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🧾सच्ची हिकायत🧾
🌷★ सच्ची हिकायत ★🌷:
*❀⊱•⊰❀⊱• •⊰❀⊱•【 ﷽】•⊰❀⊱••⊰❀⊱•⊰❀*
*࿅ 🕋 يـــــاالــــلــــــّٰه ﷻ🌙 یارسول الله ﷺ🌷࿅ * *⚘︗︗︗︗︗︗︗︗︗︗︗︗︗︗︗︗︗⚘*
*║محمدﷺ║• فاطمہ║• علی ║• حسن║• حسین ║*
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*⚡【 हिकायत -⓵ 】⚡*
*•••➲ एक सहाबी हज़रत ह्बीब-उल्लाह बिन फिदयक् रदि अल्लहो तालाअन्हो एक मर्तबा कहीं जा रहे थे रास्ते में कहीं उनका पैर धोखे से एक सांप के अंडो पे पड गया और पिस गया उसके ज़हर् से अपकी आँखे सफ़ेद हो गई और नज़र जाती रही ,और बड़ी तकलीफ होने लगी आपके वालिद ये देख कर बहोत परेशान हो गए ,और हुज़ुर ﷺ की बारगाह मे अपने बेटे को लेकर हाज़िर हुए बाद सलाम के आपने हुज़ुर ए पुर अन्वार से सारा मामला बताया आप ﷺ ने देखा और अपना लुआब् ए देहन मुबारक उनकी आँखों में थोड़ा सा डाल दिया , हज़रत ह्बीब-उल्लाह बिन फिदयक् रदि अल्लहो तालाअन्हो कि आँखे फ़ौरन रौशन हों गई ! आप्की आँखों का रंग तो हमेशा सफेद ही रहा मगर उनकी बिनाई इतनी बढ़ गई कि रावी फर्माते है कि 80 साल की उम्र होने के बावजुद आप सुई मे धागा डाल लेते थे ! ये सब मेरे आक़ा के लुआबे दहन का असर है !*
*सुब्हानल्लाह !*
*सुब्हानल्लाह !*
•–⚀•RєԲ:➻┐
*#📗दलायल उल नबुवत ,सफह 167*
_*⚠सबक* अब जो लोग ये कहते है कि नबी हमारी तरह है , तो ज़रा ये भी देखलो कि प्यारे आका हुज़ुर ﷺ के लुआब् ए दहन में वो क़माल है जो आज की दवाओ मे नहीं , और जब तुम उनके बराबर हो तो अपने थूक को किसी इंसान के आँखों में दाल के दिखा दो अच्छी खासी आँख बर्बाद हो जायेगी_
_★ उनके जैसा ना कोई पैदा किया गया और ना होगा जिसकी सनद खुद ज़िब्रिल अलेहहिस्सलाम का कौल है आप फर्माते है या रसुलअल्लाह ﷺ मैंने पूरी कायनात मे आप जैसा दूसरा नहीं देखा ! और अल्लाह ने आप जैसा की दूसरा बनाया है नहीं है !_
_*🌹तभी तो आ'ला हज़रत इमामे अहले सुन्नत इमाम इश्क मुहब्बत इसी मन्ज़र को बयान करते हुए फर्माते है !*_
*"यही बोले सिदरा वाले"*
*"चमनो जहां के थाले"*
*"सभी मैंने छान डाले"*
*"तेरे पाए सा ना पाया"*
*"तुझे येक (1) ने येक (1) बनाया"*
_सुब्हानल्लाह !_
_सुब्हानल्लाह !_
नेक्स्ट पोस्ट कंटिन्यू......✍️
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*║محمدﷺ║• فاطمہ║• علی ║• حسن║• حسین ║*
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*⚡【 सच्ची हिकायत 】⚡*
*【 ⓟⓐⓡⓣ-②】*
👑 *हज़रत इमाम-ए-आज़म रज़िअल्लाहु अन्हु का एक दहरिया से मुनाज़रा !*
_★ हमारे इमाम हज़रत *इमाम-ए-आज़म रज़िअल्लाहु अन्हु* का एक *दहरिया (ख़ुदा की हस्ती का मुन्किर यानी नास्तिक )* से मुनाज़रा मुक़र्रर हुआ और मौजू-ए-मुनाज़रा (मुनाज़रे का शीर्षक) यही मसअला था कि आलम (दुनिया) का कोई ख़ालिक़ (आलम का बनाने और पैदा करने वाला) है या नहीं ? इस अहम् मसले पर मुनाज़रा और फिर इतने बड़े इमाम से। चुनांचे मैदान-ए-मुनाज़रा में दोस्त दुश्मन भी जमा हो गए मगर हज़रत इमाम-ए-आज़म वक़्ते मुक़र्ररा से बहुत देर के बाद मजलिस में तशरीफ़ लाए। दहरिया ने पूछा कि आपने इतनी देर क्यों लगाई ? आपने फ़रमाया: अगर मैं इसका जवाब यह दूं कि मैं एक जंगल की तरफ निकल गया था। वहां एक अजीब वाक़िया नज़र आया जिसको देखकर मैं हैरत में आकर वही खड़ा हो गया। वह वाक़िया यह था कि दरिया के किनारे एक दरख़्त था, देखते-ही-देखते वह दरख़्त खुद-ब-खुद कटकर ज़मीन पर गिर पड़ा, फिर खुद-ब-खुद उसके तख्ते तैयार हुए, फिर उन तख्तों की खुद-ब-खुद एक कश्ती तैयार हुई और खुद-ब-खुद ही दरिया में चली गई। खुद-ब-खुद वह एक दरिया के इस तरफ के मुसाफ़िरों को उस तरफ और उस तरफ के मुसाफ़िरों को इस तरफ लाने और ले जाने लगी। फिर हर एक सवारी से खुद ही किराया वसूल करती थी तो बताओ तुम मेरी इस बात पर यक़ीन क्र लोगे ? तो दहरिये ने यह सुनकर कहकहा लगाया और कहा: आप जैसा बुज़ुर्ग और इमाम ऐसा झूठ बोले तो तअज्जुब है भला यह काम कहीं खुद-ब-खुद हो सकते हैं। जब तक कोई करने वाला न हो, किसी तरह नहीं हो सकते_
🌷 _*हज़रत इमाम-ए-आज़म* ने फ़रमाया कि यह तो कुछ भी काम नहीं हैं। तुम्हारे नज़दीक तो इससे भी ज़्यादा बड़े-बड़े आलीशान काम खुद-ब-खुद बग़ैर किसी करने वाले के तैयार होते हैं। यह ज़मीन, आसमान, यह चाँद, यह सूरज, यह सितारे, यह बाग़ात यह सदहा क़िस्म के रंगीन फूल शीरीं (मीठे) फल, यह पहाड़, यह चौपाए (जानवर), यह इंसान और यह सारी खुदाई बग़ैर बनाने वाले के तैयार हो गयी है। अगर एक कश्ती का बग़ैर किसी बनाने वाले के तैयार हो गयी है। अगर एक कश्ती का बग़ैर किसी बनाने वाले के खुद-ब-खुद बन जाना झूठ है तो सारे जहां का बग़ैर बनाने वाले के बन जाना इससे भी ज़्यादा झूठ है।_
*⚠👉🏻 दहरिया आपकी तक़रीर सुनकर दम-ब-खुद हैरत में आ गया और फ़ौरन अपने अक़ीदे से ताइब होकर मुसलमान हो गया।*
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*(#📗तफ़सीरे कबीर जिल्द 1, सफा 221)*
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*⚡【 सच्ची हिकायत 】⚡*
*【 ⓟⓐⓡⓣ-③】*
🌹 _*हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ रज़ियल्लाहु अन्हु और एक दहरिया मल्लाह !*_
🎯 _ख़ुदा की हस्ती के एक मुनकिर की ( जो मल्लाह था ) हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ रज़ियल्लाहु अन्हु से बातचीत हुई। वह मल्लाह कहता था कि ख़ुदा कोई नहीं ( मआज़ल्लाह! ) हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ रज़ियल्लाहु अन्हु ने उससे फ़रमाया तुम जहाज़रान ( जहाज़ चलाने वाले ) हो तो यह बताओ कभी समुंद्री तूफ़ान से भी तुम्हारा सामना पड़ा। वह बोला हां! मुझे अच्छी तरह याद है कि एक मर्तबा समुन्द्र के सख्त तूफ़ान में मेरा जहाज़ फंस गया था। हज़रत इमाम ने फ़रमाया फिर क्या हुआ ? वह बोला मेरा जहाज़ ग़र्क़ हो गया और सब लोग जो उस पर सवार थे डूबकर हलाक हो गए। आपने पूछा: तुम कैसे बच गए ? वह बोला: मेरे हाथ जहाज़ का एक तख्ता आ गया मैं उसी के सहारे तैरता हुआ साहिल के कुछ करीब पहुच गया। मगर अभी साहिल दूर ही था कि तख्त भी हाथ से छूट गया फिर मैंने खुद ही कोशिश शुरू कर दी। हाथ पैर मारकर किसी न किसी तरह किनारे आ लगा। हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ रज़ियल्लाहु फरमाने लगे!_
