, मुह धो कर और सरका मसह करके वुज़ू करेंगे। उनके मोआज़्ज़िन अजाने देंगे। वो उची इमारतों पर, मीनारों पर खड़े हो कर खुदाकि तकबीर कहेंगे। उनकी खुबिया नमाज़ में और जंग में एक जेसी होगी। वो रातके वक़्त खुदा की इबादत करने खड़े होंगे,,✍
📚 फ़ज़िलते ईदे मिलादुन्नबी सफ़ह 7 📕
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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍
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[18/10, 10:13] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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*🅿पोस्ट:-1⃣8⃣*
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*📖12 रबि उल अव्वल 📚*
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*
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*☞शरीअत की रौशनी में☜*
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*💟👉🏻ला वा रब्बिल अर्श जिसको जो मिला उनसे मिला*
*🖤बटती हैं क़ौनैंन में नेमत रसूल अल्लाह ﷺ की*
*💎👉🏻नबी आखिरुज़्ज़मा ﷺ मक्का में पैदा होंगे।* मदीने में जाएंगे। आपकी हुक़ूमत मदीने से लेकर मुल्के शाम तक फेली हुई होगी। जान लो के ये मेरा बंदा मोहम्मद होगा। जिसका नाम मुतवक़्क़ल होगा। उसे उस वक़्त तक दुन्या से न उढ़ाऊँगा जब तक के सारे टेढ़े रास्ते उसके सच्चे दिन पर न आ जाएंगे और जूठे मजहब उसके सच्चे मजहब से सीधे न हो जाएंगे। ये इस तरहसे होगा के सारे इन्सानोको, जिन्नों को और खुदाकि सारी मख्लूक़ को एक सच्चे दिनकि दावत देगा। एक खुदा की तरफ बुलाएगा। उसकी दावत की बरकत ऐसी होगी के इसकी वजह से में उन आँखों को रौशनी दूंगा जो देख न सकती होगी, उदास दिलो को ख़ुशी दूंगा, दिल के अँधेरे दूर करूँगा और लोगो के सारे मुआमले सुलजा दूंगा।,✍*
*📚 फ़ज़िलते ईदे मिलादुन्नबी सफ़ह 7 📕*
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[18/10, 10:16] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
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*♦ बागे ख़लील का गुले ज़ेबा कहूँ तुझे"*
*🌹👉🏻 नबी की ज़रूरत* अगर सिर्फ किताबे नाज़िल कर दी जाती तो उसे समझने में लोगो को शको सूबा हो सकता था और शैतान गलत माना समझा के लोगो को गलत राह पे ले जा सकता था। तो अल्लाह ने किताबे अपने मुक़द्दस और प्यारे रसूलों पे नाज़िल फ़रमाई और उनको मख़लूक़ से ज़्यादा इल्म अता किया और उन्हें गुनाहों से पाक व मासूम रखा। शैतान से उनकी हिफाज़त की। जिस रसूल पे जो किताब नाज़िल की उस किताब का सच्चा इल्म भी उस नबी को अता फ़रमाया। हबीब रसूलों ने अपने अख़लाक़ व अमलो से लोगो को अल्लाह की मुक़द्दस किताब का इल्म दिया। अल्फ़ाज़ से अगर शक होता तो उनके अमल से उनको जवाब मिल जाता।...✍*
*📚 क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 14📕*
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[19/10, 09:46] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
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*⚜मेरे रज़ा ने ख़त्मे सुखन इस पे कर दिया"*
*💟ख़ालिक़ का बन्दा ख़ल्क़ का आक़ा कहूँ तुझे"*
*💎👉🏻 नबियों की तादाद* अल्लाह ने दुन्या में कमो बेस एक लाख चौबीस हज़ार नबियों को भेजा। उनमे से 313 को नबुव्वत के साथ रिसालत भी नवाज़ा। यानी वो रसूल भी थे। इससे आप को ये समझ तो आगया की नबी और रसूल एक नही, दोनों में फर्क है।"*
*⚜👉🏻 तार्रुफ़ ए नबी* नबी बसर और मर्द है, जिसको अल्लाह ने उम्मत की रहनुमाई के लिये भेजा और उनपे वही नाज़िल फ़रमाई।
•🌹👉🏻 इससे ये मालूम हुआ कि नबी इंसान है कोई फरिश्ता या जिन्न को नबुव्वत नही दी और ये भी जानने को मिला कि इंसानो में भी सिर्फ मर्द है, किसी औरत को नबुव्वत नही दी गई।
*💟 तार्रुफ़ ए रसूल* रसूल वो है जिनको अल्लाह ने किताब या नये हुक्म अता फरमाये।
💫 इंसानों को नबुव्वत मिली है लेकिन जिनको नबुव्वत मिली वो सभी रसूल नहीं है। रसूल सिर्फ 313 है और अल्लाह की और से 104 किताबे नाज़िल हुई है। (फरिश्तों में भी रसूल है)
💎👉🏻 रसूल होना सिर्फ इंसानों के लिये खास नहीं बल्कि फरिश्तों में भी कुछ को रिसालत दी हुई है। लेकिन औरतो और मर्दो में ज़्यादा फ़ज़ीलत मर्दो को दी हुई है, इसी वजह से औरतों में नबुव्वत और रिसालत नही है। है उनको विलायत मिल सकती है बल्कि कई औरतों को विलायत मिली हुई है,✍
*📚 क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 14 📕*
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[19/10, 09:48] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
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*🅿पोस्ट:-2⃣1️⃣*
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*♦जहां बानी अता कर दें भरी ज़न्नत हिबा कर दें"*
*♦नबी मुख़्तारे कुल है जिसको जो चाहे अता कर दें"*
*💎👉🏻 अल्लाह तआला की नाज़िल करदा किताबे कलामुल्लाह है।* ऐसा नही की हमारे आक़ा ﷺ पे जो किताब क़ुरआन उतारा गया वो ही कलामुल्लाह है यानी अल्लाह का कलाम है। बल्कि उसी तरह जितनी किताबे अल्लाह ने अपने मुक़द्दस रसूलों पर नाज़िल फ़रमाई वो सभी किताबे कलामुल्लाह है और ये सभी किताबों पे ईमान लाना ज़रूरी है।*
🌹👉🏻 इससे कुछ लोगो को ये शको सूबा है कि जब अगली किताबो की हर बात कैसे क़बूल कर ले, जब कि ये साबित हो चुका है कि उसमें लोगों ने रद्दो बदल कर दिए है।
*💟 तो इसका जवाब ये है कि ईमान की दो किसमे है।*
♦➪1 किसी चीज़ पर ईमान
♦➪2 उसकी तफसील पर ईमान।
💎👉🏻 यह शको सूबा दूसरे नंबर से है, तो हम यूँ कहेंगे अल्लाह की किताब पर ईमान लाया, यानी अल्लाह ने किताब नाज़िल की थी उसपे ईमान है। इस से अल्लाह की किताबो पर ईमान लाना मुकम्मल हो जाएगा।
*_💫 इसी तरह सभी नबियों पर ईमान लाना ज़रूरी है। हर एक पर अलग अलग ईमान का इकरार करना ज़रूरी नही। क्योंकि सभी नबियों के नाम बयान नही किये गये और उनकी तादाद में भी इख़्तेलाफ़ है। तो इतना मानना ज़रूरी है कि में अल्लाह के सभी नबियों पर ईमान लाया हूं।...✍_*
*📚 क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 📕*
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[20/10, 10:12] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
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*☞शरीअत की रौशनी में☜*
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💟👉🏻सरवर कहूँ के मालिके मौला कहूँ तुझे बागे ख़लील का गुले ज़ेबा कहूँ तुझे”
🌹👉🏻 अल्लाह ने आपने फ़ज़लों करम से छोटी बड़ी कमो बेस 104 कितबे मुक़द्दस रसूलों पर नाज़िल फ़रमाई, ताकि उसके बन्दों को हक़ राह मिल सके। हक़ राह को पाने में कोई शक न रहे, जन्नत से निकाल के आने वाला इंसान फिर जन्नत में जाने लायक बन सके, शैतान जो उसका दुश्मन है वो उसे गलत राह पे ले जाके उसे दोज़खी न बना दे।
💎👉🏻 इंसान, इंसान बनके ज़िन्दगी बसर करे, अख़लाक़, आदाब से हट के जानवर न बने। बल्कि अपने अख़लाक़ से फरिश्तों से बन के दिखाये! अल्लाह की हक़ीक़ी पहचान मिले और शिर्क और बूत परस्ती से महफूज़ रहे। अल गरज़ अल्लाह के बन्दे उसकी नाज़िल करदा किताबों से उस अल्लाह का हक़ीक़ी बन्दा बनके रहे,,✍
📚 क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 14 📕
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[20/10, 10:12] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
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*🅿पोस्ट:-2⃣3️⃣*
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*📖12 रबि उल अव्वल 📚*
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*
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*☞शरीअत की रौशनी में☜*
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*🌹👉🏻मेरे आक़ा ﷺ की हैं शान सबसे अलग"*
*जैसे रुतबे में क़ुरआन सबसे अलग*"
💟 *रुतबे में सबसे अफ़ज़ल रुतबा मेरे नबी ﷺ का*
💟 *क़ुरआन हैं मुक़म्मल चेहरा मेरे नबी ﷺ का*
*📕💫 • पहले की किताबों में रद्दो बदल क्यों हुआ? •* सवाल ये भी होता है कि, पहले की किताबो में लोगों ने मिलावट क्यूं की और अल्लाह ने इस मिलावट को दूर क्यों न किया ?
