रविवार, 16 मई 2021

📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट 📗


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मुहम्मद इमरान रज़वी


 *📃🖌️📃🕌 ﴾ ﷽ ﴿ 🕋📃🖌️📃*


    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 01 📗​*

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       *🤝🏻 मुलाकात का तरीका* 🤝🏻


*👉🏻 अस्सलामु अलैकुम*

*👉🏻 व-अलैकुमअस्सलाम*


 *◾ सवाल :-* आप ब खैर व आफियत हैं ? 

*◽ जवाब :-* अल्लाह का फज्ल है और आप की दुआ है। 


*◾ सवाल :-* क्या मैं आप से चन्द (कुछ) बातें दरियाफ्त कर सकता हूँ ? 

*◽ जवाबः-* जरूर पूछिये जवाब देने की कोशिश करूंगा। 


◾ *सवाल :-* आपका क्या नाम है ? 

*◽ जवाब :-* मेरा नाम हामिद है। 


*◾ सवाल :-* और आप का नाम ? 

*◽ जवाब :-* मुझे इकबाल अहमद कहते हैं। 


*◾ सवाल :-* अच्छा यह बताइये आपके मज़हब का क्या नाम है ? 

◽ *जवाबः -* इस्लाम। 


*◾ सवाल :-* और जो लोग इस्लाम पर ईमान ले आये उन्हें क्या कहते हैं ?

 *◽ जवाब :-* मुसलमान। 


*◾ सवाल :-* मुसलमान किसकी बन्दगी करता है ? 

*◽ जवाब :-* अल्लाह तआला की। 


*◾ सवाल :-* जो लोग खुदा तआला को नहीं मानते उन्हें क्या कहते हैं ? 

*◽ जवाबः-* काफ़िर। 


◾ *सवाल :-* जो लोग बुतों की पूजा करते हैं या दो तीन खुदा मानते हैं उन्हें क्या कहते हैं ? 

*◽ जवाबः-* काफ़िर व मुशरिक। 


*◾ सवाल :-* काफ़िर और मुशरिक दोज़ख़ में जायेंगे या जन्नत में ? 

*◽ जवाब :-* दोज़ख में 


◾ *सवाल :-* अच्छा यह बताइये जो लोग हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के मानने वाले हैं उन्हें क्या कहते हैं ? 

◽ *जवाब :-* ईसाई। 


*◾ सवाल :-* और जो लोग आग की पूजा करते हैं उन्हें क्या कहते हैं ? 

*◽ जवाबः-* मजूसी या पारसी या आतिश - परस्त। 


*◾ सवाल :-* जो लोग सिर्फ हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के मानने वाले हैं उन्हें क्या कहते हैं ? 

*◽ जवाबः- यहूदी।* 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 2,3)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 02 📗​*

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◼️ *सवाल : -* इस्लाम किस मज़हब को कहते हैं ? 

◻️ *जवाब :-* इस्लाम उस मज़हब को कहते हैं जो यह सिखाता है कि खुदा एक है बन्दगी के लायक़ वही है और हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ख़ुदा के बरगुजीदा बन्दे और प्यारे रसूल हैं। 


◼️ *सवाल :-* आदमी किस तरह इस्लाम में दाखिल होता है ? 

◻️ *जवाब :-* कलिमए - तौहीद पढ़ कर और इस्लाम लाकर। 


◼️ *सवाल :-* कलिमए - तौहीद क्या है ? 

◻️ *जवाब :-* ला इला - ह इल्लल्लाहु मुहम्मदुर - रसूलुल्लाह। 

*जिसका मतलब यह है* अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लाइक नहीं मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल हैं।

इस कलिमे को कलिमए तय्यबा और कलिमए - इस्लाम भी कहते हैं। 


◼️ *सवाल :-* कलिमए - शहादत क्या है ? 

◻️ *जवाब :-* कलिमए - शहादत 

अश - हदु अल्ला इला - ह इल्लल्लाहु व अश - हदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू० 

📖 *तर्जुमा :-* मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह तआला के सिवा कोई मअबूद नहीं और गवाही देता हूं कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अल्लाह के बन्दे और उसके रसूल हैं।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 3,4)*

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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 03 📗​*

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◼️ *सवाल :-* ईमान की कितनी किस्में हैं ? 

◼️ *जवाब :-* दो किस्में हैं। 

 (1) ईमाने मुजमल। 

 (2) ईमाने मुफ़स्सल।


◼️ *सवाल :-* ईमाने मुज्मल किसे कहते हैं ? 

◼️ *जवाब :-* ईमाने मुज्मल यह है।

आमन्तु बिल्लाहि कमा हु - व बि अस्माइही व सिफातिही व. कबिल्तु जमी - अ अहकामिही 0 

*📖 तर्जुमा :-* ईमान लाया मैं अल्लाह पर जैसा कि वह अपने नामों और सिफ़तों के साथ है और में ने उसके तमाम अहकाम कुबूल किये। 


◾ *सवाल :-* ईमाने मुफ़स्सल क्या है ? 

◼️ *जवाब :-* ईमाने मुफस्सल यह है।

 आमन्तु बिल्लाहि व मलाइ - क - तेही व कुतुबिही व रुसुलिही वल यौमिल आखिरिवल कदरे खैरिही व शर्रिही मिनल्लाहि तआला वल बसि बअदल मौत। 

📖 *तर्जुमाः-* ईमान लाया मैं अल्लाह पर और उसके फ़रिश्तों और उसकी किताबों पर और उसके रसूलों पर और कियामत के दिन पर और इस पर कि अच्छी और बुरी तक़दीर खुदा तआला की तरफ से होती है और मौत के बाद उठाये जाने पर।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 4,5)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 04 📗​*

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◾ *सवाल :-* आसमान, ज़मीन, चाँद, सूरज, दरिया, पहाड़ सारी कायनात (तमाम दुनिया) का पैदा करने वाला कौन है ? 

◽ *जवाब :-* अल्लाह तआला। 


◾ *सवाल :-* क्या अल्लाह तआला झूट बोल सकता है ? 