*अब सुनो:* _जब तुम अपने जहाज़ पर सवार थे तो तुम्हे अपने जहाज़ पर एतमाद व भरोसा था कि यह जहाज़ पर लगा देगा। फिर वह डूब गया तो फिर तुम्हारा एतमाद व भरोसा उस तख्ते पर रहा जो इत्तिफ़ाक़न तुम्हारे हाथ लग गया था। मगर जब वह भी तुम्हारे हाथ से छूट गया तो अब सोचकर बताओ कि इस बेसहारा वक़्त और बेचारगी के आलम में भी क़्यों तुम्हें यह उम्मीद थी कि अब भी कोई बचाना चाहे तो मैं बच सकता हूँ ? वह बोला: हाँ यह उम्मीद तो थी। हज़रत ने फ़रमाया - मगर वह उम्मीद थी किस से कि कौन बचा सकता है ? अब वह देहरिया खामोश हो गया। आपने फ़रमाया - खूब याद रखो! इस बेचारगी के आलम में तुम्हे जिस ज़ात पर उम्मीद थी वही ख़ुदा है और उसी ने तुम्हें बचा लिया था। मल्लाह यह सुनकर होश में आ गया और इस्लाम ले आया !_
*📝 सबक़ :-* _ख़ुदा है, और यक़ीनन है। मुसीबत के वक़्त ग़ैर-इख़्तेयारी तौर पर भी ख़ुदा की तरफ ख़्याल जाता है। गोया ख़ुदा की हस्ती का इख़्तियार फ़ितरी चीज़ है !_
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*(#📗तफ्सीरे कबीर ,जिल्द 1,सफ़ह 221)*
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*⚡【 सच्ची हिकायत 】⚡*
*【 ⓟⓐⓡⓣ-④】*
*👤एक अक़्लमंद बुढ़िया🎡*
*🌷 एक आलिम ने एक बुढ़िया को चरखा कातते देखकर फ़रमाया कि बड़ी बी! सारी उम्र चरखा ही काता या कुछ अपने खुदा की पहचान की?*
_👉🏿 बुढ़िया ने जवाब दिया कि बेटा सबकुछ इसी चरखे में देख लिया।_
_👉🏻फ़रमाया:बड़ी बी! यह बताओ कि खुदा मौजूद है या नहीं?_
_👉🏿बुढ़िया ने जवाब दिया कि हाँ! हर घड़ी और रात दिन हर वक़्त खुदा मौजूद है।_
_👉🏻 आलिम ने पूछा मगर इसकी दलील?_
_👉🏿 बुढ़िया बोली दलील मेरा यह चरखा।_
_👉🏻 आलिम ने पूछा: यह कैसे?_
_👉🏿 वह बोली वह ऐसे कि जब तक मैं इस चरखे को चलाती रहती हूँ यह बराबर चलता रहता है और जब मैं इसे छोड़ देती हूँ तब यह ठहर जाता है। तो जब इस छोटे से चरख़े को हर वक़्त चलाने की ज़रूरत है तो ज़मीन व आसमान, चांद सूरज के इतने बड़े-बड़े चरख़ों को किस तरह चलाने वाले की ज़रूरत न होगी ?_
_👉🏿पस इसी तरह ज़मीन व आसमान के चरख़े चलने वाला चाहिए। जब तक वह चलाता रहेगा यह सब चरख़े चलते रहेंगे और जब वह छोड़ देगा तो ठहर जाएंगे। मगर हमने कभी ज़मीन व आसमान, चांद सूरज को ठहरे नहीं देखा तो जान लिया कि उनका चलाने वाला हर घड़ी मौजूद है !_
👉🏻 _मौलवी साहब ने सवाल किया कि आसमान व ज़मीन का चरखा चलाने वाला एक है या दो ?_
_👉🏿बुढ़िया ने जवाब दिया कि एक है। दावे की दलील भी यही मेरा चरख़ा है। क्योंकि जब इस चरख़े को अपनी मर्ज़ी से एक तरफ चलाती हूँ यह चरख़ा मेरी मर्ज़ी से एक ही तरफ चलता है और अगर कोई दूसरी चलाने वाली भी होती तो यह मेरी मददगार होकर मेरी मर्ज़ी के मुताबिक चरख़ा चलाती। तब तो चरख़े की रफ़्तार तेज़ हो जाती और इस चरख़े की रफ़्तार में फ़र्क़ आकर नतीजा हासिल न होता। अगर वह मेरी मर्ज़ी के खिलाफ़ और मेरे मुख़ालिफ़ ज़ेहत पर चलाती तो चरख़ा चलने से ठहर जाता या टूट जाता। मगर ऐसा नहीं होता। इस वजह से कि दूसरी चलाने वाली नहीं है। इसी तरह आसमान व ज़मीन का चलाने वाला अगर कोई दूसरा होता तो ज़रूर आसमानी चरख़े की रफ़्तार तेज़ होकर दिन-रात का निज़ाम में फ़र्क़ आ जाता या चलने से ठहर जाता या टूट जाता। जब ऐसा नहीं है तो ज़रूर आसमान व ज़मीन के चरख़े को चलाने वाला एक ही है !_
•–⚀•RєԲ:➻┐ *(📗सीरतुस्सालिहीन सफ़ा 3)*
📝 *सबक़ :-* *_दुनिया की हर चीज़ अपने ख़ालिक़ के वुजूद और उसकी यक्ताई पर शाहिद है। मगर अक़्ले सलीम दरकार है।_*
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*⚡【 सच्ची हिकायत 】⚡*
*【 ⓟⓐⓡⓣ-⑤】*
*🌷एक नूरानी तारा🌟*
_*👑 एक मर्तबा हमारे प्यारे आ'का हुज़ूर सल्ललाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत जिब्रईल अमीन अलैहिस्सलाम से दरयाफ्त फ़रमाया :*_
_कि ऐ जिब्रईल! तुम्हारी उम्र कितनी है? तो जिब्राईल ने अर्ज़ किया :_ _*हुज़ूर !*_ _मुझे कुछ ख़बर नहीं। हां, इतना जानता हूं कि चौथे हिजाब में एक नूरानी तारा सत्तर हज़ार बरस के बाद चमकता था। मैंने उसे बहत्तर हज़ार मर्तबा चमकते देखा है।_
_*हुज़ूर अलैहिस्सलाम ने यह सुनकर फ़रमाया :*_
_" मेरे रब की इज़्ज़त की क़सम! मैं ही वह नूरानी तारा हूँ !_
•–⚀•RєԲ:➻┐
*(#📚रुहुल ब्यान जिल्द 1, सफा 974 )*
*📲सबक :->* _हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम काइनात की हर चीज़ से पहले पैदा फरमाए गए है। आपका नूर-ए-पाक उस वक़्त भी था जबकि न कोई फरिश्ता था, न कोई बशर, न ज़मीन थी, न आसमान और न कोई शय, फसल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम !_
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*⚡【 सच्ची हिकायत 】⚡*
*【 ⓟⓐⓡⓣ-⑥】*
*⚜️यमन का बादशाह🎯*
👉🏻 _किताबुल-मुस्तज़रिफ और हुज्जतुल्लाहि अलल-आलमीन और तारीख़े इब्ने आसकिंर में है क़ि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक हज़ार साल पेशतर यमन का बादशाह तुब्बा अव्वल हिमयरी था। एक मर्तबा वह अपनी सलतनत के दौरे को निकला। बारह हज़ार आलिम और हकीम एक लाख बत्तीस हज़ार सवार और एक लाख तेरह हज़ार प्यादह अपने हमराह लिए और इस शान से निकला की जहां भी पहुँचता उसकी शान व शौकत शाही देखकर मख़लूक़े खुदा चारों तरफ से नज़ारा को जमा हो जाती थी यह बादशाह जब दौरा करता हुआ मक्का मोअज़्ज़मा पहुंचा तो अहले मक्का से कोई उसे देखने न आया। बादशाह हैरान हुआ और उसने अपने वज़ीरे आज़म से इसकी वजह पूछी तो उसने बताया की इस शहर में एक घर है जिसे बैतुल्लाह कहते हैं। उसकी और उसके खादिमो की यहां की जो यहां के बाशिंदे हैं तमाम लोग बेहद ताज़ीम करते हैं और जितना आपका लश्कर है,इससे कहि ज़्यादा दूर और नज़दीक के लोग इस घर की ज़ियारत को आते हैं और यहां के बाशिंदो की खिदमत करके चले जाते हैं। फिर आपका इनके ख्याल में क्यों आए? यह सुनकर बादशाह को गुस्सा आया और क़सम खाकर कहने लगा की मैं इस घर को खुदवा दूंगा और यह के बाशिंदो को क़त्ल कराऊंगा। यह कहना था बादशाह के नाक,मुँह और आखों से ख़ून बहना शुरू हो गया। ऐसा बदबूदार माददा बहने लगा की उसके पास बैठने की भी किसी की ताकत न रही। इस मर्ज़ का इलाज किया गया मगर अच्छा नहीं हुआ। शाम के वक़्त बादशाह के साथी आलिमों में से एक आलिमे रब्बानी तशरीफ़ लाये और नब्ज़ देखकर फ़रमाया की मर्ज़ आसमानी है और इलाज ज़मीन का हो रहा है। ऐ बादशाह!आपने अगर कोई बुरी नियत की है तो फ़ौरन उससे तौबा कीजिये। बादशाह ने दिल-ही-दिल में बैतुल्लाह शरीफ और खुद्दामे काबा के मुताल्लिक अपने इरादे से तौबा की। तौबा करते ही उसका वह खून और माददा बहना बंद हो गया और फिर सेहत की ख़ुशी में उसने बैतुल्लाह शरीफ को रेशमी ग़िलाफ़ चढ़ाया और शहर के हर बाशिन्दे को सात-सात रेशमी जोड़े नज़्र किए।_