*🌹👉🏻 अल्लाह ने* लोगो की हिदायत के लिये किताबे नाज़िल फ़रमाई। इससे हिदायत और नजात की राह दिखाई। अब लोगों के जिम्मे था कि इन किताबो को मजबूती से थाम लेते और उस पर अमल करते। लेकिन लोग शैतान के बहकावे में आ गए और इस जिम्मेदारी को भूल गये की अल्लाह ने हमे किताब क्यूं अता फ़रमाई और हमे किताब की किस तरह हिफाज़त करनी चाहिये।
💎👉🏻 दूसरी बात ये की *अल्लाह* ने जिस क़ौम को किताब अता फ़रमाई जस की हिफाज़त उस क़ौम के जिम्मे कर दी। अब हुआ यूं के उस क़ौम के आलिम गुरबा व मसाकीन के लिये खुदाई हुक्म देते और जब कोई दौलत मंद की बात आती तो वो उनको बचाने के लिये इसमें रद्दो बदल कर देते। इस तरह के काम उस क़ौम के नबी के दुन्या से जाने के बाद होते रहे..✍
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*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏼*
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*_💎मोहम्मद ईमरान रज़वी💎_*
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[21/10, 10:06] 💚محمد عمران رضوي💚: *꧁𝙅𝙊𝙄𝙉 𝙂𝙍𝙊𝙐𝙋 𝙎𝙈𝙎꧂*
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*POST:-2️⃣4️⃣*
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📖12 रबि उल अव्वल 📚
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☞शरीअत की रौशनी में☜
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💎👉🏻 • हिफाज़त की जिम्मेदारी लोगो को क्यों ?सवाल ये भी होता है कि इसकी जिम्मेदारी लोगो को क्यों दी अगर अल्लाह अपने जिम्मे रखता तो लोग इसमें रद्दो बदल न करते।
🌹👉🏻 अल्लाह ने लोगों के इम्तेहान के लिए ये जिम्मेदारी क़ौम को दी, की ये मेरी किताब है जो नबी के ज़रिये आप तक पहोंची है। पर क़ौम अल्लाह के इम्तेहान में नाकाम हुए।
💟⚜दूसरी बात ये है कि अल्लाह فَقَّالُ لِّمَايُرِيْدُ है। उसने ये इरादा किया कि किताब की हिफाज़त क़ौम को दी जाये।।
💫⚜ तीसरी बात ये की एक नबी के बाद दूसरा नबी और एक रसूल के बाद दूसरा रसूल आने वाले है। तो जो रद्दो बदल होगा वो दूसरे नबी और रसूल की तालीमात सही हो जाएगा। इसी वजह से क़ौम को ये जिम्मेदारी दी।…✍
📚 क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 18 📕
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[21/10, 10:06] 💚محمد عمران رضوي💚: *꧁𝙅𝙊𝙄𝙉 𝙂𝙍𝙊𝙐𝙋 𝙎𝙈𝙎꧂*
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*🖊️फ़ज़्ले ख़ुदा से साहिबे ज़ीशान हो गया*
*जो खुश नसीब हाफ़िज़े क़ुरआन हो गया*
*उसको जला सके न दोज़ख़ की आग*
*महफूज़ जिसके सीने में क़ुरआन हो गया*
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*⚜📕 क़ुरआन की हिफाज़त की जिम्मेदारी अल्लाह ने क्यों ली*
💎👉🏻पहला जवाब तो ये कि अल्लाह فَقَّالُ لِّمَا يُرِيْدُ वो को चाहे वो फैसला कर सकता है। उसका फैसला क़ुरआन के लिए ये किया कि उसकी हिफाज़त की जिम्मेदारी मेरे जिम्मे करम रखूंगा।
🌹👉🏻 दूसरा जवाब ये की हुज़ूर ﷺ अल्लाह के आखरी नबी और रसूल है। आपके बाद अब कोई नबी या रसूल आनेवाले नहीं। तो अब क़ुरआन की जिम्मेदारी लोगों को दे दी जाती तो लोग इस इम्तेहान में नाकाम हो कर दीन में खराबी पैदा कर देते और दीन बर्बाद हो जाता। इस वजह से अल्लाह ने अपने फ़ज़लों करम से हिफाज़त की जिम्मेदारी ली और दीन को खराबी से बचाया।
💫⚜अल्लाह फरमाता है बेशक! हमने नाज़िल किया ये क़ुरआन और बेशक! हम खुद उसकी हिफाज़त करेंगे।
💎👉🏻 मुसलमानों के सीने को खोल दिये गए, जब अल्लाह ने क़ुरआन के हिफाज़त की जिम्मेदारी ली तो उसने मुसलमानों के लिये क़ुरआन को याद करना आसान कर दिया।
🌹👉🏻 पहले की किताबो के हाफ़िज़ सिर्फ नबी थे, लेकिन क़ुरआन एक मोजिज़ा है कि कम वक़्त में और कम मेहनत में मुसलमानों के छोटे बच्चों को भी हिफ़्ज़ हो जाए। जिस कलाम के लिये सिर्फ नबी का सीना खोल दिया जाता था, क़ुरआन के लिए सभी मुसलमानों का सीना खोल दिया गया। मुसलमानों की बस्तियों के छोटे से छोटा गांव भी ऐसा न होगा जहां एक क़ुरआन का हाफ़िज़ न हो। आज पूरे जहां में लाखों की तादाद में हाफ़िज़ मौजूद है, जो एक ज़ेर ज़बर की भी गलती नहीं होने देते।..✍
📚 क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 20 📕
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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍
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[22/10, 10:18] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!*
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*🅿पोस्ट:-2⃣6️⃣*
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*📖12 रबि उल अव्वल 📚*
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*
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*☞शरीअत की रौशनी में☜*
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♦ वो वलिदैन हश्र के दिन होंगे ताजदार”
*जिनका लाडला हाफ़िज़े क़ुरआन हो गया"*
♦ दस ऐसे आदमियों को वो ज़न्नत दिलाएगा”
*दोज़ख़ में जिनके जाने का एलान हो गया"*
💎👉🏻 क़ुरआन की छपाई दुन्या के कोई भी किताब ऐसी नही है जिसको क़ुरआन के जितनी मिक़दार में छपाई हुई हो। दुन्या में सबसे ज़्यादा छपने वाली किताब क़ुरआन है। हर एक मुसलमान के घर मे एक क़ुरआन तो ज़रूर मिलेगा। चाहे उसे तिलावत न आती हो फिर भी वो बरकत की निय्यत से अपने घर मे रखता है। इस एतेबार से दुन्या में काम अज़ कम उतने क़ुरआन तो मौजूद है ही जितने मुसलमान के घर है।
💫⚜ छपाई में गलतियां होती है!कभी कभी ऐसा होता है कि प्रूफ रीडिंग सही तरह न किया जाए तो ज़ेर ज़बर की गलतियां होती है। लेकिन आज तक कोई भी क़ुरआन ऐसा नहीं जिसमे ज़बर ज़ेर की कोई गलती हुई हो और उसे सही न किया गया हो। हाफ़िज़ छपे हुए क़ुरआन की एक बार तिलावत कर के उसे सही कर लेते है और ये भी अल्लाह का फ़ज़लों करम है कि क़ुरआन की छपाई में कभी गलती होती ही नहीं, और अगर होती है तो उसे सही कर लिया जाता है। इसी वजह से क़ुरआन में कभी भी मिलावट नही हो सकती। आज तक कोई इसमें कामयाब न हुआ है और न होगा ان شاء الله. क्योंकि जो चीज़ अल्लाह की हिफाज़त में हो उसमे रद्दो बदल हो नही सकता।….✍
