सोमवार, 28 दिसंबर 2020

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शुक्रवार, 20 नवंबर 2020

🧾सच्ची हिकायत🧾


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 🧾सच्ची हिकायत🧾

🌷★ सच्ची हिकायत ★🌷:

*❀⊱•⊰❀⊱• •⊰❀⊱•【 ﷽】•⊰❀⊱••⊰❀⊱•⊰❀*

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 *║محمدﷺ║• فاطمہ║• علی ║• حسن║• حسین ║*

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                   *⚡【 हिकायत -⓵ 】⚡*


*•••➲ एक सहाबी हज़रत ह्बीब-उल्लाह बिन फिदयक् रदि अल्लहो तालाअन्हो एक मर्तबा कहीं जा रहे थे रास्ते में कहीं उनका पैर धोखे से एक सांप के अंडो पे पड गया और पिस गया उसके ज़हर् से अपकी आँखे सफ़ेद हो गई और नज़र जाती रही ,और बड़ी तकलीफ होने लगी आपके वालिद ये देख कर बहोत परेशान हो गए ,और हुज़ुर ﷺ की बारगाह मे अपने बेटे को लेकर हाज़िर हुए बाद सलाम के आपने हुज़ुर ए पुर अन्वार से सारा मामला बताया आप ﷺ ने देखा और अपना लुआब् ए देहन मुबारक उनकी आँखों में थोड़ा सा डाल दिया , हज़रत ह्बीब-उल्लाह बिन फिदयक् रदि अल्लहो तालाअन्हो  कि आँखे फ़ौरन रौशन हों गई ! आप्की आँखों का रंग तो हमेशा सफेद ही रहा  मगर उनकी बिनाई इतनी बढ़ गई कि रावी फर्माते है कि 80 साल की उम्र होने के बावजुद आप सुई मे धागा डाल लेते थे ! ये सब मेरे आक़ा के लुआबे दहन का असर है !*


*सुब्हानल्लाह !*

*सुब्हानल्लाह !*


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*#📗दलायल उल नबुवत ,सफह 167*


_*⚠सबक* अब जो लोग ये कहते है कि नबी हमारी तरह है , तो ज़रा ये भी देखलो कि प्यारे आका हुज़ुर ﷺ के लुआब् ए दहन में वो क़माल है जो आज की दवाओ मे नहीं ,  और जब तुम उनके बराबर हो तो अपने थूक को किसी इंसान के आँखों में दाल के दिखा दो अच्छी खासी आँख बर्बाद हो जायेगी_

_★ उनके जैसा ना कोई पैदा किया गया और ना होगा जिसकी सनद खुद ज़िब्रिल अलेहहिस्सलाम का कौल है आप फर्माते है या रसुलअल्लाह ﷺ मैंने पूरी कायनात मे आप जैसा दूसरा नहीं देखा ! और अल्लाह ने आप जैसा की दूसरा बनाया है नहीं है !_



_*🌹तभी तो आ'ला हज़रत इमामे अहले सुन्नत इमाम इश्क मुहब्बत इसी मन्ज़र को बयान करते हुए फर्माते है !*_


*"यही बोले सिदरा वाले"*

*"चमनो जहां के थाले"*

*"सभी मैंने छान डाले"*

*"तेरे पाए सा ना पाया"*

*"तुझे येक (1) ने येक (1) बनाया"*


_सुब्हानल्लाह !_

_सुब्हानल्लाह !_

नेक्स्ट पोस्ट कंटिन्यू......✍️

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*❀⊱•⊰❀⊱• •⊰❀⊱•【 ﷽】•⊰❀⊱••⊰❀⊱•⊰❀*

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 *║محمدﷺ║• فاطمہ║• علی ║• حسن║• حسین ║*

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                *⚡【 सच्ची हिकायत 】⚡*

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👑 *हज़रत इमाम-ए-आज़म रज़िअल्लाहु अन्हु का एक दहरिया से मुनाज़रा !* 


 _★   हमारे इमाम हज़रत *इमाम-ए-आज़म रज़िअल्लाहु अन्हु* का एक *दहरिया (ख़ुदा की हस्ती का मुन्किर यानी नास्तिक )* से मुनाज़रा मुक़र्रर हुआ और मौजू-ए-मुनाज़रा (मुनाज़रे का शीर्षक) यही मसअला था कि आलम (दुनिया) का कोई ख़ालिक़ (आलम का बनाने और पैदा करने वाला) है या नहीं ? इस अहम् मसले पर मुनाज़रा और फिर इतने बड़े इमाम से। चुनांचे मैदान-ए-मुनाज़रा में  दोस्त दुश्मन भी जमा हो गए मगर हज़रत इमाम-ए-आज़म वक़्ते मुक़र्ररा से बहुत देर के बाद मजलिस में तशरीफ़ लाए। दहरिया ने पूछा कि आपने इतनी देर क्यों लगाई ? आपने फ़रमाया: अगर मैं इसका जवाब यह दूं कि मैं एक जंगल की तरफ निकल गया था। वहां एक अजीब वाक़िया नज़र आया जिसको देखकर मैं हैरत में आकर वही खड़ा हो गया। वह वाक़िया यह था कि दरिया के किनारे एक दरख़्त था, देखते-ही-देखते वह दरख़्त खुद-ब-खुद कटकर ज़मीन पर गिर पड़ा, फिर खुद-ब-खुद उसके तख्ते तैयार हुए, फिर उन तख्तों की खुद-ब-खुद एक कश्ती तैयार हुई और खुद-ब-खुद ही दरिया में चली गई। खुद-ब-खुद वह एक दरिया के इस तरफ के मुसाफ़िरों को उस तरफ और उस तरफ के मुसाफ़िरों को इस तरफ लाने और ले जाने लगी। फिर हर एक सवारी से खुद ही किराया वसूल करती थी तो बताओ तुम मेरी इस बात पर यक़ीन क्र लोगे ? तो दहरिये ने यह सुनकर कहकहा लगाया और कहा: आप जैसा बुज़ुर्ग और इमाम ऐसा झूठ बोले तो तअज्जुब है भला यह काम कहीं खुद-ब-खुद हो सकते हैं। जब तक कोई करने वाला न हो, किसी तरह नहीं हो सकते_

   🌷  _*हज़रत इमाम-ए-आज़म* ने फ़रमाया कि यह तो कुछ भी काम नहीं हैं। तुम्हारे नज़दीक तो इससे भी ज़्यादा बड़े-बड़े आलीशान काम खुद-ब-खुद बग़ैर किसी करने वाले के तैयार होते हैं।  यह ज़मीन, आसमान, यह चाँद, यह सूरज, यह सितारे, यह बाग़ात यह सदहा क़िस्म के रंगीन फूल शीरीं (मीठे) फल, यह पहाड़, यह चौपाए (जानवर), यह इंसान और यह सारी खुदाई बग़ैर बनाने वाले के तैयार हो गयी है। अगर एक कश्ती का बग़ैर किसी बनाने वाले के तैयार हो गयी है। अगर एक कश्ती का बग़ैर किसी बनाने वाले के खुद-ब-खुद बन जाना झूठ है तो सारे जहां का बग़ैर बनाने वाले के बन जाना इससे भी ज़्यादा झूठ है।_


  *⚠👉🏻   दहरिया आपकी तक़रीर सुनकर दम-ब-खुद हैरत में आ गया और फ़ौरन अपने अक़ीदे से ताइब होकर मुसलमान हो गया।*


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*(#📗तफ़सीरे कबीर जिल्द 1, सफा 221)*

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                *⚡【 सच्ची हिकायत 】⚡*

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🌹 _*हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ रज़ियल्लाहु अन्हु और एक दहरिया  मल्लाह !*_


🎯 _ख़ुदा की हस्ती के एक मुनकिर की ( जो मल्लाह था ) हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ रज़ियल्लाहु अन्हु से बातचीत हुई। वह मल्लाह कहता था कि ख़ुदा कोई नहीं ( मआज़ल्लाह! ) हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ रज़ियल्लाहु अन्हु ने उससे फ़रमाया तुम जहाज़रान ( जहाज़ चलाने वाले ) हो तो यह बताओ कभी समुंद्री तूफ़ान से भी तुम्हारा सामना पड़ा। वह बोला हां! मुझे अच्छी तरह याद है कि एक मर्तबा समुन्द्र के सख्त तूफ़ान में मेरा जहाज़ फंस गया था। हज़रत इमाम ने फ़रमाया फिर क्या हुआ ? वह बोला मेरा जहाज़ ग़र्क़ हो गया और सब लोग जो उस पर सवार थे डूबकर हलाक हो गए।  आपने पूछा: तुम कैसे बच गए ? वह बोला: मेरे हाथ जहाज़ का एक तख्ता आ गया मैं उसी के सहारे तैरता हुआ साहिल के कुछ करीब पहुच गया। मगर अभी साहिल दूर ही था कि तख्त भी हाथ से छूट गया फिर मैंने खुद ही कोशिश शुरू कर दी। हाथ पैर मारकर किसी न किसी तरह किनारे आ लगा। हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ रज़ियल्लाहु फरमाने लगे!_

*अब सुनो:* _जब तुम अपने जहाज़ पर सवार थे तो तुम्हे अपने जहाज़ पर एतमाद व भरोसा था कि यह जहाज़ पर लगा देगा। फिर वह डूब गया तो फिर तुम्हारा एतमाद व भरोसा उस तख्ते पर रहा जो इत्तिफ़ाक़न तुम्हारे हाथ लग गया था। मगर जब वह भी तुम्हारे हाथ से छूट गया तो अब सोचकर बताओ कि इस बेसहारा वक़्त और बेचारगी के आलम में भी क़्यों तुम्हें यह उम्मीद थी कि अब भी कोई बचाना चाहे तो मैं बच सकता हूँ ? वह बोला: हाँ यह उम्मीद तो थी।  हज़रत ने फ़रमाया - मगर वह उम्मीद थी किस से कि कौन बचा सकता है ? अब वह देहरिया खामोश हो गया। आपने फ़रमाया - खूब याद रखो! इस बेचारगी के आलम में तुम्हे जिस ज़ात पर उम्मीद थी वही ख़ुदा है और उसी ने तुम्हें बचा लिया था।  मल्लाह यह सुनकर होश में आ गया और इस्लाम ले आया !_


   *📝 सबक़ :-*  _ख़ुदा है, और यक़ीनन है। मुसीबत के वक़्त ग़ैर-इख़्तेयारी तौर पर भी ख़ुदा की तरफ ख़्याल जाता है।  गोया ख़ुदा की हस्ती का इख़्तियार फ़ितरी चीज़ है !_



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*(#📗तफ्सीरे कबीर ,जिल्द 1,सफ़ह 221)*


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 *║محمدﷺ║• فاطمہ║• علی ║• حسن║• حسین ║*

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                *⚡【 सच्ची हिकायत 】⚡*

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               *👤एक अक़्लमंद बुढ़िया🎡*


  *🌷  एक आलिम ने एक बुढ़िया को चरखा कातते देखकर फ़रमाया कि बड़ी बी! सारी उम्र चरखा ही काता या कुछ अपने खुदा की पहचान की?* 

_👉🏿 बुढ़िया ने जवाब दिया कि बेटा सबकुछ इसी चरखे में देख लिया।_

 _👉🏻फ़रमाया:बड़ी बी! यह बताओ कि खुदा मौजूद है या नहीं?_

_👉🏿बुढ़िया ने जवाब दिया कि हाँ!  हर घड़ी और रात दिन हर वक़्त खुदा मौजूद है।_

_👉🏻 आलिम ने पूछा मगर इसकी दलील?_

_👉🏿 बुढ़िया बोली दलील मेरा यह चरखा।_

_👉🏻 आलिम ने पूछा: यह कैसे?_

_👉🏿 वह बोली वह ऐसे कि जब तक मैं इस चरखे को चलाती रहती हूँ यह बराबर चलता रहता है और जब मैं इसे छोड़ देती हूँ तब यह ठहर जाता है। तो जब इस छोटे से चरख़े को हर वक़्त चलाने की ज़रूरत है तो ज़मीन व आसमान, चांद सूरज के इतने बड़े-बड़े चरख़ों को किस तरह चलाने वाले की ज़रूरत न होगी ?_ 

_👉🏿पस इसी तरह ज़मीन व आसमान के चरख़े  चलने वाला चाहिए। जब तक वह चलाता रहेगा यह सब चरख़े चलते रहेंगे और जब वह छोड़ देगा तो ठहर जाएंगे। मगर हमने कभी ज़मीन व आसमान, चांद सूरज को ठहरे नहीं देखा तो जान लिया कि उनका चलाने वाला हर घड़ी मौजूद है !_

 👉🏻  _मौलवी साहब ने सवाल किया कि आसमान व ज़मीन का चरखा चलाने वाला एक है या दो ?_ 

_👉🏿बुढ़िया ने जवाब दिया कि एक है। दावे की दलील भी यही मेरा चरख़ा है। क्योंकि जब इस चरख़े को  अपनी मर्ज़ी से एक तरफ चलाती हूँ यह चरख़ा मेरी मर्ज़ी से एक ही तरफ चलता है और अगर कोई दूसरी चलाने वाली भी होती तो यह मेरी मददगार होकर मेरी मर्ज़ी के मुताबिक चरख़ा चलाती। तब तो चरख़े की रफ़्तार तेज़ हो जाती और इस चरख़े की रफ़्तार में फ़र्क़ आकर नतीजा हासिल न होता। अगर वह मेरी मर्ज़ी के खिलाफ़ और मेरे मुख़ालिफ़ ज़ेहत पर चलाती तो चरख़ा चलने से ठहर जाता या टूट जाता। मगर ऐसा नहीं होता। इस वजह से कि दूसरी चलाने वाली नहीं है। इसी तरह आसमान व ज़मीन का चलाने वाला अगर कोई दूसरा होता तो ज़रूर आसमानी चरख़े की रफ़्तार तेज़ होकर दिन-रात का निज़ाम में फ़र्क़ आ जाता या चलने से ठहर जाता या टूट जाता। जब ऐसा नहीं है तो ज़रूर आसमान व ज़मीन के चरख़े को चलाने वाला एक ही है !_


  •–⚀•RєԲ:➻┐                                                                            *(📗सीरतुस्सालिहीन सफ़ा 3)*




📝 *सबक़ :-* *_दुनिया की हर चीज़ अपने ख़ालिक़ के वुजूद और उसकी यक्ताई पर शाहिद है। मगर अक़्ले सलीम दरकार है।_*


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                     *🌷एक नूरानी तारा🌟*



_*👑 एक मर्तबा हमारे प्यारे आ'का हुज़ूर सल्ललाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत जिब्रईल अमीन अलैहिस्सलाम से दरयाफ्त फ़रमाया :*_ 

_कि ऐ जिब्रईल! तुम्हारी उम्र कितनी है? तो जिब्राईल ने अर्ज़ किया :_ _*हुज़ूर !*_ _मुझे कुछ ख़बर नहीं। हां, इतना जानता हूं कि चौथे हिजाब में एक नूरानी तारा सत्तर हज़ार बरस के बाद चमकता था। मैंने उसे बहत्तर हज़ार मर्तबा चमकते  देखा है।_

_*हुज़ूर अलैहिस्सलाम ने यह सुनकर फ़रमाया :*_

        _" मेरे रब की इज़्ज़त की क़सम! मैं ही वह नूरानी तारा हूँ !_

                       

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*(#📚रुहुल ब्यान जिल्द 1, सफा 974 )*


*📲सबक :->* _हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम काइनात की हर चीज़ से पहले पैदा फरमाए गए है। आपका नूर-ए-पाक उस वक़्त भी था जबकि न कोई फरिश्ता था, न कोई बशर, न ज़मीन थी, न आसमान और न कोई शय, फसल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम !_

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 *║محمدﷺ║• فاطمہ║• علی ║• حسن║• حسین ║*

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                     *⚜️यमन का बादशाह🎯*


 

     👉🏻 _किताबुल-मुस्तज़रिफ और हुज्जतुल्लाहि अलल-आलमीन और तारीख़े इब्ने आसकिंर में है क़ि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक हज़ार साल पेशतर यमन का बादशाह तुब्बा अव्वल हिमयरी था। एक मर्तबा वह अपनी सलतनत के दौरे को निकला। बारह हज़ार आलिम और हकीम एक लाख बत्तीस हज़ार सवार और एक लाख तेरह हज़ार प्यादह अपने हमराह लिए और इस शान से निकला की जहां भी पहुँचता उसकी शान व शौकत शाही देखकर मख़लूक़े खुदा चारों तरफ से नज़ारा को जमा हो जाती थी यह बादशाह जब दौरा करता हुआ मक्का मोअज़्ज़मा पहुंचा तो अहले मक्का से कोई उसे देखने न आया। बादशाह हैरान हुआ और उसने अपने वज़ीरे आज़म से इसकी वजह पूछी तो उसने बताया की इस शहर में एक घर है जिसे बैतुल्लाह कहते हैं। उसकी और उसके खादिमो की यहां की जो यहां के बाशिंदे हैं तमाम लोग बेहद ताज़ीम करते हैं और जितना आपका लश्कर है,इससे कहि ज़्यादा दूर और नज़दीक के लोग इस घर की ज़ियारत को आते हैं और यहां के बाशिंदो की खिदमत करके चले जाते हैं। फिर आपका इनके ख्याल में क्यों आए? यह सुनकर बादशाह को गुस्सा आया और क़सम खाकर कहने लगा की मैं इस घर को खुदवा दूंगा और यह के बाशिंदो को क़त्ल कराऊंगा। यह कहना था बादशाह  के नाक,मुँह और आखों से ख़ून बहना शुरू हो गया। ऐसा बदबूदार माददा बहने लगा की उसके पास बैठने की भी किसी की ताकत न रही। इस मर्ज़ का इलाज किया गया मगर अच्छा नहीं हुआ। शाम के वक़्त बादशाह के साथी आलिमों में से एक आलिमे रब्बानी तशरीफ़ लाये और नब्ज़ देखकर फ़रमाया की मर्ज़ आसमानी है और इलाज ज़मीन का हो रहा है। ऐ बादशाह!आपने अगर कोई बुरी नियत की है तो फ़ौरन उससे तौबा कीजिये। बादशाह ने दिल-ही-दिल में बैतुल्लाह शरीफ और खुद्दामे काबा के मुताल्लिक अपने इरादे से तौबा की। तौबा करते ही उसका वह खून और माददा बहना बंद हो गया और फिर सेहत की ख़ुशी में उसने बैतुल्लाह शरीफ को रेशमी ग़िलाफ़ चढ़ाया और शहर के हर बाशिन्दे को सात-सात रेशमी जोड़े नज़्र  किए।_


    👉🏻 _फिर यहाँ से चलकर जब मदीना मुनव्वरा पहुंचा तो हमराही आलिमों ने (जो आसमानी किताबों के आलिम थे) वहां की मिटटी को सूंघा और कंकरियों को देखा और नबी आख़िरुज़्ज़मां की हिजरतगाह की जो अलामतें उन्होंने पढ़ी थी उनके मुताबिक़ उस सरज़मीन को पाया तो आपस में अहद कर लिया कि हम यहाँ ही मर जायेंगे। मगर इस सरज़मीन को न छोड़ेंगे। अगर हमारी किस्मत ने साथ दिया तो कभी-न-कभी जब नबी आख़िरुज़्ज़मां (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) यहाँ तशरीफ़ लाएंगे, हमें भी ज़्यारत का शर्फ हासिल हो जायेगा, वरना हमारी क़ब्रो पर तो ज़रूर ही कभी-न-कभी उनकी जूतियों की मुक़द्दस ख़ाक उड़कर पड़ जाएगी जो हमारी निजात के लिए काफ़ी है।_