👉🏻 _फिर यहाँ से चलकर जब मदीना मुनव्वरा पहुंचा तो हमराही आलिमों ने (जो आसमानी किताबों के आलिम थे) वहां की मिटटी को सूंघा और कंकरियों को देखा और नबी आख़िरुज़्ज़मां की हिजरतगाह की जो अलामतें उन्होंने पढ़ी थी उनके मुताबिक़ उस सरज़मीन को पाया तो आपस में अहद कर लिया कि हम यहाँ ही मर जायेंगे। मगर इस सरज़मीन को न छोड़ेंगे। अगर हमारी किस्मत ने साथ दिया तो कभी-न-कभी जब नबी आख़िरुज़्ज़मां (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) यहाँ तशरीफ़ लाएंगे, हमें भी ज़्यारत का शर्फ हासिल हो जायेगा, वरना हमारी क़ब्रो पर तो ज़रूर ही कभी-न-कभी उनकी जूतियों की मुक़द्दस ख़ाक उड़कर पड़ जाएगी जो हमारी निजात के लिए काफ़ी है।_
👉🏻 _यह सुनकर बादशाह ने उन आलिमों के वास्ते चार सौ मकान बनवाये।और उस बड़े आलिमें रब्बानी के मकान के पास हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खातिर एक दो मंजिला उमदा मकान तैयार कराया और वसीयत कर दी कि जब आप तशरीफ लाए तो यह मकान आपकी आरामगाह होगी और उन चार सौ उलमा की काफी इमदाद भी की। कहा, तुम हमेशा यहीं रहो। फिर बड़े आलिमे रब्बानी को एक खत लिख कर दिया और कहा कि मेरा यह खत उस नबी आखिरुज़्ज़मां सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खिदमते अक़दस में पेश कर देना और अगर जिंदगी भर तुम्हें हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़्यारत का मौक़ा न मिले तो अपनी औलाद को वसीयत कर देना कि नसलन बाद नस्लिन मेरा यह खत महफूज रखें। हत्ता कि सरकारे अक़दस सल्ल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में पेश किया जाए। यह कहकर बादशाह वहां से चल दिया।_
👉🏻 _वह खत नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में एक हज़ार साल बाद पेश हुआ कैसे हुआ? और खत में क्या लिखा था? सुनिए और अज़मते मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का एतराफ़ फ़रमाइए। खत का मज़मून यह था।_
👉🏻 _कमतरीन मख़लूक़ तुब्बा अव्वल हिमयरी की तरफ से शफी-उल मुज़मबीन सय्यदुल-मुरसलीन मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अम्मा बाद!_
_☝🏻ऐ अल्लाह के हबीब मैं आप पर ईमान लाता हूं और जो किताब आप पर नाज़िल होगी उस पर भी ईमान लाता हूं और मैं आपके दीन पर हूँ। पस अगर मुझे आपकी ज्यारत का मौका मिल गया तो बहुत अच्छा व ग़नीमत और अगर मैं आपकी ज्यारत न कर सका तो मेरी शफाअत फ़रमाना और क़्यामत के रोज़ मुझे फ़रामोश न करना। मैं आपकी पहली उम्मत में से हूं और आपके साथ आपकी आमद से पहले ही बैअत करता हूं। मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह एक है और आप उसके सच्चे रसूल हैं। शाहे यमन का यह खत उन चार सौ आलिमों की नस्ल-दर-नस्ल द्वारा ज
ान की तरह हिफाज़त की जाती रही। यहां तक कि एक हजार साल का वक़्त गुज़र गया। उन आलिमों की औलाद इस कसरत से बढ़ी की मदीने की आबादी में कई गुना इज़ाफा हो गया और यह खत दस्त-ब-दस्त मअ वसीयत के उस बड़े आलिमे रब्बानी की औलाद में से हजरत अबू ऐय्यूब अंसारी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के पास पहुंचा और आपने वह खत गुलामे खास अबू लैला की हिफाज़त में रखा।_
_👉🏻 जब हुज़ूर सल्लल्लाहु अलेहि वसल्लम मक्का मोअज़्ज़मा हिजरत फरमा कर मदीना मुनव्वरा पहुंचे और मदीना मुनव्वरा की अलवदाई घाटी सनीयात की घाटियों से आपकी ऊंटनी नमूदार हुई और मदीने के खुशनसीब लोग महबूबे खुदा का इस्तिक़बाल करने को जूक़ दर जूक़ (भीड़-की-भीड़) आ रहे थे। कोई अपने मकानों को सजा रहा था, कोई दावत का इंतजाम कर रहा था और सब यही इसरार कर रहे थे कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मेरे घर तशरीफ फरमा हो । हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: कि मेरी ऊँटनी की नकील छोड़ दो। जिस घर में यह ठहरेगी और बैठ जाएगी, वही मेरी क़्यामगाह (रहने की जगह) होगी। चुनाचे जो दो मंजिला मकान शाहे यमन तुब्बा ने हुजूर की खातिर बनाया था, वह उस वक्त हजरत अबू ऐय्यूब अंसारी रजियल्लाहु तआला अन्हु के पास था। उसी में हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ऊंटनी जाकर ठहर गई।_
_👉🏻 लोगों ने अबू-लैला को भेजा कि जाओ हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को शाहे यमन तुब्बा का ख़त दे आओ। जब अबू-लैला हाजिर हुआ तो हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उसे देखते ही फरमाया : तू अबू-लैला है?_
_👉🏻 यह सुनकर अबू-लैला हैरान हो गया। हुजूर ने फिर फरमाया: मैं मुहम्मद रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) हूँ, शाहे यमन का जो मेरा खत तुम्हारे पास है, लाओ। वह मुझे दो। चुनाचे अबू-लैला ने वह खत दिया और हुजूर ने पढ़कर फ़रमाया नेक भाई तुला को आफ़रीँ व शाबाश है।_
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#📚 मीज़ानुल अद्यान सफा 177
*📝सबक :->* : हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का हर जमाने में चर्चा रहा है। खुशकिस्मत अफराद ने हर दौर में हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से फ़ैज़ पाया। हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अगली पिछली तमाम बातें जानते हैं। यह भी मालूम हुआ कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आमद-आमद की ख़ुशी में मकानों और बाज़ारो को सजाना और सजावट करना सहाबाए किराम की सुन्नत है। फिर आज अगर हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आमद की खुशी में बाज़ारो को सजाया जाए, घरों की सजावट की जाए और जुलूस निकाला जाए तो उसे बिदअत कहने वाला खुद क्यों बिदअती न होगा?