📚 क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 21 📕
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*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!*
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*♦हम ख़त्में नबुवत पर यूँ पेहरा लगाएंगे*
*🔸क़ानून ए रिसालत पर घर बार लुटाएंगे*
ताजदारे ख़त्में नबुवत ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद
💎👉🏻 क़ुरआन की हिफाज़त हमारे नबी ﷺ का आखरी नबी होने पर दलील है। अहले सुन्नत वल जमाअत का अक़ीदा है और इसपर क़ुरआन की आयत दलील भी है कि हमारे प्यारे आक़ा ﷺ अल्लाह की तरफ से इस दुन्या को सच्ची राह बताने वाले आखरी नबी है। आपके बाद कोई नया नबी नहीं आएंगे और अगर कोई दावा करता है तो वो झूठा कहलाएगा। हमारे नबी के इस दुन्या से पर्दा फरमाने के बाद लोगों ने नबी होने का झूठा दावा किया, लेकिन वो अपनी इस चाल में नाकाम रहे।*
🌹👉🏻 जब हमारे नबी आखरी नबी है और कोई नबी क़यामत तक आने वाले नहीं तो अब अगर क़ुरआन की हिफाज़त न की जाए और उसमें रद्दो बदल हो जाए तो दीन बर्बाद हो जाए, और कोई नबी के न आने पर उसे सही कौन करे? इसी वजह से अल्लाह ने क़ुरआन के हिफाज़त की जिम्मेदारी अपने करम से खुद क़ुबूल फ़रमाई।”
💟👉🏻इससे बात वाज़ेह हो जाती है कि अल्लाह ने क़ुरआन के हिफाज़त का एलान कर के हमारे नबी के आखरी नबी होने की तरफ इशारा किया है।…✍
📚क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 21📕
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[23/10, 09:17] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*
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*निसार तेरी चहल पहल पर*
*हज़ारों ईदें रबी उल अव्वल*
*सिवाये इब्लीस के जहान में*
*सभी तो खुशियां मना रहे है।*
💎👉🏻 मीलाद शरीफ और क़ुर्आन हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम की ज़ात व औसाफ व उनके हाल व अक़वाल के बयान को ही मिलादे पाक कहा जाता है,हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम की विलादत की खुशी मनाना ये सिर्फ इंसान का ही खास्सा नहीं है बल्कि तमाम खलक़त उनकी विलादत की खुशी मनाती है बल्कि खुद रब्बे क़ायनात मेरे मुस्तफा जाने रहमत सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम का मीलाद पढ़ता है,यहां क़ुर्आन की सिर्फ चंद आयतें पेश करता हूं वरना तो पूरा क़ुर्आन ही मेरे आका सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम की शान से भरा हुआ है मगर कुछ आंख के अंधे और अक़्ल के कोढ़ियों को ये आयतें नहीं दिखतीं और वो लोग इसको भी शिर्क और बिदअत कहते हैं माज़ अल्लाह,हवाला मुलाहज़ा फरमायें
🌹👉🏻 कंज़ुल ईमान वही है जिसने अपना रसूल हिदायत और सच्चे दीन के साथ भेजा
📚पारा 10,सूरह तौबा,आयत 33📕
*✏️जारी रहेगा....*
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*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!
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*🅿पोस्ट:-3️⃣0️⃣*
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*📖12 रबि उल अव्वल 📚*
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*☞शरीअत की रौशनी में☜*
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*💚जब तलक ये चांद🌙तारे✨ झिलमिलाते जाएंगे*
*💚तब तलक़ जश्ने विलावत हम मनाते जाएंगे*
💫⚜ सहाबा केराम रिदवानुल्लाहि अन्हुम का मीलाद ए महफ़िल मुन्अकिद करना
🌹✍🏻 इमाम बुखारी के उस्ताद इमाम अह़मद बिन हम्बल लिखते हैं : सय्यिदुना अमीर मुआ़विया रदियल्लाहु अ़न्हु फ़रमाते हैं : एक रोज़ रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम का अपने असहाब के ह़लके से गुज़र हुआ , आप सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम ने फरमायाः क्यों बैठे हो ? उन्होंने कहाः हम अल्लाह तआ़ला का जिक्र करने और उसने हमें जो इस्लाम की हिदायत अ़ता फरमाई उस पर हम्द व सना ( तारीफ ) बयान करने और उसने आप सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम को भेज कर हम पर जो एहसान किया है उसका शुक्र अदा करने के लिये बैठे थे । आपने फ़रमायाः अल्लाह की क़सम ! क्या तुम इसी के लिये बैठे थे ? सहाबा ने अर्ज़ कियाः अल्लाह की क़सम ! हम सब इसी के लिये बैठे थे । इस पर आप सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम ने फ़रमायाः अभी मेरे पास जिबरईल अ़लैहिस्सलाम आए थे , उन्होंने कहा कि अल्लाह तुम्हारी वजह से फ़रिश्तों पर फख्र कर रहा हैं।
🇨🇨 सुनने नसई , हृदीस : 5443 , अल – मोजमुल कबीर : तिबरानी , हदीसः 16057 📕
💎👉🏻 इस हदीस से साबित हुआ कि सहाबा हुजूर सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम की मीलाद ( पैदाइश ) पर शुक्र अदा करते थे । यहाँ ये बात भी काबिले ज़िक्र है कि जो लोग हुजूरे अकदस सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम की मीलाद की महफ़िल सजाते हैं और उसमें शरीक होते हैं , अल्लाह ऐसे बन्दों पर फ़रिश्तों की जमाअ़त में फख्र फ़रमाता है और हाँ ! हुजूरे अक़दस सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम का ज़िक्र अल्लाह ही का जिक्र है इस पर कुर्आन और हुजूर की हदीसें गवाह हैं।…✍
📚 ईद मिलाद-उन-नबी सवाल वह जवाब की रोशनी में , सफह 10-11 📗
1
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*🅿पोस्ट:-2️⃣9️⃣*
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*💟👉🏻 निसार तेरी चहल पहल पर*
*हज़ारों ईदें रबी उल अव्वल*
*सिवाए इब्लिस के जहां में*
*सभी तो खुशियां मना रहे है।*
🌹👉🏻 मीलाद शरीफ और क़ुर्आन