  👉🏻 _यह सुनकर बादशाह ने उन आलिमों के वास्ते चार सौ मकान बनवाये।और उस बड़े आलिमें रब्बानी के मकान के पास हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खातिर एक दो मंजिला उमदा मकान तैयार कराया और वसीयत कर दी कि जब आप तशरीफ लाए तो यह मकान आपकी आरामगाह होगी और उन चार सौ उलमा की काफी इमदाद भी की। कहा, तुम हमेशा यहीं रहो। फिर बड़े आलिमे रब्बानी को एक खत लिख कर दिया और कहा कि मेरा यह खत उस नबी आखिरुज़्ज़मां सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खिदमते अक़दस में पेश कर देना और अगर जिंदगी भर तुम्हें हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़्यारत का मौक़ा न मिले तो अपनी औलाद को वसीयत कर देना कि नसलन बाद नस्लिन मेरा यह खत महफूज रखें। हत्ता कि सरकारे अक़दस सल्ल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में पेश किया जाए। यह कहकर बादशाह वहां से चल दिया।_

    👉🏻 _वह खत नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में एक हज़ार साल बाद पेश हुआ कैसे हुआ? और खत में क्या लिखा था? सुनिए और अज़मते  मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का एतराफ़ फ़रमाइए। खत का मज़मून यह था।_

     👉🏻 _कमतरीन मख़लूक़ तुब्बा अव्वल हिमयरी की तरफ से शफी-उल मुज़मबीन सय्यदुल-मुरसलीन मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अम्मा बाद!_

_☝🏻ऐ अल्लाह के हबीब मैं आप पर ईमान लाता हूं और जो किताब आप पर नाज़िल होगी उस पर भी ईमान लाता हूं और मैं आपके दीन पर हूँ। पस अगर मुझे आपकी ज्यारत का मौका मिल गया तो बहुत अच्छा व ग़नीमत और अगर मैं आपकी ज्यारत न कर सका तो मेरी शफाअत फ़रमाना और क़्यामत के रोज़ मुझे फ़रामोश न करना। मैं आपकी पहली उम्मत में से हूं और आपके साथ आपकी आमद से पहले ही बैअत करता हूं। मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह एक है और आप उसके सच्चे रसूल हैं। शाहे यमन का यह खत उन चार सौ आलिमों की नस्ल-दर-नस्ल  द्वारा ज


ान की तरह हिफाज़त की जाती रही। यहां तक कि एक हजार साल का वक़्त गुज़र गया। उन आलिमों की औलाद इस कसरत से बढ़ी की मदीने की आबादी में कई गुना इज़ाफा हो गया और यह खत दस्त-ब-दस्त मअ वसीयत के उस बड़े आलिमे रब्बानी की औलाद में से हजरत अबू ऐय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के पास पहुंचा और आपने वह खत गुलामे खास अबू लैला की हिफाज़त में रखा।_

_👉🏻 जब हुज़ूर  सल्लल्लाहु अलेहि वसल्लम मक्का मोअज़्ज़मा हिजरत फरमा कर मदीना मुनव्वरा पहुंचे और मदीना मुनव्वरा की अलवदाई घाटी सनीयात की घाटियों से आपकी ऊंटनी नमूदार हुई और मदीने के खुशनसीब लोग महबूबे खुदा का इस्तिक़बाल करने को जूक़ दर जूक़ (भीड़-की-भीड़) आ रहे थे। कोई अपने मकानों को सजा रहा था, कोई दावत का इंतजाम कर रहा था और सब यही इसरार कर रहे थे कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मेरे घर तशरीफ फरमा हो । हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: कि मेरी ऊँटनी की नकील छोड़ दो। जिस घर में यह ठहरेगी और बैठ जाएगी, वही मेरी क़्यामगाह (रहने की जगह) होगी। चुनाचे जो दो मंजिला मकान शाहे यमन तुब्बा ने हुजूर की खातिर बनाया था, वह उस वक्त हजरत अबू ऐय्यूब अंसारी रजियल्लाहु तआला अन्हु के पास था। उसी में हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ऊंटनी जाकर ठहर गई।_

_👉🏻 लोगों ने अबू-लैला को भेजा कि जाओ हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को शाहे यमन तुब्बा का ख़त दे आओ। जब अबू-लैला हाजिर हुआ तो हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उसे देखते ही फरमाया : तू अबू-लैला है?_

_👉🏻 यह सुनकर अबू-लैला हैरान हो गया। हुजूर ने फिर फरमाया: मैं मुहम्मद रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) हूँ, शाहे यमन का जो मेरा खत तुम्हारे पास है, लाओ। वह मुझे दो। चुनाचे अबू-लैला ने वह खत दिया और हुजूर ने पढ़कर फ़रमाया नेक भाई तुला को आफ़रीँ व शाबाश है।_


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#📚 मीज़ानुल अद्यान सफा 177


*📝सबक :->* : हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का हर जमाने में चर्चा रहा है। खुशकिस्मत अफराद ने हर दौर में हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से फ़ैज़ पाया। हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अगली पिछली तमाम बातें जानते हैं। यह भी मालूम हुआ कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आमद-आमद की ख़ुशी में मकानों और बाज़ारो  को सजाना और सजावट करना सहाबाए किराम की सुन्नत है। फिर आज अगर हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आमद की खुशी में बाज़ारो को सजाया जाए, घरों की सजावट की जाए और जुलूस निकाला जाए तो उसे बिदअत कहने वाला खुद क्यों बिदअती न होगा?

नेस्ट पोस्ट कंटिन्यू...✍️

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💚 *हजरत सिद्दीक अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु का ख़्वाब*

 


      🌷 _हज़रत सिद्दीक अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु क़ब्ल अज़ इस्लाम एक बहुत बड़े ताजिर थे। आप तिजारत के सिलसिले में मुल्के शाम में तशरीफ़ फरमा थे की एक रात ख्वाब में देखा कि चांद और सूरज आसमान से उतरकर उनकी गोद में आ पड़े हैं। हज़रत सिद्दीक अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु ने  अपने हाथ से चांद और सूरज को पकड़ कर अपने सीने से लगाया और उन्हें अपनी चादर के अंदर कर लिया। सुबह उठे तो एक ईसाई राहिब के पास पहुंचे और उससे इस ख्वाब की ताबीर पूछी। राहिब ने पूछा कि आप कौन हैं ?_

_आपने फरमाया: मैं अबू-बक्र हूं।  मक्का का रहने वाला हूं।_

_राहिब ने पूछा: कौन से क़बीले ले से हैं ?_

_आप ने फरमाया: बनू हाशिम से और जरिया एक मआश क्या है? फरमाया:_

_राहिब ने कहा-तो फिर गौर से सुन लो !_ 

_नबी आख़िरुज़्ज़मा है है हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि  वसल्लम तशरीफ ले आए हैं। वह भी इसी कबीला बनी हाशिम से हैं और वह आखिरी नबी हैं। अगर वह ना होते तो खुदाए ताला ज़मीन व आसमान को पैदा ना फरमाता और किसी नबी को भी पैदा ना फरमाता। वह अव्वलीन व आख़रीन के सरदार है। ए अबू बक्र! अब तुम उसके दीन में शामिल होगे और उसके वजीर और उसके बाद उसके खलीफा बनोगे। यह है तुम्हारे ख्वाब की ताबीर। सुन लो!_

_मैंने इस नबी पाक की तारीफ व नअत तौरेत व इंजील में पढ़ी है।  मैं इस पर ईमान ला चुका हूं और मुसलमान हूं। लेकिन ईसाइयों के खौफ से अपने ईमान का इजहार नहीं किया।_

_हज़रत सिद्दीक़  अकबर रजियल्लाहु अन्हु ने जब अपने ख़्वाब की ताबीर सुनी तो इश्क़े रसूल का जज़्बा पैदा हुआ और आप फ़ौरन मक्का मोअज़्ज़मा वापस आए। हुजूर की तलाश करके बारगाहे रिसालत में हाज़िर हुए और दीदार ए पुरअनवर से अपनी आंखों को ठंडा किया।_


_👑 हुजूर ने फरमाया अबू बक्र! :- तुम आ गए, लो अब जल्दी करो और दीने हक़ में दाखिल हो जाओ सिद्दीक़े अकबर ने अर्ज किया: बहुत अच्छा। हुज़ूर! अगर कोई मौजिज़ा तो दिखाइए। हुजूर ने फरमाया: वह ख्वाब जो शाम में देख कर आए हो और उसकी ताबीर जो उस राहिब से सुन कर आए हो मेरा ही तो मौजिज़ा है।  सिद्दीक़ अकबर ने यह सुनकर अर्ज किया: सच फ़रमाया ऐ अल्लाह के रसूल आपने।  मैं गवाही देता हूं कि आप वाक़ई अल्लाह के सच्चे रसूल हैं !_


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*(#📚 जामिउल मुजिज़ात साफा 4)*


*📝सबक :-* _हजरत अबू-बक्र सिद्दीक़  रज़ियल्लाह हू अन्हु हुज़ूर  सल्लल्लाहु अलैहि  वसल्लम के वज़ीर और ख़लीफ़ा  बरहक़ हैं। हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कोई बात छुपी नहीं रहती। आप दानाए गुयूब है। यह भी मालूम हुआ कि तमाम मख़लूक़ हमारे हुजूर के ही  सदक़ा में पैदा की गई है। अगर हुजूर ना होते तो कुछ भी ना होता।_


🌻 _वो जो ना थे तो कुछ ना था वो जो ना हो तो कुछ ना हो,_

🌻 _जान है वो जहान की , जान है तो जहान है !_          

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              *🏁 مسلک اعلی حضرت سلامت رہے 🏁*

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                *⚡【 सच्ची हिकायत 】⚡*

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                     *👤 इबलीस का पोता*


_🌸 बैहक़ी में अमीरुल मोमिनीन हजरत उमर फारूक रजि अल्लाह हू अन्हो से रिवायत है कि एक रोज हम हुजूर सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम के हमराह तहामा की एक पहाड़ी पर बैठे थे कि अचानक एक बूढ़ा हाथ में असा लिए हुए हुजूर सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम के सामने हाजिर हुआ और सलाम अर्ज किया, !_

_♛ हुज़ुर ﷺ ने जवाब दिया और फरमाया इसकी आवाज जिन्नो की सी है फिर आपने उससे दरयाफ्त किया तू कौन है ?_

_❥ उसने अर्ज किया मैं जिन हूं मेरा नाम हामा है बेटा हीम और हीम बेटा लाकीस का और लाकीस बेटा इब्लीस का है !_

_♛ हुज़ुर ﷺ ने फरमाया तो गोया तेरे और इब्लीस के दरमियान सिर्फ दो पुश्ते हैं ,फिर फरमाया अच्छा यह बताओ तुम्हारी उम्र कितनी है ?_

_❥ उसने कहा या रसूल अल्लाह जितनी उम्र दुनिया की है उतनी ही मेरी है कुछ थोड़ी सी कम है हुजूर जिन दिनों काबील ने हाबील को कत्ल किया था, उस वक्त में कई बरस का बच्चा ही था, मगर बात समझता था पहाड़ों में दौड़ता फिरता था , और लोगों का खाना वा गल्ला चोरी कर लिया करता था , लोगों के दिलों में वसवसे भी डाल देता था कि वह अपने खवीश् व अकरबा से बदसलूकी करें !_

_♛ हुज़ुर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया तब तो तुम बहुत बुरे हो उसने , अर्ज की हुजूर मुझे मलामत ना फरमाइए इसलिए कि अब मैं हुजूर की खिदमत में तौबा करने हाजिर हुआ हूं ,_

_❥ या रसूल अल्लाह मैंने हजरते नूह अलैहिस्सलाम से मुलाकात की है 1 साल तक उनके साथ उनकी मस्जिद में रहा हूं , इससे पहले मैं उनकी बारगाह में भी तौबा कर चुका हूं ,हजरत हुद हजरत याकूब और हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम की सोहबतो में भी रह चुका हूं ,उनसे *तौरात* सीखी है  और उनका सलाम हजरत ईसा अलैहिस्सलाम को पहुंचाया था,_

_❥ ऐ नबियों के सरदार हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने फरमाया था कि अगर तू मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम से मुलाकात करें तो मेरा सलाम उन को पहुंचाना , सो हुज़ुर ﷺ अब मैं इस अमानत से सबुकदोश् होने को हाजिर हुआ हूं , और यह भी आरजू है कि आप अपनी ज़बाने हक़ तर्र्जुमान से मुझे कुछ कलाम-उल्लाह् तालीम फरमाइए !_

_♛ हुजूर अलैहिस सलाम ने उसे सूरह मुरसलात् , सूरह अम्मायतासाअलुन, सूरह इख्लास् और कुछ और सूरतो कि आयते तालीम फरमाई और , यह भी फरमाया कि ऐ हामा ! जिस वक्त तुम्हें कोई एतराज हो फिर मेरे पास आ जाना और हमसे मुलाकात करना ना छोड़ना !_

_❈ हज़रत  उमर रजि अल्लाहु अन्हु फरमाते हैं हुजूर अलैहिस्सलाम ने दोबारा अपने विसाल से पहले हामा के बाबत फिर कुछ ना फरमाया खुदा जाने हामा अभी जिंदा है या मर गया !_


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*#📚 खुलासतुल् तफ्सीर् सफह् 170*


*📜सबक :-* *हमारे हुज़ुर ﷺ रसुल-उल-सकलैन है तमाम मखलुक् मे अव्वल है और आपकी बारगाह जिन्नो, इंसान का मर्कज़् है, इंसान भी फलाह् पाता है और जिन्नो ,हैवान् ,चरिन्द - परिन्द् ,सब इनसे फैज़ हासिल करते है, !*



*📤जारी रहेगा इन-शा-अल्लाह✍️

              

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_🌸 *❀⊱•⊰❀⊱• •⊰❀⊱•【 ﷽】•⊰❀⊱••⊰❀⊱•⊰❀*

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                *⚡【 सच्ची हिकायत 】⚡*

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                  *★🗡️ मुक़द्दस क़ातिल⚔️ ★*


_❥-_◆ मक्का मोअज़्ज़मा मैं एक काफिर हुबली नामी रहता था उसका एक सोने का बुत था जिसे वह पूजा करता था। एक दिन उसमे हरकत पैदा हुई और वह बोलने लगा। उस बुत ने

कहा ऐ लोगों ! मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल नहीं है, उनकी हरगिज़ तस्दीक ना करना। वलीद बहुत खुश हुआ और बाहर निकलकर अपने दोस्तों से कहा मुबारकबाद आज मेरा माबूद बोला है साफ-साफ उसने कहा है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल नहीं है। यह सुनकर लोग उसके घर आए तो देखा कि वाकई उसका  बुत यह जुमले दोहरा रहा है। वह लोग भी बहुत खुश हुए । दूसरे दिन एक आम एलान के ज़रिये वलीद के घर में एक बहुत बड़ा इज्तिमा हो गया ताकि उस दिन भी लोग बुत के मुँह से वही जुमले सुनें। जब बड़ा इज्तिमा हो गया तो उन लोगों ने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को भी दावत दी ताकि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खुद भी तशरीफ़ लाकर बुत के मुंह से वही बकवास सुन जाएं। चुनांचे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भी तशरीफ लाएं । जब हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ लाए तो बुत बोल उठा: 

ऐ मक्का वालों ! खूब जान लो कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के सच्चे रसूल है । इनका हर इरशाद सच्चा है और इनका दीन बरहक़ है। तुम और तुम्हारे बुत झूठे , गुमराह और गुमराह करने वाले हैं । अगर तुम इस सच्चे रसूल पर ईमान ना लाओगे तो जहन्नम में जाओगे।  पस अकलमंदी से काम लो और इसी सच्चे रसूल की गुलामी इख्तियार कर लो।


*_❥- बुत का यह वाज़ सुनकर वलीद बड़ा घबराया और अपने माबूद को पकड़ पर जमीन पर दे मारा और उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिये।*


_♛  हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फातिहाना तौर पर वापस हुए तो रास्ते में एक घोड़े का सवार, जो सब्ज़ पोश था हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिला। उसके हाथ में तलवार थी जिससे खून बह रहा था । हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया तुम कौन हो ? वह बोला हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मैं जिन्न हूं और आपका गुलाम और मुसलमान हूं।  जबले तूर पर रहता हूं मेरा नाम मुहिन बिन अलअबरह है। मैं कुछ दिनों के लिए कहीं बाहर गया हुआ था आज घर वापस आया तो मेरे घरवाले रो रहे थे। मैंने वजह दरयाफ्त की तो मालूम हुआ कि एक काफिर जिन्न, जिसका नाम मुसफिर था वह मक्का में आकर वलीद के बुत में घुसकर आपके मुतालिक बकवास कर गया है और आज फिर गया है ताकि फिर बुत में घुसकर आप के मुतालिक बकवास करें । या रसूलल्लाह ! सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुझे सख्त गुस्सा आया। मैं तलवार लेकर उसके पीछे दौड़ा और उसे रास्ते ही में कत्ल कर दिया और फिर मैं खुद वलीद के बुत के अंदर घुस गया । आज जिस कदर तकरीर की है मैंने ही की है या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम 


*_♛-* हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह किस्सा सुना तो आपने बड़ी मसर्रत का इज़हार किया और इस अपने गुलाम जिन्न के लिए दुआ फरमाई


            *📗जामिउल-मुजिज़ात सफहा 7)*


*_❥ सबक-हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जिन्नों के भी रसूल हैं। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान पाक के खिलाफ गुस्ताखी सुनने सुनाने के लिए कोई जलसा करना यह वलीद जैसे काफिर की सुन्नत है।*


*📚 सच्ची हिक़ायत ,हिन्दी पेज 23,25)*


            *📤जारी रहेगा इन-शा-अल्लाह 🔜*


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  *📖 SACHCHI HIQAYAT POST : 10*

      *⊰ ══════ •⊰❂⊱• ══════ ⊰*


                *➡️ HIQAYAT NO. 10*


             _*🌼 RAKAANA PAHALWAN*_


_🌹👉Bani hashim me ek mushrik shakhs rakana nami bada jabarrdast or diler pahalwan tha. Uska record tha ke use kisi ne na giraya tha . wo ek jangle me ek ijm kahte the. Raha karta tha. Bakriya charata tha or bada maldar tha. Ek din huzoor sallAllahu alaihi wasallam akele us taraf ja nikle rakana ne aapko dekha to aapke paas aakar kahne laga, *ae Muhammad tu hi wo hai jo hamare laat wa ujja ki tohin wa taukir karrta hai. or apne ek khuda ki badai bayan karta hai.*_


_🌷👉Agar mera tujhse taalluk rahmi na hota to aaj me tumhe mar dalta. Aa mere sath kushti kar tu. Apne khuda ko pukar me aapne laat wa ujja ko pukarta hu. Dekhe to tumhare khuda me kitni taaqaat hai. huzoor ne farmaya agar kushti hi karna hai to me tayyar hu. Rakana ye jawab sunkar awwal to hairan hua. aur fir bade guroor ke sath mukable me khada ho gya._


*_💫 Huzooor sallAllahu ta'ala alihi wasallam ne pahli hi jhapat me use gira liya or uske seene par beth gaye. Rakana umr me pahli martaba girkar bada sharminda hua or hairan bhi or bola muhammad mere seene se uth khada ho. Mere laat wa ujja ne meri taraf dhyan na kiya . ek bar dubara kushti ke liye rakana bhi utha. huzoor ne dusri martaba bhi rakana ko pal bhar me gira liya. Rakana ne kaha ae muhammad maloom hota hai aaj mera laat wa ujja mujh par naraj hai. or tumhara khuda tumhari madad kar raha hai. Or khair ek marataba or aao ab ki dafa laat wa ujja jarur meri madad karenge._*


*_💐👉Huzoor ne teesri martaba ki kushti bhi manzoor farmaai aur teesri martaba bhi huzoor ne use pachaad diya ab to rakana bada sharmindha hua aur bola ae mohammad ! meri in bakriyo main jitni chaho utni bakriya le lo huzoor ne farmaya rakana muje tumahare mal ki jarurat nhi, ha musalmaan ho jaao taaki jahnnam se bach jaao vo bola ya mohammad ! musalaman to ho jao magar nafs zizakhta hai ki madina aur nawah ki aurte aur bacche kya khenge ki itne bade phelwaan ne shikhast khai aur musalmaan ho gya ._*