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*║محمدﷺ║• فاطمہ║• علی ║• حسن║• حسین ║*
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*⚡【 सच्ची हिकायत 】⚡*
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💚 *हजरत सिद्दीक अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु का ख़्वाब*
🌷 _हज़रत सिद्दीक अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु क़ब्ल अज़ इस्लाम एक बहुत बड़े ताजिर थे। आप तिजारत के सिलसिले में मुल्के शाम में तशरीफ़ फरमा थे की एक रात ख्वाब में देखा कि चांद और सूरज आसमान से उतरकर उनकी गोद में आ पड़े हैं। हज़रत सिद्दीक अकबर रज़ियल्लाहु अन्हु ने अपने हाथ से चांद और सूरज को पकड़ कर अपने सीने से लगाया और उन्हें अपनी चादर के अंदर कर लिया। सुबह उठे तो एक ईसाई राहिब के पास पहुंचे और उससे इस ख्वाब की ताबीर पूछी। राहिब ने पूछा कि आप कौन हैं ?_
_आपने फरमाया: मैं अबू-बक्र हूं। मक्का का रहने वाला हूं।_
_राहिब ने पूछा: कौन से क़बीले ले से हैं ?_
_आप ने फरमाया: बनू हाशिम से और जरिया एक मआश क्या है? फरमाया:_
_राहिब ने कहा-तो फिर गौर से सुन लो !_
_नबी आख़िरुज़्ज़मा है है हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ ले आए हैं। वह भी इसी कबीला बनी हाशिम से हैं और वह आखिरी नबी हैं। अगर वह ना होते तो खुदाए ताला ज़मीन व आसमान को पैदा ना फरमाता और किसी नबी को भी पैदा ना फरमाता। वह अव्वलीन व आख़रीन के सरदार है। ए अबू बक्र! अब तुम उसके दीन में शामिल होगे और उसके वजीर और उसके बाद उसके खलीफा बनोगे। यह है तुम्हारे ख्वाब की ताबीर। सुन लो!_
_मैंने इस नबी पाक की तारीफ व नअत तौरेत व इंजील में पढ़ी है। मैं इस पर ईमान ला चुका हूं और मुसलमान हूं। लेकिन ईसाइयों के खौफ से अपने ईमान का इजहार नहीं किया।_
_हज़रत सिद्दीक़ अकबर रजियल्लाहु अन्हु ने जब अपने ख़्वाब की ताबीर सुनी तो इश्क़े रसूल का जज़्बा पैदा हुआ और आप फ़ौरन मक्का मोअज़्ज़मा वापस आए। हुजूर की तलाश करके बारगाहे रिसालत में हाज़िर हुए और दीदार ए पुरअनवर से अपनी आंखों को ठंडा किया।_
_👑 हुजूर ने फरमाया अबू बक्र! :- तुम आ गए, लो अब जल्दी करो और दीने हक़ में दाखिल हो जाओ सिद्दीक़े अकबर ने अर्ज किया: बहुत अच्छा। हुज़ूर! अगर कोई मौजिज़ा तो दिखाइए। हुजूर ने फरमाया: वह ख्वाब जो शाम में देख कर आए हो और उसकी ताबीर जो उस राहिब से सुन कर आए हो मेरा ही तो मौजिज़ा है। सिद्दीक़ अकबर ने यह सुनकर अर्ज किया: सच फ़रमाया ऐ अल्लाह के रसूल आपने। मैं गवाही देता हूं कि आप वाक़ई अल्लाह के सच्चे रसूल हैं !_
•–⚀•RєԲ:➻┐
*(#📚 जामिउल मुजिज़ात साफा 4)*
*📝सबक :-* _हजरत अबू-बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाह हू अन्हु हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वज़ीर और ख़लीफ़ा बरहक़ हैं। हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कोई बात छुपी नहीं रहती। आप दानाए गुयूब है। यह भी मालूम हुआ कि तमाम मख़लूक़ हमारे हुजूर के ही सदक़ा में पैदा की गई है। अगर हुजूर ना होते तो कुछ भी ना होता।_
🌻 _वो जो ना थे तो कुछ ना था वो जो ना हो तो कुछ ना हो,_
🌻 _जान है वो जहान की , जान है तो जहान है !_
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*🏁 مسلک اعلی حضرت سلامت رہے 🏁*
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*⚡【 सच्ची हिकायत 】⚡*
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*👤 इबलीस का पोता*
_🌸 बैहक़ी में अमीरुल मोमिनीन हजरत उमर फारूक रजि अल्लाह हू अन्हो से रिवायत है कि एक रोज हम हुजूर सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम के हमराह तहामा की एक पहाड़ी पर बैठे थे कि अचानक एक बूढ़ा हाथ में असा लिए हुए हुजूर सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम के सामने हाजिर हुआ और सलाम अर्ज किया, !_
_♛ हुज़ुर ﷺ ने जवाब दिया और फरमाया इसकी आवाज जिन्नो की सी है फिर आपने उससे दरयाफ्त किया तू कौन है ?_
_❥ उसने अर्ज किया मैं जिन हूं मेरा नाम हामा है बेटा हीम और हीम बेटा लाकीस का और लाकीस बेटा इब्लीस का है !_
_♛ हुज़ुर ﷺ ने फरमाया तो गोया तेरे और इब्लीस के दरमियान सिर्फ दो पुश्ते हैं ,फिर फरमाया अच्छा यह बताओ तुम्हारी उम्र कितनी है ?_
_❥ उसने कहा या रसूल अल्लाह जितनी उम्र दुनिया की है उतनी ही मेरी है कुछ थोड़ी सी कम है हुजूर जिन दिनों काबील ने हाबील को कत्ल किया था, उस वक्त में कई बरस का बच्चा ही था, मगर बात समझता था पहाड़ों में दौड़ता फिरता था , और लोगों का खाना वा गल्ला चोरी कर लिया करता था , लोगों के दिलों में वसवसे भी डाल देता था कि वह अपने खवीश् व अकरबा से बदसलूकी करें !_
_♛ हुज़ुर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया तब तो तुम बहुत बुरे हो उसने , अर्ज की हुजूर मुझे मलामत ना फरमाइए इसलिए कि अब मैं हुजूर की खिदमत में तौबा करने हाजिर हुआ हूं ,_
_❥ या रसूल अल्लाह मैंने हजरते नूह अलैहिस्सलाम से मुलाकात की है 1 साल तक उनके साथ उनकी मस्जिद में रहा हूं , इससे पहले मैं उनकी बारगाह में भी तौबा कर चुका हूं ,हजरत हुद हजरत याकूब और हजरत यूसुफ अलैहिस्सलाम की सोहबतो में भी रह चुका हूं ,उनसे *तौरात* सीखी है और उनका सलाम हजरत ईसा अलैहिस्सलाम को पहुंचाया था,_
_❥ ऐ नबियों के सरदार हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने फरमाया था कि अगर तू मुहम्मद सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम से मुलाकात करें तो मेरा सलाम उन को पहुंचाना , सो हुज़ुर ﷺ अब मैं इस अमानत से सबुकदोश् होने को हाजिर हुआ हूं , और यह भी आरजू है कि आप अपनी ज़बाने हक़ तर्र्जुमान से मुझे कुछ कलाम-उल्लाह् तालीम फरमाइए !_
_♛ हुजूर अलैहिस सलाम ने उसे सूरह मुरसलात् , सूरह अम्मायतासाअलुन, सूरह इख्लास् और कुछ और सूरतो कि आयते तालीम फरमाई और , यह भी फरमाया कि ऐ हामा ! जिस वक्त तुम्हें कोई एतराज हो फिर मेरे पास आ जाना और हमसे मुलाकात करना ना छोड़ना !_
_❈ हज़रत उमर रजि अल्लाहु अन्हु फरमाते हैं हुजूर अलैहिस्सलाम ने दोबारा अपने विसाल से पहले हामा के बाबत फिर कुछ ना फरमाया खुदा जाने हामा अभी जिंदा है या मर गया !_
•–⚀•RєԲ:➻┐
*#📚 खुलासतुल् तफ्सीर् सफह् 170*
*📜सबक :-* *हमारे हुज़ुर ﷺ रसुल-उल-सकलैन है तमाम मखलुक् मे अव्वल है और आपकी बारगाह जिन्नो, इंसान का मर्कज़् है, इंसान भी फलाह् पाता है और जिन्नो ,हैवान् ,चरिन्द - परिन्द् ,सब इनसे फैज़ हासिल करते है, !*
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*⚡【 सच्ची हिकायत 】⚡*
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*★🗡️ मुक़द्दस क़ातिल⚔️ ★*
_❥-_◆ मक्का मोअज़्ज़मा मैं एक काफिर हुबली नामी रहता था उसका एक सोने का बुत था जिसे वह पूजा करता था। एक दिन उसमे हरकत पैदा हुई और वह बोलने लगा। उस बुत ने
कहा ऐ लोगों ! मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल नहीं है, उनकी हरगिज़ तस्दीक ना करना। वलीद बहुत खुश हुआ और बाहर निकलकर अपने दोस्तों से कहा मुबारकबाद आज मेरा माबूद बोला है साफ-साफ उसने कहा है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल नहीं है। यह सुनकर लोग उसके घर आए तो देखा कि वाकई उसका बुत यह जुमले दोहरा रहा है। वह लोग भी बहुत खुश हुए । दूसरे दिन एक आम एलान के ज़रिये वलीद के घर में एक बहुत बड़ा इज्तिमा हो गया ताकि उस दिन भी लोग बुत के मुँह से वही जुमले सुनें। जब बड़ा इज्तिमा हो गया तो उन लोगों ने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को भी दावत दी ताकि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खुद भी तशरीफ़ लाकर बुत के मुंह से वही बकवास सुन जाएं। चुनांचे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भी तशरीफ लाएं । जब हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ लाए तो बुत बोल उठा:
ऐ मक्का वालों ! खूब जान लो कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के सच्चे रसूल है । इनका हर इरशाद सच्चा है और इनका दीन बरहक़ है। तुम और तुम्हारे बुत झूठे , गुमराह और गुमराह करने वाले हैं । अगर तुम इस सच्चे रसूल पर ईमान ना लाओगे तो जहन्नम में जाओगे। पस अकलमंदी से काम लो और इसी सच्चे रसूल की गुलामी इख्तियार कर लो।
*_❥- बुत का यह वाज़ सुनकर वलीद बड़ा घबराया और अपने माबूद को पकड़ पर जमीन पर दे मारा और उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिये।*
_♛ हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फातिहाना तौर पर वापस हुए तो रास्ते में एक घोड़े का सवार, जो सब्ज़ पोश था हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिला। उसके हाथ में तलवार थी जिससे खून बह रहा था । हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया तुम कौन हो ? वह बोला हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मैं जिन्न हूं और आपका गुलाम और मुसलमान हूं। जबले तूर पर रहता हूं मेरा नाम मुहिन बिन अलअबरह है। मैं कुछ दिनों के लिए कहीं बाहर गया हुआ था आज घर वापस आया तो मेरे घरवाले रो रहे थे। मैंने वजह दरयाफ्त की तो मालूम हुआ कि एक काफिर जिन्न, जिसका नाम मुसफिर था वह मक्का में आकर वलीद के बुत में घुसकर आपके मुतालिक बकवास कर गया है और आज फिर गया है ताकि फिर बुत में घुसकर आप के मुतालिक बकवास करें । या रसूलल्लाह ! सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुझे सख्त गुस्सा आया। मैं तलवार लेकर उसके पीछे दौड़ा और उसे रास्ते ही में कत्ल कर दिया और फिर मैं खुद वलीद के बुत के अंदर घुस गया । आज जिस कदर तकरीर की है मैंने ही की है या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
*_♛-* हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह किस्सा सुना तो आपने बड़ी मसर्रत का इज़हार किया और इस अपने गुलाम जिन्न के लिए दुआ फरमाई
*📗जामिउल-मुजिज़ात सफहा 7)*
*_❥ सबक-हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जिन्नों के भी रसूल हैं। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान पाक के खिलाफ गुस्ताखी सुनने सुनाने के लिए कोई जलसा करना यह वलीद जैसे काफिर की सुन्नत है।*
*📚 सच्ची हिक़ायत ,हिन्दी पेज 23,25)*
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*📖 SACHCHI HIQAYAT POST : 10*
*⊰ ══════ •⊰❂⊱• ══════ ⊰*
*➡️ HIQAYAT NO. 10*
_*🌼 RAKAANA PAHALWAN*_
_🌹👉Bani hashim me ek mushrik shakhs rakana nami bada jabarrdast or diler pahalwan tha. Uska record tha ke use kisi ne na giraya tha . wo ek jangle me ek ijm kahte the. Raha karta tha. Bakriya charata tha or bada maldar tha. Ek din huzoor sallAllahu alaihi wasallam akele us taraf ja nikle rakana ne aapko dekha to aapke paas aakar kahne laga, *ae Muhammad tu hi wo hai jo hamare laat wa ujja ki tohin wa taukir karrta hai. or apne ek khuda ki badai bayan karta hai.*_
_🌷👉Agar mera tujhse taalluk rahmi na hota to aaj me tumhe mar dalta. Aa mere sath kushti kar tu. Apne khuda ko pukar me aapne laat wa ujja ko pukarta hu. Dekhe to tumhare khuda me kitni taaqaat hai. huzoor ne farmaya agar kushti hi karna hai to me tayyar hu. Rakana ye jawab sunkar awwal to hairan hua. aur fir bade guroor ke sath mukable me khada ho gya._
*_💫 Huzooor sallAllahu ta'ala alihi wasallam ne pahli hi jhapat me use gira liya or uske seene par beth gaye. Rakana umr me pahli martaba girkar bada sharminda hua or hairan bhi or bola muhammad mere seene se uth khada ho. Mere laat wa ujja ne meri taraf dhyan na kiya . ek bar dubara kushti ke liye rakana bhi utha. huzoor ne dusri martaba bhi rakana ko pal bhar me gira liya. Rakana ne kaha ae muhammad maloom hota hai aaj mera laat wa ujja mujh par naraj hai. or tumhara khuda tumhari madad kar raha hai. Or khair ek marataba or aao ab ki dafa laat wa ujja jarur meri madad karenge._*
*_💐👉Huzoor ne teesri martaba ki kushti bhi manzoor farmaai aur teesri martaba bhi huzoor ne use pachaad diya ab to rakana bada sharmindha hua aur bola ae mohammad ! meri in bakriyo main jitni chaho utni bakriya le lo huzoor ne farmaya rakana muje tumahare mal ki jarurat nhi, ha musalmaan ho jaao taaki jahnnam se bach jaao vo bola ya mohammad ! musalaman to ho jao magar nafs zizakhta hai ki madina aur nawah ki aurte aur bacche kya khenge ki itne bade phelwaan ne shikhast khai aur musalmaan ho gya ._*
*💛👉Huzoor ne farmaaya to tera mall tujhi ko Mubarak ! ye kahkar aap wapas tashrif le aaye, idher hazrat abu bakar aur umer radiallahu anhuma aapki talash main the aur malum krke ke huzoor wadiye izm ki taraf tashrif le gye hai. mutafakkir the ki is taraf rakana phelwaan rehta hai. mubada huzoor ko iza de huzoor ko waapas tashrif late dekhkar dono hozoor ki khidmat main haazir huye aur arz kiya ya rasulallah aap idher akele kyu tashrif le gye the jab ki us taraf rakana phelwaan jo bada jowrawar aur dushmane islaam hai rahta hai ? huzoor ye sunker muskuraye aur ye farmaya jab mera Allah har waqt mere saath hai fir kisi rakana wakana ki kya parwah hai. lo is rakana ki phelwani ka kissa suno chunaanche*
_Huzoor ne saara kissa sunaya siddiuqe wa farook sun sun kar khush hone lage. Or arz kiya huzoor woh to aisa pahlwan tha ke aaj tak use kisi ne giraya nahi tha. Use girana Allah ke rasool ka hi kam hai._
*🌻”SABAQ”* :- _hamare huzoor sallAllahu taala alaihi wasallam har fazlo kamal ke munabbe wa makhjan hai. aur duniya ki koi taqat huzoor ke muqable me nahi thahr sakti . or mukhalifin ke dil bhi huzoor ke fazlo kamaal ko jante hai. lekin duniya ki aar se uska inkar nahi karte ._
*📚Sachchi hiqayat safa 34,35*
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*📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 11 📃*
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▶️ *हिकायत नं. - 11*
*👑 खालीद की टोपी 👑*
*🔊👉 हजरत खालीद बिन वलीद (रजी अल्लाहु अन्हु) जो अल्लाह की तलवारो मे से एक तलवार थे। आप जिस मैदाने जंग भे तशरिफ ले जाते। अपने टोपी को जरुर सर पर रख कर ले जाते और हमेशा फतह ही पाकर लौटते। कभी शिकस्त का मुंह न देखते।*
☘👉 एक मर्तबा मर्तबा जंगे यरमुक मे जबकि मैदाने जंग गर्म हो रहे था हजरत खालीद की टोपी गुम हो गयी। आपने लड़ना छोड़कर टोपी की तलाश शुरु कर दी। लोगो ने जब देखा की तीर और पत्थर बरस रहे है। तलवार और नेजा अपना काम कर रहे है। मौत सामने है। इस आलम मे खालीद को अपनी टोपी की पड़ी है। वह उसी को ढ़ुंढ़ने मे मसरुफ हो गये। तो उन्होने हजरत खालीद से कहा: जनाब टोपी का ख्याल छोड़ीये और लड़ना शुरु किजीए। हजरत खालीद ने उनकी इस बात की परवाह ना की और टोपी की बदस्तुर तलाश शुरु रखी।
