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बिहिश्त के माना जन्नत कुंजी यानी जन्नत की चाबी
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*🔑 बिहिश्त की कुन्जियां 🔑*
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]◆➦ बिहिश्त यानी जन्नत इन्तिहाई हसीन व बहुत ही शानदार मक़ाम है इस में अल्लाह तआला उन लोगों को दाखिल फ़रमाएगा जो ईमान लाए और नेक आमाल करते रहे। चुनान्चे, कुरआने मजीद फुरकाने हमीद में इरशादे रब्बानी है : तर्जमए कन्जुल ईमान : और जो ईमान लाए और अच्छे काम किए कुछ देर जाती है कि हम उन्हें बागों में ले जाएंगे जिन के नीचे नहें बहें हमेशा हमेशा उन में रहें।
]◆➦ एक और मकाम पर अल्लाह और उस के रसूल ﷺ की इताअत व फ़रमां बरदारी करने वालों को जन्नत की बिशारत दी गई चुनान्चे , इरशादे बारी तआला है : तर्जमए कन्जुल ईमान : और जो हूक्म माने अल्लाह और अल्लाह के रसूल का अल्लाह उसे बागों में ले जाएगा जिन के नीचे नहरें रवां हमेशा उन में रहेंगे और येही है बड़ी कामयाबी।
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 07📕*
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*_🤲🏻 अपनी नेक दुआओं में याद रखें..✍🏻_*
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*🔑 बिहिश्त की कुन्जियां 🔑*
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•⊰ *पेश लफ्ज* ⊱•
]◆➦ जन्नत में अल्लाह ने तमाम किस्म की रूहानी व जिस्मानी लज्ज़तों के वोह तमाम सामान मुहय्या फ़रमाए हैं जो किसी बड़े से बड़े दानिश्वर के गुमान व तसव्वुर में भी नहीं आ सकते जो कोई मिसाल उन नेमतों की तारीफ़ में दी जाए वोह मेहूज़ तकरीबे फेम ( समझाने के लिए ) है वरना दुन्या की आला से आला शै को जन्नत की किसी चीज़ के साथ कोई मुनासबत नहीं।
]◆➦ जाहिर है कि जिन नेमतों को न आंखों ने देखा न कानों ने सुना न किसी आदमी के दिल पर बे देखे इन का ख़तरा गुज़रा तो वोह तम्सील व तशबीह से अपनी पूरी हक़ीक़त के साथ क्यूंकर निगाहों में समा सकती और जेनों में जगह पा सकती है इस लिए इन्सान को जन्नत की नेमतों का पूरा अन्दाज़ा अपने हवास से हो ही नहीं सकता। गफूर्रहीम की मर्हमतों , मेहरबानियों बख्रिशशों इनायतों और नेमतों का कुछ तजकिरा आयाते कुरआनी की रौशनी में दर्जे जैल है :
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 08📕*
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*🔑 बिहिश्त की कुन्जियां 🔑*
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]◆➦ ( 1 ) जन्नती जन्नत में हमेशा रहेंगे उन्हें कभी मौत न आएगी
( 2 ) एक एक जन्नती के लिए चार चार बाग होंगे
( 3 ) और उन बागों में शराबे तहूर, कभी ख़राब न होने वाले दूध साफ़ किए हुवे शहद और ठन्डे खुशगवार पानी की नरें हैं
( 4 ) उन में खजूर ,अनार अंगूर और हर किस्म के मेवे हैं
( 5 ) उन बागों में खैमे उस्तादा हैं और उन में बालाख़ानों के ऊपर बालाखाने बने हैं