◽ *जवाब :-* नहीं वह हर ऐब से पाक और साफ़ है। 


◾ *सवाल :-* क्या अल्लाह तआला अपने किसी काम में किसी से मदद चाहता है ? 

◽ *जवाब :-* हरगिज़ नहीं वह जिस चीज़ को जिस वक्त पैदा करना चाहता है पैदा करता है वह किसी का मोहताज नहीं। 


◾ *सवाल :-* क्या अल्लाह तआला ने अपने बन्दों की हिदायत के लिए कोई अपना ख़लीफ़ा भी भेजा है ?

◽ *जवाब :-* जी हाँ। 


◾ *सवाल :-* वह कौन लोग हैं ? 

◽ *जवाब :-* नबी और रसूल हैं। 


◾ *सवाल :-* सबसे पहले किस नबी को भेजा ? 

◽ *जवाबः-* हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को। 


◾ *सवाल :-* और सबसे आखिर में ? 

◽ *जवाब :-* हमारे पैगम्बर हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को। 


◾ *सवाल :-* क्या आपके बाद कोई नबी और रसूल आयेगा ? 

◽ *जवाब :-* जी नहीं अब दरवाज़ -ए- नबुब्बत बन्द हो चुका है। हमारे पैग़म्बर ख़ातेमुन - नबिय्यीन (आखरी नबी) हैं अब कोई नबी नहीं आएगा। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 5,6)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 05 📗​*

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◾ *सवाल :-* हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कौन हैं ? 

*◽ जवाब :-* अल्लाह तआला के बरगुजीदा बन्दे और उसके रसूल व पैगम्बर हैं हम लोग उन्हीं की उम्मत में हैं।


◾ *सवाल :-* हमारे पैगम्बर रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहां पैदा हुए ? 

◽ *जवाब :-* मक्का मुअज्जमा में जहाँ खान - ए - काबा है। 


◾ *सवाल :-* आपके वालिद और दादा और माँ का क्या नाम था ? 

◽ *जवाब :-* आपके वालिद का नाम अब्दुल्लाह और दादा का नाम अब्दुल मुत्तलिब और माँ का नाम बीबी आमिना था। 


◾ *सवाल :-* हमारे पैगम्बर किस महीने में पैदा हुए ? 

◽ *जवाब :-* रबीउल अव्वल शरीफ़ के महीने में पैदा हुए। सोमवार का दिन था और बारह तारीख थी। 


◾ *सवाल :-* हमारे पैगम्बर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और दूसरे पैग़म्बरों के मर्तबे में क्या फर्क है ? 

◽ *जवाब :-* हमारे पैगम्बर मर्तबे में सब पैगम्बरों से बड़े और अफ़ज़ल और ख़ुदा की सारी मखलूक में सब से बुज़ुर्ग व बरतर हैं। 


◾ *सवाल :-* अगर कोई शख्स हमारे पैगम्बर को न माने या तौहीन करे वह कैसा है ? 

*◽ जवाबः-* जो शख्स हमारे पैगम्बर को खुदा का रसूल न माने या ज़बान से उन्हें रसूल मान कर उनकी शान में गुस्ताखी व बे - अदबी करे वह काफिर है। 


◾ *सवाल :-* अल्लाह तआला ने हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को एलाने नबुव्वत का कब हुक्म दिया ? 

*◽ जवाबः-* चालीस बरस की उम्र में।


*◾ सवाल :-* हमारे पैगम्बर तमाम उम्र कहाँ रहे ? 

◽ *जवाब :-* तिर्पन साल की उम्र तक अपने शहर मक्का मुअज्जमा में रहे उसके बाद वहाँ से हिजरत' करके मदीना मुनव्वरा चले गये। दस बरस तक वहां रहे फिर तिर्सठ साल की उम्र में आप का इन्तेकाल हुआ। 


◾ *सवाल :-* हमारे पैगम्बर का मज़ार कहां है ? 

◽ *जवाबः-* मदीना मुनव्वरा में। 


◾ *सवाल :-* जिस इमारत में आपकी कब्र शरीफ है उसको क्या कहते हैं ? 

◽ *जवाबः-* गुम्बदे खज्रा। 


◾ *सवाल :-* गुम्बदे खज्रा में और भी किसी की कब्र है ? 

◽ *जवाब :-* जी हां हज़रत अबू बकर सिद्दीक और हज़रत उमर फारूके आजम (रज़ियल्लाहु तआला अन्हुमा) की के भी हैं। 


*◾ सवालः-* क्या नबी और रसूल भी अपनी कब्र में सड़ गल कर मिट्टी में मिल जाते हैं ?

*◽ जवाब :-* हरगिज़ नहीं। वह अपनी कब्र में जिन्दा हैं। अपनी उम्मत का हाल जानते हैं। हमारी नेकी और बदी का उन्हें इल्म है फ़रिश्ते उनकी खिदमत में हाज़िर होते हैं और हमारी आवाज़ भी सुना करते हैं।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 6,7)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 06 📗​*

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📝 *सवाल :-* हिजरत किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाबः-* अल्लाह तआला की रज़ा और खुशी के लिये अपने वतन और रिश्तेदारों को छोड़ने को हिजरत कहते हैं। 

1.अल्लाह की रज़ा के लिए अपने वतन और अहले कराबत को छोड़ना हिजरत कहलाता है।


📝 *सवाल :-* अल्लाह तआला ने हमारे पैगम्बर पर जो किताब उतारी उसका क्या नाम है ? 

✍🏻 *जवाब :-* उस किताब का नाम कुरआन मजीद है। 


📝 *सवाल :-* कितने दिनों में पूरा कुरआन शरीफ़ नाज़िल हुआ ? 

✍🏻 *जवाबः-* तेईस बरस में थोड़ा - थोड़ा नाज़िल हुआ है। 


📝 *सवाल :-* कुरआन शरीफ़ किस तरह नाज़िल होता था ? 