💎👉🏻 कंज़ुल ईमान बेशक तुम्हारे पास तशरीफ लायें तुममे से वो रसूल जिन पर तुम्हारा मशक़्क़त में पड़ना गिरां है तुम्हारी भलाई के निहायत चाहने वाले मुसलमानों पर कमाल मेहरबान
📚पारा 11,सूरह तौबा,आयत 128📕
⚜💫 पहली आयत में मौला तआला उन्हें भेजने का ज़िक्र कर रहा है और भेजा उसे जाता है जो पहले से मौजूद हो मतलब साफ है कि महबूब सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम पहले से ही आसमान पर या अर्शे आज़म पर या जहां भी रब ने उन्हें रखा वो वहां मौजूद थे,और दूसरी आयत में उनके तशरीफ लाने का और उनके औसाफ का भी बयान फरमा रहा है,क्या ये उसके महबूब सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम का मीलाद नहीं है,क्या अब वहाबी खुदा पर भी हुक्म लगायेगा….✍🏻
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*🅿पोस्ट:-3⃣1️⃣* ••──────────────────────➻। *📖12 रबि उल अव्वल 📚* ••──────────────────────➻
*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*
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*☞शरीअत की रौशनी में☜* *~~~~~~~✮~~~~~~~✮~~~~~~~*
*”जब तलक़ ये चाँद तारे झिल मिलाते जाएंगे”*
*”तब तलक़ जश्ने विलावत हम मनाते जाएंगे”*
🇸🇦👉🏻 *मिलाद ए मुस्तफ़ा ﷺ*
*💎हज़रत अबू क़तादा रदियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूले अकरम सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम से पीर ( सोमवार ) के दिन रोज़ा रखने के बारे में पूछा गया तो आप सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम ने इरशाद फरमायाः*
*” इसी रोज़ मेरी विलादत हुई , इसी रोज़ मेरी बिअ़स़त हुई और इसी रोज़ मेरे ऊपर कुर्आन नाज़िल किया गया*
*❇सहीह मुस्लिम , हदीसः 2807📚*
*❇👉🏻सुनने अबू दाऊद , हदीसः 2428📚* ,
*❇👉🏻मुस्नद इमाम अहमद बिन हम्बल , हदीस 23215 📕*
*❇ईद मिलाद-उन-नबी सवाल वह जवाब की रोशनी में , सफह 9 📘*
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*💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍*
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[24/10, 09:52] 💚محمد عمران رضوي💚: *꧁𝙅𝙊𝙄𝙉 𝙂𝙍𝙊𝙐𝙋 𝙎𝙈𝙎꧂*
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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!*
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*🅿पोस्ट:-3️⃣2️⃣*
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*📖12 रबि उल अव्वल 📚*
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*
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*☞शरीअत की रौशनी में☜*
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*♦तेरे हबीब का प्यारा चमन किया बर्बाद*
*♦ इलाही निकले ये नजदी बाला मदीने से*
❇✨ जिस मुकद्दस मकान में हुजूर अक्दस ﷺ की विलादत हुई, तारीखे इस्लाम में उस मुकाम का नाम (“मिलादुन्नबी )” (नबी की पैदाइश की जगह) है,यह बहुत ही मुतबकि मक़ाम है। सलातीने इस्लाम ने इस मुबारक यादगार पर बहुत ही शानदार इमारत बना दी थी, जहां अहले हरमैने शरीफैन और तमाम दुन्या से आने वाले मुसलमान दिन रात महफिले मीलाद शरीफ़ मुन्अकिद करते और सलातो सलाम पढ़ते रहते थे। चुनान्चे हज़रते शाह वलियुल्लाह साहिब मुहद्दिस देहलवी ने अपनी किताब “फुयूजुल हुरमैन” में तहरीर फ़रमाया है कि मैं एक मरतबा उस महफ़िले मीलाद में हाजिर हुवा, जो मक्कए मुकर्रमा में बारहवीं रबीउल अव्वल को “मिलादुन्नबी में मुन्अकिद हुई थी जिस वक्त विलादत का ज़िक्र पढा जा रहा था तो मैं ने देखा कि यक बारगी उस मजलिस से कुछ अन्वार बुलन्द हुए, मैंने उन अन्वार पर गौर किया तो मालूम हुवा कि वोह रहमते इलाही और उन फ़िरिश्तों के अन्वार थे जो ऐसी महफ़िलों में हाज़िर हुवा करते हैं।
💎👉🏻 जब हिजाज़ पर नज्दी हुकूमत का तसल्लुत हुवा तो मकाबिरे जन्नतुल मला व जन्नतुल बको के गुम्बदों के साथ साथ नजदी हुकूमत ने इस मुकद्दस यादगार को भी तोड़ फोड़ कर मिस्मार कर दिया। और बरसों येह मुबारक मक़ाम वीरान पड़ा रहा, मगर मैं जब जून सि. 1959 ई. में इस मर्कने खैरो बरकत की जियारत के लिये हाज़िर हुवा तो मैं ने उस जगह एक छेटी सी बिल्डिग देखी जो मुकम्फल थी।बाज़ अरबों ने बताया कि अब इस बिल्डिंग में एक मुख्तसर सी
लाएब्रेरी और एक छोटा सा मक्तब है, अब इस जगह न मीलाद शरीफ़ हो सकता है न सलातो सलाम पढ़ने की इजाजत है । मैं ने अपने साथियों के साथ बिल्डिग से कुछ दूर खड़े हो कर चुपके चुपके सलातो सलाम पढ़ा, और मुझ पर ऐसी रिक्कत तारी हुई कि मैं कुछ देर तक
रोता रहा।
⚠ नोट ये पोस्ट शेखुल-हदीस हज़रत अल्लामा अब्दुल मुस्तफा आजमी رحمۃ اللہ تعالٰی علیہ की किताब सीरते मुस्तफा ﷺ से है!
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*📩पोस्ट√जारी…✍*
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*♦इलाही निकले ये नजदी बाला मदीने से*
💎👉🏻 हज़रते हलीमा सादिया ने अपने शोहर ‘हारिस बिन अब्दुल उज्ज़ा” से कहा कि यह तो अच्छा नहीं मालूम होता कि मैं खाली हाथ वापस जाऊं इस से तो बेहतर यही है कि मैं इस यतीम ही को ले चलू, शोहर ने इस को मंजूर कर लिया और हज़रते हुलीमा उस दुरै यतीम को ले कर आई जिस से सिर्फ हुज़रते हलीमा और हज़रते आमिना ही के घर में नहीं बल्कि काएनाते आलम के मशरिक व मग़रिब में उजाला होने वाला था । येह खुदा वन्दे ख्युदूस का फ़ले अज़ीम ही था कि हुज़रते हुलीमा की सोई हुई किस्मत बेदार हो गई और सरवरे काएनात इन की आगोश में आ गए। अपने खेमे में ला कर जब दूध पिलाने बैठीं तो बाराने रहमत की तरह बरकाते नुबुव्वत का जुहूर शुरू हो गया, खुदा की शान देखिये कि हज़रते हलीमा के मुबारक पिस्तान में इस कदर दूध उतरा कि रहमते आलम ने भी और इन के रजाई भाई ने भी खूब शिकम सैर हो कर दूध पिया, और दोनों आराम से सो गए, उधर उंटनी को देखा तो उस के थन दूध से भर गए थे । हज़रते हलीमा के शोहर ने उस का दूध दोहा और मियां बीवी दोनों ने खूब सैर हो कर दूध पिया और दोनों शिकम सैर हो कर रात भर सुख और चैन की नींद सोए।