*🌺👉 आखिर टोपी उनको मिल गयी तो उन्होने खुश होकर कहा: भाईयों! जानते हो मुझे यह टोपी इतनी अजीज क्यों है? जान लोशमैने आज तक जो जंग भी जीती इसी टोपी के तुफैल। मेरा क्या है? सब इसी की बर्कत है। मै इसके बेगैर कुछ भी नही। अगर यह मेरे सर पर हो तो फिर दुश्मन मेरे सामने कुछ भी नही। लोगो ने कहा आखिर इस टोपी मे क्या खुबी है ?? फरमाया: यह देखो क्या है? यह हुजुर सरवरे आलम ﷺ के सरे अनवर का बाल मुबारक है जो मैने इसी मे सी रखे है।*
*🌹👉 हुजुर ﷺ एक मर्तबा उमरा बजा लाने को बैतुल्लाह तशरिफ ले गये। सरे मुबारक का बाल उतरवाए तो उस वक्त हममे से हर एक शख्स बाल मुबारक लेने की कोशिश कर रहा था और हर एक दुसरे पर गिरता था तो मैने इसी कोशिश मे आगे बढ़कर चंद बाल मुबारक हासिल कर लिए थे। फिर इसी टोपी मे सी लिए। यह टोपी अब मेरे लिए जुम्ला बरकत व फुतुहात का जरिया है। मै इसी के सदके मे हर मैदान का फातेह बनकर लौटता हुं। फिर बताओ यह टोपी अगर न मिलती तो मुझे चैन कैसे आता?*
📙 {हुज्जतुल्लाहुल आलमीन, सफा-686}
*📜 सबक :-* हुजुर सरवरे आलम ﷺ की जुम्ला बर्कत व इनाआमात का जरिया है। आपका बाल शरिफ बर्कत व रहमत है। यह भी मालुम हुआ की सहाबाए किराम हुजुर ﷺ से मुतअल्लिक अशिया का बतौर तबर्रुक आपने पास भी रखते थे। जिसके पास आपका बाल मुबारक होता अल्लाह तआला उसे कामयाबीयों से सरफराज फरमाता था।
📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर-36,37}*
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*📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 12 📃*
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▶️ *हिकायत नं. - 12*
*▶️ बाल का कमाल ▶️*
*🍃👉हमारे हुजुर ﷺ की रीश मुबारक के दो बाल मुबारक हजरत सिद्दीके अकबर (रजी अल्लाहु अन्हु) को मिल गए। आप उन दो बालो को बतौर तबर्रुक घर ले आयें और बड़ी ताजीम के साथ अंदर एक जगह रख दिए। थोड़ी देर के बाद अंदर से कुरआन पढ़ने की अवाज आने लगी। सिद्दीके अकबर (रजी अल्लाहु अन्हु) अंदर गए तो तिलावत की अवाजे तो आ रही थी मगर पढ़ने वाले नजर न आते थे। हजरत सिद्दके अकबर (रजी अल्लाहु अन्हु) ने हुजुर की खिदमत मे हाजिर होकर सारा किस्सा ब्यान किया तो हुजुर ने मुस्कुरा कर फरमाया। यह फरिश्ते है जो मेरे बाल के पास जमा होकर कुरआन पढ़ते है।*
📚 {जामिउल मुजिजत सफा-62}
*📿 सबक :-* हुजुर ﷺ का हर बाल मम्बउल कमाल है आपका बाल शरीफ ज्यारत गाहे खलाइक है। फिर जिन लोगो को बाल मुंडकर नाइ नालियो मे फेक देता है वह अगर हुजुर की मिस्ल होने की दावा करने लगे तो किस कद्र जुल्म है।
📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर-37}*
*📬 पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*
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*📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 13 📃*
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*▶️ हिकायत नं. - 13*
*🐏 बकरी जिन्दा हो गयी 🐏*
🌺👉 जंगे अहजाब मे हजरत जाबीर (रजी अल्लाहु अन्हु) ने हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की दावत की और एक बकरी जबह की हुजुर जब सहाबाए किराम के साथ जाबीर के घर पहुंचे तो जाबीर ने खाना लाकर आगे रखा। खाना थोड़ा था और खाने वाले ज्यादा थे। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फरमाया थोड़े थोड़े आदमी आते जाओ और बारी बारी खाना खाते जाओ। चुनांचे:-
🌻👉 ऐसे ही हुआ की जितने आदमी खाना खा लेते वह निकल जाते इस तरह सबने खाना खा लिया। जाबीर फरमाते थे की हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) पहले ही फरमा दिया था की कोइ शख्स गोश्त की हड्डी न तोड़े न फेके सब एक जगह रखते जाए। जब सब खा चुके तो आपने हुक्म दिया की छोटी मोटी सब हड्डीयां जमा कर दो। जमा हो गयी तो आपने अपना दस्ते मुबारक उनपर रखकर कुछ पढ़ा आपका दस्त मुबारक अभी हड्डीयो के ऊपर ही था और जबाने मुबारक से कुछ पढ़ ही रहे थे की वह हड्डीयां कुछ का कुछ बनने लगी। यहां तक की गोश्त पोश्त तैयार होकर कान झाड़ते हुइ वह बकरी उठ खड़ी हुई। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने फरमाया जाबीर! ले यह अपनी बकरी ले जा।
*📚 {दलाइलुल नुबुव्व जिल्द-2, सफा-224,}*
*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) मंबऊल-हयात हयात बख्श है।आपने मुर्दा दिलो और मुर्दा जिस्मो को भी जिन्दा फरमा दिया फिर जो हुजुर को मर कर मिट्टी मे मिलने वाला कहते है। (माज अल्लाह) किस कद्र जाहील और बेदिन है।
📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर-37,39}*
*📬 पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*
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*🌹💖आशिक़ ए गौस रज़ा 💖🌹*
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_*☝हमारी दावत एक सच्चे दीन की तरफ*_
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*📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 14 📃*
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▶️ *हिकायत नं. - 14*
*🐍🥚 सांप का अंण्डा 🐍🥚*
🌹👉 एक सहाबी हजरत हबीबुल्लाह बिन फिदयक (रजी अल्लाहु अन्हु) कही जा रहे थे की उनका पांव इत्तेफाकन एक जहरिले सांप के अंडे पर पड़ गया। और वह पिस गया। उसके जहर के असर से हजरत हबीब बिन फिदयक (रजी अल्लाहु अन्हु) की आँखें बिलकुल सफेद हो गई। नजर जाती रही। यह हाल देखकर उनके वालीद बहुत परेशान हुए और उन्हे लेकर हुजुर(सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम)की खिदमत मे पहुंचे।
🌹👉🏻 हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने सारा किस्सा सुनकर अपना थुक मुबारक उनकी आँखो मे डाला तो हजरत हबीब बिन फिदयक की अंधी आंखे फौरन रौशन हो गई और उन्हे नजर आने लगा। रावी का ब्यान है की मैने खुद हजरत फिदयक को देखा। उस वक्त उनकी उम्र 80 साल की थी और आंखे तो उनकी बिल्कुल सफेद थी मगर हुजुर के थुक मुबारक के असर से नजर इतनी तेज थी की सुई मे धागा डाल लेते थे।
*📚 {दलाइलुल नुबुव्वत सफा-167}*
*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की मिस्ल बनने वालो के लिए मकामे गौर है की हुजुर वह है जिनकी थुक मुबारक से अंधी आंखो मे बिनाई और नुर पैदा हो जाए और वो वो है की उनकी थुक के मुतअल्लिक रेलवे स्टेशन मे यह लिखा होता है की थुको मत इससे बिमारी फैलती है।
*फिर मर्ज व शिफा दोनो बराबर कैसे हो सकती है।??*
📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर-38, 39}*
*📬 पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*
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*🌹💖 आशिकाने रज़ा 💖🌹*
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_*☝हमारी दावत एक सच्चे दीन की तरफ*_
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*_✏ आओ इल्म -ए-दीन सीखें....✍🏻_*
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*📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 15 📃*
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▶️ *हिकायत नं. - 15*
*🏡 हजरत जाबीर का मकान और एक हजार मेहमान*
🌹 हजरत जाबीर (रजी अल्लाहु अन्हु) ने जंगे खंदक के दिनो हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के शिकमे अनवर पर पत्थर बंधा देखा तो घर आकर अपनी बिवी से कहा की क्या घर मे कुछ है ताकी हम हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के लिए कुछ पकाएं और हुजुर को खिलाए??