✍🏻 *जवाब :-* अल्लाह तआला की तरफ से हज़रत जिबरील अलैहिस्सलाम कुरआन शरीफ की कोई सूरत या कुछ आयतें लेकर आते और आपको सुना देते। फिर आप दूसरों को बता देते और लिखवा देते। 


📝 *सवाल :-* जिबरील अलैहिस्सलाम कौन थे ? 

✍🏻 *जवाब :-* फ़रिश्ते हैं। खुदा तआला का हुक्म पैगम्बरों के पास लाते थे। 


📝 *सवाल :-* हमारे पैगम्बर को हजरत जिबरील सिर्फ कुरआन मजीद की आयतें सुना देते थे या मतलब भी बताते थे ? 

✍🏻 *जवाब :-* हजरत जिबरील सिर्फ सुना देते थे। कभी - कभी जिबरील अलैहिस्सलाम खुद भी कुरआन शरीफ का मतलब नहीं जानते थे। मगर हुजूर समझ लेते थे। 


📝 *सवाल :-* क्या हमारे पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इल्म हज़रत जिबरील अलैहिस्सलाम से भी ज्यादा है ? 

✍🏻 *जवाब :-* बेशक आपका इल्म सारी मखलूकात से ज्यादा है। आपको अल्लाह तआला ने तमाम उलूम की कुन्जी अता फ़माई 


📝 *सवाल :-* हमारे पैगम्बर छुपी हुई बातों को भी जानते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* जी हाँ ! हमारे पैगम्बर अल्लाह तआला के बताने से जाहिर और खुली यानी (शहादत) छुपीऔर गाइब (गैब) की तमाम बातें जानते हैं। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 7,8)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 07 📗​*

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📝 *सवाल :-* अच्छा अब यह तो बताईये कि मुसलमान अपने खुदा की बन्दगी कैसे करता है ? 

✍🏻 *जवाब :-* कलमा पढ़ता हैं नमाज़ पढ़ता है रोज़ा रखता है अपने माल की जकात देता है और हज करता है। 


*📝 सवाल :-* नमाज़ पढ़ने से पहले जो लोग हाथ मुँह धोते हैं। उसे क्या कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाबः-* उसे वजू कहते हैं। बगैर वजू के नमाज़ नहीं होती। 


*📝 सवाल :-* वजू करने का क्या तरीका है ? 

*✍🏻 जवाब :-* पहले बिस्मिल्लाह पढ़े। फिर वुज़ू की दुआ पढ़े फिर दोनों हाथों को कलाई तक तीन बार धोये। फिर उसके बाद तीन बार कुल्ली करे। मिस्वाक न हो तो उंगलियों से दाँत साफ़ करे फिर तीन बार नाक में पानी डाल कर बायें उल्टे हाथ की छोटी उंगली से नाक साफ करे, फिर पूरे चेहरे को  तीन बार धोये, इसके बाद दोनों हाथ कुहनियों समेत तीन बार धोये, इसके बाद चौथाई सर का मसह करे फिर कानों का मसह करे, फिर गर्दन कामराह करे।फिर हॉट की उंगलियों के खलाल करे मसह सिर्फ एक बार करना चाहिये, फिर दोनों पाँव को टखनों तक अच्छी तरह तीन बार धोये। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 8,9)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 08 📗​*

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*◼️सवाल :-* नमाज़ पढ़ने से पहले एक शख्स खड़े होकर अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर पुकारता है उसे क्या कहते हैं ? 

*◽जवाब :-* उसको अजान कहते हैं 


*◼️सवाल :-* अज़ान किस तरह दी जाती है और उसके

अल्फाज़ क्या हैं ? 

*◽जवाब : -* जब नमाज़ का वक्त हो जाये तो नमाज़ से कुछ पहले एक शख्स पच्छिम की तरफ यानी क़िबले कि तरफ मुँह करके जोर - ज़ोर से जो यह अल्फाज़ कहे उसी को अजान कहते हैं।


अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर 

(अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह सबसे बड़ा है) 


अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर 

(अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह सबसे बड़ा है)

 

अश - हदु अल्ला इला - ह इल्लल्लाह 

(मैं गवाही देता है कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं)


 अश - हदु अल्ला इला - ह इल्लल्लाह 

(मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं)

 

 अश - हदु अन्न मुहम्मदर रसूलुल्लाह 

(मैं गवाही देता हूं कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल हैं)

 

 अश - हदु अन्न मुहम्मदर रसूलुल्लाह 

(मैं गवाही देता हूं कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल हैं)


 हय्य अलस्सलाह हय्य अलस्सलाह (आओ नमाज के लिये) (आओ नमाज के लिये)

 

 हय्य अलल फलाह हय्य अलल फलाह (आओ कामयाबी की तरफ) (आओ कामयाबी की तरफ) 


 अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर 

(अल्लाह सब से बड़ा है) (अल्लाह सब से बड़ा है) 


 लाइला - ह इल्लल्लाह 

(अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लाइक नहीं) 


*⚠️ नोट : -* सुबह की अजान में ? हय्य अलल फलाह के बाद अस्सलातु खैरुम मिनन् नौम (नमाज़ बेहतर है नींद से) भी दो बार कहना चाहिए। 


◾ *सवाल : -* जो शख्स अज़ान या तकबीर कहता है उसे क्या कहते हैं ? 

◽ *जवाब : -* अज़ान कहने वाले को मुअज्जिन और तकबीर कहने वाले को मुकब्बिर कहते हैं। 


◾ *सवाल : -* अज़ान या इकामत में सरकारे दोआलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का नाम सुनकर क्या करना चाहिए ? 

◽ *जवाबः-* सल्लल्लाहो अलैही व सल्लम कहते हुए हाथ के दोनों अंगूठों को चूम कर आंखों में मलना चाहिये। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 10,11,12)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 09 📗​*

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◾ *सवाल : -* जिस तरफ़ मुँह करके नमाज पढ़ते हैं, उसे क्या कहते हैं ? 