💟👉🏻हुज़रते हलीमा का शोहर हुजुर रहमते आलम की येह बरकतें देख कर हैरान रह गया, और कहने लगा कि हलीमा तुम बड़ा ही मुबारक बच्चा लाई हो । हज़रते हलीमा ने कहा कि वाकेई मुझे भी येही उम्मीद है कि येह निहायत के ही बा बरकत बच्चा है और खुदा की रहमत बन कर हम को मिला है और मुझे येही तवक्कोअ है कि अब हमारा घर खैरो बरकत से भर जाएगा।
⚠ नोट ये पोस्ट शेखुल-हदीस हज़रत अल्लामा अब्दुल मुस्तफा आजमी رحمۃ اللہ تعالٰی علیہ की किताब सीरते मुस्तफा ﷺ से है!…✍
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*♦इलाही निकले ये नजदी बाला मदीने से"*
🌹👉🏻हज़रते हलीमा फ़रमाती हैं कि इस के बाद हम रहुमते आलमﷺ को अपनी गोद में ले कर मक्का मुकर्रमा से अपने गाऊ की तरफ रवाना हुए तो मेरा वो ही खच्चर अब इस कदर तेज़ चलने लगा कि किसी की सुवारी उस की गर्द को नहीं पहुंचती थीं, काफिले की औरतें हैरान हो कर मुझ से कहने लग कि ऐ हलीमा क्या येह वोही खच्चर है जिस पर तुम सवार हो कर आई थीं या कोई दूसरा तेज रफ्तार खच्चर तुम ने खरीद लिया है अल गरज हम अपने घर पहुंचे वहां सख्त कृहत् पड़ा हुवा था । तमाम जानवरों के धन में दूध खुश्क हो चुके थे, लेकिन मेरे घर में कदम रखते ही मेरी बकरियों के थन दूध से भर गए, अब रोजाना मेरी बकरियां जब चरागाह से घर वापस आतीं तो उन के थन दूध से भरे होते हालां कि पूरी बस्ती में और किसी को अपने जानवरों का एक कतरा दूध नहीं मिलता था मेरे कबीले वालों ने अपने चरवाहों से कहा कि तुम लोग भी अपने जानवरों को उसी जगह चराओ जहां हलीमा के जानवर चरते हैं। चुनान्चे सब लोग उसी चरागाह में अपने मवेशी चराने लगे जहां मेरी बकरियां चरती थीं, मगर यहां तो चरागाह और जंगल का कोई अमल दखल ही नहीं था येह तो रहूमते आलम ﷺ के बरकाते नुबुव्वत का फ़ैज़ था जिस के मैं और मेरे शोहर के सिवा मेरी कौम का कोई शख्स नहीं समझ सकता था।
💎👉🏻अल गरज इस तरह हर दम हर कदम पर हम बराबर आप की बरकतों मुशाहिदा करते रहे यहां तक कि दो है 3 साल पूरे हो गए और मैंने आप क दूध छुड़ा दिया। आप की तन्दुरुस्ती और नशवो नुमा क हाल दूसरे बच्चों से इतना अच्छा था कि दो साल में आप ﷺ खुब अच्छे बड़े मालूम होने लगे,अब हम दस्तूर के मुताबिक रहमते आलमﷺ को उन की वालिदा के पास लाए और उन्हों ने हस्बे तौफीक हम को इन्आमो इक्राम से नवाज़ा!…✍
⚠ नोट ये पोस्ट शेखुल-हदीस हज़रत अल्लामा अब्दुल मुस्तफा आजमी رحمۃ اللہ تعالٰی علیہ की किताब सीरते मुस्तफा ﷺ से है!…✍
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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*
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*☞शरीअत की रौशनी में☜*
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*♦वो बशर लाइक-ए-एहतिराम नहीं*
*जिसके लब पर मेरे नबीﷺ का नाम नहीं*
*♦जिसका खाते हैं उसका गाते हैं!*
*हम सुन्नी हैं नमक हराम नहीं*
💎👉🏻 हज़रते अब्दुल्लाह ये हमारे आक़ा के वालीदे माजिद है। ये अब्दुल मुत्तलिब के तमाम बेटो में सबसे ज्यादा बाप के लाडले थे। चुकी इन की पेशानी में नुरे मुहम्मदी अपनी पूरी शानो शौकत के साथ जल्वा गर था इसलिये हुस्नो खूबी के पैकर, और जमाल सूरत व कमाल सीरत के आइना दार और ईफ्कत व पारसाई में यक्ताए रोज़कार थे।
🌹👉🏻 एक दिन आप शिकार के लिए जंगल में तशरीफ़ ले गए थे मुल्क शाम के यहूदी चन्द अलामतो से पहचान गए थे के नबिय्ये आखिरुज़्ज़मा के वालिद माजिद यही है। चुनांचे उन यहूदियो ने आप को बारह कत्ल कर डालने की कोशिश की। इस मर्तबा भी यहूदियो की एक बहुत बड़ी जमात मुसल्लह हो कर इस निय्यत से जंगल में गई की आप को तन्हाई में धोके से कत्ल कर दिया जाए।
💎👉🏻मगर अल्लाह ने” इस मर्तबा भी अपने फज़लो करम से बचा लिया। आलमे गैब से चन्द ऐसे सुवार ना गहा नमूदार हुए जो इस दुनिया से कोई मूशा-बहत ही नहीं रखते थे। इन सुवारोने आकर यहूदियो को मार भगाया और आप को ब हिफाज़त उनके मकान तक पहुचा दिया।
💦💐 वहब बिन मनाफ भी उस जंगल में थे और उन्होंने अपनी आँखोसे ये सबकुछ देखा। इसलिए उनको हज़रते अब्दुल्लाह से बे इंतिहा मोहब्बत व अकीदत पैदा हो गई।
🌹👉🏻औऱ घर आ कर ये अज़्म कर लिया की मैं अपनी नुरे नज़र हज़रते आमिना की शादी हज़रते अब्दुल्लाह ही से करूँगा।..✍
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*♦जहां बानी अता कर दें भरी ज़न्नत हिबा कर दें*
*🔹नबी मुख़्तारे कुल है जिसको जो चाहे अता कर दें*
🌹👉🏻आप ﷺ के मोअज़्जा आप ﷺ का सब से बड़ा मोअज़्जा कुरान शरीफ है। इसके अलावा बहुत सारे मोअज़्जात हैं उन में से कुछ ये है।
💎👉🏻आप ﷺ के जिस्म-ए-अक़दस पे कभी मच्छर और मक्खी नहीं बैठ’ती थी।
🌷💫आप ﷺ जैसे अपने आगे की चीज़ों को देखते थे वैसे ही अपने पीछे की चीज़ों को भी देखते थे।
❇👉🏻आप ﷺ के पसीने से खुशबु आती थी।
💟✨आप ﷺ अगर खाड़े पानी (साल्ट वाटर) में अपना लुआब-ए-दहन (स्पिट) दाल देते थे तो वह मीठा हो जाता था।
💎आप ﷺ जानवरों और पथ्थरों की आवाज़ को भी सुनते और समझते थे
🌹✨आप ﷺ जिस बच्चे के सर पर हाथ डाल देते थे वह दिन भर खुशबु से महकता रहता था।
✨♦आप ﷺ दूर-व-नज़दीक की आवाज़ें को सुनते थे और लाखों कोसों दूर की चीज़ों को भी देख लेते थे।
💟🌹 आप ﷺ ने अपनी ऊँगली के इशारे से चाँद को दो टुकड़े कर दिया।
💎👉🏻 आप ﷺ ने डूबे हुए सूरज को लौटा कर असर के वक़्त पर कर दिया।
💟✨ आप ﷺ ने कम खाने में बहुत ज़ियादह लोगो को खिलाया।
🌹👉🏻 आप ﷺ ने लकड़ी को लोहे का तलवार बना दिया।
💎👉🏻आप ﷺ रात के थोड़े से वक़्त में सातों आसमान के ऊपर गए और फिर चले आए।..✍🏻
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*♦जहां बानी अता कर दें भरी ज़न्नत हिबा कर दें*
*🔹नबी मुख़्तारे कुल है जिसको जो चाहे अता कर दें*
🌹👉🏻आप ﷺ की अद्ल व इंसाफ़ आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हर किसी के साथ अद्ल व इन्साफ फ़रमाते थे चाहे वह दोस्त हो या दुश्मन अपना हो या पराया।