]◆➦ ( 6 ) उन बागों में पर्दा नशीन , बड़ी बड़ी आंखों वाली , एक उम्र वाली हूरें हैं जो अपने शौहरों पर प्यारी , उन्हें प्यार दिलाती हैं , आदत की नेक , सूरत की हसीन होंगी , हुस्नो लताफ़त में याकूत व मरजान की मिस्ल होंगी , उन के हुस्न की चमक दमक छुपे हुवे मोतियों की आबो ताब की तरह होगी , उन को उन के शौहरों से पेहले न किसी आदमी ने हाथ लगाया होगा न किसी जिन्न ने
]◆➦ ( 7 ) उन में जन्नतियों की ख़िदमत के लिए , निहायत खूब सूरत , कमसिन लड़के होंगे जो कभी जन्नतियों की ख़िदमत से न थकेंगे और न कभी उन की खूब सूरती व कमसिनी में फ़र्क आएगा
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 08📕*
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*🔑 बिहिश्त की कुन्जियां 🔑*
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]◆➦ ( 8 ) वोह गिलमान जन्नतियों के गिर्द कूजे आफ़्ताबे जाम और चांदी सोने के बरतन लिए फिरेंगे
]◆➦ ( 9 ) उन में पसन्द के मुताबिक़ मेवे मर्जी के मुवाफ़िक परिन्दों के गोश्त होंगे
]◆➦ ( 10 ) उन के साए जन्नतियों पर झुकने वाले होंगे कि जन्नती जिस तरफ़ जाएगा जन्नत के दरख़्त का साया उसी तरफ झुक जाया करेगा
]◆➦ ( 11 ) उन के गुच्छे झुका कर नीचे कर दिए गए होंगे कि जब जन्नती कोई मेवा खाना चाहेगा उस की शाख उस के मुंह तक झुक कर नीची हो जाया करेगी
]◆➦ ( 12 ) उन बागों में न धूप की हिद्दत होगी न सर्दी की शिद्दत
]◆➦ ( 13 ) जन्नतियों को कनावीज़ और करेब ( रेशम के दो किस्मों ) के कपड़े और सोने चांदी के कंगन और मोतियों के जेवर पेहनाए जाएंगे
]◆➦ ( 14 ) ऊंचे ऊंचे जड़ाव तख्तों पर ऐसे रेशमी नर्म बिछौनों पर, जिन का अस्तर कनावीज़ का होगा और खूब सूरत मुनक्कश चांदनियों पर तक्ये लगाए बैठे होंगे।..✍️
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 09📕*
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]◆➦ इसी तरह मालिके जन्नत , कासिमे नेमत ﷺ के फ़रमूदाते आलिया की रौशनी में जन्नत का कुछ तजकिरा मुलाहज़ा फ़रमाइए।
]◆➦ ( 1 ) जन्नत में सौ दर्जे हैं हर दो दों में वोह मसाफ़त है जो ज़मीनो आस्मान के दरमियान है
]◆➦ ( 2 ) जन्नत में किस्म किस्म के जवाहिर के महल हैं ऐसे साफ़ शफ़्फ़ाफ़ कि अन्दर का हिस्सा बाहर से और बाहर का अन्दर से दिखाई दे
]◆➦ ( 3 ) जन्नत की दीवारें सोने और चांदी की ईंटों और मुश्क के गारे से बनी हैं, ज़मीन ज़ाफ़रान की, कंकरियों की जगह मोती और याकूत
]◆➦ ( 4 ) जन्नत में एक एक मोती का खैमा होगा जिस की बुलन्दी साठ मील होगी
]◆➦ ( 5 ) जन्नत की नहरें जो हर एक जन्नती के मकान में जारी हैं उन का एक कनारा मोती का दूसरा याकूत का है और नहरो की ज़मीन ख़ालिस मुश्क की
]◆➦ ( 6 ) वहां नजासत गन्दगी बोलो बराज़ वगैरा बल्कि बदन का मैल अस्लन न होगा एक खुश्बूदार फ़रहत बख़्श डकार आएगी खुश्बूदार फ़रहत बख़्श पसीना निकलेगा और सब खाना हज़्म हो जाएगा और डकार और पसीने से मुश्क की खुश्बू निकलेगी