◽ *जवाबः-* उसे किबला कहते हैं। 


◾ *सवाल : -* रात व दिन में नमाज़ कितनी बार पढ़ी जाती है ? 

◽ *जवाबः-* रात व दिन में पांच वक्त की नमाजें पढ़ी जाती हैं। 


◾ *सवाल : -* पांचों नमाज़ों के नाम क्या हैं ? 

◽ *जवाब : -* फज्र, जोहर, अस्र, मगरिब और इशा यह नाम हैं। 

1️⃣ नमाज़े फ़ज़्र सुबह सूरज निकलने से पहले पढ़ी जाती है। 

2️⃣ दूसरी नमाज़े ज़ोहर दोपहर को सूरज ढलने के बाद पढ़ी जाती है। 

3️⃣ तीसरी नमाज़े अस्र सूरज डूबने से एक दो घंटे पहले पढ़ी जाती है। 

4️⃣ चौथी नमाज़े मगरिब शाम को सूरज डूबने के बाद पढ़ी जाती है। 

5️⃣ पांचवीं नमाजे इशा मगरिब के डेढ़ दो घंटे के बाद पढ़ी जाती है। 


◾ *सवाल : -* नमाज़ अकेले और जमाअत के साथ पढ़ने में क्या फर्क है ? 

◽ *जवाबः-* जो नमाज़ किसी इमाम के पीछे पढ़ी जाती है वह नमाज़ जमाअत वाली है और जो नमाज़ अकेले पढ़ी जाती है वह नमाज़ मुनफ़रिद नमाज़ है जो शख्स सबसे आगे नमाज़ पढ़ता है उसको इमाम कहते हैं और जो लोग उस इमाम के पीछे हैं उनको मुकतदी कहा जाता है। (फ़र्ज़ नमाज़ का जमाअत से पढ़ना वाजिब है) 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 12,13)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 10 📗​*

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*🌹 सवाल : -* तकबीर किसे कहते हैं ?

💐 *जवाब : -* जब लोग नमाज़ के लिये खड़े होने लगते हैं तो उससे पहले नमाज़ शुरू करने से पहले एक शख्स वही अल्फ़ाज़ कहता है जो अज़ान में कहे जाते हैं उसे तकबीर और इकामत भी कहते हैं

*तकबीर में हय्य अलल फलाह कहने के बाद कद कामतिस सलात भी दो बार कहना चाहिये।*


🌹 *सवाल :-* अज़ान के बाद कौन सी दुआ मांगी जाती है ? 

💐 *जवाब :-* अल्लाहुम्म रब्ब हाज़िहिद दअवतित्ताम्मति वस्सला तिल काएमतिः आति सय्यिदिना मुहम्मद निल वसील - त वल फ़ज़ील - त वद द - र - जतर - रफ़ीअ - त व असहू मकामम् महमूद निल लज़ीवअत्तहू वर.जुक्ता शफाअतहु यौमल कियामते इन्न - क ला तुखलिफुल मीआद, बे रहमति - क या अरहमर राहिमीन0


📖 *तर्जुमाः-* ऐ वह अल्लाह तआला जो मुकम्मल दुआ और मज़बूत नमाज़ का मालिक है, हमारे सरदार मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को वसीला इनायत फ़रमा और बुजुर्गी और बुलन्द मर्तबा और उन्हें मकामे महमूद पर फ़ाइज़ कर दे जिसका वादा फ़रमाया है और नसीब कर हमको उनकी शफाअत कियामत के दिन, बेशक तू वादे के ख़िलाफ़ नहीं करता अपनी रहमत के सदके उसे सबसे बड़ा रहमत करने वाला। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 13,14)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 11 📗​*

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📝 *सवाल :-* मस्जिद में किस तरह दाखिल होना चाहिये और उस वक्त क्या दुआ पढ़ी जाती है ? 

✍🏻 *जवाब :-* पहले दायां पाँव दाखिल करें और यह दुआ पढ़ें 

अल्लाहुम्मफतहली अबवा - ब रहमति - क0 

*📖 तर्जुमाः-* ऐ अल्लाह तआला तू मेरे लिये अपनी रहमत के दरवाजे खोल दे। 


📝 *सवाल :-* मस्जिद से किस तरह बाहर आना चाहिये और क्या पढ़ना चाहिये ? 

✍🏻 *जवाब :-* पहले बायाँ पाँव बाहर करें और यह दुआ पढ़ें। 

अल्लाहुम्म इन्नी अरअल - क मिन फालेकल - अज़ीम०

या ये दुआ पढ़े 👉 अल्लाहुम्मा इन्नी असलौका - मीन फ़ाज़लीक०

📖 *तर्जुमाः-* ऐ अल्लाह तआला मैं तेरे ला महदूद फज्ल का तलबगार हूं। 


📝 *सवाल :-* हर वक्त की नमाज़ में अलग - अलग कितनी रकअत नमाज़ पढ़नी चाहिये ? 

✍🏻 *जवाबः-* 

1️⃣ फज्र में चार रकअत, पहले दो रकअत सुन्नत मौक़ीक़द फिर दो रकअत फर्ज। 

2️⃣ जोहर में बारह रकात, पहले चार सुन्नत मौक़ीक़द फिर चार फ़र्ज़ उसके बाद दो सुन्नत मौकीदाह फिर दो नफ़्ल। 

3️⃣ अस्र में आठ रक्त, पहले चार सुन्नत गैर मौकीदाह फिर चार फ़र्ज़। 

4️⃣ मगरिब में सात रक्त, पहले तीन रकअत फ़र्ज़ उसके बाद दो सुन्नत मौकीदाह फिर दो नफ़्ल, 

5️⃣ इशा में सत्तरह रकअत, पहले चार सुन्नत गैर मौकीदाह फिर चार फ़र्ज़ उसके बाद दो सुन्नत मौक़ीदह फिर दो नफ़्ल फिर तीन रक्त वित्र वाजिब फिर दो नफ्ल।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 14)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 12 📗​*

*▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


*📝 सवाल :-* जुमा में कितनी रकअत नमाज पढ़नी चाहिये ? 