💫🌷 एक बार आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के कबीला बनू हाशिम की एक औरत ने चोरी कर ली तो बड़े बड़े लोगों ने उसकी सजा माफ़ करने की शिफारिश की और कहा की ये औरत हमारे क़ाबिले की है अगर इस का हाथ काट दिया जाएगा तो इस से हमारे क़ाबिले की पूरे अरब में बड़ी बे-इज़्ज़ती और बद-नामी होगी उस वक़्त हुज़ुर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम गुस्से में आ गए और इर्शाद फ़रमाया के अगर मेरी सब से चाहिती बेटी फ़ातिमा भी चोरी करेगी तो मैं उसका भी हाथ काट लूंगा।
*📚सहीह बुख़ारी हदीस हदीस नंबर 6788📕*
*⚠नोट आज जब कोई मामला हो जाता है तो आम तौर से लोग अपने रिश्तेदार दोस्त और जान पहचान के लोगों की तरफ’दारी करते हैं और उसकी हिमायत (फवौर) में बोलते हैं अगरचे वह गलती पर होता है ये हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का तरीक़ा नहीं है। एक मुसलमान को चाहिए के वह हर हाल में अद्ल-व-इन्साफ करे और सिर्फ हक़ का साथ दे क्योंकि हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का यही तरीक़ा है और इसी को अपनाने में हमारी निजात है।..✍🏻*
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*🔹जहां बानी अता कर दें भरी ज़न्नत हिबा कर दें*
*♦नबी मुख़्तारे कुल है जिसको जो चाहे अता कर दें*
🌹👉🏻आप ﷺ की सखावत हज़रत-ए- जाबिर रादिअल्लाहु तआला अन्हु बयान करते हैं कि कभी ऐसा नहीं हुआ की आप सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम से किसी ने कोई चीज़ माँगा हो और आपने “नहीं” फ़रमाया हो।
📘सही मुस्लिम, हदीस नंबर 2311📕
*♦वाह किया ज़ूदों -करम है शाहे बतहा तेरा*
*♦नही ! सुनता ही नहीं माँगने वाला तेरा*
💎👉🏻एक मर्तबा हुज़ुर ﷺ के पास 90 हज़ार चांदी के सिक्के आए। तो आप ﷺ ने फ़रमाया की इन सब को चटाई पर रख दो फिर उसे बाँटने के लिए हुज़ुर खुद खड़े हुए,ज़ो शख्स भी आया उसे आप ने अता फ़रमाया यहाँ तक की वह सारे सिक्के ख़त्म हो गए। उसके बाद एक माँगने वाला आया। तो आप ﷺ ने फ़रमाया की मेरे पास तो अब कोई चीज़ नहीं है। तुम ऐसा करो की फलां दूकानदार के पास जा कर अपनी ज़रूरत की चीज़ें ले लो। दुकान-दार को मैं क़ीमत अदा कर दूंगा। इस पर हज़रत-ए-उमर रादिअल्लाहु तआला अन्हो ने कहा की या रसूलुल्लाह ﷺ अल्लाह तआला ने आप पर ये ज़रूरी नहीं किया है की आप के पास नहीं हो तब भी आप दें। आप ﷺ को ये बात पसंद नहीं आई जिस का असर आप के चेहरे से भी ज़ाहिर हुआ।एक अंसारी सहाबी वहां हाज़िर थे उन्होंने अर्ज़ किया ए अल्लाह के प्यारे रसूल! आप खर्च करते रहिये आप का रब जो सारी दुनिया का मालिक है,अप को देने में कभी कमी नहीं फ़रमाएगा। हुजुर ﷺ ये बात सुन कर मुस्कुराने लगे और आप ने फ़रमाया की हाँ मुझे इसी का हुक्म दिया गया है की मैं लोगो को नवाज़ता रहूं।
*💫🌹 हज़रत-ए-मुआवविज़ बिन अफरा बयांन करते हैं की मैं एक बर्तन में ताज़ा खजूर भर कर हुजूर के पास ले गया तो आप ﷺ ने मुझे मुट्ठी भर कर सोना और चांदी अता फ़रमाया।*
🌷💟 हज़रत-ए-अनस रादिअल्लाहु तआला अन्हो बयांन करते हैं की हुज़ुर ﷺ कल के लिए कुछ भी बचा कर नहीं रखते थे।..✍
*📚तलख़ीस : जियाउन नबी ज़िल्द 5 सफ़ह 522 📕*
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[28/10, 10:47] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
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*🔹मुश्किल थे रास्ते आसान हो गए*
*♦दुश्मन भी देख कर हैरान हो गए*
*🔹जब रखा मेरे नबी ﷺ ने दुनिया मे क़दम*
*♦पत्थर भी कलमा पढ़कर मुसलमान हो गए*
🌹👉🏻आप ﷺ की अमन पसंदी आप ﷺ अपनी पूरी ज़िन्दगी अमन और इंसानियत का माहौल बनाने के लिए लोगो के अंदर से उन तमाम बुराइयों को दूर फ़रमाया जिस से किसी भी तरह अमन और इंसानियत को नुक़सान पहुँचता है। जैसे झूट, धोका, घमंड, वादा खिलाफी, ज़ुल्म , लडाई झगड़ा और खून खराबा वगैरह। और हर उस चीज़ को अपने किरदार और बातों से बढ़ावा दिया जिस से अमन और इंसानीयत का परचार होता है। जैसे सारे लोगो पर रहम करना। किसी के लिए बुरा नहीं सोचना, ज़ात पात और रंग-व-नस्ल की बुन्याद पर कोई फ़र्क़ नहीं करना, सब के साथ अच्छे अख़लाक़ से पेश आना, अपनी ज़ात से दुसरों को फ़ायदा पहुचाना, ख़ास तौर से कमज़ोर और गरीब लोगो की मदद करना और उन की इज़्ज़त की हिफ़ाज़त करना वगैरह। और आप ﷺ अपनी बारगाह में उन्ही लोगो को बड़ा रुतबा देते थे जो लोगो को ज़ियादह से ज़ियादह फायदा पहुँचाने में आगे आगे रहते थे।
🌷💚जैसा की हज़रत इमाम हसन रादिअल्लाहु अन्हो बयां करते हैं की “आप ﷺ की ख़िदमत में हाज़िर होने वाले लोग मख्लूक़ के बेहतरीन लोग होते थे और आप ﷺ के नज़दीक अफ़ज़ल वही होता था जिसकी खैर-ख़्वाही आम हो या’नी जो हर शख्स की भलाई चाहता हो और आप के नज़दीक बड़े रुतबे वाला वही शख्स होता था जो लोगों की मदद में ज़ियादह हिस्सा लेता था।
📚 शामिल-ए-तिर्मिज़ी हदीस 314📕
⚠ नोट आज भी हुज़ुर ﷺ की नज़र में अफ़ज़ल और बड़े रुत्बे वाला वही शख्स होगा जो हर शख्स की भलाई चाहता हो इसलिए हमें भी नबी ﷺ की सीरत के मुताल्लिक़ ज़िन्दगी गुज़ारनी चाहिए।..✍🏻
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*♦जब रखा मेरे नबी ﷺ ने दुनिया मे क़दम*
*पत्थर भी कलमा पढ़कर मुसलमान हो गए*
💟💫 ईद मिलाद उन नबी ﷺ मानना शिर्क कैसे हो सकता है
🌹👉🏻 सबसे पहले तो आप लोगों को ये बतादें की मिलाद का, मतलब पैदाइश होती है।।
💎💚और सभी लोग जानते हैं की जो पैदा होता है वो खुदा नहीं होता, और जो खुदा होता है वो पैदा नहीं होता
💫❇ इसिलिये हम अपने प्यारे आक़ा अलैहिस सलाम की पैदाइश्, यानि उनकी मिलाद मानते है, तो आज जो कुछ जाहिल लोग मिलाद मानाने को भी मअज़ल्लाह शिर्क कहते है।
🌹🇸🇦वो खुद ही मुश्रिक हो गए, क्यूँकि शिर्क का मतलब होता है अल्लाहﷻ की ज़ात या सिफ़त में शारिक, या बराबर समझण।