*💛👉Huzoor ne farmaaya to tera mall tujhi ko Mubarak ! ye kahkar aap wapas tashrif le aaye, idher hazrat abu bakar aur umer radiallahu anhuma aapki talash main the aur malum krke ke huzoor wadiye izm ki taraf tashrif le gye hai. mutafakkir the ki is taraf rakana phelwaan rehta hai. mubada huzoor ko iza de huzoor ko waapas tashrif late dekhkar dono hozoor ki khidmat main haazir huye aur arz kiya ya rasulallah aap idher akele kyu tashrif le gye the jab ki us taraf rakana phelwaan jo bada jowrawar aur dushmane islaam hai  rahta hai ?  huzoor ye sunker muskuraye aur ye farmaya jab mera Allah har waqt mere saath hai fir kisi rakana wakana ki kya parwah hai. lo is rakana ki phelwani ka kissa suno chunaanche*


_Huzoor ne saara kissa sunaya siddiuqe wa farook sun sun kar  khush hone lage. Or arz kiya huzoor woh to aisa pahlwan tha ke aaj tak use kisi ne giraya nahi tha. Use girana Allah ke rasool ka hi kam hai._


*🌻”SABAQ”* :- _hamare huzoor sallAllahu taala alaihi wasallam har fazlo kamal ke munabbe wa makhjan hai. aur duniya ki koi taqat huzoor ke muqable me nahi thahr sakti . or mukhalifin ke dil bhi huzoor ke fazlo kamaal ko jante hai. lekin duniya ki aar se uska inkar nahi karte ._


*📚Sachchi hiqayat safa 34,35*


          *_📬 Next Post Continue...✍🏻_*


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*📜🖌️📜🕌 ﴾ ﷽ ﴿ 🕋📜🖌️📜*


    *📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 11 📃​*

*▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*

                 ▶️ *हिकायत नं. - 11*


              *👑 खालीद की टोपी  👑*


*🔊👉 हजरत खालीद बिन वलीद (रजी अल्लाहु अन्हु) जो अल्लाह की तलवारो मे से एक तलवार थे। आप जिस मैदाने जंग भे तशरिफ ले जाते। अपने टोपी को जरुर सर पर रख कर ले जाते और हमेशा फतह ही पाकर लौटते। कभी शिकस्त का मुंह न देखते।*


☘👉 एक मर्तबा मर्तबा जंगे यरमुक मे जबकि मैदाने जंग गर्म हो रहे था हजरत खालीद की टोपी गुम हो गयी। आपने लड़ना छोड़कर टोपी की तलाश शुरु कर दी। लोगो ने जब देखा की तीर और पत्थर बरस रहे है। तलवार और नेजा अपना काम कर रहे है। मौत सामने है। इस आलम मे खालीद को अपनी टोपी की पड़ी है। वह उसी को ढ़ुंढ़ने मे मसरुफ हो गये। तो उन्होने हजरत खालीद से कहा: जनाब टोपी का ख्याल छोड़ीये और लड़ना शुरु किजीए। हजरत खालीद ने उनकी इस बात की परवाह ना की और टोपी की बदस्तुर तलाश शुरु रखी।


*🌺👉 आखिर टोपी उनको मिल गयी तो उन्होने खुश होकर कहा: भाईयों! जानते हो मुझे यह टोपी इतनी अजीज क्यों है? जान लोशमैने आज तक जो जंग भी जीती इसी टोपी के तुफैल। मेरा क्या है? सब इसी की बर्कत है। मै इसके बेगैर कुछ भी नही। अगर यह मेरे सर पर हो तो फिर दुश्मन मेरे सामने कुछ भी नही। लोगो ने कहा आखिर इस टोपी मे क्या खुबी है ?? फरमाया: यह देखो क्या है? यह हुजुर सरवरे आलम ﷺ के सरे अनवर का बाल मुबारक है जो मैने इसी मे सी रखे है।*


*🌹👉 हुजुर ﷺ एक मर्तबा उमरा बजा लाने को बैतुल्लाह तशरिफ ले गये। सरे मुबारक का बाल उतरवाए तो उस वक्त हममे से हर एक शख्स बाल मुबारक लेने की कोशिश कर रहा था और हर एक दुसरे पर गिरता था तो मैने इसी कोशिश मे आगे बढ़कर चंद बाल मुबारक हासिल कर लिए थे। फिर इसी टोपी मे सी लिए। यह टोपी अब मेरे लिए जुम्ला बरकत व फुतुहात का जरिया है। मै इसी के सदके मे हर मैदान का फातेह बनकर लौटता हुं। फिर बताओ यह टोपी अगर न मिलती तो मुझे चैन कैसे आता?*

📙 {हुज्जतुल्लाहुल आलमीन, सफा-686}


*📜 सबक :-* हुजुर सरवरे आलम ﷺ की जुम्ला बर्कत व इनाआमात का जरिया है। आपका बाल शरिफ बर्कत व रहमत है। यह भी मालुम हुआ की सहाबाए किराम हुजुर ﷺ से मुतअल्लिक अशिया का बतौर तबर्रुक आपने पास भी रखते थे। जिसके पास आपका बाल मुबारक होता अल्लाह तआला उसे कामयाबीयों से सरफराज फरमाता था।


📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर-36,37}*


*📬 पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻

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               *📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 12 📃​*

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                        ▶️ *हिकायत नं. - 12*


                      *▶️ बाल का कमाल ▶️*


*🍃👉हमारे हुजुर ﷺ की रीश मुबारक के दो बाल मुबारक हजरत सिद्दीके अकबर (रजी अल्लाहु अन्हु) को मिल गए। आप उन दो बालो को बतौर तबर्रुक घर ले आयें और बड़ी ताजीम के साथ अंदर एक जगह रख दिए। थोड़ी देर के बाद अंदर से कुरआन पढ़ने की अवाज आने लगी। सिद्दीके अकबर (रजी अल्लाहु अन्हु) अंदर गए तो तिलावत की अवाजे तो आ रही थी मगर पढ़ने वाले नजर न आते थे। हजरत सिद्दके अकबर (रजी अल्लाहु अन्हु) ने हुजुर की खिदमत मे हाजिर होकर सारा किस्सा ब्यान किया तो हुजुर ने मुस्कुरा कर फरमाया। यह फरिश्ते है जो मेरे बाल के पास जमा होकर कुरआन पढ़ते है।*

📚 {जामिउल मुजिजत सफा-62}


*📿 सबक :-* हुजुर ﷺ का हर बाल मम्बउल कमाल है आपका बाल शरीफ ज्यारत गाहे खलाइक है। फिर जिन लोगो को बाल मुंडकर नाइ नालियो मे फेक देता है वह अगर हुजुर की मिस्ल होने की दावा करने लगे तो किस कद्र जुल्म है।


📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर-37}*


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        *📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 13 📃​*

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                  *▶️ हिकायत नं. - 13*


            *🐏 बकरी जिन्दा हो गयी 🐏*


🌺👉 जंगे अहजाब मे हजरत जाबीर (रजी अल्लाहु अन्हु) ने हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की दावत की और एक बकरी जबह की हुजुर जब सहाबाए किराम के साथ जाबीर के घर पहुंचे तो जाबीर ने खाना लाकर आगे रखा। खाना थोड़ा था और खाने वाले ज्यादा थे। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फरमाया थोड़े थोड़े आदमी आते जाओ और बारी बारी खाना खाते जाओ। चुनांचे:-


🌻👉 ऐसे ही हुआ की जितने आदमी खाना खा लेते वह निकल जाते इस तरह सबने खाना खा लिया। जाबीर फरमाते थे की हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) पहले ही फरमा दिया था की कोइ शख्स गोश्त की हड्डी न तोड़े न फेके सब एक जगह रखते जाए। जब सब खा चुके तो आपने हुक्म दिया की छोटी मोटी सब हड्डीयां जमा कर दो। जमा हो गयी तो आपने अपना दस्ते मुबारक उनपर रखकर कुछ पढ़ा आपका दस्त मुबारक अभी हड्डीयो के ऊपर ही था और जबाने मुबारक से कुछ पढ़ ही रहे थे की वह हड्डीयां कुछ का कुछ बनने लगी। यहां तक की गोश्त पोश्त तैयार होकर कान झाड़ते हुइ वह बकरी उठ खड़ी हुई। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फरमाया जाबीर! ले यह अपनी बकरी ले जा।

*📚 {दलाइलुल नुबुव्व जिल्द-2, सफा-224,}*


*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) मंबऊल-हयात हयात बख्श है।आपने मुर्दा दिलो और मुर्दा जिस्मो को भी जिन्दा फरमा दिया फिर जो हुजुर को मर कर मिट्टी मे मिलने वाला कहते है। (माज अल्लाह) किस कद्र जाहील और बेदिन है।


📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर-37,39}*


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   *📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 14 📃​*

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▶️ *हिकायत नं. - 14*


        *🐍🥚 सांप का अंण्डा 🐍🥚*


🌹👉 एक सहाबी हजरत हबीबुल्लाह बिन फिदयक (रजी अल्लाहु अन्हु) कही जा रहे थे की उनका पांव इत्तेफाकन एक जहरिले सांप के अंडे पर पड़ गया। और वह पिस गया। उसके जहर के असर से हजरत हबीब बिन फिदयक (रजी अल्लाहु अन्हु) की आँखें बिलकुल सफेद हो गई। नजर जाती रही। यह हाल देखकर उनके वालीद बहुत परेशान हुए और उन्हे लेकर हुजुर(सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम)की खिदमत मे पहुंचे। 


🌹👉🏻 हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने सारा किस्सा सुनकर अपना थुक मुबारक उनकी आँखो मे डाला तो हजरत हबीब बिन फिदयक की अंधी आंखे फौरन रौशन हो गई और उन्हे नजर आने लगा। रावी का ब्यान है की मैने खुद हजरत फिदयक को देखा। उस वक्त उनकी उम्र 80 साल की थी और आंखे तो उनकी बिल्कुल सफेद थी मगर हुजुर के थुक मुबारक के असर से नजर इतनी तेज थी की सुई मे धागा डाल लेते थे।

*📚 {दलाइलुल नुबुव्वत सफा-167}*


*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की मिस्ल बनने वालो के लिए मकामे गौर है की हुजुर वह है जिनकी थुक मुबारक से अंधी आंखो मे बिनाई और नुर पैदा हो जाए और वो वो है की उनकी थुक के मुतअल्लिक रेलवे स्टेशन मे यह लिखा होता है की थुको मत इससे बिमारी फैलती है।

*फिर मर्ज व शिफा दोनो बराबर कैसे हो सकती है।??*


📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर-38, 39}*


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        *📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 15 📃​*

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                      ▶️ *हिकायत नं. - 15*


*🏡 हजरत जाबीर का मकान और एक हजार मेहमान*


🌹 हजरत जाबीर (रजी अल्लाहु अन्हु) ने जंगे खंदक के दिनो हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के शिकमे अनवर पर पत्थर बंधा देखा तो घर आकर अपनी बिवी से कहा की क्या घर मे कुछ है ताकी हम हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के लिए कुछ पकाएं और हुजुर को खिलाए??


*☘ बिवी ने कहा:* थोड़े पे जौ है और यह एक बकरी का छोटा बच्चा है। इसे जबह कर लेते है।आप हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) को बुला लाइये। चुकी वहां लश्कर बहुत ज्यादा है इसलिए हुजुर से पोशीदगी मे कहीएगा की वह अपने हमराह दस आदमीयो से कुछ कम लाएं।

*🌹 जाबीर ने कहा :* अच्छा तो लो मै इस बकरी के बच्चे को जबह करता हुं तुम इसे पकाओ। मै हुजुर को बुला लाता हुं।


*✍🏻 चुनांचे:-* जाबीर हुजुर के खिदमत मे पहुंचे तो कान मे अर्ज किया हुजुर मेरे यहां तशरिफ ले चलीए और अपने साथ दस आदमीयों से कुछ कम आदमी ले चलीए। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने सारे लश्कर को मुखातीब फरमाया: चलो मेरे साथ चलो। जाबीर ने खाना पकाया है। फिर जाबीर के घर आकर हुजुर ने उस थोड़े से आटे मे अपना थुक मुबारक डाल दिया। फिर हुक्म दिया की अब रोटीयां और हंडिया पकाओ। चुनांचे उस थोड़े से आटे और गोश्त मे थुक मुबारक की बर्कत से इतनी बर्कत पैदा हो गयी की एक हजार आदमी खा गए मगर न रोटी कम हुई और न कोई बोटी।


*🌼 सबक :-* यह हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के थुक मुबारक की बर्कत थी कि थोड़े से खाने मे इतनी बर्कत पैदा हो गयी की हजार आदमी सैर शिकम होकर खा गए लेकीन खाना बदस्तुर वैसे का वैसा ही रहा कम न हुआ।


📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर-39, 40}*


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   *📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 16 📃​*

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▶️ *हिकायत नं. - 16*


               *_🌧️ कोजे मे दरिया 🌧️_*


🌧️ हुदैबिया के रोज सारे लश्करे सहाबा मे पानी खत्म हो गया हत्ता की वुजु और पिने के लिए भी पानी का एक कतरा तक न रहा। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के पास एक कुजा पानी का था। हुजुर जब उस कुजा से वुजु फरमाने लगे तो सब हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की तरफ लपके और फरियाद की कि या रसुलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) हमारे पास तो एक कतरा भी पानी का बाकी न रहा। न तो वुजु कर सकते है और ना ही अपनी प्यास बुझा सकते है।

_🌨️ हुजुर! यह आप ही के कुजे मे पानी बाकि है हम सब के पास पानी खत्म हो गया है और हम सब प्यास की शिद्दत से बेचैन है। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने यह बात सुनकर अपना हाथ मुबारक उस कुजे मे डाल दिये लोगो ने देखा की हुजुर के हाथ मुबारक उस कुजे मे डाल दिया लोगो ने देखा की हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के हाथ मुबारक की पांचो उंगलियों से पानी के पांच चश्मे जारी हो गयें। सब लोग इन चश्मो से सैराब होने लगे। हर शख्स ने जी भर के पानी पिया और प्यास बुझाई। सब ने वुजु भी कर लिया। हजरत जाबीर से पुछा गया कि लशकर की तदाद कितनी थी?? तो फरमाया उस वक्त अगर एक लाख आदमी भी होते तो वह पानी सबके लिए काफी था मगर हम उस वक्त पन्द्रह सौ की तदाद मे थे।_

*📚 {मिश्कात शरिफ सफा-524}*


*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) को अल्लाह ने यह इख्तेयार व तसर्रुफ अता फरमाया है की आप थोड़ी चीज को ज्यादा कर देते है। ”न” से हां और मादुम से मौजुद करना अल्लाह का काम है। थोड़े से ज्यादा कर देना मुस्तफा का काम है यह अल्लाह ही का अता है।


📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 40}*


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   *📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 17 📃​*

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▶️ *हिकायत नं. - 17*


           *📃 एक सहराई काफिला* 📃 


👉🏻अरब के एक सहरा मे एक बहुत बड़ा काफिला राहे पैमा था अचानक उस काफिला का पानी खत्म हो गया। उस कफिला मे छोटे बड़े बुढ़े जवान और मर्द व औरत सभी थे। प्यास के मारे सबका बुरा हाल था। दुर तक पानी का निशान ना था। पानी उनके पास एक कतरा तक बाकि न रहा था यह आलम देखकर मौत उनके रक्स करने लगी। उन पर यह खास करम हुआ की:-

*अचानक दो जहां के फरयाद-रस मुहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) उनकी मदद फरमाने वहां पहुंच गये।* हुजुर को देखकर सबकी जान मे जान आ गइ। सब हुजुर के गिर्द जामा हो गये। हुजुर ने उन्हे तसल्ली दी और फरमाया की वह सामने जो टिला है उसके पिछे एक स्याह रंग हब्शी गुलाम ऊंटनी पर सवार जा रहा है। उसके पास पानी का एक मश्कीजा है। उसको ऊंटनी समेत मेरे पास ले लाओ।

*🌹 चुनांचे:-* कुछ आदमी टिले के उस पार गये तो देखा की वाकइ एक ऊंटनी पर सवार हब्शी जा रहा है वह उस हब्शी को हुजुर के पास ले आए। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने उस हब्शी से मश्कीजा ले लिया। अपने दस्ते रहमत उस मश्कीजा पर फेरकर उसका मुंह खोल दिया। 

*फरमाया :* आओ अब जिस कद्र भी प्यासे हो आते जाओ और पानी पी-पीकर अपनी प्यास बुझाते जाओ। चुनाचे-सारे काफीले ने उस मश्कीजा से जारी रहमत से पानी पिना शुरु किया फिर सबने अपने अपने बर्तन भी भर लिये। सब के सब सैराब हो गये। सब बर्तन भी पानी से भर गये। हुजुर का यह मोजीजा देखकर हब्शी बड़ा हैरान हुआ। हुजुर के दस्ते अनवर चुमने लगा। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने अपना दस्ते अनवर उसके मुंह पर भेर दिया। तो उस हब्शी का स्याह रंग काफुर हो गया। वह सफेद पुरनुर हो गया। फिर उस हब्शी ने कलीमा पढ़कर अपना दिल भी मुनव्वर कर लिया। मुस्लमान होकर जब वह अपने मालीक के पास पहुंचा तो मालीक पुछा तुम कौन हो??