*✍🏻 जवाबः-* चौदह रक्अत, चार सुन्नत मौकीदाह , दो  फ़र्ज, चार सुन्नत,मौकीदाह दो सुन्नत मौकीदाह दो नफ्ल। 

जुम्में में सिर्फ 2 फ़र्ज़ जुम्मे के ह बाकी 12 रकअत ज़ुहर की है।

*📝 सवाल :-* जुमा की नमाज़ से पहले एक शख्स या कोई इमाम मिम्बर पर खड़ा होकर अरबी में कुछ पढ़ता है उसको क्या कहते हैं ? 

✍🏻 *जबाव : -* उसे खुतबा कहते हैं। 


*📝 सवाल :-* खुतबा का सुनना कैसा है ? 

*✍🏻 जवाब :-* वाजिब है उस उक्त न तो कोई बात करनी चाहिये और न नमाज़ शुरू करनी चहिये,ना दुरूद ना क़ुरआन की कोई आयते या क़ुरआन सिर्फ खामोशी से खुतबा सुनना चाहिये चाहे आवाज़ सुनाई दे या न सुनाई दे। 


📝 *सवाल :-* नमाज़ पढ़ने से क्या फाइदा है ? 

✍🏻 *जवाब :-* 

(1) नमाज़ आदमी को बेहयाई गुनाह से रोकती है। 

(2) नमाज़ आदमी को अज़ाबे कब्र से बचायेगी। 

(3) नमाज़ी से अल्लाह और उसके रसूल राज़ी होते हैं। ओर हमारे नबी की आंखों की ठंडक  हैं। 

(4) नमाज़ी के बदन और कपड़े साफ़ रहते हैं। 

(5) नमाज़ी आदमी को अल्लाह तआला दीन और दुनिया में इज़्ज़त बख्शता है। 

(6) नमाज़ी आदमी की दुआ अल्लाह तआला कबूल करता है। 

(7) नमाज़ी आदमी पर अल्लाह तआला की रहमत नाज़िल होती है। 

(9) नमाज़ पढ़ने वाले को अल्लाह तआला जन्नत अता फरमायेगा। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 15)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 13 📗​*

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📝 *सवाल :-* नमाज़ी नमाज़ की हालत में किसी से गुफ्तगू (बात - चीत) कर सकता है ?

✍🏻 *जवाब :-* नहीं गुफ्तगू करने से नमाज़ टूट जायेगी। 


📝 *सवाल :-* अच्छा यह बताईये कि नमाजी नमाज़ की हालत में किसी को सलाम कर सकता है या किसी के सलाम का जवाब दे सकता है ? 

✍🏻 *जवाब :-* नहीं सलाम करने या सलाम का जवाब देने से भी नमाज़ टूट जायेगी अलबत्ता नमाज़ की दूसरी रकअत के दिल मे इरादा करके तशद्दहुद में हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर सलाम भेजेगा अतहियात में। 


📝 *सवाल :-* नमाज़ तो अल्लाह तआला की इबादत है फिर रसूले खुदा पर सलाम क्यों भेजना चाहिये ? 

✍🏻 *जवाब :-* अल्लाह तआला की यही मर्जी है वह अपने बन्दे की उसी नमाज़ को कबूल करता है जिसमें रसूले खुदा पर सलाम भेजा जाये। जैसे अतहियात में सालम होता ही है अस्लमामु अलैका या अय्यूहन्नबीयू व रहमतुल्लाहि व बरकातूह अस्सलामु आलैना व आला इबादिल्ला हिस्सालिहिन।


📝 *सवाल :-* तो क्या नमाज़ में रसूले खुदा का ख्याल लाने से नमाज़ हो जायेगी ? 

✍🏻 *जवाब :-* बेशक नमाज़ हो जायेगी। जब रसूले ख़ुदा पर सलाम भेजा जायेगा तो उनका ख्याल यकीनन आयेगा और सलाम उन्हीं के हुक्म से भेजा जाता है। 


📝 *सवाल :-* क्या सलाम के वक्त हुजूर का ख्याल भी लाया जायेगा ? 

📝 *जवाब :-* जी हां। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 16)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 13 📗​*

*▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


📝 *सवाल :-* नमाज़ी नमाज़ की हालत में किसी से गुफ्तगू (बात - चीत) कर सकता है ?

✍🏻 *जवाब :-* नहीं गुफ्तगू करने से नमाज़ टूट जायेगी। 


📝 *सवाल :-* अच्छा यह बताईये कि नमाजी नमाज़ की हालत में किसी को सलाम कर सकता है या किसी के सलाम का जवाब दे सकता है ? 

✍🏻 *जवाब :-* नहीं सलाम करने या सलाम का जवाब देने से भी नमाज़ टूट जायेगी अलबत्ता नमाज़ की दूसरी रकअत के तशद्दहुद में हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर सलाम भेजेगा। उनके अलावा किसी को नही


📝 *सवाल :-* नमाज़ तो अल्लाह तआला की इबादत है फिर रसूले खुदा पर सलाम क्यों भेजना चाहिये ? 

✍🏻 *जवाब :-* अल्लाह तआला की यही मर्जी है वह अपने बन्दे की उसी नमाज़ को कबूल करता है जिसमें रसूले खुदा पर सलाम भेजा जाये। 


📝 *सवाल :-* तो क्या नमाज़ में रसूले खुदा का ख्याल लाने से नमाज़ हो जायेगी ? 

✍🏻 *जवाब :-* बेशक नमाज़ हो जायेगी। जब रसूले ख़ुदा पर सलाम भेजा जायेगा तो उनका ख्याल यकीनन अतहियात में आयेगा और सलाम उन्हीं के हुक्म से भेजा जाता है।


📝 *सवाल :-* क्या सलाम के वक्त हुजूर का ख्याल भी लाया जायेगा ? 

