मंगलवार, 19 मार्च 2024

आप(ﷺ) की खातिर दो जहान

आप(ﷺ) की खातिर बनाए दोनो जहान

200 साल पहले पैदा होने वाले वहाबी देवबंदियों का कहना है कि हुजूर ﷺ को 40 साल बाद नबुवत मिले उनसे पहले वो नबी नहीं थे माजल्लाह استغفراللہ

अहले सुन्नत वल हजरत का ये अकीदा है नबी ए करीम ﷺ ने नबुवत का ऐलान 40 साल में किया या अल्लाह ﷻ ने सबसे पहले नबी ﷺ को बनाया या नबी ﷺ के सदके ही इस दुनिया को बनाया या नबी ﷺ खातिमुन नबीन हैं नबी ﷺ के बाद कोई नबी नहीं आएगा

अल्लाहﷻ कुरान पाक सुराई अले इमरान आयत 81 में इरशाद फरमाता है

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तरजुमा:- और याद करो जब अल्लाह ने नबियों से वादा लिया था।

हज़रत अली کَرَّمَ اللہ تَعَالٰی وَجْہَہُ الْکَرِیْم ने फ़रमाया की रॉकी लॉक ने हज़रत एडम علیہ السلام और उनके बाद को नबूवत अता फ़रमाई शहीद उल अंबिया मोहम्मद मुस्तफाﷺ के मुतालिक अहद और उन अंबिया عَلَیْہِمُ الصَّلٰوۃُ وَالسَّلَام Ne Apni Qaumo Se Ahd Liya Ke अग्र उनकी हयात सरवर में कायनातﷺ हो तो आप वोﷺ पर ईमान ताल करें और आपकी मदद ओ नसरत करें।

পারিতারিক

(तफ़सीर उल ख़ज़िन” अल इमरान- ताहेतुल आयत 81/जिल्द 1/पृष्ठ-825)

हुज़ूर नबी ए करीम ﷺ का ख़तमुन नबियिन होना और हज़रत अमीना رضي الله عنها का शाम ए शाम देखना:

हज़रत इरबाज़ बिन सरिया रदियल्लाहु अन्हु से मरवी है के रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया म अल्लाह ताला का वो बंदा हुआ जिसे उम्मुल किताब में हमें वक्ता खातिमुन नबियिन लिख दिया गया तो जब आदम عَلَيـهِ السَّـلَام अभी तक अपनी मिट्टी में पड़े हुए थे और माई अन करीब तुमको उनके टीवी के बारे में बताओगे, माई अपने बाप हजरत इब्राहिम अलैहसलाम की दुआ, ईसा मसीह عَلَيـهِ السَّــلَام की बशारत और अपनी मां का ख्वाब हूं।  मेरी माँ ने एक ख्वाब देखा था एक ऐसा नूर निकला जिसने उसे अपनी झूठी शमके महलात रोशन केर की मौत और नाबियो की माँ ऐसे ही ख्वाब बना रही है, अल्लाह लॉक की उनपे रहमते हो”

इमाम अहमद इब्न हनबल खंड: 28, पृष्ठ 395, हदीस: 17163) सही तहकीक शेख अरनौत (मुसनद अहमद इमाम अहमद इब्न हनबल खंड: 13, पृष्ठ 281-282 हदीस: 17085-86) तहकीक अहमद शाकिर (इमाम दारमी सुनान, हदीस: 13) (इमाम हकीम अपने मुस्तद्रक खंड 02:418, 600, 616-617 सहीह में), (इमाम बाहाकी दल'एल अन-नुबुव्वा 1:80-84,110, 2/8) (इमाम इब्न हिब्बन 14:313 # 6404), (इमाम तबरानी मुअज़म अल-कबीर, 8:206, 18:252-53, 20:353), (इमाम इब्न आसिम सुन्नत #409) (इमाम बाज़ार मजमा उज़ ज़वायद 1:217, 3:113), (इमाम बुख़ारी तारिख़ अल-कबीर (6:68) (इमाम अबू दीद अल तैयलिसी मुसनद, #1236) (इमाम इब्न असाकिर तारिख 1: 166-71) (मज़मा अज़-ज़वायद 8 में इमाम हयातमी:222-23 #13841-42)(इमाम सुयुति जामी अस-सगीर #4359-60)