🌺 वह बोला तुम्हारा गुलाम हुं।मालीक ने कहा: तुम गलत कहते हो। वह तो बड़ा स्याह रंग का था वह बोला यह ठीक है मगर मै उस मनब्बेए नुर जाते बा-बर्कात से मिलकर और उस पर ईमान लाकर आया हुं। जिसने सारे काएनात को मुनव्वर फरमा दिया है। मालीक ने सारा किस्सा सुना तो वह भी ईमान ले आया।

📚 *{मसनवी शरिफ}* 


*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) अल्लाह की रजा से दो जहान के फरियाद रस है और मुसीबत के वक्त मदद फरमाने वाले है। फिर अगर कोई शख्स यूँ कहे के हुजूर किसी की मदद नहीं फरमा सकते और किसी की फरयाद नहीं सुनते तो वो किस कद्र जाहिल व बेखबर है पस अपना अकीदह ये रखना चाहिए के


*फरयादउम्ती जो करे हाले जार में*

*मुमकिन नहीं के खैर बशर को खबर ना हो*


📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 41,42}*


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   *📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 18 📃​*

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▶️ *हिकायत नं. - 18*


                   *_🌧 बादलो पर हुकुमत 🌧_* 


🍃👉 मदीना मुनाव्वरा मे एक मर्तबा बारिश नही हुइ थी। कहत का सा आलम था। लोग बड़े परिशान थे। एक जुम्मा के रोज हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) जबकी वअज फरमा रहे थे। एक अरबी उठा और अर्ज करने लगा या रसुलल्लाह! माल हलाक हो गया और औलाद फाका करने लगी। दुआ फरमाइये बारिश हो। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने उसी वक्त अपने प्यारे प्यारे हाथ उठाए रावी का ब्यान है की आसमान बिलकुल साफ था अब्र (बादल) का नाम व निशान तक न था। मगर मदनी सरकार के हाथ मुबारक उठे ही थे की पहाड़ो की मानिंद अब्र छा गए और छाते ही मेंह बरसने लगा। हुजुर मिंबर पर ही तशरिफ फरमा थे की मेंह शुरु हो गया इतना बरसा की छत टपकने लगी। हुजुर के रेश अनवर से पानी के कतरे गिरते हमने देखे। फिर यह मेंह बन्द नही हुआ बल्कि हफता को भी बरसता रहा। 

🌹👉 फिर अगले दिन भी और फिर उससे अगले हफ्ता को भी हत्ता की लगातार अगले जुम्मा तक बरसता ही रहा। हुजुर दुसरे जुम्मा को वअज फरमाने उठे तो वही अरबी जिसने पहले जुम्मा मे बारिश न होने की तकलीफ अर्ज की थी उठा और अर्ज करने लगा या रसुलल्लाह! अब तो माल गर्क होने लगा और मकान गिरने लगे। अब फिर हाथ उठाइये की यह बारिश बंद भी हो।चुनांचे हुजुर ने फिर उसी वक्त अपने प्यारे प्यारे नुरानी हाथ उठाए और अपनी उंगली मुबारक से इशारा फरमाकर दुआ फरमाइ की ऐ अल्लाह! हमारे इर्द गिर्द बारिश हो हम पर ना हो। हुजुर का यह इशारा करना ही था की जिस जिस तरफ उंगली गई उस तरफ से बादल फटता गया और मदीना मुनाव्वरा के ऊपर सब आसमान साफ हो गया।

*📚 {मिश्कात शरिफ सफा-528}* 


*🌼 सबक :-* सहाबा किराम मुश्किल के वक्त हुजुर ही की बारगाह मे फरियाद लेकर आते थे। उनका यकीन था की हर मुश्किल यहक हल होती है। वकाई वही हल होती रही। इसी तरह आज भी हम हुजुर के मोहताज है। बेगैर हुजुर के वसीले के हम अल्लाह से कुछ भी नही पा सकते। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की हुकुमत बादलो पर भी जारी है।


📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 42}*


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       *🌹💖 तालिब ए दुआ 💖🌹*

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   *📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 19 📃​*

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▶️ *हिकायत नं. - 19*


              *🌙 चांद पर हुकुमत 🌙* 


🌹👉 हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के दुशमनो ने बिलखुसुस अबु-जहल ने एक मर्तबा हुजुर से कहा की अगर तुम खुदा के रसुल हो तो आसमान पर जो चांद है उसको दो टुकड़े करके दिखाओ। *हुजुर ने फरमाया :* लो यह भी करके दिखा देता हुं। 


🖌️ *चुनांचे:-* आपने चांद की तरफ उंगली मुबारक से इशारा फरमाया तो चांद के दो टुकड़े हो गये। यह देखकर अबु जहल हैरान हो गया। मगर बे-इमान माना भी नही और हुजुर को जादुगर ही कहता रहा।

📚 *{हुज्जतुल्लाह सफा-366, बुखारी शरिफ-हिस्सा-2, सफा-271}* 


*🌼सबक :-* हमारे हुजुर की हुकुमत चांद पर भी जारी है।बावजुद इतने बड़े इख्तियार के बे-ईमान अफराद हुजुर के ईख्तियार व तसर्रुफ को फिर भी नही मानते।


📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 43}*


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       *~🌹💖 मुहम्मद इमरान रज़वी 💖🌹~*

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   *📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 20 📃​*

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▶️ *हिकायत नं. - 20*


            *☀ सुरज पर हुकुमत ☀* 


☘ एक रोज मकामे सहाबा मे हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने नमाजे जुहर अदा की और फिर हजरत अली (रजी अल्लाहु अन्हु) को किसी किसी काम के लिए रवाना फरमाया। हजरत अली (रजी अल्लाहु अन्हु) के वापस आने तक हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम)ने नमाजे अस्र भी अदा फरमा ली। जब हजरत अली वापस आए तो उनकी आगोश मे अपना सर रखकर हुजुर सो गये। हजरत अली ने अभी तक नमाजे अस्र अदा न की थी। उधर सुरज को देखा तो गुरुब होने वाला था। हजरत अली सोचने लगे। इधर रसुले खुदा अराम फरमा है। और उधर नमाजे खुदा का वक्त हो रहा है। रसुले खुदा का ख्याल रखु तो नमाज जाती है। और नमाज का ख्याल करु तो रसुले खुदा की नींद मे खलल वाके होता है। करुं तो क्या करु?आखीर मौला अली शेरे खुदा (रजी अल्लाहु अन्हु) ने फैसला किया की नमाज कजा होने दो मगर हुजुर की नींद मुबारक मे खलल न आए। 

*💫 चुनांचे:-* सुरज डुब गया और अस्र का वक्त जाता रहा। हुजुर उठे तो हजरत अली को मगमूम देखकर वजह दर्याफ्त की तो हजरत अली ने अर्ज किया या रसुलल्लाह! मैने आपकी इस्तिराहत के पेशे नजर अभी तक नमाजे अस्र नही पढ़ी। सुरज गुरुब हो गया है। हुजुर ने फरमाया तो गम किस बात का?? लो अभी सुरज वापस आता है। फिर उसी मकाम पर आकर रुकता है जहां वक्ते अस्र होता है। 

*📿चुनांचे:-* हुजुर ने दुआ फरमाइ तो गुरुब शुदा सुरज फिर निकला और उल्टे कदम उसी जगह आकर ठहर गया जहां अस्र का वक्त होता है। हजरत अली ने उठकर अस्र की नमाज पढ़ी तो सुरज गुरुब हो गया। 

📚 *{हुज्जतुल्लाह अलल आलमीन सफा-368}* 


*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर की हुकुमत सुरज पर भी जारी है। आप काइनात के हर जर्रा के हाकिम व मुख्तार है। आप जैसा न होगा और न हो सकता है।


📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 44}*


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   *📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 21 📃​*

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▶️ *हिकायत नं. - 21*


         *🗻 जमीन पर हुकुमत 🗻* 


🌹👉 हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने हजरत सिद्दिक अकबर (रजी अल्लाहु अन्हु) के मक्का से हिजरत फरमाई तो कुरैशे मक्का ने ऐलान किया की जो कोइ मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) और उनके साथी सिद्दिके अकबर (रजी अल्लाहु अन्हु) को गिरफ्तार करके लायेगा उसे सौ ऊंट इनाम मे दिया जाएगा। सुराका बिन। जअशम ने यह ऐलान सुना तो अपना तेज रफ्तार घोड़ा निकाला और उस पर बैठकर कहने लगा की मेरा यह तेज रफ्तार घोड़ा मुहम्मद और अबु बक्र का पिछा कर लेगा। मै अभी उन दोनो को पकड़कर लाता हुं। 

*☘👉 चुनांचे:-* उसने अपना घोड़ा दौड़ाया। थोड़ी देर मे हुजुर के करीब पहुंच गया। सिद्दिके अकबर ने जब देखा की सुर्राका घोड़े पर सवार हमारे पिछे आ रहा है। हम तक पहुंचेने वाला ही वाला है। तो अर्ज किया या रसुलल्लाह! सूर्राका ने हमे देख लिया है और वो देखीए हमारे पिछे आ रहा है। हुजुर ने फरमाया ऐ सिद्दिक! कोइ फिक्र ना करो अल्लाह हमारे साथ है। इतने मे सुर्राका बिलकुल करीब आ पहुंचा तो हुजुर ने दुआ फरमाइ। जमीन ने फौरन सुर्राका के घोड़े को पकड़ लिया और उसके चारो पैर पेट तक जमीन मे धस गया। सुराका यह मंजर देखकर घबराया और अर्ज करने लगा।या मुहम्मद! मुझे और मेरे घोड़े को इस मुसीबत से नजात दिलाइये। मै आपसे वादा करता हुं। की पिछे मुड़ जाऊंगा। जो कोई आपका पिछा करता हुआ आपकी तलाश मे इधर आ रहा होगा उसे भी वापस ले जाऊंगा। आप तक न आने दुंगा चुनांचे हुजुर के हुक्म से जमीन ने उसे छोड़ दिया।


*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर का हुक्म व फरमान जमीन पर भी जारी है और काइनात के हर चीज अल्लाह ने हुजुर के ताबे कर दी है फिर जिस शख्श की अपनी बीवी भी उसकी ताबे ना हो वो अगर हुजूर की मिस्ल बनने लगे तो वो किस कद्र अहमक व बेवकूफ है।


📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 44}*


*📬 पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*

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       *🌹💖 हक़ की दावत 💖🌹*

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_*☝हमारी दावत एक सच्चे दीन की तरफ*_

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      *_✏ आओ इल्म -ए-दीन सीखें....✍🏻_*

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*📜🖌️📜🕌 ﴾ ﷽ ﴿ 🕋📜🖌️📜*


   *📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 22 📃​*

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▶️ *हिकायत नं. - 22*


           *🌳 दरख्तो पर हुकुमत 🌳*


*💫👉 एक मर्तबा एक आराबी हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) से कहा-ऐ मुहम्मद!* अगर आप अल्लाह के रसुल है तो कोइ निशानी दिखाइये। *हुजुर ने फरमाया:-* अच्छा तो देखो! वह जो सामने दरख्त खड़ा है उसे जाकर इतना कह दो की तुम्हे अल्लाह के रसुल बुलाता है।

*🌻👉 चुनांचे:-* वह आराबी उस दरख्त के पास गया और उससे कहा। तुम्हे अल्लाह का रसुल बुलाता है। वह दरख्त यह बात सुनकर अपने आगे पिछे दायें बायें पिछे गिरा और अपनी जड़े जमीन से उखाड़कर जमीन पर चलते हुवे हुजुर की खिदमत मे हाजीर हो गया और कहने लगा अस्सालामु अलैकुम या रसुलल्लाह! वह आराबी हुजुर से कहने लगा अब इसे हुक्म दिजीए की यह फिर अपनी जगह पर चला जाए।

*🌻👉चुनांचे:-* हुजुर ने उससे फरमाया की जाओ। वापस चले जाओ वह दरख्त यह सुनकर पिछे मुड़ गया और अपनी जगह जाकर कायम हो गया। आराबी यह मुजीजा देखकर मुस्लमान हो गया और हुजुर को सज्दा करने की इजाजत चाही। हुजुर ने फरमाया सज्दा करना जाएज नही। फिर उसने हुजुर के हाथ पैर मुबारक चुमने की इजाजत चाही तो हुजुर ने फरमाया हां। यह बात जायज है। उसने हुजुर के हाथ और पैर मुबारक चुम लिए। 

*📚 {हुज्जतुल्लाह अलल आलमीन, सफा-441}* 


*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर का हुक्म दरख्तो पर भी जारी है। यह भी मालुम हुआ की बुजुर्गो के हाथ पैर चुमना जाएग है। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने इससे माना नही फरमाया।


📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 45}*


*📬 पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*

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       *🌹💖 दीन की दावत 💖🌹*

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_*☝हमारी दावत एक सच्चे दीन की तरफ*_

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      *_✏ आओ इल्म -ए-दीन सीखें....✍🏻_*

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रविवार, 15 नवंबर 2020

📚 EID-MILADUN-NABI QURA'AN AUR SHARIYAT KI ROUSHNI ME

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*📜🅿 पोस्ट:-0⃣1⃣*


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         🎆  *☞12 रबि उल अव्वल☜*  🎆

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         *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*

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        📖 *शरीअत की रौशनी में* 📚

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 *_🌹💫☞पहले ये जानले की एहले सुन्नत के नज़्दीक ईदे मिलादुन्नबी ﷺ मनाना कोई फ़र्ज़ या वाजिब नहीं, ये मुस्तहब अ’मल है। जो करे उसको षवाब मिलेगा और जो न करे उस पर कोई गुनाह नहीं।अब बात ये आती है की क्या इस्लाम हमें इजाज़त देता है ईदे मिलादुन्नबी ﷺ मानाने की या नहीं_*

☞इसका जवाब ये है की क़ुरआनो हदिष की रौशनी में मिलादुन्नबी मनाना बिलकुल जाइज़ है।कोई भी दूसरे मसलक का आ’लिम आज तक शरई दलील मिलाद के हराम या नाजाइज़ होने की न आज तक ला सका है और न ला सकेगा। ان شاء الل📖

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🔄✨👉🏻आगे आने वाली पोस्ट में हम जानेंगे की किस तरह ईदे मिलाद ﷺ मनाना जाइज़ है क़ुरआनो हदिष की रौशनी में !🔄

*12वी शरीफ की निस्बत से ये 12 टॉपिक जो निचे दिये गये है और मजीद कुछ पॉइंट भी कवर करने की कोशिश की जायेगी।*

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*_{1}↬आक़ा  ए करीम ﷺ की विलाद कब हुई✍……_*


*_{2}↬क़ुरआन क्या फरमाता है✍……_*


*_{3}↬आप ﷺ ने क्या अपना मिलाद मनाया_*


*_और आप ﷺ ने अपने मिलाद के मुतअल्लिक़ क्या फ़रमाया✍……_*


*_{4}↬क्या किसी सहाबी ने ईदे मिलादुन्नबी ﷺ मनाई है✍……_*


*_{5}↬अबू लहब ने भी मिलाद मनाया…✍……_*


*_{6}↬जुलूस निकालना किसकी सुन्नत✍……_*


*_{7}↬झंडे लगाना किसकी सुन्नत✍……_*


*_{8}↬नात शरीफ पढ़ना किसकी सुन्नत✍……_*


*_{9}↬मिलाद पर खर्च करना कैसा✍……_*


*_{10}↬शैतान की रुस्वाई…_*


*_{11}↬शबे क़द्र से भी अफ़्ज़ल रात….✍……_*


*_{12}↬किस किस आइम्ह व मुहद्दिसिन ने✍……_*


*_ मिलादुन्नबी ﷺ को जाइज़ कहा है✍……_*

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*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…*

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*🅿 पोस्ट:-0⃣2⃣*

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         🎆  *☞12 रबि उल अव्वल☜*  🎆

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         *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*

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        📖 *शरीअत की रौशनी में* 📚

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🎍☞ *आक़ा-ए-करीम ﷺ की विलादत कब हुई* 12 रबी उल अव्वल पर तमाम उलमा ए इस्लाम का इज्मा है की इस दिन मुहम्मद ﷺ सारे आ’लम के लिये रहमत बनके दुन्या में तशरीफ़ लाये। और इसी दिन सारी दुन्या में मुसलमान अपने नबी ﷺ की विलादत का जस्न मानते है।

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📒इब्ने जवाज़ी, शफा 87


🌹इब्ने इस्हाक़ ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه


🗓85-151 हिजरी


📕इब्ने हिशाम, जी-1, शफा 158


🌹अल्लामा इब्ने हिशाम ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه


🗓213 हिजरी


📗तारीख अल-उमम व अल-मुलुक, जी-2, शफा 125


🌹इमाम इब्ने जारीर तबारी ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه


🗓224-310 हिजरी


📒आइलामुन नबुव्वत, शफा 192


🌹अल्लामा अबू अल-हसन अली बिन मुहम्मद अल-मवार्दी ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه


🗓370-480 हिजरी


📕आयुन अल-असर, जी-1, शफा 33


🌹इमाम अल-हाफ़िज़ अबू-उल-फतह अल-उन्दालासि ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه


🗓671-734 हिजरी


📗इब्ने खलदून, 2/394


🌹अल्लामा इब्न खलदून ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه


🗓732-808 हिजरी


📕मुहम्मद रसूलुल्लाह, 1/102


🌹मुहम्मद अस-सादिक़ इब्राहिम अर्जुन ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه


📗मदारिजुन नुबुव्वत, 2/14


🌹शैख़ अब्दुल-हक़ मुहद्दिस दहेल्वी ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه


🌹950-1052 हिजरी


📕अल-मुवाहिद अल-लदुन्य , 1/88


🌹इमाम क़ुस्तलानी ﺭﺣﻤﺘﻪ ﺍﻟﻠﻪ عليه

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*_🔮👉🏻 इससे साबित हुआ की आक़ा-ए-करीम ﷺ की विलादत 12 रबी उल अव्वल को ही हुई…._*

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*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…*

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*🅿🄾🅂🅃​​​►0⃣3⃣*

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         🎆  *☞12 रबि उल अव्वल☜*  🎆

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         *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*

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        📖 *शरीअत की रौशनी में* 📚

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🎍👉🏻 *अल-क़ुरआन* तुम फ़रमाओ अल्लाह ही के फज़ल और उसी की रहमत और उसी पर चाहिये की खुशिया करे…*

            *📖सूरह युनुस, आयत 58📚*

🔮👉🏻इस आयत में अल्लाह عزوجل ने अपने फ़ज़्ल और अपनी रहमत पर खुशिया मनाने का हुक्म दिया है। और हमने तुम्हे न भेजा मगर रहमत सारे जहांन के लिये…

         *📖सूरह अम्बिया, आयत 10📚*

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*_📖👉🏻 इस आयत में अल्लाह عزوجل अपने प्यारे नबी ﷺ से फरमा रहा है की हमने तुम्हे सिर्फ 1 या 2 आलम के लिए नहीं बल्कि सारे आ’लम के लिये रहमत बना कर भेजा यहाँ गौर करे अल्लाह عزوجل ने नबीﷺ को रहमत कहा है और जो पहली आयत पेश की गई उसमे अल्लाह عزوجل ने अपनी रहमत पर ख़ुशी मनाने का हुक्म दिया है।_*


📖👉��जो इन आयतो का मुन्किर होगा, जो नबीﷺ को अपने लिये अल्लाह की रहमत और नेअमत नहीं संमजेगा वो नबी ए पाकﷺ की विलादत की ख़ुशी से ऐतराज़ करेगा, यानी वो गम मनायेगा नबीﷺ की विलादत पर मगर हम तो खुशिया ही मनायेंगे,,

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*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…*

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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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*🅿🄾🅂🅃​​​►0⃣4⃣*

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         🎆  *☞12 रबि उल अव्वल☜*  🎆

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         *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*

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        📖 *शरीअत की रौशनी में* 📚

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📖👉🏻 *क़ुरआन क्या फरमाता है* अपने रब की नेअमतों का खूब खूब चर्चा करो

              *📖सूरह दूहा आयत 11📚*

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*🍁☞ इस आयत में अल्लाह ने हमें अपनी नेअमतों का चर्चा करने का हुक्म दिया। हर मोमिन ये जनता है की अल्लाह की सबसे बड़ी अज़ीम नेअमत हमारे लिये उसके रसूल है।*

📖☞इस बात को समझने के किये क़ुरआन की एक और आयत पेशे खिदमत है…

*✬बेशक अल्लाह का बड़ा ऐहसान हुआ मुसलमानो पर की उन्मे उन्ही मेसे एक रसूल भेजा जो उनपर उसकी आयते पढ़ता है और उन्हें पाक करता है,✍*

   *📖सूरह अल-इमरान, आयत 164📚

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*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼*

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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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     *🅿🄾🅂🅃​​​►0⃣5⃣*

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         🎆  *☞12 रबि उल अव्वल☜*  🎆

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         *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*

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        📖 *शरीअत की रौशनी में* 📚

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*_✬↬मेरे भाइयो आप सारा क़ुरआन पढ़ लीजिये किसी भी जगह अल्लाह ने ये नहीं कहा की हमने तुम्हे ये नेअमत दे कर तुम पे एहसान किया है सिवा अपने मेहबूब के।_*

*✍इससे मालूम हुआ की अल्लाह की सबसे बड़ी नेअमत हमारे लीये उसके नबी है…..*

📖 बेशक तुम्हारे पास तशरीफ़ लाये तुम में से वो रसूल जिन पर तुम्हारा मुशक्कत में पड़ना गवारा नहीं है, तुम्हारी भलाई के निहायत चाहने वाले मुसलमानो पर कमाले मेहरबान मेहरबान📚

          *📜सूरह तौबा, आयात 128📕*

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🌸👍🏻इस आयत में अल्लाह तबारक-व-तआला खुद गवाही दे रहा है अपने रसूल की हम गुनाहगारो से बे-इन्तहा मुहब्बत और हम पर मेहरबान होने की…..