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 📕*
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]◆➦ ( 7 ) हर वक्त ज़बान से तस्बीह व तक्बीर बिल कस्द और बिला कस्द मिस्ले सांस के जारी होगी
]◆➦ ( 8 ) हर शख्स के सिरहाने कम अज़ कम दस हज़ार ख़ादिम खड़े होंगे किस्म किस्म की नेमतों के साथ
]◆➦ ( 9 ) हर निवाले में सत्तर मज़े होंगे और हर मज़ा दूसरे से मुमताज़
]◆➦ (10) अदना जन्नती के लिए अस्सी हज़ार ख़ादिम और बहत्तर बीबियां होंगी और उन को ऐसे ताज मिलेंगे कि उन में का अदना मोती मशरिको मगरिब को रौशन कर दे
(11) जन्नत में नींद नहीं कि नींद एक किस्म की मौत है और जन्नत में मौत नहीं
]◆➦ ( 12 ) जब कोई जन्नती जन्नत में जाएगा तो उस के सिरहाने और पाइंती दो हूरें निहायत अच्छी आवाज़ से गाएंगी मगर उन का गाना येह शैतानी मज़ामीर नहीं बल्कि अल्लाह की हम्द व पाकी होगा वोह ऐसी खुश गुलू होंगी कि मख्लूक ने वैसी आवाज़ कभी न सुनी होगी और येह भी गाएंगी कि हम हमेशा रेहने वालियां हैं कभी न मरेंगी हम चैन वालियां हैं कभी तक्लीफ़ में न पड़ेंगी हम राज़ी हैं नाराज़ न होंगी मुबारक बाद उस के लिए जो हमारा और हम उस के लिए हों
]◆➦ ( 13 ) सब से कम दरजे का जो जन्नती है उस के बागात बीबियो, नेमतें और खुद्दाम हज़ार बरस की मसाफ़त तक होंगे। सब से आज़म व आला नेमत जो मुसलमानों को नसीब होगी वोह अल्लाह का दीदार है कि उस के बराबर कोई नेमत नहीं जिसे एक बार दीदार मुयस्सर होगा हमेशा हमेशा उस के जौक में मुस्तग्रक रहेगा कभी न भूलेगा।
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 10📕*
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]◆➦ जन्नत की ऐसी ऐसी दाइमी नेमतों को पेशे नज़र रखते हुवे जिस में रब का दीदार शामिल है हर मुसलमान को चाहिए कि वोह जन्नत के लिए कमरबस्ता हो जाए और सुनने इब्ने माजा की एक हदीसे मुबारका में है कि सरकारे मदीना राहते कल्बो सीना ﷺ ने फ़रमाया : है कोई जो जन्नत को पाने के लिए कमरबस्ता हो
]◆➦ लेहाजा अल्लाह की रेहमत से उम्मीद रखते हुवे ऐसे आमाल में मश्गूल हो जाइए जिन पर अमल करने वालों के लिए जन्नत की बिशारत है और अहादीसे मुबारका में उन आमाल का तजकिरा मौजूद है जिन पर जन्नत की खुश खबरी है उन अहादीसे जन्नत निशान में से साठ आमाल को हज़रते अल्लामा मौलाना अब्दुल मुस्तफा आजमी ने अपनी किताब “ बिहिश्त की कुन्जियां ' में ज़िक्र फ़रमाया है जन्नत की तय्यारी के लिए येह किताब मश्अले राह साबित होगी।
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 11📕*
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•⊰ *तआरुफे मुसन्निफ़* ⊱•
]◆➦ हज़रते अल्हाज मौलाना अब्दुल मुस्तफा आजमी रहमतुल्लाह तआला अलैह जी क़ादा सिन 1333 हिजरी को अपने आबाई वतन घोसी जिल्अ आज़म गढ़ में पैदा हुवे।