📝 *जवाब :-* जी हां। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 16)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 14 📗​*

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📝 *सवाल :-* अच्छा अब मुझे यह बताइये कि रसूले खुदा सल्लल्लाहुअलैहि वसल्लम ने नमाज़ में क्या - क्या पढ़ने का हुक्म दिया है और किस तरह नमाज़ पढ़नी चाहिये ?

✍🏻 *जवाब :-* जो चीजें नमाज़ में पढ़ी जाती हैं उन सब के नाम और अल्फाज़ यह हैं। 


🔘 *तकबीर -* अल्लाहु अकबर (अल्लाह सब से बड़ा है) 


🔘 *सना :* सुबहानकल्लाहुम्म व बि हम्दि - क व तबा - र कस्मु - क व तआला जदु - क व ला इला - ह गैरू - क. 

*🔘 तर्जुमाः-* ऐ अल्लाह हम तेरी पाकी का इकरार करते हैं और तेरी तारीफ़ बयान करते हैं और तेरा नाम बहुत बरकत वाला है और तेरी बुज़ुर्गी बरतर और तेरे सिवा कोई मुस्तहिके इबादत नहीं।


🔘 *तअव्वुज़* अऊजु बिल्लाहि मिन - नश्शेयतान- निर्रजीम०

*🔘 तर्जुमा :-* मैं अल्लाह की पनाह चाहता हूं शैतान मरदूद से।


🔘 *तसमीया* बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम ०

*🔘 तर्जुमाः-* अल्लाह के नाम से शुरू करता हूं जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है। 


1️⃣ *सूरह फ़ातिहा* अलहम्दु लिल्लाहि रबिल आलमीन. अर रहमानिर् रहीम, मालिकि यौमिददीन, इय्या - क नअबुदु व इय्या - क नस् तयीन. एहदिनस - सिरातल् मुस्तकीम सिरातल - लज़ी - नअन् अम् - त अलैहिम, गैरिल मगजूबि अलैहिम् वलज - ज़ाल्लीन, आमीन. 

🔘 *तर्जुमा :-* तमाम तारीफें उस अल्लाह के लिये जो सारे जहानों का पालने वाला बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है। रोजे जजा का मालिक है, ऐ अल्लाह हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ ही से मदद मांगते हैं कि सीधे रास्ते पर चला। उन लोगों के रास्ते पर जिन पर तूने इनआम फरमाया है, न उनके रास्ते पर जिन पर तेरा गजब नाजिल हुआ और न गुमराहों के रास्ते पर। 


2️⃣ *सूरह कौसर* 

इन्ना अअतैना कल कौसर, फसल्लि लि रबि - क वन्हर इन्न शानि -अ - क हुवल अब्तर 

*🔘 तर्जुमा :-* ऐ नबी हमने आपको कौसर अता की है। बस आप अपने रब के लिये नमाज़ पढ़िये और क़ुरबानी कीजिये। बेशक आपका दुश्मन ही बे नाम और निशान हो जाने वाला है।


3️⃣ *सूरह इख्लास-* कुल हुवल्लाहु अहद. अल्लाहुस - समद लम् यलिद, वलम् यूलद, वलम् यकुल - लहू कुफुवन अहद.

*🔘 तर्जुमाः-* (ऐ नबी) कह दीजिये वह अल्लाह एक है अल्लाह बे नियांज है उससे कोई पैदा नहीं हुआ और न वह किसी से और कोई उसका हमसर (बराबर) नहीं। 


*4️⃣ सूरह फलक* कुल अऊजु बि रबिल फलक . मिन् शरिमा खलक, व मिन् शरि ग़ासिकिन् इज़ा वकब व मिन शरिन् नफफ़ासाति फिल उकद व मिन् शरि हासिदिन इजा हसद, 

🔘 *तर्जुमाः-* कह दीजिये उसकी पनाह लेता हूं। जो सुबह का पैदा करने वाला है। उसकी सब मखलूक के शर से और अंधेरी डालने वाले के शर से जब वह डूबे और उन औरतों के शर से जो गिरहों में फूंकती हैं और हसद वाले के शर से जब वह मुझ से जले। 


*5️⃣ सूरह अन्नास*• कुल अऊ.जु बि रबिन् नासि. मलिकिन नासि इलाहिन् नासि. मिन शर् - रिल् - वस्वासिल खन्नास. अल्लज़ी युवस् विसु फी सुदूरिन् नास. मिनल जिन्नति वन्नास. 

🔘 *तर्जुमाः-* (ऐ नबी) कहो कि मैं आदमियों के रब की पनाह लेता हूं आदमियों के बादशाह आदमियों के माबूद की पनाह लेता हूं उस वस्वसा डालने वाले, पीछे हट जाने वाले के शर से जो लोगों के दिलों में वस्वसा डालते हैं जिन्नों में से हों या आदमियों में से। 

*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 17 से 25 तक)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 15 📗​*

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*💧 नमाज पढने का तरीका* 💧


💎 *सवाल :-* नमाज पढ़ने का क्या तरीका है ? 

📢 *जवाब :-* पहले वजू कीजिये और पाक कपड़े पहने हुए पाक ज़मीन पर किबला मुँह खड़े होकर जिस नमाज़ का वक्त हो उस नमाज़ की नीयत करके दोनों हाथ कानों की लौ तक उठाइये और अल्लहु अकबर कह कर दोनों हाथों को नाफ़ के नीचे इस तरह बाँध लीजिये कि दायां हाथ ऊपर रहे और बायां नीचे रहे इसके बाद सना पढ़िये यानी 

*सुबहा - न - कल्लाहुम्म व बि हम्दि - क व तबा - र - कस्मु - क व तआला जद्दु - क व ला इला - ह गैरु - क*


*फिर तअव्वुज़* पढ़िये यानी अऊजु बिल्लाहि मिनश - शैतानिर - रजीम. 