तो क्या पहली आयत में अल्लाह ने जो हुक्म दिया उस पर अमल करते हुए हम हमारे प्यारे प्यारे आक़ा की विलादत न मनाये ,,

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      *💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍*

*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼*

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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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🅿️OST  -  0️⃣6️⃣

📖12 रबि उल अव्वल📚

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🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦

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☞शरीअत की रौशनी में☜

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☞📖 आइये आप के सामने एक हदिष पेश करता हु अपने प्यारे आक़ा ﷺ के महेरबान होने की चुनान्चे आक़ा ए करीम ﷺ का फरमान मग्फिरत निशान है : जिसने मुज पर 100 मर्तबा दुरुद शरीफ पढ़ा अल्लाह عزوجل उसकी दोनों आँखों के दरमियान लिख देता है की ये निफ़ाक़ और जहन्नम की आग से आज़ाद है और उसे ब-रोज़े कियामत शोहदा के साथ रखूँगा।

📖मजमुअज़्ज़वायद् 10/253, हदिष 17298📕

✒ अब 100 बार दुरुद शरीफ पढ़ना कौनसी बड़ी बात है मगर फिर भी जहन्नम से निजात की बशारत दे दी गई अब ये मेहरबानी नहीं तो क्या है.✍

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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍

📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼

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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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🅿️OST   --  7️⃣

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📖12 रबि उल अव्वल 📚

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*☞मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद☜*

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शरीअत की रौशनी में

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📖👉🏻अब और क्या क्या सबुत चाहिये तुम्हे अपने प्यारे नबी ﷺ से मुहब्बत करने के लिये और उनकी विलादत की ख़ुशी मनाने के लिये ?


☞हुज़ूर ने अपनी विलादत खुद मनाई☜


✒ हज़रत अबू क़तादाرضي الله تعالي عنه से रिवायत है : रसूले करीम ﷺ से पिर का रोज़ा रखने के बारे में सवाल किया गया ओ आपﷺ ने फ़रमाया की

✒ इसी दिन मेरी विलादत हुई और इसी दिन मुझ पर क़ुरआन नाज़िल हुआ.✍

📖सहीह मुस्लिम, 2/1162, हदिष 819📕


📖नसाई अल-सुनाने कुब्रा, 2/2777, हदिष 146📗

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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍

📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼

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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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*🅿पोस्ट:-0⃣8️⃣*

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📖12 रबि उल अव्वल 📚

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🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦

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शरीअत की रौशनी में

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📖👉🏻 क्या किसी साहबा ने मिलादे मुस्तफा मनाई है हज़रत अबू सईद खुदरी से रिवायत है की मुआविया से रिवायत हे की आक़ा करीम ﷺ बाहिर निकले साहब के हल्के पर, आप ने फ़रमाया :

☞✮तुम यहाँ किस वजह से बेठे हो, उन्होंने कहा हम अल्लाह عزوجل से दुआ कर रहे है और उसका शुक्र अदा कर रहे है की उसने अपना दिन हम को बतलाया और हम पर एहसान किया आप को भेज कर।…..

🌹👉🏻साहबा और ताबेईन और दीगर अहले इस्लाम ने पीर के दिन का रोज़ा रख कर भी मिलाद मनाया।

✒मक्का शरीफ के लोग नबी की पैदाइश की जगह को मिलादुन्नबी ﷺ के दिन हर साल ज़ियारत करते और महफ़िल मुनाकिद करते,✍

📖जवाहिर अल-बिहार सफा 1222📘

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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍

📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼

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*सुन्नियत का काम करेंगे!*

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!*

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*🅿पोस्ट:-0⃣9⃣*

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             *📖12 रबि उल अव्वल 📚*

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         *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*

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        *☞शरीअत की रौशनी में☜*

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📖👉🏻 *आप ﷺ की विलादत को ईद कहना कैसा* आइये पहले हम ईद का मतलब समज लेते है, ईद के लूग्वि माना है ख़ुशी, अगर कोई अरबी ख़ुशी का लफ्ज़ अरबी में कहेगा तो वो यही कहेगा “”ईद” इसे समझने के लिये क़ुरआन की एक आयत पेशे खिदमत है

📖🇸🇦 *_अल-क़ुरआन_* ईशा इब्ने मरीयम ने अर्ज़ की या अल्लाह ! ऐ हमारे रब ! हम पर आसमान से एक कुवा उतार की वो (कुवा उतरने के दिन) हमारे लिये ईद हो, हमारे अग्लो और पिछलों की,

           *📖सूरह माईदा, आयत 114📕*

*_☞🌹इस आयत से मालुम हुआ की जिस दिन अल्लाह عزوجل की खास रेहमत नाज़िल हो उस दिन को ईद मनाना और ख़ुशी मनाना अल्लाह عزوجل के शुक्र अदा करना अम्बिया का तरीका है, तभी तो हज़रत इसा अलैहिस्सलाम ने दुआ मांगी,✍_*

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*💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍*

*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼*

 *_📲𝑮𝑹𝑶𝑼𝑷 𝑴𝑬𝑰𝑵 𝑱𝑶𝑰𝑵 𝑯𝑶𝑵𝑬 𝑲𝑬 𝑳𝑰𝒀𝑬 𝑰𝑺 𝑵𝑼𝑴𝑩𝑬𝑹 𝑷𝑨𝑹 whatsapp 𝑺𝑴𝑺 𝑲𝑨𝑹𝑬𝑵_*

*+918239827845*

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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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*🅿पोस्ट:-1⃣0⃣*

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             *📖12 रबि उल अव्वल 📚*

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         *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*

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        *☞शरीअत की रौशनी में☜*

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🌹👉🏻 आक़ा ﷺ ने फ़रमाया : जुमुआ का दिन सब दिनों का सरदार है, अल्लाह عزوجل के नज़्दीक सबसे बड़ा है और वो अल्लाह عزوجل के नज़्दीक “ईदुल अज़्हा” और ” ईदुल फ़ित्र” से बड़ा है।

💎👉🏻 अल्लाह عزوجل ने इसमें (यानि जुमुआ के दिन) हज़रते आदम को पैदा किया

इसी में ज़मीन पर उनको उतरा

इसी में उनको वफ़ात दी,,✍

*🇨🇨 सुनन इब्ने माजाह, 1/8 हदिष 1084

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*💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍*

*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह…✍🏼*

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[05/10, 11:23] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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🅿️OST  --  1️⃣1️⃣

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📖12 रबि उल अव्वल 📚

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मेरे मुस्तफा का मिलाद


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☞शरीअत की रौशनी में☜

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📚👉🏻 इस हदिष में 3 खसल्ते हज़रत आदम के लिये बयान की गई जिसमे आप की वफ़ात ए ज़ाहिरी का भी ज़िक्र है। तो पता चला की एक नबी की पैदाइश उनका ज़मीन पर उतारना और उनकी वफ़ात के दिन के बावुजूद भी मोमिन के लिये अल्लाह ने उसे ईद बना दिया।


💎👉🏻 और तो और वो “ईदुल अज़्हा” और ” ईदुल फ़ित्र” से भी अफ़्ज़ल कर दिया। मेराज की रात आक़ा ﷺ ने तमाम अम्बिया की इमामत की थी



🌹👉🏻 जैसा की हदिष से पता चलता है की हमारे सरकार ﷺ तमाम अम्बिया के सरदार और इमाम है उनकी तशरीफ़ आवरी पर हम उस दिन को क्यू ईद न कहे। बल्कि हम तो उसे इदो की ईद कहेंगे की उनकी तशरीफ़ आवरी की वजह से ही तो हमें बाकि ईद मिली और हर हफ्ते में एक दिन करके पुरे साल में 52 इदो (जुमुआ) का तोहफा मिला इसी “राहमतुल्लिल आ’लमिन” की तशरीफ़ आवरी से मिला हैं तो हम क्यू उस दिन ख़ुशी न मनाये,

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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍


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[05/10, 11:24] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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🅿️OST--1️⃣2️⃣


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📖12 रबि उल अव्वल 📚

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☞शरीअत की रौशनी में☜

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🌹👉🏻अबू लहब ने भी मिलादे मुस्तफा ﷺ मनाया जब हुज़ूर ﷺ की विलादत हुई तब अबू लहब की गुलाम सोबिया ने अबू लहब से कहा की तुजे भतीजा हुआ है, इस ख़ुशी में अबू लहब ने अपनी उस गुलाम को ऊँगली के इशारे से आज़ाद किया था।”*


💎💟👉🏻 जब अबू लहब मर गया तो उसके बाद अहले खाना ने उसे ख्वाब में बुरी हालत में देखा तो उससे पूछा : तेरा क्या हाल है


🌹🖤👉🏻 उसने कहा : मेने तुम्हारे बाद कोई भलाई नहीं पाई लेकिन मुझे हर पिर के रोज़ उस ऊँगली से पानी दिया जाता है जिस से मेने हज़रत मुहम्मद ﷺ की विलादत की ख़ुशी में सोबिया को आज़ाद किया था,,✍


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[06/10, 10:01] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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🅿️OST  --  1️⃣3️⃣


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📖12 रबि उल अव्वल 📚

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मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद<

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☞शरीअत की रौशनी में☜

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🌹📖 इस हदिष के तहत इमाम जिज़री फरमाते है : जब एक काफ़िर का ये हाल है तो वो उम्मती जो अपने रसूल ﷺ की मुहब्बत में मिलाद पे माल खर्च करता है उसका क्या सीला होगा


📚मुवाहिब अद-दुन्या, 1/27📕


💎🇨🇨👉🏻 ईदे मिलादुन्नबी ﷺ का एहतमाम और ख़ुशी ज़ाहिर करने वालो के लिये खुशखबरी है की वो जन्नती है…


💎🇨🇨👉🏻ईदे मिलादुन्नबी ﷺ के बारे में खुल्फा ऐ राशिदीन का क़ौल : हज़रते सिद्दिके अकबर رضي الله تعالي عنه ने फ़रमाया की जिसने नबी की मिलाद पाक पर 1 दिरहम भी खर्चा किया वो जन्नत में मेरे साथ होगा,✍


📖अन्नेअमतुल कुब्रा अलल आलम, सफा 7-12📕

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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍


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[06/10, 10:01] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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*🅿पोस्ट:-1⃣4️⃣* 


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📖12 रबि उल अव्वल 📚

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मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद<

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☞शरीअत की रौशनी में☜

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💎💟👉🏻 हज़रत उमर फ़ारुके आज़म رضي الله تعالي عنه ने फ़रमाया की जिसने इमामूल अम्बिया के मिलाद पाक की ताज़ीम की उस ने इस्लाम को ज़िन्दा किया


🌹👉🏻 हज़रते उष्मान गनी رضي الله تعالي عنه ने फ़रमाया की जिसने हुज़ूर के मिलाद पाक पर 1 दिरहम भी खर्च किया गोया की वो बदर व मुनाइन के जिहाद में शरीक हुआ।


💎👉🏻 मौला ए काएनात हज़रत अलीكَرَّمَ اللّٰهُ تَعَالٰى وَجْهَهُ الْكَرِيْم फरमाते है जो कोई मिलाद लाक की ताज़ीम और उस पर खर्च करे वो दुन्या से ईमान के साथ जायेगा। और बगैर हिसाब के जन्नत में दाखिल होगा..✍


📖 अन्नेअमतुल कुब्रा अलल आलम, सफा 7-12📕

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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍


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[07/10, 11:41] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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*🅿पोस्ट:-1⃣5⃣* ••──────────────────────➻ *📖12 रबि उल अव्वल 📚* ••──────────────────────➻ *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦* *~~~~~~~✮~~~~~~~✮~~~~~~~* *☞शरीअत की रौशनी में☜* *~~~~~~~✮~~~~~~~✮~~~~~~~**🌹👉🏻ज़म ज़मो कौसरो तसनीम नहीं लिख सकता**♦या नबी आप की ताज़ीम नहीं लिख सकता* *♦मैं अगर लाख समंदर भी निचोड़ो भी अगर**♦आप के नाम की एक मीम नहीं लिख सकता*🌹👉🏻 12वी तारीख को अल्लाह ने प्यारे महबूब रहमतुलिल आलमीन ﷺ को पैदा फ़रमाया और मख्लुकात जहानों को पैदा फ़रमाया जैसा की अल्लाह ने अपनी मुक़द्दस किताब क़ुरआन में अलग अलग जगहों पर इरशाद फ़रमाया है!  💎👉🏻 *वरफअना लक ज़िकरक* ⚜ हमने बुलंद किया आपके लिये आपके ज़िक्र को  🌹👉🏻 *लकद जाअकुम रसूलुम मीन अन्फुसे कम* ⚜ ऐ मोमिनो तुम्हारे पास अज़मत वाला रसूल तशरीफ़ लाए जो तुम्हारे में से है!  💎👉🏻 *लक़द मन्नल्लाहो अलल मोअमिनिन इज़ बअष फिहिम रसुला* 🌹👉🏻 हमने मुसलमानो पर बड़ा एहसान किया की उनमे उन्ही में से एक रसूल भेजा  ⚜ *वजकुरु निअमतल्लाहे अलैकुम* 🌹👉🏻 और अल्लाह के एहसान को याद करो  💟 *वमा अरसलनाक इल्ला राहमतलिल आलमीन* 💎👉🏻 हमने तुम्हे सारी कायनात के लिए रहमत बनाकर भेजा।  🌹👉🏻बेशक सरकार अल्लाह तआला की नेअमतें उज़्मा है। अल्लाह क़ुरआन में इरशाद फ़रमाता है! ⚜➡ *व अम्मा बे नेअमतें रब्बिक फहद्दीष* 💎👉🏻अपने रब की नेअमतों का खूब चर्चा करो और याद करो अल्लाह की नेअमतों को जो तुम पर है। *सूरए आले इमरान*  🌹👉🏻मिलाद शरीफ का माना ये है के सरकार ﷺ का ज़िक्र करना चर्चा करना। अल्लाह ने इन आयत में हुज़ूर ﷺ का ज़िक्र करने का और चर्चा करने का हुक्म फ़रमाया है।  💎👉🏻 इसी तरह अल्लाह ने अपने प्यारे महबूब ﷺ की तारीफ़ (मिलाद) तमाम आसमानी किताबो में फ़रमाया है। जिसका ज़िक्र ان شاء الله अगली पोस्ट में।…✍ *🔰फ़ज़िलते ईदे मिलादुन्नबी सफ़ह 5 📕* •────────────────────•*💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,



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[07/10, 11:41] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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*📜🅿 पोस्ट:-1️⃣6️⃣*


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         🎆  *☞12 रबि उल अव्वल☜*  🎆


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         *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*


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        📖 *शरीअत की रौशनी में* 📚


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⚜दो जहां के मालिकों मुख़्तार पर लाखों सलाम


🌹👉🏻किताबो में की है। हुज़ूर ﷺ की इस दुनियां में तशरीफ़ आवरी के मुतअल्लिक़ बहुत सी बशारते है के इन सबको लिखना न मुमकिन है यहाँ हम चन्द बशारतो का बयान करते है जो सही रिवायतों से है, हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की 9 किताबो में अल्लाह ने ये खिताब फ़रमाया है।


💎👉🏻अल्लाह फ़रमाता है ऐ आदम एक वक़्त आएगा जब तेरी औलाद में एक नरम दिल और लोगो पर तरस खाने वाला इंसान पैदा होगा। उसका नाम इब्राहीम होगा। वो मेरा एक घर बनाएगा। उस हरमे पाक में ज़मज़म का चश्मा निकल आएगा। ये सिलसिला तेरे उस फ़रज़न्द तक पहोचेगा जो सबसे अफ्ज़ल होगा। जिसका रुतबा सबसे बुलंद होगा। उसका नाम हज़रत मुहम्मद होगा। खूबसूरती में वो सबसे निराला होगा, अच्छाई में वो सबसे आला होगा, वो सबका इमाम होगा, इस शहेर कि इमामत उसी को दी जाएगी, वो पैगम्बर होगा, आली हिम्मत होगा, वो मेरे इस घर के ऐहतराम को फिर ज़िंदा करेगा और क़यामत तक इसे मेरी सिर्फ मेरी इबादत जगह बना देगा। मेरा ये बाँदा आखरी पैगम्बर होगा आखरी रसूल होगा के, इसके बाद फिर कोई पैगम्बर और कोई रसूल न होगा।


💟 ये इबारत हज़रते आदम के सहिफे यानी किताब में है।..✍


📚फ़ज़िलते ईदे मिलादुन्नबी सफ़ह 6 📕

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*💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍


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[08/10, 10:13] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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*📜🅿 पोस्ट:-1⃣7️⃣*


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         *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद,🇸🇦*


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☞शरीअत की रौशनी में☜

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💟ला वा रब्बिल अर्श जिसको जो मिला उनसे मिला


🇨🇨बटती हैं क़ौनैंन में नेमत रसूल अल्लाह ﷺ की


🧕🏻👉🏻तौरेत अल्लाह ने अपने नबी हज़ारत मूसा अलैहिस्सलाम पर नाज़िल फ़रमाई है, इस मुक़द्दस किताब में भी अल्लाह ने हुज़ूर ﷺ की तारीफ़ (मिलाद बयान की है)


💎👉🏻 एक सहाबी क़अबूल फरमाते है की मेने तौरेत में पढ़ा है के, “हुज़ूरﷺ गुस्सा न करेंगे, आप का दिल सख्त न होगा, आप बाजारमें कभी किसीको उची आवाज़ से न बुलाएंगे, बुराई का बदला बुराई से न देंगे, बल्कि मुआफ़ फरमा देंगे। आप की उम्मत अल्लाह का ज़िक्र करती रहेगी। वो हाथ, पाउ, मुह धो कर और सरका मसह करके वुज़ू करेंगे। उनके मोआज़्ज़िन अजाने देंगे। वो उची इमारतों पर, मीनारों पर खड़े हो कर खुदाकि तकबीर कहेंगे। उनकी खुबिया नमाज़ में और जंग में एक जेसी होगी। वो रातके वक़्त खुदा की इबादत करने खड़े होंगे,,✍


📚 फ़ज़िलते ईदे मिलादुन्नबी सफ़ह 7 📕

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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍



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[18/10, 10:13] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

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         *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*

   

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*💟👉🏻ला वा रब्बिल अर्श जिसको जो मिला उनसे मिला*


*🖤बटती हैं क़ौनैंन में नेमत रसूल अल्लाह ﷺ की*



*💎👉🏻नबी आखिरुज़्ज़मा ﷺ मक्का में पैदा होंगे।* मदीने में जाएंगे। आपकी हुक़ूमत मदीने से लेकर मुल्के शाम तक फेली हुई होगी। जान लो के ये मेरा बंदा मोहम्मद होगा। जिसका नाम मुतवक़्क़ल होगा। उसे उस वक़्त तक दुन्या से न उढ़ाऊँगा जब तक के सारे टेढ़े रास्ते उसके सच्चे दिन पर न आ जाएंगे और जूठे मजहब उसके सच्चे मजहब से सीधे न हो जाएंगे। ये इस तरहसे होगा के सारे इन्सानोको, जिन्नों को और खुदाकि सारी मख्लूक़ को एक सच्चे दिनकि दावत देगा। एक खुदा की तरफ बुलाएगा। उसकी दावत की बरकत ऐसी होगी के इसकी वजह से में उन आँखों को रौशनी दूंगा जो देख न सकती होगी, उदास दिलो को ख़ुशी दूंगा, दिल के अँधेरे दूर करूँगा और लोगो के सारे मुआमले सुलजा दूंगा।,✍*


   *📚 फ़ज़िलते ईदे मिलादुन्नबी सफ़ह 7 📕*

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[18/10, 10:16] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

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*💎⚜सरवर  कहूँ  के  मालिके  मौला  कहूँ  तुझे"*


           *♦  बागे  ख़लील  का  गुले  ज़ेबा  कहूँ  तुझे"*

 

*🌹👉🏻 नबी  की  ज़रूरत* अगर सिर्फ किताबे नाज़िल कर दी जाती तो उसे समझने में लोगो को शको सूबा हो सकता था और शैतान गलत माना समझा के लोगो को गलत राह पे ले जा सकता था। तो अल्लाह ने किताबे अपने मुक़द्दस और प्यारे रसूलों पे नाज़िल फ़रमाई और उनको मख़लूक़ से ज़्यादा इल्म अता किया और उन्हें गुनाहों से पाक व मासूम रखा। शैतान से उनकी हिफाज़त की। जिस रसूल पे जो किताब नाज़िल की उस किताब का सच्चा इल्म भी उस नबी को अता फ़रमाया। हबीब रसूलों ने अपने अख़लाक़ व अमलो से लोगो को अल्लाह की मुक़द्दस किताब का इल्म दिया। अल्फ़ाज़ से अगर शक होता तो उनके अमल से उनको जवाब मिल जाता।...✍*