]◆➦ *शजरए नसब येह है* मुहम्मद अब्दुल मुस्तफ़ा बिन शैख़ हाफ़िज़ अब्दुर्रहीम बिन शैख़ हाजी अब्दुल वहाब बिन शैख चमन बिन शैख़ नूर मुहम्मद बिन शैख मिठू बाबा रहमतुल्लाह तआला अलैह आप के वालिदे गिरामी हज़रते हाफ़िज़ अब्दुर्रहीम साहिब हाफ़िज़े कुरआन उर्दू ख्वां वाकिफ़े मसाइले दीनिय्या मुत्तकी परहेज़गार थे। गाऊं के मशहूर बुजुर्ग हाफ़िज़ अब्दुस्सत्तार साहिब से शरफे तलम्मुज़ हासिल था जो हज़रते अशरफ़ी मियां किछौछवी के बड़े भाई हज़रते शाह सय्यिद अशरफ़ हुसैन साहिब क़िब्ला किछौछवी के मुरीद थे चन्द साल हुवे इन्तिकाल फ़रमा गए।
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 12📕*
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*🔑 बिहिश्त की कुन्जियां 🔑*
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]◆➦ *तालीम* अल्लामा आज़मी साहिब कुरआने मजीद और उर्दू की इब्तिदाई तालीम अपने वालिदे माजिद से हासिल कर के मद्रसा इस्लामिय्या घोसी में दाखिल हुवे और उर्दू फ़ारसी की मजीद तालीम पाई। चन्द माह मद्रसा नासिरुल उलूम घोसी में भी तालीम हासिल की। इस के बाद मद्रसए मारूफ़िय्या मारूफ़ पुरा में मीज़ान से शर्हे जामी तक पढ़ा। फिर सिन 1351 हिजरी में मद्रसए मुहम्मदिय्या हनफ़िय्या अमरोहा जिल्अ मुरादाबाद ( यूपी ) का रुख किया और वहां शैखुल उलमा हज़रते मौलाना शाह उवैस हसन उर्फ गुलाम जीलानी आज़मी रहमतुल्लाह तआला अलैह ( शैखुल हदीस दारुल उलूम फैजुर्रसूल बराऊं शरीफ़ मुतवफ्फ़ा सिन 1397 हिजरी ) और हज़रते मौलाना हिक्मतुल्लाह साहिब क़िब्ला अमरोही और हज़रते मौलाना सय्यिद मुहम्मद खलील साहिब चिश्ती काज़िमी अमरोही की ख़िदमत में एक साल रेह कर इक्तिसाबे फैज़ किया।
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 12📕*
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•⊰ *तआरुफे मुसन्निफ़* ⊱•
]◆➦ *तालीम* इस के बाद सिन 1352 हिजरी में हज़रते सदरुश्शरीआ मौलाना हकीम मुहम्मद अमजद अली साहिब आज़मी रहमतुल्लाह तआला अलैह के हमराह बरेली शरीफ़ तशरीफ़ ले गए और मद्रसा मन्ज़रे इस्लाम महल्ला सौदा गरान बरेली में दाखिल हो कर तालीमी सिलसिला शुरूअ फ़रमाया। मुल्ला हसन मीबज़ी वगैरा चन्द किताबें हज़रते मुहद्दिसे आज़म पाकिस्तान मौलाना मुहम्मद सरदार अहमद साहिब चिश्ती गोरदासपुरी रहमतुल्लाह तआला अलैह से पढ़ीं बाकी किताबें हज़रते सदरुश्शरीआ रहमतुल्लाह तआला अलैह से पढ़ीं। इस दौरान हुज्जतुल इस्लाम हज़रते मौलाना शाह हामिद रज़ा खान साहिब रहमतुल्लाह तआला अलैह ( खलफ़े अक्बर सरकारे आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा रहमतुल्लाह तआला अलैह की ख़िदमत में हाज़िरी दी और शरफ़याब हुवे। मौसूफ़ आप पर बड़ा करम फ़रमाया करते थे। आला हज़रत रहमतुल्लाह तआला अलैह के बरादरे खुर्द हज़रते मौलाना मुहम्मद रज़ा खान साहिब उर्फ नन्हे मियां रहमतुल्लाह तआला अलैह से फ़राइज़ की मश्क की और हुजूर मुफ्तिए आज़मे हिन्द मौलाना शाह मुस्तफा रज़ा खान नूरी रहमतुल्लाह तआला अलैह ( जैब सज्जादा आलिया कादिरिय्या रज़विय्या बरेली शरीफ़ खलफे असगर हुजूर आला हज़रत रहमतुल्लाह तआला अलैह के दारुल इफ़्ता में भी हाज़िरी दी।