*☘ बिवी ने कहा:* थोड़े पे जौ है और यह एक बकरी का छोटा बच्चा है। इसे जबह कर लेते है।आप हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) को बुला लाइये। चुकी वहां लश्कर बहुत ज्यादा है इसलिए हुजुर से पोशीदगी मे कहीएगा की वह अपने हमराह दस आदमीयो से कुछ कम लाएं।
*🌹 जाबीर ने कहा :* अच्छा तो लो मै इस बकरी के बच्चे को जबह करता हुं तुम इसे पकाओ। मै हुजुर को बुला लाता हुं।
*✍🏻 चुनांचे:-* जाबीर हुजुर के खिदमत मे पहुंचे तो कान मे अर्ज किया हुजुर मेरे यहां तशरिफ ले चलीए और अपने साथ दस आदमीयों से कुछ कम आदमी ले चलीए। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने सारे लश्कर को मुखातीब फरमाया: चलो मेरे साथ चलो। जाबीर ने खाना पकाया है। फिर जाबीर के घर आकर हुजुर ने उस थोड़े से आटे मे अपना थुक मुबारक डाल दिया। फिर हुक्म दिया की अब रोटीयां और हंडिया पकाओ। चुनांचे उस थोड़े से आटे और गोश्त मे थुक मुबारक की बर्कत से इतनी बर्कत पैदा हो गयी की एक हजार आदमी खा गए मगर न रोटी कम हुई और न कोई बोटी।
*🌼 सबक :-* यह हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के थुक मुबारक की बर्कत थी कि थोड़े से खाने मे इतनी बर्कत पैदा हो गयी की हजार आदमी सैर शिकम होकर खा गए लेकीन खाना बदस्तुर वैसे का वैसा ही रहा कम न हुआ।
📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर-39, 40}*
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*🌹💖 मुरीद ए ताजूशर्रिया 💖🌹*
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*📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 16 📃*
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▶️ *हिकायत नं. - 16*
*_🌧️ कोजे मे दरिया 🌧️_*
🌧️ हुदैबिया के रोज सारे लश्करे सहाबा मे पानी खत्म हो गया हत्ता की वुजु और पिने के लिए भी पानी का एक कतरा तक न रहा। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के पास एक कुजा पानी का था। हुजुर जब उस कुजा से वुजु फरमाने लगे तो सब हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की तरफ लपके और फरियाद की कि या रसुलल्लाह (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) हमारे पास तो एक कतरा भी पानी का बाकी न रहा। न तो वुजु कर सकते है और ना ही अपनी प्यास बुझा सकते है।
_🌨️ हुजुर! यह आप ही के कुजे मे पानी बाकि है हम सब के पास पानी खत्म हो गया है और हम सब प्यास की शिद्दत से बेचैन है। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने यह बात सुनकर अपना हाथ मुबारक उस कुजे मे डाल दिये लोगो ने देखा की हुजुर के हाथ मुबारक उस कुजे मे डाल दिया लोगो ने देखा की हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के हाथ मुबारक की पांचो उंगलियों से पानी के पांच चश्मे जारी हो गयें। सब लोग इन चश्मो से सैराब होने लगे। हर शख्स ने जी भर के पानी पिया और प्यास बुझाई। सब ने वुजु भी कर लिया। हजरत जाबीर से पुछा गया कि लशकर की तदाद कितनी थी?? तो फरमाया उस वक्त अगर एक लाख आदमी भी होते तो वह पानी सबके लिए काफी था मगर हम उस वक्त पन्द्रह सौ की तदाद मे थे।_
*📚 {मिश्कात शरिफ सफा-524}*
*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) को अल्लाह ने यह इख्तेयार व तसर्रुफ अता फरमाया है की आप थोड़ी चीज को ज्यादा कर देते है। ”न” से हां और मादुम से मौजुद करना अल्लाह का काम है। थोड़े से ज्यादा कर देना मुस्तफा का काम है यह अल्लाह ही का अता है।
📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 40}*
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*~🌹💖 दीनी तालीम 💖🌹~*
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*📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 17 📃*
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▶️ *हिकायत नं. - 17*
*📃 एक सहराई काफिला* 📃
👉🏻अरब के एक सहरा मे एक बहुत बड़ा काफिला राहे पैमा था अचानक उस काफिला का पानी खत्म हो गया। उस कफिला मे छोटे बड़े बुढ़े जवान और मर्द व औरत सभी थे। प्यास के मारे सबका बुरा हाल था। दुर तक पानी का निशान ना था। पानी उनके पास एक कतरा तक बाकि न रहा था यह आलम देखकर मौत उनके रक्स करने लगी। उन पर यह खास करम हुआ की:-
*अचानक दो जहां के फरयाद-रस मुहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) उनकी मदद फरमाने वहां पहुंच गये।* हुजुर को देखकर सबकी जान मे जान आ गइ। सब हुजुर के गिर्द जामा हो गये। हुजुर ने उन्हे तसल्ली दी और फरमाया की वह सामने जो टिला है उसके पिछे एक स्याह रंग हब्शी गुलाम ऊंटनी पर सवार जा रहा है। उसके पास पानी का एक मश्कीजा है। उसको ऊंटनी समेत मेरे पास ले लाओ।
*🌹 चुनांचे:-* कुछ आदमी टिले के उस पार गये तो देखा की वाकइ एक ऊंटनी पर सवार हब्शी जा रहा है वह उस हब्शी को हुजुर के पास ले आए। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने उस हब्शी से मश्कीजा ले लिया। अपने दस्ते रहमत उस मश्कीजा पर फेरकर उसका मुंह खोल दिया।
*फरमाया :* आओ अब जिस कद्र भी प्यासे हो आते जाओ और पानी पी-पीकर अपनी प्यास बुझाते जाओ। चुनाचे-सारे काफीले ने उस मश्कीजा से जारी रहमत से पानी पिना शुरु किया फिर सबने अपने अपने बर्तन भी भर लिये। सब के सब सैराब हो गये। सब बर्तन भी पानी से भर गये। हुजुर का यह मोजीजा देखकर हब्शी बड़ा हैरान हुआ। हुजुर के दस्ते अनवर चुमने लगा। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने अपना दस्ते अनवर उसके मुंह पर भेर दिया। तो उस हब्शी का स्याह रंग काफुर हो गया। वह सफेद पुरनुर हो गया। फिर उस हब्शी ने कलीमा पढ़कर अपना दिल भी मुनव्वर कर लिया। मुस्लमान होकर जब वह अपने मालीक के पास पहुंचा तो मालीक पुछा तुम कौन हो??
🌺 वह बोला तुम्हारा गुलाम हुं।मालीक ने कहा: तुम गलत कहते हो। वह तो बड़ा स्याह रंग का था वह बोला यह ठीक है मगर मै उस मनब्बेए नुर जाते बा-बर्कात से मिलकर और उस पर ईमान लाकर आया हुं। जिसने सारे काएनात को मुनव्वर फरमा दिया है। मालीक ने सारा किस्सा सुना तो वह भी ईमान ले आया।
📚 *{मसनवी शरिफ}*
*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) अल्लाह की रजा से दो जहान के फरियाद रस है और मुसीबत के वक्त मदद फरमाने वाले है। फिर अगर कोई शख्स यूँ कहे के हुजूर किसी की मदद नहीं फरमा सकते और किसी की फरयाद नहीं सुनते तो वो किस कद्र जाहिल व बेखबर है पस अपना अकीदह ये रखना चाहिए के
*फरयादउम्ती जो करे हाले जार में*
*मुमकिन नहीं के खैर बशर को खबर ना हो*
📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 41,42}*
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*📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 18 📃*
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▶️ *हिकायत नं. - 18*
*_🌧 बादलो पर हुकुमत 🌧_*
🍃👉 मदीना मुनाव्वरा मे एक मर्तबा बारिश नही हुइ थी। कहत का सा आलम था। लोग बड़े परिशान थे। एक जुम्मा के रोज हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) जबकी वअज फरमा रहे थे। एक अरबी उठा और अर्ज करने लगा या रसुलल्लाह! माल हलाक हो गया और औलाद फाका करने लगी। दुआ फरमाइये बारिश हो। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने उसी वक्त अपने प्यारे प्यारे हाथ उठाए रावी का ब्यान है की आसमान बिलकुल साफ था अब्र (बादल) का नाम व निशान तक न था। मगर मदनी सरकार के हाथ मुबारक उठे ही थे की पहाड़ो की मानिंद अब्र छा गए और छाते ही मेंह बरसने लगा। हुजुर मिंबर पर ही तशरिफ फरमा थे की मेंह शुरु हो गया इतना बरसा की छत टपकने लगी। हुजुर के रेश अनवर से पानी के कतरे गिरते हमने देखे। फिर यह मेंह बन्द नही हुआ बल्कि हफता को भी बरसता रहा।
🌹👉 फिर अगले दिन भी और फिर उससे अगले हफ्ता को भी हत्ता की लगातार अगले जुम्मा तक बरसता ही रहा। हुजुर दुसरे जुम्मा को वअज फरमाने उठे तो वही अरबी जिसने पहले जुम्मा मे बारिश न होने की तकलीफ अर्ज की थी उठा और अर्ज करने लगा या रसुलल्लाह! अब तो माल गर्क होने लगा और मकान गिरने लगे। अब फिर हाथ उठाइये की यह बारिश बंद भी हो।चुनांचे हुजुर ने फिर उसी वक्त अपने प्यारे प्यारे नुरानी हाथ उठाए और अपनी उंगली मुबारक से इशारा फरमाकर दुआ फरमाइ की ऐ अल्लाह! हमारे इर्द गिर्द बारिश हो हम पर ना हो। हुजुर का यह इशारा करना ही था की जिस जिस तरफ उंगली गई उस तरफ से बादल फटता गया और मदीना मुनाव्वरा के ऊपर सब आसमान साफ हो गया।