*📚 क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 14📕*


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[19/10, 09:46] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

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  *⚜मेरे रज़ा ने ख़त्मे सुखन इस पे कर दिया"*


    *💟ख़ालिक़ का बन्दा ख़ल्क़ का आक़ा कहूँ तुझे"*


*💎👉🏻 नबियों  की  तादाद* अल्लाह ने दुन्या में कमो बेस एक लाख चौबीस हज़ार नबियों को भेजा। उनमे से 313 को नबुव्वत के साथ रिसालत भी नवाज़ा। यानी वो रसूल भी थे। इससे आप को ये समझ तो आगया की नबी और रसूल एक नही, दोनों में फर्क है।"*


*⚜👉🏻 तार्रुफ़  ए  नबी* नबी बसर और मर्द है, जिसको अल्लाह ने उम्मत की रहनुमाई के लिये भेजा और उनपे वही नाज़िल फ़रमाई।


•🌹👉🏻 इससे ये मालूम हुआ कि नबी इंसान है कोई फरिश्ता या जिन्न को नबुव्वत नही दी और ये भी जानने को मिला कि इंसानो में भी सिर्फ मर्द है, किसी औरत को नबुव्वत नही दी गई।


*💟 तार्रुफ़  ए  रसूल* रसूल वो है जिनको अल्लाह ने किताब या नये हुक्म अता फरमाये।


💫 इंसानों को नबुव्वत मिली है लेकिन जिनको नबुव्वत मिली वो सभी रसूल नहीं है। रसूल सिर्फ 313 है और अल्लाह की और से 104 किताबे नाज़िल हुई है। (फरिश्तों में भी रसूल है)


💎👉🏻 रसूल होना सिर्फ इंसानों के लिये खास नहीं बल्कि फरिश्तों में भी कुछ को रिसालत दी हुई है। लेकिन औरतो और मर्दो में ज़्यादा फ़ज़ीलत मर्दो को दी हुई है, इसी वजह से औरतों में नबुव्वत और रिसालत नही है। है उनको विलायत मिल सकती है बल्कि कई औरतों को विलायत मिली हुई है,✍


*📚 क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 14 📕*


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[19/10, 09:48] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

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*♦जहां बानी अता कर दें भरी ज़न्नत हिबा कर दें"*


*♦नबी मुख़्तारे कुल है जिसको जो चाहे अता कर दें"*


*💎👉🏻 अल्लाह  तआला  की  नाज़िल  करदा  किताबे  कलामुल्लाह है।* ऐसा नही की हमारे आक़ा ﷺ पे जो किताब क़ुरआन उतारा गया वो ही कलामुल्लाह है यानी अल्लाह का कलाम है। बल्कि उसी तरह जितनी किताबे अल्लाह ने अपने मुक़द्दस रसूलों पर नाज़िल फ़रमाई वो सभी किताबे कलामुल्लाह है और ये सभी किताबों पे ईमान लाना ज़रूरी है।*


🌹👉🏻 इससे कुछ लोगो को ये शको सूबा है कि जब अगली किताबो की हर बात कैसे क़बूल कर ले, जब कि ये साबित हो चुका है कि उसमें लोगों ने रद्दो बदल कर दिए है।


*💟 तो इसका जवाब ये है कि ईमान की दो किसमे है।*


♦➪1 किसी चीज़ पर ईमान 

♦➪2 उसकी तफसील पर ईमान।


💎👉🏻 यह शको सूबा दूसरे नंबर से है, तो हम यूँ कहेंगे अल्लाह की किताब पर ईमान लाया, यानी अल्लाह ने किताब नाज़िल की थी उसपे ईमान है। इस से अल्लाह की किताबो पर ईमान लाना मुकम्मल हो जाएगा।


*_💫 इसी तरह सभी नबियों पर ईमान लाना ज़रूरी है। हर एक पर अलग अलग ईमान का इकरार करना ज़रूरी नही। क्योंकि सभी नबियों के नाम बयान नही किये गये और उनकी तादाद में भी इख़्तेलाफ़ है। तो इतना मानना ज़रूरी है कि में अल्लाह के सभी नबियों पर ईमान लाया हूं।...✍_*


 *📚  क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 📕*


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💟👉🏻सरवर कहूँ के मालिके मौला कहूँ तुझे बागे ख़लील का गुले ज़ेबा कहूँ तुझे”


🌹👉🏻 अल्लाह ने आपने फ़ज़लों करम से छोटी बड़ी कमो बेस 104 कितबे मुक़द्दस रसूलों पर नाज़िल फ़रमाई, ताकि उसके बन्दों को हक़ राह मिल सके। हक़ राह को पाने में कोई शक न रहे, जन्नत से निकाल के आने वाला इंसान फिर जन्नत में जाने लायक बन सके, शैतान जो उसका दुश्मन है वो उसे गलत राह पे ले जाके उसे दोज़खी न बना दे।


💎👉🏻 इंसान, इंसान बनके ज़िन्दगी बसर करे, अख़लाक़, आदाब से हट के जानवर न बने। बल्कि अपने अख़लाक़ से फरिश्तों से बन के दिखाये! अल्लाह की हक़ीक़ी पहचान मिले और शिर्क और बूत परस्ती से महफूज़ रहे। अल गरज़ अल्लाह के बन्दे उसकी नाज़िल करदा किताबों से उस अल्लाह का हक़ीक़ी बन्दा बनके रहे,,✍


📚 क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 14 📕


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[20/10, 10:12] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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       *🅿पोस्ट:-2⃣3️⃣*

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             *📖12 रबि उल अव्वल 📚* 

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         *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*

   

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        *☞शरीअत की रौशनी में☜* 

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*🌹👉🏻मेरे आक़ा ﷺ की हैं शान सबसे अलग"*


          *जैसे रुतबे में क़ुरआन सबसे अलग*"


 💟 *रुतबे में सबसे अफ़ज़ल रुतबा मेरे नबी ﷺ का*


   💟 *क़ुरआन हैं मुक़म्मल चेहरा मेरे नबी ﷺ का*


*📕💫 • पहले की किताबों में रद्दो बदल क्यों हुआ? •* सवाल ये भी होता है कि, पहले की किताबो में लोगों ने मिलावट क्यूं की और अल्लाह ने इस मिलावट को दूर क्यों न किया ? 


*🌹👉🏻 अल्लाह ने* लोगो की हिदायत के लिये किताबे नाज़िल फ़रमाई। इससे हिदायत और नजात की राह दिखाई। अब लोगों के जिम्मे था कि इन किताबो को मजबूती से थाम लेते और उस पर अमल करते। लेकिन लोग शैतान के बहकावे में आ गए और इस जिम्मेदारी को भूल गये की अल्लाह ने हमे किताब क्यूं अता फ़रमाई और हमे किताब की किस तरह हिफाज़त करनी चाहिये।


💎👉🏻  दूसरी बात ये की *अल्लाह*  ने जिस क़ौम को किताब अता फ़रमाई जस की हिफाज़त उस क़ौम के जिम्मे कर दी। अब हुआ यूं के उस क़ौम के आलिम गुरबा व मसाकीन के लिये खुदाई हुक्म देते और जब कोई दौलत मंद की बात आती तो वो उनको बचाने के लिये इसमें रद्दो बदल कर देते। इस तरह के काम उस क़ौम के नबी के दुन्या से जाने के बाद होते रहे..✍

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*💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍*


*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏼*

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   *_💎मोहम्मद ईमरान रज़वी💎​​_*

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      *_🌸अहले सुन्नत व-जमाअत की जानिब से...🌸​​​​_*


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      *_📙इस्लाह सबकी करनी है....​_*

[21/10, 10:06] 💚محمد عمران رضوي💚: *꧁𝙅𝙊𝙄𝙉 𝙂𝙍𝙊𝙐𝙋 𝙎𝙈𝙎꧂*


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📖12 रबि उल अव्वल 📚

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☞शरीअत की रौशनी में☜

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💎👉🏻 • हिफाज़त की जिम्मेदारी लोगो को क्यों ?सवाल ये भी होता है कि इसकी जिम्मेदारी लोगो को क्यों दी अगर अल्लाह अपने जिम्मे रखता तो लोग इसमें रद्दो बदल न करते।


🌹👉🏻 अल्लाह ने लोगों के इम्तेहान के लिए ये जिम्मेदारी क़ौम को दी, की ये मेरी किताब है जो नबी के ज़रिये आप तक पहोंची है। पर क़ौम अल्लाह के इम्तेहान में नाकाम हुए।


💟⚜दूसरी बात ये है कि अल्लाह فَقَّالُ لِّمَايُرِيْدُ है। उसने ये इरादा किया कि किताब की हिफाज़त क़ौम को दी जाये।।


💫⚜ तीसरी बात ये की एक नबी के बाद दूसरा नबी और एक रसूल के बाद दूसरा रसूल आने वाले है। तो जो रद्दो बदल होगा वो दूसरे नबी और रसूल की तालीमात सही हो जाएगा। इसी वजह से क़ौम को ये जिम्मेदारी दी।…✍


📚 क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 18 📕


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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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*🖊️फ़ज़्ले ख़ुदा से साहिबे ज़ीशान हो गया*


*जो खुश नसीब हाफ़िज़े क़ुरआन हो गया*


   *उसको जला सके न दोज़ख़ की आग*

 

 *महफूज़ जिसके सीने में क़ुरआन हो गया*

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*⚜📕 क़ुरआन की हिफाज़त की जिम्मेदारी अल्लाह ने क्यों ली*


💎👉🏻पहला जवाब तो ये कि अल्लाह فَقَّالُ لِّمَا يُرِيْدُ वो को चाहे वो फैसला कर सकता है। उसका फैसला क़ुरआन के लिए ये किया कि उसकी हिफाज़त की जिम्मेदारी मेरे जिम्मे करम रखूंगा।


🌹👉🏻 दूसरा जवाब ये की हुज़ूर ﷺ अल्लाह के आखरी नबी और रसूल है। आपके बाद अब कोई नबी या रसूल आनेवाले नहीं। तो अब क़ुरआन की जिम्मेदारी लोगों को दे दी जाती तो लोग इस इम्तेहान में नाकाम हो कर दीन में खराबी पैदा कर देते और दीन बर्बाद हो जाता। इस वजह से अल्लाह ने अपने फ़ज़लों करम से हिफाज़त की जिम्मेदारी ली और दीन को खराबी से बचाया।


💫⚜अल्लाह फरमाता है बेशक! हमने नाज़िल किया ये क़ुरआन और बेशक! हम खुद उसकी हिफाज़त करेंगे।


💎👉🏻 मुसलमानों के सीने को खोल दिये गए, जब अल्लाह ने क़ुरआन के हिफाज़त की जिम्मेदारी ली तो उसने मुसलमानों के लिये क़ुरआन को याद करना आसान कर दिया।


🌹👉🏻 पहले की किताबो के हाफ़िज़ सिर्फ नबी थे, लेकिन क़ुरआन एक मोजिज़ा है कि कम वक़्त में और कम मेहनत में मुसलमानों के छोटे बच्चों को भी हिफ़्ज़ हो जाए। जिस कलाम के लिये सिर्फ नबी का सीना खोल दिया जाता था, क़ुरआन के लिए सभी मुसलमानों का सीना खोल दिया गया। मुसलमानों की बस्तियों के छोटे से छोटा गांव भी ऐसा न होगा जहां एक क़ुरआन का हाफ़िज़ न हो। आज पूरे जहां में लाखों की तादाद में हाफ़िज़ मौजूद है, जो एक ज़ेर ज़बर की भी गलती नहीं होने देते।..✍


📚 क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 20 📕


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♦ वो वलिदैन हश्र के दिन होंगे ताजदार”


 *जिनका लाडला हाफ़िज़े क़ुरआन हो गया"*

♦ दस ऐसे आदमियों को वो ज़न्नत दिलाएगा”


 *दोज़ख़ में जिनके जाने का एलान हो गया"*

💎👉🏻 क़ुरआन की छपाई दुन्या के कोई भी किताब ऐसी नही है जिसको क़ुरआन के जितनी मिक़दार में छपाई हुई हो। दुन्या में सबसे ज़्यादा छपने वाली किताब क़ुरआन है। हर एक मुसलमान के घर मे एक क़ुरआन तो ज़रूर मिलेगा। चाहे उसे तिलावत न आती हो फिर भी वो बरकत की निय्यत से अपने घर मे रखता है। इस एतेबार से दुन्या में काम अज़ कम उतने क़ुरआन तो मौजूद है ही जितने मुसलमान के घर है।


💫⚜ छपाई में गलतियां होती है!कभी कभी ऐसा होता है कि प्रूफ रीडिंग सही तरह न किया जाए तो ज़ेर ज़बर की गलतियां होती है। लेकिन आज तक कोई भी क़ुरआन ऐसा नहीं जिसमे ज़बर ज़ेर की कोई गलती हुई हो और उसे सही न किया गया हो। हाफ़िज़ छपे हुए क़ुरआन की एक बार तिलावत कर के उसे सही कर लेते है और ये भी अल्लाह का फ़ज़लों करम है कि क़ुरआन की छपाई में कभी गलती होती ही नहीं, और अगर होती है तो उसे सही कर लिया जाता है। इसी वजह से क़ुरआन में कभी भी मिलावट नही हो सकती। आज तक कोई इसमें कामयाब न हुआ है और न होगा ان شاء الله. क्योंकि जो चीज़ अल्लाह की हिफाज़त में हो उसमे रद्दो बदल हो नही सकता।….✍


📚 क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 21 📕


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*♦हम ख़त्में नबुवत पर यूँ पेहरा लगाएंगे*

 

*🔸क़ानून ए रिसालत पर घर बार लुटाएंगे* 

ताजदारे ख़त्में नबुवत ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद


💎👉🏻 क़ुरआन की हिफाज़त हमारे नबी ﷺ का आखरी नबी होने पर दलील है। अहले सुन्नत वल जमाअत का अक़ीदा है और इसपर क़ुरआन की आयत दलील भी है कि हमारे प्यारे आक़ा ﷺ अल्लाह की तरफ से इस दुन्या को सच्ची राह बताने वाले आखरी नबी है। आपके बाद कोई नया नबी नहीं आएंगे और अगर कोई दावा करता है तो वो झूठा कहलाएगा। हमारे नबी के इस दुन्या से पर्दा फरमाने के बाद लोगों ने नबी होने का झूठा दावा किया, लेकिन वो अपनी इस चाल में नाकाम रहे।*


🌹👉🏻 जब हमारे नबी आखरी नबी है और कोई नबी क़यामत तक आने वाले नहीं तो अब अगर क़ुरआन की हिफाज़त न की जाए और उसमें रद्दो बदल हो जाए तो दीन बर्बाद हो जाए, और कोई नबी के न आने पर उसे सही कौन करे? इसी वजह से अल्लाह ने क़ुरआन के हिफाज़त की जिम्मेदारी अपने करम से खुद क़ुबूल फ़रमाई।”


💟👉🏻इससे बात वाज़ेह हो जाती है कि अल्लाह ने क़ुरआन के हिफाज़त का एलान कर के हमारे नबी के आखरी नबी होने की तरफ इशारा किया है।…✍


📚क़ुरआन एक जिंदा मोजिज़ा सफ़ह 21📕


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 *निसार  तेरी  चहल  पहल  पर*

 

        *हज़ारों  ईदें  रबी  उल  अव्वल*

 

   *सिवाये इब्लीस के जहान में*

 

*सभी तो खुशियां मना रहे है।*

💎👉🏻 मीलाद शरीफ और क़ुर्आन​ हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम की ज़ात व औसाफ व उनके हाल व अक़वाल के बयान को ही मिलादे पाक कहा जाता है,हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम की विलादत की खुशी मनाना ये सिर्फ इंसान का ही खास्सा नहीं है बल्कि तमाम खलक़त उनकी विलादत की खुशी मनाती है बल्कि खुद रब्बे क़ायनात मेरे मुस्तफा जाने रहमत सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम का मीलाद पढ़ता है,यहां क़ुर्आन की सिर्फ चंद आयतें पेश करता हूं वरना तो पूरा क़ुर्आन ही मेरे आका सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम की शान से भरा हुआ है मगर कुछ आंख के अंधे और अक़्ल के कोढ़ियों को ये आयतें नहीं दिखतीं और वो लोग इसको भी शिर्क और बिदअत कहते हैं माज़ अल्लाह,हवाला मुलाहज़ा फरमायें​


🌹👉🏻 कंज़ुल ईमान​ वही है जिसने अपना रसूल हिदायत और सच्चे दीन के साथ भेजा

📚पारा 10,सूरह तौबा,आयत 33📕


*✏️जारी रहेगा....*

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*💚जब तलक ये चांद🌙तारे✨ झिलमिलाते जाएंगे*

  *💚तब तलक़ जश्ने विलावत हम मनाते जाएंगे*


💫⚜ सहाबा केराम रिदवानुल्लाहि अन्हुम का मीलाद ए महफ़िल मुन्अकिद करना


🌹✍🏻 इमाम बुखारी के उस्ताद इमाम अह़मद बिन हम्बल लिखते हैं : सय्यिदुना अमीर मुआ़विया रदियल्लाहु अ़न्हु फ़रमाते हैं : एक रोज़ रसूल सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम का अपने असहाब के ह़लके से गुज़र हुआ , आप सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम ने फरमायाः क्यों बैठे हो ? उन्होंने कहाः हम अल्लाह तआ़ला का जिक्र करने और उसने हमें जो इस्लाम की हिदायत अ़ता फरमाई उस पर हम्द व सना ( तारीफ ) बयान करने और उसने आप सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम को भेज कर हम पर जो एहसान किया है उसका शुक्र अदा करने के लिये बैठे थे । आपने फ़रमायाः अल्लाह की क़सम ! क्या तुम इसी के लिये बैठे थे ? सहाबा ने अर्ज़ कियाः अल्लाह की क़सम ! हम सब इसी के लिये बैठे थे । इस पर आप सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम ने फ़रमायाः अभी मेरे पास जिबरईल अ़लैहिस्सलाम आए थे , उन्होंने कहा कि अल्लाह तुम्हारी वजह से फ़रिश्तों पर फख्र कर रहा हैं।


🇨🇨 सुनने नसई , हृदीस : 5443 , अल – मोजमुल कबीर : तिबरानी , हदीसः 16057 📕


💎👉🏻 इस हदीस से साबित हुआ कि सहाबा हुजूर सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम की मीलाद ( पैदाइश ) पर शुक्र अदा करते थे । यहाँ ये बात भी काबिले ज़िक्र है कि जो लोग हुजूरे अकदस सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम की मीलाद की महफ़िल सजाते हैं और उसमें शरीक होते हैं , अल्लाह ऐसे बन्दों पर फ़रिश्तों की जमाअ़त में फख्र फ़रमाता है और हाँ ! हुजूरे अक़दस सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम का ज़िक्र अल्लाह ही का जिक्र है इस पर कुर्आन और हुजूर की हदीसें गवाह हैं।…✍


📚 ईद मिलाद-उन-नबी सवाल वह जवाब की रोशनी में , सफह 10-11 📗


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*💟👉🏻 निसार तेरी चहल पहल पर*


*हज़ारों  ईदें  रबी  उल  अव्वल*

 

         *सिवाए इब्लिस के जहां में*

 

               *सभी तो खुशियां मना रहे है।*


🌹👉🏻 मीलाद शरीफ और क़ुर्आन​


💎👉🏻 ​कंज़ुल ईमान​ बेशक तुम्हारे पास तशरीफ लायें तुममे से वो रसूल जिन पर तुम्हारा मशक़्क़त में पड़ना गिरां है तुम्हारी भलाई के निहायत चाहने वाले मुसलमानों पर कमाल मेहरबान