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•⊰ *तआरुफे मुसन्निफ़* ⊱•
]◆➦ *तालीम* बरेली शरीफ़ में दौराने तालिबे इल्मी आप की इक्तिसादी हालत अच्छी नहीं थी। मस्जिद की इमामत और ट्यूशन से अख़राजात पूरे करते थे। जब हज़रते सदरुश्शरीआ मौलाना अमजद अली साहिब रहमतुल्लाह तआला अलैह बरेली से रुख्सत हो कर मद्रसए हाफ़िज़िय्या सईदिय्या दादूं जिल्अ अलीगढ़ में मस्नदे तदरीस पर जल्वा फ़रमा हुवे तो मौलाना आज़मी साहिब भी बरेली शरीफ़ न रेह सके और 10 शव्वाल सिन 1355 हिजरी को अलीगढ़ हज़रते सदरुश्शरीआ की ख़िदमत में हाज़िर हुवे और मद्रसए हाफ़िज़िय्या सइदिय्या में दाखिला लिया और इम्तिहानात में अच्छी पोजीशन से कामयाब हो कर इन्आमात भी हासिल किए। अलीगढ़ के दौराने क़ियाम हज़रते मौलाना सय्यद सुलैमान अशरफ़ बिहारी प्रोफ़ेसर दीनियात मुस्लिम यूनीवर्सिटी अलीगढ़ ( ख़लीफ़ए आला हज़रत की ख़िदमत में भी हाज़िरी देते और इल्मी इक्तिसाब फ़रमाते रहे। सिने 1356 हिजरी में मद्रसए हाफ़िज़िय्या सईदिय्या दादूं से सनदे फ़राग हासिल किया। हज़रते मौलाना सय्यिद शाह मिस्बाहुल हसन साहिब चिश्ती रहमतुल्लाह तआला अलैह ने सर पर दस्तारे फजीलत बांधी।
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*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 13📕*
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]◆➦ *बैअत* 17 सफ़रुल मुज़फ्फ़र सिन 1353 हिजरी में हज़रते काज़ी इब्ने अब्बास साहिब अब्बासी नक्शबन्दी रहमतुल्लाह तआला अलैह के पेहले उर्स में हज़रते अल्हाज हाफ़िज़ शाह अबरार हसन ख़ान साहिब नक्शबन्दी शाहजहांपुरी ( जो क़ाज़ी साहिब मौसूफ़ के पीरभाई थे ) से मुरीद हुवे। 2. जीकादा सिन 1370 हिजरी को हज़रते शाह अबरार हसन साहिब नक्शबन्दी रहमतुल्लाह तआला अलैह का इन्तिकाल हो गया तो उस के बाद आप के ख़लीफ़ए बरहक़ अल्हाज काज़ी मेहबूब अहमद साहिब अब्बासी नक्शबन्दी से भी इक्तिसाबे फैज़ किया। चूंकि शुरूअ ही से मौसूफ़ का रुजहान सिलसिलए नक्शबन्दिया की तरफ़ ज़्यादा था इसी लिए इस सिलसिले में मुरीद हुवे मगर दीगर सलासिल के बुजुर्गों से भी इक्तिसाबे फैजो बरकात का सिलसिला जारी रखा। 25 सफ़रुल मुज़फ़्फ़र सिन 1358 हिजरी में उर्से रज़वी के मुबारक व मसऊद मौक़अ पर हज़रते हुज्जतुल इस्लाम मौलाना हामिद रज़ा खान साहिब ( सिन 1363 हिजरी ) ने सिलसिलए आलिया कादिरिय्या रज़विय्या की ख़िलाफ़त व इजाज़त से सरफ़राज़ फ़रमाया।
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*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 13📕*