और फिर तसमीया पढ़िये यानी *बिस्मिल्लाहिरहमानिर्रहीम* पढ़ कर सूरह अल्हम्द शरीफ खत्म करके वलज्जाल्लीन के बाद बहुत आहिस्ता (धीमें) से आमीन कहिये फिर सूरह कौसर या कोई और सूरह जो याद हो उसको पढ़िये फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए रूकूअ के लिये झुक जाइये और रुकूअ में दोनों घुटनों को हाथों से पकड़ के रुकूअ की तस्वीह पढ़िये यानी 

*सुबहा - न रबियल अज़ीम* तीन मर्तबा, या पाँच मर्तबा या सात मर्तबा या नौ मर्तबा पढिये (ताक पढ़ना चाहिये)। 

फिर तसमीअ यानी समिअल्लाहु लिमन् हमिदह, कहते हुए सीधे खड़े हो जाइये। 

*तहमीद (रब्बना लकल हम्द भी पढ़ लीजिये)*

फिर तकबीर कहते हुए सज्दे में इस तरह जाइये कि पहले दोनों घुटने जमीन पर रखिये फिर दोनों हाथ ज़मीन पर रखिये फिर दोनों हाथ के बीच में पहले नाक फिर पेशानी जमीन पर रखिये इसके बाद सज्दे की तस्वीह पढ़िये यानी सुब्हा - न रब्बियल आला. तीन, पांच, सात या नौ बार पढ़िये 

फिर तकबीर कहते हुए सर उठाइये और सीधे बैठ जाइये और फिर तकबीर कहते हुए पहले की तरह दूसरा सज्दा कीजिये और सज्दे की तस्बीह पढ़िये। उसके बाद तकबीर कहते हुए सीधे खड़े हो जाइये और हार्थों को ज़मीन पर न टेकिये। सज्दों तक नमाज़ की एक रकअत पूरी हो गयी। अब दूसरी रकअत शुरू हुई तसमिया पढ़ कर अल्हम्द शरीफ पढ़िये। और सूरह इखलास या और कोई दूसरी सूरह मिला कर, फिर रुकूअ कीजिये और पहली रकअत की तरह इसमें रुकूअ, तसमीअ , तकबीर सज्दा कीजिये और दो सज्दे करके बैठ जाइये। बैठने के बाद पहले *"अत्तहिय्यात"* पढ़िये, उसके बाद दुरूद शरीफ़ पढ़िये, 

फिर दुरूद शरीफ के बाद की दुआ. इसके बाद सलाम फेरिये, पहले दांये तरफ फिर बांये तरफ। सलाम फेरते वक्त दाहिने और बायें तरफ मुँह मोड़े फिर बाईं तरफ मोड़ लीजिये। 

इस नमाज़ पूरी हो गयी। 3-4 रकअत वाली नमाज़ में अत्ताहीयात के बात खड़े हो जाए और सना नही पडना अल्हम्दु शरीफ एक सुरह: पढ़े ओर ऊपर बताया वैसे रुकु सजदा करे 4चौथी भी इसी तरह पढ़के अतहियात दुरूद इब्राहिम दुआ पढ़के सलाम फेरने के बाद दोनों हाथ उठा कर दुआ मांगिये 


💧 अल्लाहुम्म अन्तस्सलामु व मिन्कस्सलामु व इलै - क यर् जिऊस्सलामु हाय्यिना रब्बना बिस्सलामि व अद् खिल्ना दारस्सलामि तबारक - त रब्बना व तआलै - त या जल्जलालि वल इकराम 


📖 *तर्जुमाः-* ऐ अल्लाह तू ही सलामती वाला है और तेरी ही जानिब सलामती है और तेरी तरफ सलामती लौटती है जिन्दा रख हमको ऐ परवरदिगार सलामती से और दाखिल कर हमको सलामती के घर में, बरकत वाला है तू ऐ परवरदिगार और बुलन्द है ऐ जलाल और बुजुर्गी वाले। और भी जो दुआयें याद हों उन्हें पढ़िये और अल्लाह तआला से दुआए मगफिरत कीजिये। दुआ से फ़ारिग होकर दोनों हाथों को मुँह पर फेर लीजिये। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 25 से 27 तक)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 16 📗​*

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*✍🏻 रूकूअ की तस्बीह* सुबहान - रब्बियल अज़ीम, 

*📖 तर्जुमाः-* पाकी बयान करता हूं अपने परवरदिगार बुजुर्ग की। 


✍🏻 *कौमा यानी रुकूअ से खड़े होने की तस्बीह*- समिअल्लाहु लिमन हमिदह

📖 *तर्जुमाः-* अल्लाह तआला ने उसकी सुन ली जिसने उसकी तारीफ की। 


✍🏻 *इसी क़ौमा की तहमीद तस्बीह के बाद*- रब्बना लकल हम्द।

*📖 तर्जुमाः-* ऐ हमारे परवरदिगार तेरे लिये ही तमाम तारीफ़ है। 


✍🏻 *सज्दे की तस्बीह :* सुबहा - न रब्बियल आला 

📖 *तर्जुमा :-* पाकी बयान करता हूं मैं अपने परवरदिगार बरतर की। 


🔘 *तशहहुद या अत्तहिय्यात*


✍🏻 अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस् सलवातु वत्तय्यिबातु अस्सलामु अलै - क अय्युहन् नबीय्यु व रह - मतुल्लाहि व ब - र - कातुहू अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्ला हिस्सालिहीन, अश - हदु अल्ला इला - ह इल्लल्लाहु व अश - हदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू. 