*📚 {मिश्कात शरिफ सफा-528}*
*🌼 सबक :-* सहाबा किराम मुश्किल के वक्त हुजुर ही की बारगाह मे फरियाद लेकर आते थे। उनका यकीन था की हर मुश्किल यहक हल होती है। वकाई वही हल होती रही। इसी तरह आज भी हम हुजुर के मोहताज है। बेगैर हुजुर के वसीले के हम अल्लाह से कुछ भी नही पा सकते। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) की हुकुमत बादलो पर भी जारी है।
📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 42}*
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*🌹💖 तालिब ए दुआ 💖🌹*
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*📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 19 📃*
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▶️ *हिकायत नं. - 19*
*🌙 चांद पर हुकुमत 🌙*
🌹👉 हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) के दुशमनो ने बिलखुसुस अबु-जहल ने एक मर्तबा हुजुर से कहा की अगर तुम खुदा के रसुल हो तो आसमान पर जो चांद है उसको दो टुकड़े करके दिखाओ। *हुजुर ने फरमाया :* लो यह भी करके दिखा देता हुं।
🖌️ *चुनांचे:-* आपने चांद की तरफ उंगली मुबारक से इशारा फरमाया तो चांद के दो टुकड़े हो गये। यह देखकर अबु जहल हैरान हो गया। मगर बे-इमान माना भी नही और हुजुर को जादुगर ही कहता रहा।
📚 *{हुज्जतुल्लाह सफा-366, बुखारी शरिफ-हिस्सा-2, सफा-271}*
*🌼सबक :-* हमारे हुजुर की हुकुमत चांद पर भी जारी है।बावजुद इतने बड़े इख्तियार के बे-ईमान अफराद हुजुर के ईख्तियार व तसर्रुफ को फिर भी नही मानते।
📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 43}*
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*~🌹💖 मुहम्मद इमरान रज़वी 💖🌹~*
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*📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 20 📃*
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▶️ *हिकायत नं. - 20*
*☀ सुरज पर हुकुमत ☀*
☘ एक रोज मकामे सहाबा मे हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने नमाजे जुहर अदा की और फिर हजरत अली (रजी अल्लाहु अन्हु) को किसी किसी काम के लिए रवाना फरमाया। हजरत अली (रजी अल्लाहु अन्हु) के वापस आने तक हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम)ने नमाजे अस्र भी अदा फरमा ली। जब हजरत अली वापस आए तो उनकी आगोश मे अपना सर रखकर हुजुर सो गये। हजरत अली ने अभी तक नमाजे अस्र अदा न की थी। उधर सुरज को देखा तो गुरुब होने वाला था। हजरत अली सोचने लगे। इधर रसुले खुदा अराम फरमा है। और उधर नमाजे खुदा का वक्त हो रहा है। रसुले खुदा का ख्याल रखु तो नमाज जाती है। और नमाज का ख्याल करु तो रसुले खुदा की नींद मे खलल वाके होता है। करुं तो क्या करु?आखीर मौला अली शेरे खुदा (रजी अल्लाहु अन्हु) ने फैसला किया की नमाज कजा होने दो मगर हुजुर की नींद मुबारक मे खलल न आए।
*💫 चुनांचे:-* सुरज डुब गया और अस्र का वक्त जाता रहा। हुजुर उठे तो हजरत अली को मगमूम देखकर वजह दर्याफ्त की तो हजरत अली ने अर्ज किया या रसुलल्लाह! मैने आपकी इस्तिराहत के पेशे नजर अभी तक नमाजे अस्र नही पढ़ी। सुरज गुरुब हो गया है। हुजुर ने फरमाया तो गम किस बात का?? लो अभी सुरज वापस आता है। फिर उसी मकाम पर आकर रुकता है जहां वक्ते अस्र होता है।
*📿चुनांचे:-* हुजुर ने दुआ फरमाइ तो गुरुब शुदा सुरज फिर निकला और उल्टे कदम उसी जगह आकर ठहर गया जहां अस्र का वक्त होता है। हजरत अली ने उठकर अस्र की नमाज पढ़ी तो सुरज गुरुब हो गया।
📚 *{हुज्जतुल्लाह अलल आलमीन सफा-368}*
*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर की हुकुमत सुरज पर भी जारी है। आप काइनात के हर जर्रा के हाकिम व मुख्तार है। आप जैसा न होगा और न हो सकता है।
📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 44}*
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*📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 21 📃*
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▶️ *हिकायत नं. - 21*
*🗻 जमीन पर हुकुमत 🗻*
🌹👉 हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने हजरत सिद्दिक अकबर (रजी अल्लाहु अन्हु) के मक्का से हिजरत फरमाई तो कुरैशे मक्का ने ऐलान किया की जो कोइ मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) और उनके साथी सिद्दिके अकबर (रजी अल्लाहु अन्हु) को गिरफ्तार करके लायेगा उसे सौ ऊंट इनाम मे दिया जाएगा। सुराका बिन। जअशम ने यह ऐलान सुना तो अपना तेज रफ्तार घोड़ा निकाला और उस पर बैठकर कहने लगा की मेरा यह तेज रफ्तार घोड़ा मुहम्मद और अबु बक्र का पिछा कर लेगा। मै अभी उन दोनो को पकड़कर लाता हुं।
*☘👉 चुनांचे:-* उसने अपना घोड़ा दौड़ाया। थोड़ी देर मे हुजुर के करीब पहुंच गया। सिद्दिके अकबर ने जब देखा की सुर्राका घोड़े पर सवार हमारे पिछे आ रहा है। हम तक पहुंचेने वाला ही वाला है। तो अर्ज किया या रसुलल्लाह! सूर्राका ने हमे देख लिया है और वो देखीए हमारे पिछे आ रहा है। हुजुर ने फरमाया ऐ सिद्दिक! कोइ फिक्र ना करो अल्लाह हमारे साथ है। इतने मे सुर्राका बिलकुल करीब आ पहुंचा तो हुजुर ने दुआ फरमाइ। जमीन ने फौरन सुर्राका के घोड़े को पकड़ लिया और उसके चारो पैर पेट तक जमीन मे धस गया। सुराका यह मंजर देखकर घबराया और अर्ज करने लगा।या मुहम्मद! मुझे और मेरे घोड़े को इस मुसीबत से नजात दिलाइये। मै आपसे वादा करता हुं। की पिछे मुड़ जाऊंगा। जो कोई आपका पिछा करता हुआ आपकी तलाश मे इधर आ रहा होगा उसे भी वापस ले जाऊंगा। आप तक न आने दुंगा चुनांचे हुजुर के हुक्म से जमीन ने उसे छोड़ दिया।
*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर का हुक्म व फरमान जमीन पर भी जारी है और काइनात के हर चीज अल्लाह ने हुजुर के ताबे कर दी है फिर जिस शख्श की अपनी बीवी भी उसकी ताबे ना हो वो अगर हुजूर की मिस्ल बनने लगे तो वो किस कद्र अहमक व बेवकूफ है।
📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 44}*
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*🌹💖 हक़ की दावत 💖🌹*
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*📃 सच्ची हिकायत, पोस्ट नं. : 22 📃*
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▶️ *हिकायत नं. - 22*
*🌳 दरख्तो पर हुकुमत 🌳*
*💫👉 एक मर्तबा एक आराबी हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) से कहा-ऐ मुहम्मद!* अगर आप अल्लाह के रसुल है तो कोइ निशानी दिखाइये। *हुजुर ने फरमाया:-* अच्छा तो देखो! वह जो सामने दरख्त खड़ा है उसे जाकर इतना कह दो की तुम्हे अल्लाह के रसुल बुलाता है।
*🌻👉 चुनांचे:-* वह आराबी उस दरख्त के पास गया और उससे कहा। तुम्हे अल्लाह का रसुल बुलाता है। वह दरख्त यह बात सुनकर अपने आगे पिछे दायें बायें पिछे गिरा और अपनी जड़े जमीन से उखाड़कर जमीन पर चलते हुवे हुजुर की खिदमत मे हाजीर हो गया और कहने लगा अस्सालामु अलैकुम या रसुलल्लाह! वह आराबी हुजुर से कहने लगा अब इसे हुक्म दिजीए की यह फिर अपनी जगह पर चला जाए।
*🌻👉चुनांचे:-* हुजुर ने उससे फरमाया की जाओ। वापस चले जाओ वह दरख्त यह सुनकर पिछे मुड़ गया और अपनी जगह जाकर कायम हो गया। आराबी यह मुजीजा देखकर मुस्लमान हो गया और हुजुर को सज्दा करने की इजाजत चाही। हुजुर ने फरमाया सज्दा करना जाएज नही। फिर उसने हुजुर के हाथ पैर मुबारक चुमने की इजाजत चाही तो हुजुर ने फरमाया हां। यह बात जायज है। उसने हुजुर के हाथ और पैर मुबारक चुम लिए।
*📚 {हुज्जतुल्लाह अलल आलमीन, सफा-441}*
*🌼 सबक :-* हमारे हुजुर का हुक्म दरख्तो पर भी जारी है। यह भी मालुम हुआ की बुजुर्गो के हाथ पैर चुमना जाएग है। हुजुर (सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम) ने इससे माना नही फरमाया।
📙 *{सच्ची हिकायत हिस्सा-अव्वल, पेज नम्बर- 45}*
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*🌹💖 दीन की दावत 💖🌹*
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