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]◆➦ *सिलसिलए तदरीस* फ़ारिगुत्तहसील होने के बाद सब से पेहले मद्रसए इस्हाक़िय्या जोधपुर ( राजस्थान ) में मुदर्रिस हुवे। दर्से निज़ामी का इफ़्तिताह फ़रमाया और मद्रसा तरक्की की राह पर चल निकला था कि अचानक जोधपुर में हिन्दू मुस्लिम फ़साद होने की से बहुत से बैरूनी उलमा आप रहमतुल्लाह तआला अलैह को गिरिफ़्तार किया गया और बाद में इश्तिआल अंगेज़ तकरीर करने का इल्ज़ाम लगा कर हुकूमत ने शहर बदर कर दिया जिस से मद्रसे को भी नुक्सान हुवा और मौलाना मौसूफ़ को भी वहां से आना पड़ा।
]◆➦ सितम्बर सिन 1939 ईसवी में हज़रते काजी महबूब अहमद साहिब की दावत पर अमरोहा तशरीफ़ ले गए और वहां मद्रसए मुहम्मदिय्या हनफ़िय्या में तदरीसी ख़िदमात अन्जाम दी जिस का सिलसिला तीन साल तक रहा। उस वक्त वहां पर मौलाना सय्यिद मुहम्मद खलील साहिब काज़िमी अमरोही सद्र मुदर्रिस थे इस दौरान भी मौसूफ़ से इस्तिफ़ादा किया। इस के बाद सिन 1942 ईसवी में दारुल उलूम अशरफ़िय्या मुबारकपुर में तदरीसी ख़िदमात का आगाज़ फ़रमाया और ग्यारह साल तक यहां भी दर्स देते रहे और इस की तामीर व तरक्की में भरपूर हिस्सा लिया।
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 14📕*
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•⊰ *तआरुफे मुसन्निफ़* ⊱•
]◆➦ *सिलसिलए तदरीस* सिने 1952 ईसवी में आप का अहमदाबाद गुजरात ब सिलसिलए तकरीर दौरा हुवा। मुतअद्दद तकारीर के सबब लोग गिरवीदा हुवे और जब वहां पर एक दारुल उलूम का क़ियाम अमल में आया तो अहमदाबाद के अमाइदे एले सुन्नत ने ब इसरार मुबारकपुर से बुलवा कर दारुल उलूम शाहे आलम में मुर्रिस रखा। इस सिलसिले में हज़रते मौलाना इब्राहीम रज़ा खां साहिब नबीरए आला हज़रत और हुजूर मुफ्तिए आज़म हिन्द अलहीरहमा ने भी दारुल उलूम के क़ियाम और तरक्की में भरपूर हिस्सा लिया। मौलाना ने इस दारुल उलूम की तरक्की और बक़ा में भरपूर और जान तोड़ कर कोशिश की और इस को उरूज तक पहुंचा कर दम लिया।
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 16📕*
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•⊰ *तम्हीदी तजल्लियां* ⊱•
]◆➦ जन्नती जेवर की तस्नीफ़ के बाद खुद ब खुद दिल में येह ख़याल पैदा हुवा कि जन्नत की नेमतों और जन्नत में ले जाने वाले आमाल के बारे में भी कोई किताब लिख दूं ताकि मुसलमान भाई जन्नती आमाल की तरफ़ रागिब हो कर अपने जन्नत में जाने का सामान करें मगर ख़ुदा की शान कि इस दरमियान में कई बार मुझ पर मुख़्तलिफ़ बीमारियों का हम्ला होता रहा और मैं कुछ भी न लिख सका लेकिन इम्साल रमज़ान सिन 1400 हिजरी में सेहत क़दरे अच्छी रही और मैं ने येह तै कर लिया कि इस रमज़ान शरीफ़ में छोटा या बड़ा कहीं का भी कोई सफ़र नहीं करूंगा चुनान्चे माहे रमज़ान में मकान पर कियाम के दौरान ब हालते रोज़ा इन औराक को तेहरीर करने की तौफ़ीक हुई।