हज़रत इरबाज़ बिन सरिया رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ से रिवायत नबी करीम रूफ़ ओ रहीम صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ने इरशाद फरमाया मी
अब्दुल्ला हूं (यानी अल्लाह का बंदा हूं) और माई उस वक्त भी खात्मा नबियिन था जब मेरे बाप (यानी आदम अलैहस्सलाम) अभी गाधी मिट्ठी में वो,
और मा अम्बरीब इसके बारे में तूफान खबर, मा अपने जद्दे अला इब्राहिम عليه السلام की दुआ हो, ईसा मसीह عليه السلام की बशारत हू और वो ख्वाब हू जो मेरी वलीदा सैय्यदा अमीना رض ی اللہ عنہا ने ज़नाना ए हमल देखा मैंने एक नूर ने तुलू फ़रमाया है उसका अल्लाह ए शाम मुनव्वर हो गया और फिर ये आयतें लिखीं फ़रमायी सूरह अहज़ाब आयत 45-46

পারিতারিক

يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِىُّ إِنَّآ أَرْسَلْنَٰكَ شَٰهِدًا وَمُبَشِّر ًا وَنَذِيرًا
وَدَاعِيًا إِلَى ٱللَّهِ بِإِذْنِهِۦ وَسِرَاجًا مُّن ِيرًا

ऐ महबूब बेहसाक हमने तुम्हें गवाह और खुशखबरी सुनाने वाला और दर सुनाने वाला और अल्लाह के हुक्म से उसकी तरफ लोगों को बुला ने वाला और रोशन आफताब बना कर भेजा

(इमाम हकीम अल मुस्तद्रक किताबुत तफ़सीर, सूरह अहज़ाब खंड 02, पृष्ठ: 453 हदीस: 3566)

हजरत अबू हुरैरा رضی ﷲتعالی عنہ से मरवी है कि सहाबा इकराम ने अर्ज किया या रसूल अल्लाहﷺ आपके लिए नबुवत कब वाजिब हुई आपने फरमाया जब हजरत आदम علیہ السلام रूह और जिस्म के दरमियान इस हदीस को हजरत इमाम तिर्मिज़ी رحمہ ﷲ ने रिवायत किया और फरमाया याह हदीस हसन है

(सुनन तिर्मिज़ी/किताब उल मनक़िब/हदीस-3609)

हज़रत सैयदना अब्दुल्लाह बिन अब्बास رضی ﷲتعالی عنہ से रिवायत है के अल्लाह पाक ने हज़रत सैयदना ईसा علیہ السلام की तरफ वही फ़रमाई:


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यानी ऐ ईसा! मुहम्मद अरबीﷺ पर ईमान लाओ और अपनी उम्मत में से उनका ज़माना पाने वालों को भी उन पर ईमान लेन का हुक्म दो अगर मुहम्मद मुस्तफा ﷺ ना होते तो मैं ना आदम को पैदा करता और ना ही जन्नत और दोज़ख बनाता,

(अल मुस्तद्रक अलल सहीहेन/जिल्द 3/हदीस-4227)

क्या हदीस पाक में है कि आकाﷺ न होते तो अल्लाहﷻ न आदम علیہ السلام को भुगतान करता न जन्नत जहन्नम को बनता