📚पारा 11,सूरह तौबा,आयत 128📕


⚜💫 पहली आयत में मौला तआला उन्हें भेजने का ज़िक्र कर रहा है और भेजा उसे जाता है जो पहले से मौजूद हो मतलब साफ है कि महबूब सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम पहले से ही आसमान पर या अर्शे आज़म पर या जहां भी रब ने उन्हें रखा वो वहां मौजूद थे,और दूसरी आयत में उनके तशरीफ लाने का और उनके औसाफ का भी बयान फरमा रहा है,क्या ये उसके महबूब सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम का मीलाद नहीं है,क्या अब वहाबी खुदा पर भी हुक्म लगायेगा​….✍🏻


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 *”जब तलक़ ये चाँद तारे झिल मिलाते जाएंगे”* 

*”तब तलक़ जश्ने विलावत हम मनाते जाएंगे”*


🇸🇦👉🏻 *मिलाद ए मुस्तफ़ा ﷺ* 


*💎हज़रत अबू क़तादा रदियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूले अकरम सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम से पीर ( सोमवार ) के दिन रोज़ा रखने के बारे में पूछा गया तो आप सल्लल्लाहु अ़लैहि व सल्लम ने इरशाद फरमायाः* 


*” इसी रोज़ मेरी विलादत हुई , इसी रोज़ मेरी बिअ़स़त हुई और इसी रोज़ मेरे ऊपर कुर्आन नाज़िल किया गया*


*❇सहीह मुस्लिम , हदीसः 2807📚*

 *❇👉🏻सुनने अबू दाऊद , हदीसः 2428📚* ,

 *❇👉🏻मुस्नद इमाम अहमद बिन हम्बल , हदीस 23215 📕*

*❇ईद मिलाद-उन-नबी सवाल वह जवाब की रोशनी में , सफह 9 📘*

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*💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍*

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*सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!*

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         *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*

   

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        *☞शरीअत की रौशनी में☜* 

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    *♦तेरे  हबीब  का  प्यारा  चमन  किया  बर्बाद*

 

*♦ इलाही  निकले  ये  नजदी  बाला  मदीने  से*


❇✨ जिस मुकद्दस मकान में हुजूर अक्दस ﷺ की विलादत हुई, तारीखे इस्लाम में उस मुकाम का नाम (“मिलादुन्नबी )” (नबी की पैदाइश की जगह) है,यह बहुत ही मुतबकि मक़ाम है। सलातीने इस्लाम ने इस मुबारक यादगार पर बहुत ही शानदार इमारत बना दी थी, जहां अहले हरमैने शरीफैन और तमाम दुन्या से आने वाले मुसलमान दिन रात महफिले मीलाद शरीफ़ मुन्अकिद करते और सलातो सलाम पढ़ते रहते थे। चुनान्चे हज़रते शाह वलियुल्लाह साहिब मुहद्दिस देहलवी ने अपनी किताब “फुयूजुल हुरमैन” में तहरीर फ़रमाया है कि मैं एक मरतबा उस महफ़िले मीलाद में हाजिर हुवा, जो मक्कए मुकर्रमा में बारहवीं रबीउल अव्वल को “मिलादुन्नबी में मुन्अकिद हुई थी जिस वक्त विलादत का ज़िक्र पढा जा रहा था तो मैं ने देखा कि यक बारगी उस मजलिस से कुछ अन्वार बुलन्द हुए, मैंने उन अन्वार पर गौर किया तो मालूम हुवा कि वोह रहमते इलाही और उन फ़िरिश्तों के अन्वार थे जो ऐसी महफ़िलों में हाज़िर हुवा करते हैं।


💎👉🏻 जब हिजाज़ पर नज्दी हुकूमत का तसल्लुत हुवा तो मकाबिरे जन्नतुल मला व जन्नतुल बको के गुम्बदों के साथ साथ नजदी हुकूमत ने इस मुकद्दस यादगार को भी तोड़ फोड़ कर मिस्मार कर दिया। और बरसों येह मुबारक मक़ाम वीरान पड़ा रहा, मगर मैं जब जून सि. 1959 ई. में इस मर्कने खैरो बरकत की जियारत के लिये हाज़िर हुवा तो मैं ने उस जगह एक छेटी सी बिल्डिग देखी जो मुकम्फल थी।बाज़ अरबों ने बताया कि अब इस बिल्डिंग में एक मुख्तसर सी

लाएब्रेरी और एक छोटा सा मक्तब है, अब इस जगह न मीलाद शरीफ़ हो सकता है न सलातो सलाम पढ़ने की इजाजत है । मैं ने अपने साथियों के साथ बिल्डिग से कुछ दूर खड़े हो कर चुपके चुपके सलातो सलाम पढ़ा, और मुझ पर ऐसी रिक्कत तारी हुई कि मैं कुछ देर तक

रोता रहा।


⚠ नोट ये पोस्ट शेखुल-हदीस हज़रत अल्लामा अब्दुल मुस्तफा आजमी رحمۃ اللہ تعالٰی علیہ की किताब सीरते मुस्तफा ﷺ से है! 

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*♦तेरे हबीब का प्यारा चमन किया बर्बाद*

 *♦इलाही  निकले  ये  नजदी  बाला  मदीने  से*


💎👉🏻 हज़रते हलीमा सादिया ने अपने शोहर ‘हारिस बिन अब्दुल उज्ज़ा” से कहा कि यह तो अच्छा नहीं मालूम होता कि मैं खाली हाथ वापस जाऊं इस से तो बेहतर यही है कि मैं इस यतीम ही को ले चलू, शोहर ने इस को मंजूर कर लिया और हज़रते हुलीमा उस दुरै यतीम को ले कर आई जिस से सिर्फ हुज़रते हलीमा और हज़रते आमिना ही के घर में नहीं बल्कि काएनाते आलम के मशरिक व मग़रिब में उजाला होने वाला था । येह खुदा वन्दे ख्युदूस का फ़ले अज़ीम ही था कि हुज़रते हुलीमा की सोई हुई किस्मत बेदार हो गई और सरवरे काएनात इन की आगोश में आ गए। अपने खेमे में ला कर जब दूध पिलाने बैठीं तो बाराने रहमत की तरह बरकाते नुबुव्वत का जुहूर शुरू हो गया, खुदा की शान देखिये कि हज़रते हलीमा के मुबारक पिस्तान में इस कदर दूध उतरा कि रहमते आलम ने भी और इन के रजाई भाई ने भी खूब शिकम सैर हो कर दूध पिया, और दोनों आराम से सो गए, उधर उंटनी को देखा तो उस के थन दूध से भर गए थे । हज़रते हलीमा के शोहर ने उस का दूध दोहा और मियां बीवी दोनों ने खूब सैर हो कर दूध पिया और दोनों शिकम सैर हो कर रात भर सुख और चैन की नींद सोए।


💟👉🏻हुज़रते हलीमा का शोहर हुजुर रहमते आलम की येह बरकतें देख कर हैरान रह गया, और कहने लगा कि हलीमा तुम बड़ा ही मुबारक बच्चा लाई हो । हज़रते हलीमा ने कहा कि वाकेई मुझे भी येही उम्मीद है कि येह निहायत के ही बा बरकत बच्चा है और खुदा की रहमत बन कर हम को मिला है और मुझे येही तवक्कोअ है कि अब हमारा घर खैरो बरकत से भर जाएगा।


⚠ नोट ये पोस्ट शेखुल-हदीस हज़रत अल्लामा अब्दुल मुस्तफा आजमी رحمۃ اللہ تعالٰی علیہ की किताब सीरते मुस्तफा ﷺ से है!…✍

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*♦तेरे हबीब का प्यारा चमन किया बर्बाद”*

 *♦इलाही  निकले  ये  नजदी  बाला  मदीने  से"*

🌹👉🏻हज़रते हलीमा फ़रमाती हैं कि इस के बाद हम रहुमते आलमﷺ को अपनी गोद में ले कर मक्का मुकर्रमा से अपने गाऊ की तरफ रवाना हुए तो मेरा वो ही खच्चर अब इस कदर तेज़ चलने लगा कि किसी की सुवारी उस की गर्द को नहीं पहुंचती थीं, काफिले की औरतें हैरान हो कर मुझ से कहने लग कि ऐ हलीमा क्या येह वोही खच्चर है जिस पर तुम सवार हो कर आई थीं या कोई दूसरा तेज रफ्तार खच्चर तुम ने खरीद लिया है अल गरज हम अपने घर पहुंचे वहां सख्त कृहत् पड़ा हुवा था । तमाम जानवरों के धन में दूध खुश्क हो चुके थे, लेकिन मेरे घर में कदम रखते ही मेरी बकरियों के थन दूध से भर गए, अब रोजाना मेरी बकरियां जब चरागाह से घर वापस आतीं तो उन के थन दूध से भरे होते हालां कि पूरी बस्ती में और किसी को अपने जानवरों का एक कतरा दूध नहीं मिलता था मेरे कबीले वालों ने अपने चरवाहों से कहा कि तुम लोग भी अपने जानवरों को उसी जगह चराओ जहां हलीमा के जानवर चरते हैं। चुनान्चे सब लोग उसी चरागाह में अपने मवेशी चराने लगे जहां मेरी बकरियां चरती थीं, मगर यहां तो चरागाह और जंगल का कोई अमल दखल ही नहीं था येह तो रहूमते आलम ﷺ के बरकाते नुबुव्वत का फ़ैज़ था जिस के मैं और मेरे शोहर के सिवा मेरी कौम का कोई शख्स नहीं समझ सकता था।


💎👉🏻अल गरज इस तरह हर दम हर कदम पर हम बराबर आप की बरकतों मुशाहिदा करते रहे यहां तक कि दो है 3 साल पूरे हो गए और मैंने आप क दूध छुड़ा दिया। आप की तन्दुरुस्ती और नशवो नुमा क हाल दूसरे बच्चों से इतना अच्छा था कि दो साल में आप ﷺ खुब अच्छे बड़े मालूम होने लगे,अब हम दस्तूर के मुताबिक रहमते आलमﷺ को उन की वालिदा के पास लाए और उन्हों ने हस्बे तौफीक हम को इन्आमो इक्राम से नवाज़ा!…✍


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*♦वो बशर लाइक-ए-एहतिराम नहीं*

*जिसके लब पर मेरे नबीﷺ का नाम नहीं*

 

      *♦जिसका खाते हैं उसका गाते हैं!*

*हम सुन्नी हैं नमक हराम नहीं*


💎👉🏻 हज़रते अब्दुल्लाह ये हमारे आक़ा के वालीदे माजिद है। ये अब्दुल मुत्तलिब के तमाम बेटो में सबसे ज्यादा बाप के लाडले थे। चुकी इन की पेशानी में नुरे मुहम्मदी अपनी पूरी शानो शौकत के साथ जल्वा गर था इसलिये हुस्नो खूबी के पैकर, और जमाल सूरत व कमाल सीरत के आइना दार और ईफ्कत व पारसाई में यक्ताए रोज़कार थे।


🌹👉🏻 एक दिन आप शिकार के लिए जंगल में तशरीफ़ ले गए थे मुल्क शाम के यहूदी चन्द अलामतो से पहचान गए थे के नबिय्ये आखिरुज़्ज़मा के वालिद माजिद यही है। चुनांचे उन यहूदियो ने आप को बारह कत्ल कर डालने की कोशिश की। इस मर्तबा भी यहूदियो की एक बहुत बड़ी जमात मुसल्लह हो कर इस निय्यत से जंगल में गई की आप को तन्हाई में धोके से कत्ल कर दिया जाए।


💎👉🏻मगर अल्लाह ने” इस मर्तबा भी अपने फज़लो करम से बचा लिया। आलमे गैब से चन्द ऐसे सुवार ना गहा नमूदार हुए जो इस दुनिया से कोई मूशा-बहत ही नहीं रखते थे। इन सुवारोने आकर यहूदियो को मार भगाया और आप को ब हिफाज़त उनके मकान तक पहुचा दिया।


💦💐 वहब बिन मनाफ भी उस जंगल में थे और उन्होंने अपनी आँखोसे ये सबकुछ देखा। इसलिए उनको हज़रते अब्दुल्लाह से बे इंतिहा मोहब्बत व अकीदत पैदा हो गई।


🌹👉🏻औऱ घर आ कर ये अज़्म कर लिया की मैं अपनी नुरे नज़र हज़रते आमिना की शादी हज़रते अब्दुल्लाह ही से करूँगा।..✍

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*♦जहां बानी अता कर दें भरी ज़न्नत हिबा कर दें*

*🔹नबी मुख़्तारे कुल है जिसको जो चाहे अता कर दें*


🌹👉🏻आप ﷺ के मोअज़्जा आप ﷺ का सब से बड़ा मोअज़्जा कुरान शरीफ है। इसके अलावा बहुत सारे मोअज़्जात हैं उन में से कुछ ये है।


💎👉🏻आप ﷺ के जिस्म-ए-अक़दस पे कभी मच्छर और मक्खी नहीं बैठ’ती थी।


🌷💫आप ﷺ जैसे अपने आगे की चीज़ों को देखते थे वैसे ही अपने पीछे की चीज़ों को भी देखते थे।


❇👉🏻आप ﷺ के पसीने से खुशबु आती थी।


💟✨आप ﷺ अगर खाड़े पानी (साल्ट वाटर) में अपना लुआब-ए-दहन (स्पिट) दाल देते थे तो वह मीठा हो जाता था।


💎आप ﷺ जानवरों और पथ्थरों की आवाज़ को भी सुनते और समझते थे


🌹✨आप ﷺ जिस बच्चे के सर पर हाथ डाल देते थे वह दिन भर खुशबु से महकता रहता था।


✨♦आप ﷺ दूर-व-नज़दीक की आवाज़ें को सुनते थे और लाखों कोसों दूर की चीज़ों को भी देख लेते थे।


💟🌹 आप ﷺ ने अपनी ऊँगली के इशारे से चाँद को दो टुकड़े कर दिया।


💎👉🏻 आप ﷺ ने डूबे हुए सूरज को लौटा कर असर के वक़्त पर कर दिया।


💟✨ आप ﷺ ने कम खाने में बहुत ज़ियादह लोगो को खिलाया।


🌹👉🏻 आप ﷺ ने लकड़ी को लोहे का तलवार बना दिया।


💎👉🏻आप ﷺ रात के थोड़े से वक़्त में सातों आसमान के ऊपर गए और फिर चले आए।..✍🏻

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        *☞शरीअत की रौशनी में☜* 

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*♦जहां बानी अता कर दें भरी ज़न्नत हिबा कर दें*


*🔹नबी मुख़्तारे कुल है जिसको जो चाहे अता कर दें*


🌹👉🏻आप ﷺ की अद्ल व इंसाफ़ आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हर किसी के साथ अद्ल व इन्साफ फ़रमाते थे चाहे वह दोस्त हो या दुश्मन अपना हो या पराया।


💫🌷 एक बार आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के कबीला बनू हाशिम की एक औरत ने चोरी कर ली तो बड़े बड़े लोगों ने उसकी सजा माफ़ करने की शिफारिश की और कहा की ये औरत हमारे क़ाबिले की है अगर इस का हाथ काट दिया जाएगा तो इस से हमारे क़ाबिले की पूरे अरब में बड़ी बे-इज़्ज़ती और बद-नामी होगी उस वक़्त हुज़ुर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम गुस्से में आ गए और इर्शाद फ़रमाया के अगर मेरी सब से चाहिती बेटी फ़ातिमा भी चोरी करेगी तो मैं उसका भी हाथ काट लूंगा।


*📚सहीह बुख़ारी हदीस हदीस नंबर 6788📕*


*⚠नोट आज जब कोई मामला हो जाता है तो आम तौर से लोग अपने रिश्तेदार दोस्त और जान पहचान के लोगों की तरफ’दारी करते हैं और उसकी हिमायत (फवौर) में बोलते हैं अगरचे वह गलती पर होता है ये हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का तरीक़ा नहीं है। एक मुसलमान को चाहिए के वह हर हाल में अद्ल-व-इन्साफ करे और सिर्फ हक़ का साथ दे क्योंकि हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का यही तरीक़ा है और इसी को अपनाने में हमारी निजात है।..✍🏻*

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*🔹जहां बानी अता कर दें भरी ज़न्नत हिबा कर दें*


*♦नबी मुख़्तारे कुल है जिसको जो चाहे अता कर दें*


🌹👉🏻आप ﷺ की सखावत हज़रत-ए- जाबिर रादिअल्लाहु तआला अन्हु बयान करते हैं कि कभी ऐसा नहीं हुआ की आप सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम से किसी ने कोई चीज़ माँगा हो और आपने “नहीं” फ़रमाया हो।


📘सही मुस्लिम, हदीस नंबर 2311📕


  *♦वाह किया ज़ूदों -करम है शाहे बतहा तेरा*

 

   *♦नही ! सुनता ही नहीं माँगने वाला तेरा*

💎👉🏻एक मर्तबा हुज़ुर ﷺ के पास 90 हज़ार चांदी के सिक्के आए। तो आप ﷺ ने फ़रमाया की इन सब को चटाई पर रख दो फिर उसे बाँटने के लिए हुज़ुर खुद खड़े हुए,ज़ो शख्स भी आया उसे आप ने अता फ़रमाया यहाँ तक की वह सारे सिक्के ख़त्म हो गए। उसके बाद एक माँगने वाला आया। तो आप ﷺ ने फ़रमाया की मेरे पास तो अब कोई चीज़ नहीं है। तुम ऐसा करो की फलां दूकानदार के पास जा कर अपनी ज़रूरत की चीज़ें ले लो। दुकान-दार को मैं क़ीमत अदा कर दूंगा। इस पर हज़रत-ए-उमर रादिअल्लाहु तआला अन्हो ने कहा की या रसूलुल्लाह ﷺ अल्लाह तआला ने आप पर ये ज़रूरी नहीं किया है की आप के पास नहीं हो तब भी आप दें। आप ﷺ को ये बात पसंद नहीं आई जिस का असर आप के चेहरे से भी ज़ाहिर हुआ।एक अंसारी सहाबी वहां हाज़िर थे उन्होंने अर्ज़ किया ए अल्लाह के प्यारे रसूल! आप खर्च करते रहिये आप का रब जो सारी दुनिया का मालिक है,अप को देने में कभी कमी नहीं फ़रमाएगा। हुजुर ﷺ ये बात सुन कर मुस्कुराने लगे और आप ने फ़रमाया की हाँ मुझे इसी का हुक्म दिया गया है की मैं लोगो को नवाज़ता रहूं।


*💫🌹 हज़रत-ए-मुआवविज़ बिन अफरा बयांन करते हैं की मैं एक बर्तन में ताज़ा खजूर भर कर हुजूर के पास ले गया तो आप ﷺ ने मुझे मुट्ठी भर कर सोना और चांदी अता फ़रमाया।*


🌷💟 हज़रत-ए-अनस रादिअल्लाहु तआला अन्हो बयांन करते हैं की हुज़ुर ﷺ कल के लिए कुछ भी बचा कर नहीं रखते थे।..✍


*📚तलख़ीस : जियाउन नबी ज़िल्द 5 सफ़ह 522 📕*

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*🔹मुश्किल थे रास्ते आसान हो गए*


       *♦दुश्मन भी देख कर हैरान हो गए*

 

  *🔹जब रखा मेरे नबी ﷺ ने दुनिया मे क़दम*

 

*♦पत्थर भी कलमा पढ़कर मुसलमान हो गए*


🌹👉🏻आप ﷺ की अमन पसंदी आप ﷺ अपनी पूरी ज़िन्दगी अमन और इंसानियत का माहौल बनाने के लिए लोगो के अंदर से उन तमाम बुराइयों को दूर फ़रमाया जिस से किसी भी तरह अमन और इंसानियत को नुक़सान पहुँचता है। जैसे झूट, धोका, घमंड, वादा खिलाफी, ज़ुल्म , लडाई झगड़ा और खून खराबा वगैरह। और हर उस चीज़ को अपने किरदार और बातों से बढ़ावा दिया जिस से अमन और इंसानीयत का परचार होता है। जैसे सारे लोगो पर रहम करना। किसी के लिए बुरा नहीं सोचना, ज़ात पात और रंग-व-नस्ल की बुन्याद पर कोई फ़र्क़ नहीं करना, सब के साथ अच्छे अख़लाक़ से पेश आना, अपनी ज़ात से दुसरों को फ़ायदा पहुचाना, ख़ास तौर से कमज़ोर और गरीब लोगो की मदद करना और उन की इज़्ज़त की हिफ़ाज़त करना वगैरह। और आप ﷺ अपनी बारगाह में उन्ही लोगो को बड़ा रुतबा देते थे जो लोगो को ज़ियादह से ज़ियादह फायदा पहुँचाने में आगे आगे रहते थे।