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 21📕*
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•⊰ *तम्हीदी तजल्लियां* ⊱•
]◆➦ यूं तो हर नेक अमल जन्नत में ले जाने वाला अमल है मगर बाज़ ऐसे नेक आमाल भी हैं जिन पर खुसूसिय्यत के साथ अल्लाह पाक व रसूल ﷺ की तरफ़ से जन्नत का वादा और बिहिश्त की खुश खबरी दी गई है चुनान्चे , इसी किस्म के आमाले हसना में से चुन चुन कर साठ अमलों को हृदीसों से मुन्तख़ब कर के जम्अ कर दिया है और उन साठ आमाल को उनवान बना कर हर उनवान के तहत उन आमाल के फ़ज़ाइल में चन्द अहादीस नक्ल कर दी हैं फिर हर उनवान के आखिर में तशरीहात व फ़वाइद" लिख कर हदीसों की वज़ाहत करते हुवे ज़रूरी मसाइल की भी तौज़ीह कर दी है। इन मुन्तशिर औराक के मजमूए को *बिहिश्त की कुन्जियां आमाले जन्नत* के नाम से नाज़िरीन की ख़िदमत में पेश करता हूं ।
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 21📕*
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*🤲🏻 अपनी नेक दुआओं में याद रखें..✍🏻*
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🅟🅞🅢🅣 ❶❼
*🔑 बिहिश्त की कुन्जियां 🔑*
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•⊰ *तम्हीदी तजल्लियां* ⊱•
]◆➦ पेहले येह खयाल हुवा कि चूंकि येह किताब आम मुसलमानों के लिए लिखी गई है। इस लिए हर उनवान के तहत में चन्द हदीसों के उर्दू तर्जमों को नक्ल कर दूं मगर फिर नागहां येह खयाल पैदा हो गया कि हदीसों के अस्ल अरबी अल्फ़ाज़ किताबों के हवालों के साथ नक्ल कर के फिर इन का मतलब खेज़ तर्जमा कर दिया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। क्यूंकि हदीस पढ़ने वाले तलबा को कुछ हदीसों के तर्जमों में आसानी भी हो जाएगी और हमारे अवाम भाई, रसूलुल्लाह ﷺ की ज़बाने मुबारक से निकले हुवे मुक़द्दस अल्फ़ाजे हदीस की तिलावत का शरफ़ और अज्रो सवाब हासिल कर लें, इस लिए बाज़ उनवानों में हदीस के अस्ल अल्फ़ाज़ मअ सफ़हाते कुतुब नक्ल कर के इन का बा मुहावरा और मतलब खेज़ तर्जमा तेहरीर कर दिया है और बाज़ उनवानों में ब गरजे इख़्तिसार सिर्फ हदीसों का तर्जमा लिख दिया है मगर किताबों के सफ़हात का हवाला और "तशरीहात व फ़वाइद" हर उनवान के तहत लिखा गया है ताकि हदीसों को किताबों में तलाश कर लेना आसान हो और हदीसों के समझने में कोई दुश्वारी न लाहिक हो। ज़बान कस्दन बहुत आम फेम और आसान तेहरीर की है ताकि मज़ामीन के समझने में औरतों और बच्चों को भी कोई दिक्क़त न पेश आए।
🤲🏻दुआ है कि अरहमुर्राहिमीन अपने फ़ॉलो करम से इस मजमूए को दोनों जहान में शरफे कबूलिय्यत से सरफ़राज़ फ़रमाए और मुझ फ़क़ीर और मेरे वालिदैन व असातेज़ा नीज़ मेरे सब अहबाब व मुरीदीन व तलामिज़ा के लिए सामाने आख़िरत व ज़रीअए मगफ़िरत बनाए और इस किताब के जरीए तमाम मुसलमान मर्दो और औरतों को आमाले जन्नत की रगबत और अमल करने की तौफ़ीक़ हासिल हो।आमीन...
