बुधवार, 10 मार्च 2021

मिर्ज़ा इंजिनियर का पर्दा फास


*💘हजरत अमीरे मुआविया राजियल्लाहु अनहु का गुस्ताख़ इंजीनियर मिर्जा*


*🚫गुमराही का नया नाम इंजीनियर मोहम्मद अली मिर्जा*

गुस्ताख़


इंजीनियर मोहम्मद अली मिर्जा एक पाकिस्तानी गुमराह और 

गुमराह कुन शख्स का नाम है जिसने बरेलवी घराने में आंखें खोली और बरेलवी से देवबंदी हुआ, देवबंदी से एहले  हदीस हुआ। और अब अहले तशय्यु से भी मुतास्सिर होकर उन्हें भी अहले हक तस्लीम करने लगा है।

हम दुआ गो हैं के यह बंदा एक कदम और आगे ना बढ़े के कादियानियत से मुतास्सिर होकर किसी दिन कादियानी होने का ऐलान भी कर दे।


मोहम्मद अली मिर्जा यूट्यूब के जरिए खासकर एशिया के *अनपढ़ और असरी तालीम गाहों के फारेगिंन के जहनों से खेल रहा है,* यूट्यूब पर इसके नाम से कई एक चैनल हैं और कई दूसरे चैनलों पर भी विवर्स पाने के लिए उसकी वीडियोस अपलोड की जाती है।


अली मिर्जा अक्सर धोखे और फरेब की जबान इस्तेमाल करता है, उलमा ए किराम की मुखालिफत करते हुए उसका बाजारी अंदाज भी देखने को मिलता है।

कुराने पाक की तफसीर में रिवायत व उसूले तफ्सीर से हटकर अपना दिमाग इस्तेमाल करता है,इसी तरह अपनी समझ के मुताबिक हदीस की तफ़सीर पेश करता है।


हर मकतबे फिक्र के उलेमाओं ने अली मिर्जा नामी इस फ़ितने से बरात का इजहार किया है।

 पाकिस्तान के किसी भी *देवबंदी, बरेलवी और अहले हदीस इदारे से इसका कोई ताल्लुक नहीं है।* बल्कि इसके बारे में पाकिस्तान के उलमा का नजरिया यह है कि यह बंदा अपने ही भेष में छुपा हुआ एक *राफ़ज़ी* है।


अली मिर्जा का फ़िरक़ा क्या है?

 इस सवाल का जवाब देते हुए वह खुद कहता है कि मैं मौजूदा तमाम फिरकों से बरी हूं और मेरा फ़िरक़ा सिर्फ इल्मी किताबी है।

अली मिर्जा का दिमागी इतेजात तो यह है कि वह एक तरफ तमाम फिरको के मानने वालों को *हत्ता के शियाओं को भी मुसलमान समझता है।* और दूसरी तरफ फिरके बंदी को गलत और इस्लाम के खिलाफ करार देता है।


अली मिर्जा और उस जैसे तमाम बे पेंदी के लोटे का हाल यही है कि वह खुद से दो चार किताबें पढ़कर यह नतीजा निकाल लेते हैं कि क्या सही है और क्या गलत इस किस्म के लोग सबसे पहले फिरको की मुखालफत करते हैं लेकिन हकीकत यह है कि वह दर पर्दा दिन की मुखालिफ कर रहे होते हैं,क्योंकि अलल एलान वह मजहब और दीन के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं रखते, लिहाजा वो फिरका परस्ती को अपनी गुमराह कुन बंदूक चलाने के लिए निशाना बना लेते हैं, और फिरका परसती की मजमत करते हुए हर फिरके को अपनी तलक नोवाई और बेजा इल्जामात  का निशाना बनाकर पहले अपने सामईन को फिरका बेजार करते हैं फिर आहिस्ता आहिस्ता दिन बेजार बना देते हैं।


जब कोई बिना उस्ताद के पढ़ना शुरू करता है जब कोई बिना रहबर के चलना शुरू करता है जब कोई बे पर के उड़ने की सोचता है तो अली मिर्जा जैसे फितना परदार पैदा होते हैं।

 इंजीनियर मिर्जा शियत से इतना मुतास्सिर है के जन्नत की बशारत पाने वाले असहाबे पैगंबर की खिलाफ भी जबान दराजी करने लगा है, और सहीह हदीस तक की गलत तफ़सीर करके आवाम को सहाबा ए किराम के ताल्लुक से बदजन करने की कोशिश कर रहा है।


उसने एक वीडियो में जंगे सिफ्फिन की तफ़सील बताते हुए *❣हजरत अमीर मुआविया रजि अल्लाह अन्हु* की शान ए आली मर्तबा को घटाने और उन पर भेजा इल्जमात लगाने की कोशिश की है। हजरत अमीर मुआविया रजि अल्लाहअन्हु के बारे में उसने वह तल्ख लहजा और अंदाज इख्तियार किया है के खुदा की पनाह।


अरबी जबान और उसके पेच वह खम से ना वाकिफ उर्दू तर्जुमा से दिन को समझने वाला अली मिर्जा खुद तजबजुब का शिकार है।

उसे यही नहीं पता कि जो बात वह कह रहा है उसका पसे मंजर क्या है। 

जमहूर  उलमा और मुक्तकदिमिन व मुअख्खिरीन इस बारे में क्या राय रखते हैं।

 इस बंदे ने दिन को भी इंजीनियरिंग का एक सब्जेक्ट समझ लिया है के जो समझ में आया और जैसे समझ में आया वही सही है।


यह जिस फिरका परस्ती के खिलाफ बोल कर अपनी गुमराही की रोटी सेकने की कोशिश में है हकीकत में यह खुद एक नए फिरके की दाग बेल रहा है।

फिरकों को ना मानने की जो तफीम इस जैसे बदमाशों ने समझी है वही इन सब की सबसे बड़ी नासमझी है।


*एक गलतफहमी का इजाला:*

फिरका परस्ती क्या है और क्या किसी फिरके में शामिल होना मयूब है?

अली मिर्जा जैसे नंबर 2 का इल्म रखने वाले यही समझते और समझाते हैं कि आदमी को सिर्फ मुसलमान होना चाहिए इनके नजदीक खुद को किसी भी फिरके में शामिल करना गोया इस्लामी तालीमात के मनाफी है हालांकि यह बिल्कुल गलत सोच है दरअसल बात समझने के लिए पहले यह समझे कि फिरका परस्ती क्या है:-

फिरका परस्ती यह है कि हर आदमी अपने हर हर अमल में किसी एक ग्रुप या जमात की पैरवी करें --पस अगर इस ग्रुप या जमात का मनहज और तरीका सहाबा ए किराम रजि अल्लाह अनहु अजमइन और नबी पाक सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम के मुताबिक हुआ तो वह सिरातल मुस्तकीम

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