🌹👉🏻यानि ये वहाबी लोग पैदाइश के लफ्ज़ को अल्लाह ﷻ की सिफ़त समझते हैं यानि अल्लाह ﷻ को पैदा होने वाला मानते हैं इसिलिये तो शिर्क का फतवा दे रहे है।
🌹☝🏻 फिर जो अल्लाह ﷻ के लिए पैदा होना मानता हो वो यक़ीनन मुश्रिक हो गया, हम इन्शाअल्लाहﷻ मिलादुन नबी ﷺ के तअल्लुक़ से आप लोगों तक कुछ हदीसें और क़ुरान की आयतें पेश करेंगे पोस्ट 41 में कल .✍
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*पोस्ट जारी हैं✍*
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*♦मुश्किल थे रास्ते आसान हो गए"*
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*♦जब रखा मेरे नबी ﷺ ने दुनिया मे क़दम"*
*पत्थर भी कलमा पढ़कर मुसलमान हो गए*
*◥ अल कुर’आन ◤*
🌹👉🏻 तर्जुमा हमने मोमिनो पर एहसान किया है जब उनमे अपने रसूल ﷺ को भेज दिया।, तो पता चला की हमारी जांन माल, ज़िन्दगी और दोनों आलम की नेमतों में सबसे बड़ी नेमत हमारे प्यारे आक़ा ﷺ है।
*📚सुराह आले- इमरान-आयत 164)*
🌷💚 इसीलिये अल्लाह ﷻ ने इस नेमत पर एहसान जताए है। तो फिर हमे इस नेमत का ख़ूब ख़ूब चर्चा करना है।
🌷💫 तर्जुमा आप कह दीजिए की अल्लाह ﷻ के फ़ज़्ल और उसकी रहमत पे ख़ूब खुशियाँ मनाओ, ये बेहतर है उससे जो कुछ वो काम कर रहे है।
*(सुराह युनुस आयत 48)*
💟👉🏻यहाँ अल्लाह ﷻ ने अपनी रहमत और फ़ज़्ल पर खुद ही ख़ुशी मानाने का हुक्म दिया है,✍
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*♦मुश्किल थे रास्ते आसान हो गए*
*दुश्मन भी देख कर हैरान हो गए*
*♦जब रखा मेरे नबी ﷺ ने दुनिया मे क़दम*
*पत्थर भी कलमा पढ़कर मुसलमान हो गए*
*◥ अल कुर’आन ◤*
🌷तर्जुमा हमने आपको सारे जहाँ वालो के लिए रहमत बनाकर भेजा।
*(सुराह अम्बिया आयत 107)📕*
💎👉🏻यानि अल्लाह ﷻ के मेहबूब ﷺ हमारे लिए रहमत है और पिछली आयत में अल्लाहﷻ ने हुक्म दिया की अल्लाहﷻ की रहमत पे खुशियाँ माना, बस साबित हुआ की अल्लाह ﷻ के मेहबुब ﷺ की विलादत के दिन हम खुशियाँ मनायें।
{♦ *इमाम इब्न जौज़ी लिखते हैं* ♦}
🌹👉🏻 तफ़्सीर 1: “ज़ाहाक ने इब्न अब्बास रदियल्लाहो त’आला अन्हु से रिवायत किया की अल्लाह ﷻ के फ़ज़्ल से मुराद इल्म है और रहमत से मुराद नबी ﷺ है।” (तफ़्सीर जादुल मसीर फि इल्मे तफ़्सीर )
❇ इमाम अबू हय्यान अंदालूसी भी लिखते हैं♡}
💚 तफ़्सीर 2: फ़ज़्ल इल्म है और रहमत मुहम्मद ﷺ है,✍
*📚(तफ़्सीर बाहरुल मुहीत जिल्द -5 पेग 171)📘*
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[31/10, 11:43] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
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*दुश्मन भी देख कर हैरान हो गए*
*♦जब रखा मेरे नबी ﷺ ने दुनिया मे क़दम*
*पत्थर भी कलमा पढ़कर मुसलमान हो गए*
*◥ अल कुर’आन ◤*
💎👉🏻तर्जुमा हमने आपको सारे जहाँ वालो के लिए रहमत बनाकर भेजा। (सुराह अम्बिया आयत 107)📕
♦ *इमाम जलालुद्दी सुयूती लिखते हैं* ♦
💎👉🏻 तफ़्सीर 3: अबु शेख ने इब्न अब्ब्बास रदियल्लाहो त’आला अन्हु से रिवायत किया की अल्लाह ﷻ के फ़ज़्ल से मुराद इल्म है और उसकी रेहमत से मुराद मुहम्मदﷺ हैं क्यूंकि अल्लाह ﷻ ने फ़रमाया “हमने आपको सारे जहाँ वलोके लिए रहमत बनाकर भेजा”
*📚दुर्रे मंसूर जिल्द 4 पेग 330*
🌹अल्लामा अलुसि लिखते हैं: ख़तीब और इब्बन असाकिर ने फ़ज़्ल से मुराद नबी ﷺ है,✍
📚(तफ़्सीर रूहुल माँ’अ’नी जिल्द 11 पेग, 141💦
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*🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*
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*☞शरीअत की रौशनी में☜*
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*♦मुश्किल थे रास्ते आसान हो गए*
*दुश्मन भी देख कर हैरान हो गए*
*♦जब रखा मेरे नबी ﷺ ने दुनिया मे क़दम*
*पत्थर भी कलमा पढ़कर मुसलमान हो गए*
*◥ अल कुर’आन ◤*
🌹👉🏻 तर्जुमा वो अल्लाह ﷻ का फ़ज़्ल है जिसपर वो चाहता है देता है, और अल्लाह ﷻ बड़े फ़ज़्ल वाला अज़मत वाला है।
*📚सूरह जमुआह आयत 4*
💦 इब्न अब्बास रदियल्लाहो त’आला अन्हु फ़ज़्ल के बारे में फ़रमाते हैं:
💐 इस्लाम और नबी ﷺ देकर अल्लाहﷻ ने फ़ज़्ल फ़रमाया; और ये भी कहा गया है की ईमान वालो को इस्लाम देकर फ़ज़्ल फ़रमाया; और ये भी कहा है की अपनी मख्लूक़ को नबी ﷺ भेजकर फ़ज़्ल फ़रमाया।”
📚(तफ़्सीर इब्न अब्ब्बास सूरह जुमाअ आयत 4) 📙
🌹👉🏻 क़ुरआन में भी अंबिया की पैदाइश के दिनों का ज़िक्र खुसूसियत के साथ किया गया है।। अल्लाहﷻ ताला क़ुरान में याह्या अलैहिस सालम के बारे में फ़रमाता है,
✍🏻( ﻭَﺳَﻠَﺎﻡٌ ﻋَﻠَﻴْﻪِ ﻳَﻮْﻡَ ﻭُﻟِﺪَ ﻭَﻳَﻮْﻡَ ﻳَﻤُﻮﺕُ ﻭَﻳَﻮْﻡَ ﻳُﺒْﻌَﺚُ ﺣَﻴًّﺎ १५ ” )📗
💎👉🏻ओर सलाम हो उन पर, जिस दिन ये पैदा हुए और जिस दिन वो वफ़ात पाएँगे,✍
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[01/11, 09:46] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚
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*💦 एक जगह ईसा अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया:*
*✍🏻( ﻭَﭐﻟﺴَّﻼَﻡُ ﻋَﻠَﻲَّ ﻳَﻮْﻣَﻮُﻟِﺪْﺕُّ ﻭَﻳَﻮْﻡَ ﺃَﻣُﻮﺕُ* *ﻭَﻳَﻮْﻡَ ﺃُﺑْﻌَﺚُ ﺣَﻴّﺎً )*
*💐तर्जुमा* और मुझपर
सलामती हो उस दिन, जिस दिन मे पैदा हुआ, और जिस दिन मुझे मौत आएगी।
*📚(सूरह मरयम, आयत 33 )📕*
💎👉🏻इस आयत से पहले अल्लाह ﷻ ने हज़रत मरयम रदलदिअल्लहो अन्हु का पूरा वाक़ेया बयान किया, और जिस तरह हज़रात ईसा अलैहिस्सलाम की विलादत हुई, ये सब कुछ बयान किया, फिर ईसा अलैहिस्सलाम की विलादत पर उनपर सलाम का ज़िक्र किया।
👉🏻अब ज़रा बताइये, हम अहलेसुन्नत वल जमात भी तो नबी ﷺ की विलादत और बचपन के वाक़ेए और मोजिज़ात बयां करते है, और ये सब कुछ ऊपर क़ुरान की आयतो से साबित है,✍
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💦👉🏻 पता चला की अंबिया की मिलाद के दिन तो खुद अल्लाह ﷻ भी सलाम भेजने का तज़किरा कर रहा है। जबकि अल्लाह ﷻ ताला ने ये भी फरमा दिया की