🌷💚जैसा की हज़रत इमाम हसन रादिअल्लाहु अन्हो बयां करते हैं की “आप ﷺ की ख़िदमत में हाज़िर होने वाले लोग मख्लूक़ के बेहतरीन लोग होते थे और आप ﷺ के नज़दीक अफ़ज़ल वही होता था जिसकी खैर-ख़्वाही आम हो या’नी जो हर शख्स की भलाई चाहता हो और आप के नज़दीक बड़े रुतबे वाला वही शख्स होता था जो लोगों की मदद में ज़ियादह हिस्सा लेता था।


📚 शामिल-ए-तिर्मिज़ी हदीस 314📕


⚠ नोट आज भी हुज़ुर ﷺ की नज़र में अफ़ज़ल और बड़े रुत्बे वाला वही शख्स होगा जो हर शख्स की भलाई चाहता हो इसलिए हमें भी नबी ﷺ की सीरत के मुताल्लिक़ ज़िन्दगी गुज़ारनी चाहिए।..✍🏻

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         *🇸🇦मेरे मुस्तफ़ा ﷺ का मीलाद🇸🇦*

   

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        *☞शरीअत की रौशनी में☜* 

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*♦मुश्किल थे रास्ते आसान हो गए*

*दुश्मन भी देख कर हैरान हो गए*

 

*♦जब रखा मेरे नबी ﷺ ने दुनिया मे क़दम*

*पत्थर भी कलमा पढ़कर मुसलमान हो गए*


💟💫 ईद मिलाद उन नबी ﷺ मानना शिर्क कैसे हो सकता है


🌹👉🏻 सबसे पहले तो आप लोगों को ये बतादें की मिलाद का, मतलब पैदाइश होती है।।


💎💚और सभी लोग जानते हैं की जो पैदा होता है वो खुदा नहीं होता, और जो खुदा होता है वो पैदा नहीं होता


💫❇ इसिलिये हम अपने प्यारे आक़ा अलैहिस सलाम की पैदाइश्, यानि उनकी मिलाद मानते है, तो आज जो कुछ जाहिल लोग मिलाद मानाने को भी मअज़ल्लाह शिर्क कहते है।


🌹🇸🇦वो खुद ही मुश्रिक हो गए, क्यूँकि शिर्क का मतलब होता है अल्लाहﷻ की ज़ात या सिफ़त में शारिक, या बराबर समझण।


🌹👉🏻यानि ये वहाबी लोग पैदाइश के लफ्ज़ को अल्लाह ﷻ की सिफ़त समझते हैं यानि अल्लाह ﷻ को पैदा होने वाला मानते हैं इसिलिये तो शिर्क का फतवा दे रहे है।


🌹☝🏻 फिर जो अल्लाह ﷻ के लिए पैदा होना मानता हो वो यक़ीनन मुश्रिक हो गया, हम इन्शाअल्लाहﷻ मिलादुन नबी ﷺ के तअल्लुक़ से आप लोगों तक कुछ हदीसें और क़ुरान की आयतें पेश करेंगे पोस्ट 41 में कल .✍

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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,


 *पोस्ट जारी हैं✍*


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[29/10, 12:15] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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       *🅿पोस्ट:-4️⃣1️⃣*

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    *♦मुश्किल थे रास्ते आसान हो गए"*

 

    *दुश्मन भी देख कर हैरान हो गए"*

 

   *♦जब रखा मेरे नबी ﷺ ने दुनिया मे क़दम"*

 

*पत्थर भी कलमा पढ़कर मुसलमान हो गए*

 

 

             *◥ अल कुर’आन ◤*

🌹👉🏻 तर्जुमा हमने मोमिनो पर एहसान किया है जब उनमे अपने रसूल ﷺ को भेज दिया।, तो पता चला की हमारी जांन माल, ज़िन्दगी और दोनों आलम की नेमतों में सबसे बड़ी नेमत हमारे प्यारे आक़ा ﷺ है।


*📚सुराह आले- इमरान-आयत 164)*


🌷💚 इसीलिये अल्लाह ﷻ ने इस नेमत पर एहसान जताए है। तो फिर हमे इस नेमत का ख़ूब ख़ूब चर्चा करना है।


🌷💫 तर्जुमा आप कह दीजिए की अल्लाह ﷻ के फ़ज़्ल और उसकी रहमत पे ख़ूब खुशियाँ मनाओ, ये बेहतर है उससे जो कुछ वो काम कर रहे है।


*(सुराह युनुस आयत 48)*


💟👉🏻यहाँ अल्लाह ﷻ ने अपनी रहमत और फ़ज़्ल पर खुद ही ख़ुशी मानाने का हुक्म दिया है,✍

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💌दुआ फरमाइये की जिस काम की निय्यत की गई है वो मुकम्मल हो सके,,✍

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[29/10, 12:15] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

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       *🅿पोस्ट:-4️⃣2️⃣*

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*♦मुश्किल थे रास्ते आसान हो गए*

    *दुश्मन भी देख कर हैरान हो गए*

 

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*पत्थर भी कलमा पढ़कर मुसलमान हो गए*

 

 

             *◥ अल कुर’आन ◤*

🌷तर्जुमा हमने आपको सारे जहाँ वालो के लिए रहमत बनाकर भेजा। 


*(सुराह अम्बिया आयत 107)📕*


💎👉🏻यानि अल्लाह ﷻ के मेहबूब ﷺ हमारे लिए रहमत है और पिछली आयत में अल्लाहﷻ ने हुक्म दिया की अल्लाहﷻ की रहमत पे खुशियाँ माना, बस साबित हुआ की अल्लाह ﷻ के मेहबुब ﷺ की विलादत के दिन हम खुशियाँ मनायें।



{♦ *इमाम इब्न जौज़ी लिखते हैं* ♦}


🌹👉🏻 तफ़्सीर 1: “ज़ाहाक ने इब्न अब्बास रदियल्लाहो त’आला अन्हु से रिवायत किया की अल्लाह ﷻ के फ़ज़्ल से मुराद इल्म है और रहमत से मुराद नबी ﷺ है।” (तफ़्सीर जादुल मसीर फि इल्मे तफ़्सीर )


❇ इमाम अबू हय्यान अंदालूसी भी लिखते हैं♡}


💚 तफ़्सीर 2: फ़ज़्ल इल्म है और रहमत मुहम्मद ﷺ है,✍


*📚(तफ़्सीर बाहरुल मुहीत जिल्द -5 पेग 171)📘*

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[31/10, 11:43] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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       *♦मुश्किल थे रास्ते आसान हो गए*

 

    *दुश्मन भी देख कर हैरान हो गए*

 

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💎👉🏻तर्जुमा हमने आपको सारे जहाँ वालो के लिए रहमत बनाकर भेजा। (सुराह अम्बिया आयत 107)📕



♦ *इमाम जलालुद्दी सुयूती लिखते हैं* ♦

💎👉🏻 तफ़्सीर 3: अबु शेख ने इब्न अब्ब्बास रदियल्लाहो त’आला अन्हु से रिवायत किया की अल्लाह ﷻ के फ़ज़्ल से मुराद इल्म है और उसकी रेहमत से मुराद मुहम्मदﷺ हैं क्यूंकि अल्लाह ﷻ ने फ़रमाया “हमने आपको सारे जहाँ वलोके लिए रहमत बनाकर भेजा”


*📚दुर्रे मंसूर जिल्द 4 पेग 330*


🌹अल्लामा अलुसि लिखते हैं: ख़तीब और इब्बन असाकिर ने फ़ज़्ल से मुराद नबी ﷺ है,✍


📚(तफ़्सीर रूहुल माँ’अ’नी जिल्द 11 पेग, 141💦


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*♦मुश्किल थे रास्ते आसान हो गए*

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*पत्थर भी कलमा पढ़कर मुसलमान हो गए*

 

 

             *◥ अल कुर’आन ◤*

🌹👉🏻 तर्जुमा वो अल्लाह ﷻ का फ़ज़्ल है जिसपर वो चाहता है देता है, और अल्लाह ﷻ बड़े फ़ज़्ल वाला अज़मत वाला है।


*📚सूरह जमुआह आयत 4*


💦 इब्न अब्बास रदियल्लाहो त’आला अन्हु फ़ज़्ल के बारे में फ़रमाते हैं:


💐 इस्लाम और नबी ﷺ देकर अल्लाहﷻ ने फ़ज़्ल फ़रमाया; और ये भी कहा गया है की ईमान वालो को इस्लाम देकर फ़ज़्ल फ़रमाया; और ये भी कहा है की अपनी मख्लूक़ को नबी ﷺ भेजकर फ़ज़्ल फ़रमाया।”


📚(तफ़्सीर इब्न अब्ब्बास सूरह जुमाअ आयत 4) 📙


🌹👉🏻 क़ुरआन में भी अंबिया की पैदाइश के दिनों का ज़िक्र खुसूसियत के साथ किया गया है।। अल्लाहﷻ ताला क़ुरान में याह्या अलैहिस सालम के बारे में फ़रमाता है,


✍🏻( ﻭَﺳَﻠَﺎﻡٌ ﻋَﻠَﻴْﻪِ ﻳَﻮْﻡَ ﻭُﻟِﺪَ ﻭَﻳَﻮْﻡَ ﻳَﻤُﻮﺕُ ﻭَﻳَﻮْﻡَ ﻳُﺒْﻌَﺚُ ﺣَﻴًّﺎ १५ ” )📗


💎👉🏻ओर सलाम हो उन पर, जिस दिन ये पैदा हुए और जिस दिन वो वफ़ात पाएँगे,✍


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[01/11, 09:46] 💚محمد عمران رضوي💚: *सुन्नियत का काम करेंगे!*📚

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*💦 एक जगह ईसा अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया:*

*✍🏻( ﻭَﭐﻟﺴَّﻼَﻡُ ﻋَﻠَﻲَّ ﻳَﻮْﻣَﻮُﻟِﺪْﺕُّ ﻭَﻳَﻮْﻡَ ﺃَﻣُﻮﺕُ* *ﻭَﻳَﻮْﻡَ ﺃُﺑْﻌَﺚُ ﺣَﻴّﺎً )* 


*💐तर्जुमा* और मुझपर

सलामती हो उस दिन, जिस दिन मे पैदा हुआ, और जिस दिन मुझे मौत आएगी।


 *📚(सूरह मरयम, आयत 33 )📕*


💎👉🏻इस आयत से पहले अल्लाह ﷻ ने हज़रत मरयम रदलदिअल्लहो अन्हु का पूरा वाक़ेया बयान किया, और जिस तरह हज़रात ईसा अलैहिस्सलाम की विलादत हुई, ये सब कुछ बयान किया, फिर ईसा अलैहिस्सलाम की विलादत पर उनपर सलाम का ज़िक्र किया। 


👉🏻अब ज़रा बताइये, हम अहलेसुन्नत वल जमात भी तो नबी ﷺ की विलादत और बचपन के वाक़ेए और मोजिज़ात बयां करते है, और ये सब कुछ ऊपर क़ुरान की आयतो से साबित है,✍


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💦👉🏻 पता चला की अंबिया की मिलाद के दिन तो खुद अल्लाह ﷻ भी सलाम भेजने का तज़किरा कर रहा है। जबकि अल्लाह ﷻ ताला ने ये भी फरमा दिया की


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🏮”अल्लाह ﷻ और उसके फ़रिश्ते नबी अलैहिस्सलाम पर दरूद भेजते है


*📖सूरह अहजाब, आयात 56*


💟 यानि अल्लाह ﷻ और उसके फ़रिश्ते भी नबी अलैहिस्सलाम पर रोज़ सलाम भेजते है,


💦💐 लेकिन फिर भी पैदाइश के दिन सलाम भेजने का ज़िक्र अल्लाह ﷻ ने खास तौर पर किया है,


💎👉🏻तो पता चला की रोज़ सलाम भेजते रहो, और अम्बियाए अलैहिस्सलाम की विलादत के दिन सलाम भेजना और भी खास है।।


🌹👉🏻 फिर अगर हम अपने नबी अलैहिस्सलाम की विलादत के दिन सलाम पढ, तो कैसे बिदअत हो जाता है,✍


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💎👉🏻हर तरफ अंधेरा था! सिर्फ अंधेरा!! कैसा अंधेरा? कुफ्र व शिर्क का अंधेरा! बुत परस्ती का अंधेरा! जुल्म व सितम का अंधेरा ! लोग इंसानियत, शराफत, हमदर्दी, अमानत व दयानत जैसे अल्फाज़ को जानते न थे। इंसानी खून की कोई कीमत न थी, ज़रा सी बात पर तलवारें निकल आतीं और खून की होली खेली जाती, फिर यह जंग नस्लों तक चलती रहती और खून के दरिया बहते रहते। कमज़ोरों को दबाना, गरीबों को सताना, जिनाकारी, बदकारी और शराबनोशी आम थी। औरत की हालत सबसे ज्यादा बुरी थी, उसके साथ जानवरों से बदतर सुलूक किया जाता था। एक खुदा को छोड़कर सैकड़ों अपने बनाये हुए खुदाओं की इबादत की जाती थी। यहां तक कि खुद काबा शरीफ के अन्दर 360 बुत रख दिये गये थे।


💦💐 ऐसे संगीन और होश उड़ाने वाले हालात में 12 रबीउल अव्वल, 20 अप्रैल सन् 571 ई0 बरोज़ पीर सुबह सादिक के वक़्त एक नूर चमका और उसकी रोशनी बढ़ती गयी। देखते ही देखते उसकी किरणें पूरी दुनिया में फैल गयीं, यानि मुस्तफ़ा जाने रहमत शम्ए बज़्मे हिदायत जनाबे मोहम्मदुर्रसूलुल्लाह ﷺ इस दुनिया में तशरीफ ले आये,.......✍


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🌹👉🏻 जब आपकी विलादत हुई तो एक हज़ार साल से रौशन फारसियों के आतिश कदे की आग बुझ गई। काबे में रखे हुए बुत औंधे हो गये। किसरा के महल के 14 कंगूरे ढह गये। शैतान रंज व गम में मारा-मारा फिरा।


*💎👉🏻हज़रते जिबरील तीन झण्डे लेकर आये एक पूरब दूसरा पश्चिम तीसरा काबे की छत पर लगा दिया तमाम फरिश्तों ने एक दूसरे को मुबारक बाद दी और सूरज को बड़ी रोशनी अता की गयी *(शिफा शरीफ)*


💐💟 आपकी विलादत के वक्त एक नूर ज़ाहिर हुआ जिससे आपकी वालिदा हज़रत आमिना ने शाम के महल देख लिये हज़रत आमना के पास हज़राते अम्बिया (अलैहिमुस्सलाम) तशरीफ लाये और फरमाया जब हुज़ूर ﷺकी

विलादत हो जाये तो उनका नाम मोहम्मद ﷺ रखना।


💟💦 आपकी वालिदा फरमाती हैं कि जब आपकी विलादत हो गयी तो मैंने देखा कि आपके सुर्मा और तेल लगा हुआ है। आप ख़तनाशुदा हैं और रेशम से ज्यादा मुलायम कपड़े में लिपटे हुये हैं। इसी बीच तीन शख्स आये उनके चेहरे चाँद की तरह चमक रहे थे एक के हाथ में चाँदी का लोटा दूसरे के हाथ में ज़बरजद (एक कीमती पत्थर) की तश्त तीसरे के हाथ में एक सफेद रेशम था, जिसमें एक मुहर चमक रही थी उनमें से एक शख्स ने चाँदी के लोटे से आपको सात बार गुस्ल दिया फिर आपके दोनो कांधों के बीच में मोहरे नबुव्वत लगा दी।


🌹👉🏻आपकी विलादत के सातवें दिन आपके दादा हज़रत अब्दुल मुत्तलिव ने आपकी तरफ से कुर्बानी की और कुरैश को खाने पर बुलाया।


🔸💐 सबसे पहले आपने हज़रत सुवैबा का दूध पिया फिर अपनी हज़रत आमिना का, इसके बाद बाकी तमाम अर्सा हज़रत हलीमा के दूध से सैराब होते रहे,✍….

*नेक्स्ट पोस्ट कंटिन्यू*✏️

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*मसलक ए आला हजरत को आम करेंगे!

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*पत्थर भी कलमा पढ़कर मुसलमान हो गए*


💐💦बचपन के हालात दूसरे अहवाल की तरह हुजूर का बचपन भी सबसे निराला और अनोखा था बचपन में आपने कभी कपड़ों में पाखाना पेशाब न किया और न। कभी बर्हना हुये और अगर कभी अचानक कपड़ा उठ भी गया तो फरिश्ते सतर छुपा देते थे।आपके इशारे पर चाँद झुक जाता और आपको रोने से बहलाता था।


🌹👉🏻एक बार आप चारागाह में थे कि फरिश्तों के सरदार हज़रत जिबरील आये,आपके सीना-ए-मुबारक को चाक किया और कल्ब मुबारक ( दिल ) को धोकर इल्म व इरफान से भर दिया फिर आपके सीना-ए-मुबारक को सी दिया।


💎👉🏻 जब आप 6 वर्ष के हो गये तो आपकी वालिदा अपनी एक बांदी ‘उम्मे एमन’ को साथ लेकर आपको मदीना शरीफ ले आयी कुछ दिन वहां गुज़ार कर। आपको लेकर मदीना वापस आ रही थीं कि ‘आबवा’ नामी जगह पर वालिदा का विसाल हो गया । वहां से उम्मे एमन आपको मदीना शरीफ ले आयीं।


💐💦 हज़रत आमिना के इन्तेकाल के बाद आपके दादा हज़रत अब्दुल मुत्तलिब ने आपको अपनी ज़िम्मेदारी में ले लिया और अपनी औलाद से बढ़कर चाहा लेकिन दादा की गोद में रहते हुये दो वर्ष ही गुज़रे थे कि उनका भी इन्तेकाल हो गया।


♦👉🏻दादा की वफात के बाद आप अपने चाचा अबु तालिब के यहां परवरिश पाने लगे,अबु तालिब ने भी किफालत का हक अदा कर दिया,आपके हर आराम का पूरा ख्याल रखा,,  पोस्ट जारी है..✍

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🌹👉🏻जवानी मुबारक..! जब आपने जवानी की मंज़िल में कदम रखा तो उन तमाम बुरे कामों से दूर रहे जो आम तौर से नौजावानों में पाये जाते हैं। सच्चाई,अमानत,दयानत और तमाम अच्छी बातें और बेहतरीन आदतें आपके अन्दर पायी जाती थीं।


💎👉🏻नौजवान आपको खेल कूद की तरफ बुलाते लेकिन आप उनके साथ कभी न जाते। कुरैश आपकी सच्चाई और अमानत को मानते थे । तिजारत ( व्यापार ) आप अपना मामला बहुत साफ रखते झूठ कभी न बोलते हमेशा सच बोलते इसी लिये लोग आपको “सादिक” यानि सच्चा और “अमीन” यानि अमानत दार कहने लगे।


🌹🕋मक्का की एक ख़ातून हज़रत खदीजा बहुत मालदार और बहुत ही शरीफ और पाक दामन ख़ातून थीं उनकी दरख्वास्त पर आपने तिजारत के इरादे से मुल्के शाम ( सीरिया ) का दूसरा सफर किया और बहुत जल्द सारा सामान। बेच कर मक्का वापस आ गये। आपकी अच्छी बातें और बेहतरीन आदतों को। देखकर हज़रत खदीजा ने आपके पास निकाह का पैगाम भेजा आपने मंजूर कर लिया और हज़रत ख़दीजा का निकाह आपसे हो गया उस वक्त आपकी उम्र शरीफ 25 वर्ष थी.

*पोस्ट..जारी..हैं..✍*

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