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 22📕*
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*🤲🏻 अपनी नेक दुआओं में याद रखें..✍🏻*
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🅟🅞🅢🅣 ❶❾
*🔑 बिहिश्त की कुन्जियां 🔑*
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•⊰ *जन्नत क्या है* ⊱•
]◆➦ आला दरजे के रेशमी लिबास और सितारों से बढ़ कर चमकते और जगमगाते हुवे सोने चांदी और मोती व जवाहिरात के जेवरात ,ऊंचे ऊंचे जडाव तख्त उन पर गालीचे और चांदनियां बिछी हुई और मस्नदें लगी हुई हैं। ऐशो निशात के लिए दुन्या की औरतें और जन्नत की हूरें हैं जो बे इन्तिहा हसीन व खूब सूरत हैं। ख़िदमत के लिए खूब सूरत लड़के चारों तरफ़ दस्त बस्ता हर वक्त हाज़िर हैं अल ग़रज़ जन्नत में हर किस्म की बे शुमार राहतें और नेमतें तय्यार हैं। और जन्नत की हर नेमत इतनी बे नज़ीर और इस क़दर बे मिसाल है कि न कभी किसी आंख ने देखा न किसी कान ने सुना न किसी के दिल में इस का ख़याल गुज़रा। जन्नती लोग बिला रोक टोक उन तमाम नेमतों और लज्ज़तों से लुत्फ़ अन्दोज़ होंगे और उन तमाम नेमतों से बढ़ कर जन्नत में सब से बड़ी येह नेमत मिलेगी कि जन्नत में जन्नतियों को खुदावन्दे कुडूस - का दीदार नसीब होगा।
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 24📕*
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🅟🅞🅢🅣 ❷⓿
*🔑 बिहिश्त की कुन्जियां 🔑*
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•⊰ *जन्नत क्या है* ⊱•
]◆➦ जन्नत में न नींद आएगी न कोई मरज़ होगा न बुढ़ापा आएगा न मौत होगी। जन्नती हमेशा हमेशा जन्नत में रहेंगे और हमेशा तनदुरुस्त और जवान ही रहेंगे। एहले जन्नत खूब खाएं पिएंगे मगर न उन को पेशाब पाखाने की हाजत होगी न वोह थूकेंगे न उन की नाक बहेगी। बस एक डकार आएगी और मुश्क से ज्यादा खुश्बूदार पसीना बहेगा और खाना पीना हज्म हो जाएगा। जन्नती हर किस्म की फ़िक्रों से आज़ाद और रन्जो गम की ज़हमतों से मेहफूज़ रहेंगे। हमेशा हर दम और हर कदम पर शादमानी और मसर्रत की फ़ज़ाओं में शादो आबाद रहेंगे और किस्म किस्म की नेमतों और तरह तरह की लज्ज़तों से लुत्फ़ अन्दोज़ व महजूज़ होते रहेंगे *( खुलासए कुरआनो हदीस )*
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 24📕*
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*🤲🏻 अपनी नेक दुआओं में याद रखें..✍🏻*
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🅟🅞🅢🅣 ❷❶
*🔑 बिहिश्त की कुन्जियां 🔑*
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•⊰ *जन्नत कहां है* ⊱•
]◆➦ ज्यादा सहीह कौल येह है कि जन्नत सातवें आस्मान के ऊपर है क्यूंकि कुरआने मजीद में है कि *सिद्रतुल मुन्तहा के पास ही जन्नतुल मावा है।* और एक हदीस में येह आया है कि जन्नत की छत अर्श पर है। *( हाशिया शर्हे अकाइदे नसफ़िया , सफह 80 )
•⊰ *जन्नतें कितनी हैं* ⊱•
]◆➦ जन्नतों की तादाद आठ है जिन के नाम येह हैं।
( 1 ) दारुल जलाल
( 2 ) दारुल करार
( 3 ) दारुस्सलाम
( 4 ) जन्नते अदन
( 5 ) जन्नतुल मावा
( 6 )जन्नतुल खुल्द
( 7 ) जन्नतुल फ़िरदौस
( 8 ) जन्नतुन्नईम *( तफ़्सीरे रूहुल बयान , जि . 1 स . 82 )*
बाकी अगली पोस्ट में.✍️
*🔰बिहिश्त की कुन्जियां सफह 25📕*
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