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🏮”अल्लाह ﷻ और उसके फ़रिश्ते नबी अलैहिस्सलाम पर दरूद भेजते है
*📖सूरह अहजाब, आयात 56*
💟 यानि अल्लाह ﷻ और उसके फ़रिश्ते भी नबी अलैहिस्सलाम पर रोज़ सलाम भेजते है,
💦💐 लेकिन फिर भी पैदाइश के दिन सलाम भेजने का ज़िक्र अल्लाह ﷻ ने खास तौर पर किया है,
💎👉🏻तो पता चला की रोज़ सलाम भेजते रहो, और अम्बियाए अलैहिस्सलाम की विलादत के दिन सलाम भेजना और भी खास है।।
🌹👉🏻 फिर अगर हम अपने नबी अलैहिस्सलाम की विलादत के दिन सलाम पढ, तो कैसे बिदअत हो जाता है,✍
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💎👉🏻हर तरफ अंधेरा था! सिर्फ अंधेरा!! कैसा अंधेरा? कुफ्र व शिर्क का अंधेरा! बुत परस्ती का अंधेरा! जुल्म व सितम का अंधेरा ! लोग इंसानियत, शराफत, हमदर्दी, अमानत व दयानत जैसे अल्फाज़ को जानते न थे। इंसानी खून की कोई कीमत न थी, ज़रा सी बात पर तलवारें निकल आतीं और खून की होली खेली जाती, फिर यह जंग नस्लों तक चलती रहती और खून के दरिया बहते रहते। कमज़ोरों को दबाना, गरीबों को सताना, जिनाकारी, बदकारी और शराबनोशी आम थी। औरत की हालत सबसे ज्यादा बुरी थी, उसके साथ जानवरों से बदतर सुलूक किया जाता था। एक खुदा को छोड़कर सैकड़ों अपने बनाये हुए खुदाओं की इबादत की जाती थी। यहां तक कि खुद काबा शरीफ के अन्दर 360 बुत रख दिये गये थे।
💦💐 ऐसे संगीन और होश उड़ाने वाले हालात में 12 रबीउल अव्वल, 20 अप्रैल सन् 571 ई0 बरोज़ पीर सुबह सादिक के वक़्त एक नूर चमका और उसकी रोशनी बढ़ती गयी। देखते ही देखते उसकी किरणें पूरी दुनिया में फैल गयीं, यानि मुस्तफ़ा जाने रहमत शम्ए बज़्मे हिदायत जनाबे मोहम्मदुर्रसूलुल्लाह ﷺ इस दुनिया में तशरीफ ले आये,.......✍
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🌹👉🏻 जब आपकी विलादत हुई तो एक हज़ार साल से रौशन फारसियों के आतिश कदे की आग बुझ गई। काबे में रखे हुए बुत औंधे हो गये। किसरा के महल के 14 कंगूरे ढह गये। शैतान रंज व गम में मारा-मारा फिरा।
*💎👉🏻हज़रते जिबरील तीन झण्डे लेकर आये एक पूरब दूसरा पश्चिम तीसरा काबे की छत पर लगा दिया तमाम फरिश्तों ने एक दूसरे को मुबारक बाद दी और सूरज को बड़ी रोशनी अता की गयी *(शिफा शरीफ)*
💐💟 आपकी विलादत के वक्त एक नूर ज़ाहिर हुआ जिससे आपकी वालिदा हज़रत आमिना ने शाम के महल देख लिये हज़रत आमना के पास हज़राते अम्बिया (अलैहिमुस्सलाम) तशरीफ लाये और फरमाया जब हुज़ूर ﷺकी
विलादत हो जाये तो उनका नाम मोहम्मद ﷺ रखना।
💟💦 आपकी वालिदा फरमाती हैं कि जब आपकी विलादत हो गयी तो मैंने देखा कि आपके सुर्मा और तेल लगा हुआ है। आप ख़तनाशुदा हैं और रेशम से ज्यादा मुलायम कपड़े में लिपटे हुये हैं। इसी बीच तीन शख्स आये उनके चेहरे चाँद की तरह चमक रहे थे एक के हाथ में चाँदी का लोटा दूसरे के हाथ में ज़बरजद (एक कीमती पत्थर) की तश्त तीसरे के हाथ में एक सफेद रेशम था, जिसमें एक मुहर चमक रही थी उनमें से एक शख्स ने चाँदी के लोटे से आपको सात बार गुस्ल दिया फिर आपके दोनो कांधों के बीच में मोहरे नबुव्वत लगा दी।
🌹👉🏻आपकी विलादत के सातवें दिन आपके दादा हज़रत अब्दुल मुत्तलिव ने आपकी तरफ से कुर्बानी की और कुरैश को खाने पर बुलाया।
🔸💐 सबसे पहले आपने हज़रत सुवैबा का दूध पिया फिर अपनी हज़रत आमिना का, इसके बाद बाकी तमाम अर्सा हज़रत हलीमा के दूध से सैराब होते रहे,✍….
*नेक्स्ट पोस्ट कंटिन्यू*✏️
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💐💦बचपन के हालात दूसरे अहवाल की तरह हुजूर का बचपन भी सबसे निराला और अनोखा था बचपन में आपने कभी कपड़ों में पाखाना पेशाब न किया और न। कभी बर्हना हुये और अगर कभी अचानक कपड़ा उठ भी गया तो फरिश्ते सतर छुपा देते थे।आपके इशारे पर चाँद झुक जाता और आपको रोने से बहलाता था।
🌹👉🏻एक बार आप चारागाह में थे कि फरिश्तों के सरदार हज़रत जिबरील आये,आपके सीना-ए-मुबारक को चाक किया और कल्ब मुबारक ( दिल ) को धोकर इल्म व इरफान से भर दिया फिर आपके सीना-ए-मुबारक को सी दिया।
💎👉🏻 जब आप 6 वर्ष के हो गये तो आपकी वालिदा अपनी एक बांदी ‘उम्मे एमन’ को साथ लेकर आपको मदीना शरीफ ले आयी कुछ दिन वहां गुज़ार कर। आपको लेकर मदीना वापस आ रही थीं कि ‘आबवा’ नामी जगह पर वालिदा का विसाल हो गया । वहां से उम्मे एमन आपको मदीना शरीफ ले आयीं।
💐💦 हज़रत आमिना के इन्तेकाल के बाद आपके दादा हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने आपको अपनी ज़िम्मेदारी में ले लिया और अपनी औलाद से बढ़कर चाहा लेकिन दादा की गोद में रहते हुये दो वर्ष ही गुज़रे थे कि उनका भी इन्तेकाल हो गया।
♦👉🏻दादा की वफात के बाद आप अपने चाचा अबु तालिब के यहां परवरिश पाने लगे,अबु तालिब ने भी किफालत का हक अदा कर दिया,आपके हर आराम का पूरा ख्याल रखा,, पोस्ट जारी है..✍
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🌹👉🏻जवानी मुबारक..! जब आपने जवानी की मंज़िल में कदम रखा तो उन तमाम बुरे कामों से दूर रहे जो आम तौर से नौजावानों में पाये जाते हैं। सच्चाई,अमानत,दयानत और तमाम अच्छी बातें और बेहतरीन आदतें आपके अन्दर पायी जाती थीं।
💎👉🏻नौजवान आपको खेल कूद की तरफ बुलाते लेकिन आप उनके साथ कभी न जाते। कुरैश आपकी सच्चाई और अमानत को मानते थे । तिजारत ( व्यापार ) आप अपना मामला बहुत साफ रखते झूठ कभी न बोलते हमेशा सच बोलते इसी लिये लोग आपको “सादिक” यानि सच्चा और “अमीन” यानि अमानत दार कहने लगे।
🌹🕋मक्का की एक ख़ातून हज़रत खदीजा बहुत मालदार और बहुत ही शरीफ और पाक दामन ख़ातून थीं उनकी दरख्वास्त पर आपने तिजारत के इरादे से मुल्के शाम ( सीरिया ) का दूसरा सफर किया और बहुत जल्द सारा सामान। बेच कर मक्का वापस आ गये। आपकी अच्छी बातें और बेहतरीन आदतों को। देखकर हज़रत खदीजा ने आपके पास निकाह का पैगाम भेजा आपने मंजूर कर लिया और हज़रत ख़दीजा का निकाह आपसे हो गया उस वक्त आपकी उम्र शरीफ 25 वर्ष थी.
*पोस्ट..जारी..हैं..✍*
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