इमाम "बुखारी" के उस्ताद के उस्ताद हज़रत इमाम "अब्दुर रज़्ज़ाक" अल मुतवफ़ा "211" हिजरी हदीस लिखते हैं कि मेने ये हदीस मशहूर "तबअतबईन" हज़रत इमाम "मुअमर इब्न रशीद" अल मुतवफ़ा "153" हिजरी सुनी अनहोन से मशहूर अज़ीम "तबई" हज़रत इमाम "इब्न ए मुनकादिर" अल मुतवफ़ा "130" हिजरी से, अनहोन अज़ीम सबसे मशहूर प्यारे सहाबी हज़रत "जाबिर बिन अब्दुल्ला" अल-अंसारी अल मुतवफ़ा "78" हिजरी से और आप रिवायत करते हैं की मेने अल्लाह ﷻ के “हबीब ﷺ से अरज़ की या रसूल अल्लाह ﷺ अल्लाह ﷻ ने सारी मखलुकत ​​में सबसे पहले किस चीज़ को बनाया ?तो हुज़ूर ﷺ ने फरमाया ऐ जाबिर رضي الله عنه अल्लाह ﷻ ने सबसे पहले तेरे नबी मुहम्मद ﷺ के नूर को अपने नूर से पैदा फरमाया''

(अल-मुसन्नफ़/पेज-64/सनद सहीह)

क्या हदीस की सनद इतनी मजबूत है कि सउदी नजदी स्वाइन इसको तोड़ ना सके पर इसको तोड़ने के चक्कर में नजदियो के बिदअती अकीदे जरूर टूट गए_ क्या हदीस को लिखने वाले "मुहद्दीसीन" हजरत इमाम "गजाली" अल मुतवफा "505" हिजरी अपनी किताब "सुलवत अल-अरिफ़ीन" खंड "1/ पृष्ठ "64" पार

ग़ौस ए आज़म" अल मुतवफ़ा "561" हिजरी अपनी किताब "अल सफीना अल-कादिरियाह" खंड "1" पृष्ठ 75″ पार लिखा

हज़रत इमाम इब्न ए "शाहवर अल-रज़ी" अल मुतवफ़ा "654" हिजरी अपनी किताब "मनारत अल-असयेरिन" खंड "1" पृष्ठ "12" पार

हज़रत इमाम अब्द अल-हक बिन इब्राहिम अल-अंदालुसी "इब्न ए सबाईन" अल मुतवफ़ा "669" हिजरी अपनी किताब "अनवर अल-नबी ﷺ" खंड "1" पृष्ठ "132" पार

हज़रत इमाम अब्दुल करीम "अल-जिलानी" अल मुतवफ़ा "805" हिजरी अपनी किताब "अल कहफ़ वल-रकीम फ़ि-शरह ﷽" खंड "1" पृष्ठ "47" पार

हज़रत इमाम इब्न ए "हज़ार हयातमी" अल मुतवफ़ा "974" हिजरी अपनी किताब "फ़तवा अल-हदीसिया" खंड "1" पृष्ठ "108" पार

हज़रत इमाम मुफ़स्सिर "इस्माइल हक़्क़ी" अल मुतवफ़ा "1137" हिजरी अपनी किताब कुरान की तफ़सीर "रूह अल-बयान" खंड "9" पृष्ठ "113" पार

हज़रत इमाम इस्माइल "अल-अजलूनी" अल मुतवफ़ा "1162" हिजरी अपनी किताब "कश्फ़ अल-खिफ़ा वा-मुज़िल अल-इल्बस" खंड "1" पृष्ठ "237" पार

हज़रत इमाम हसन अल-अदावी "अल-हमज़ावी" अल मुतवफ़ा "1303" हिजरी जिन्होन "200" साल पहले किताब बुलुघ अल-मसरत खंड "1" पेज "23" पर इस्की "सनद" को "सहीह" करार दिया

हज़रत इमाम यूसुफ़ "नभानी" अल मुतवफ़ा "1350" हिजरी अपनी किताब "मजमुए अल-अरबईन" खंड "1" पृष्ठ "106" पार

सब मुहद्द्दिसीन ने ये हदीस लिखी लेकिन किसी ने भी इसको मवदु ज़ीफ़ नहीं कहा बलके तैदान इसको लिखा_


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