📖 *तर्जुमाः-* सब इबादतें जो ज़बान बदन और माल से हो सकें अल्लाह ही के लिये है सलाम हो तुम पर ऐ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें, सलामती हो हम पर और अल्लाह के नेक बन्दों पर, गवाही देता हूं मैं कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और गवाही देता हूं मैं कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खुदा के बन्दे और रसूल हैं। 


*✍🏻 दुरूद शरीफ:* अल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन कमा सल्लै - त अला इब्राही - म व अला आलि इब्राही - म इन्न - क हमीदुम् - मजीद, अल्लाहुम्म बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन कमा बारक - त अला इब्राही - म व अला आलि इब्राही - म इन्न - क हमीदुम् मजीद ० 

📖 *तर्जुमा :-* ऐ अल्लाह हमारे आका सय्यदना मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनकी आल पर रहमत नाज़िल फ़रमा जिस तरह तूने हज़रत सय्यदना इबराहीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम और उनकी आल पर रहमत नाज़िल फरमाई है बेशक तू तारीफ़ और बुजुर्गी वाला है। ऐ अल्लाह हमारे आका सय्यदना मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर और उनकी आल पर बरकत नाज़िल फरमा, जिस तरह तूने हजरत सय्यदना इबराहीम अलैहिस्सलाम और उनकी आल पर बरकतें नाज़िल फ़रमाई हैं बेशक तू तारीफ़ और बुजुर्गी वाला है। 


*✍🏻 दुरूद शरीफ़ के बाद की दुआ*

 अल्लाहुम्मा - फिरली वलि वालिदय्य व लिमन तवा - ल - द व लि जमीईल मुमिनी - न वल मुमिनाते वल मुस्लिमी - न वल मुस्लिमातिल अह्याअि मिन्हुम वल अम्वाति बि - रहमति - क या अरहमर राहिमीन. 

अगर ये दुआ या ओर कोई भी याद न हो तो :- अल्लाहुम्मा रब्बना आतिना फ़िद - दुन्या ह - स - नतंव व फिलआख़िरतिः ह - स- नतंव व - किना अज़ाबन् - नार पढ़े।

*📖 तर्जुमाः-* ऐ अल्लाह मगफिरत फ़रमा मेरी और मेरे वालिदैन की और उनकी जो उनसे पैदा हुए और तमाम मोमिनीन व मोमिनात व मुस्लिमीन और मुस्लिमात (औरतें) की जो उनमें से जिन्दा हैं या मुर्दा अपनी रहमत के वसीले में ऐ अरहमुर राहिमीन। 


*✍🏻 दाये बाए सलाम फेरे : अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह*

*📖 तर्जुमाः-* सलाम हो तुम पर और अल्लाह की रहमत।*


*✍🏻 नमाज़ के बाद की दुआ* 

रब्बना आतिना फ़िद - दुन्या ह - स - नतंव व फिलआख़िरतिः ह - स- नतंव व - किना अज़ाबन् - नार, 

*📖 तर्जुमाः-* ऐ हमारे परवरदिगार तू हमको दुनिया में नेकी दे और आखिरत में हमको नेकी और हमको दोज़ख के आग से बचा। 


✍🏻 *दुआए कुनूत*: 

अल्लाहुम्मइन्ना नस्तीनु - क व नस्तगफिरु - क व नुअमिनु बि - क व न - त - वक्कलु अलै - क व नुस्नी अलैकल खैर व नश कुरु - क व ला नकफुरु - क व नखलउ व नतरूकु मंय्यफ जुरु - क अल्लाहुम्म इय्या - क नअबुदु व ल - क नुसल्ली व नस्जुदु इलै - क नस्आ व नह्फिदु व नरजू रहूम - त - क व नखशा अज़ाब - क इन्न अज़ाब - क बिल कुफ्फारि मुल्हिक. 

*📖 तर्जुमाः-* ऐ परवरदिगार हम तुझसे मदद चाहते हैं और तुझसे माफी मांगते हैं और ईमान लाते हैं तुझ पर औरभरोसा रखते हैं तुझ पर और तारीफ़ करते हैं तेरी अच्छी और हम तेरा शुक्र अदा करते हैं और हम नाशुक्री नहीं करते तेरी और हम उससे अलग होते हैं जो तेरी नाफरमानी करते हैं। ऐ अल्लाह तेरे ही लिये इबादत करते हैं और तेरे ही लिये नमाज़ पढ़ते और सज्दा करते हैं और तेरी ही तरफ दौड़ते हैं और हम तेरी खिदमत में हाज़िर हैं और उम्मीदवार हैं तेरी रहमत के और डरते हैं तेरे अज़ाब से बेशक तेरा अज़ाब काफिरों को मिलने वाला है। 

नोट:- इसमे सिर्फ 2 रकअत वाली नमाज़ के तरीके बताए गये ह ओर 2सरी रकअत में अतहियात पढ़ कर तीसरी चौथी रकअत पढे जैसे पहली दूसरी पढी सना नही पढे ओर अल्हम्दु शरीफ के बाद दोनों रकअत में दूसरी सुरह मिलाए।

*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 17 से 25 तक)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 17 📗​*

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*💧 नमाज पढने का तरीका (2)* 💧


 📝 *सवाल :-* दोनों सज्दों के दरमियान और तशहहुद की हालत में किस तरह बैठना चाहिये ? 

✍🏻 *जवाब : -* दाहिना पाँव खड़ा रखिये और उसकी उंगलियां किबला की तरफ हों और बायां पाँव बिछा कर उस पर बैठ जाइये। बैठने की हालत में दोनों हाथ रानों पर घुटने के पास रखने चाहिये। 


📝 *सवाल :-* रुकूअ करने का सही तरीका क्या है ? 

✍🏻 *जवाब :-* रुकूअ इस तरह करना चाहिए कि कमर और सर दोनों बिल्कुल बराबर रखें और घुटनों को हाथ से पकड़ लिया जाये। 


📝 *सवाल :-* सज्दा करने का सही तरीका क्या है ? 

✍🏻 *जवाब :-* हाथों की दोनों हथेलियों को ज़मीन पर बिछा कर इस तरह रखें कि कलाई और कुहनी जमीन से ऊँची रहे और पेट रानों से अलग रहे और दोनों हाथ पसलियों से अलग हों और नाक और पेशानी ज़मीन पर जमी रहें। 


📝 *सवाल :-* नमाज के बाद उमूमन जो तस्बीह पढ़ी जाती है उसको क्या कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* उसको तस्बीहे फातिमा कहते हैं। 


📝 *सवाल :-* तस्बीहे फातिमा में क्या पढ़ना चाहिये ? 

✍🏻 *जवाब :* सुबहानल्लाह 33 बार अलहम्दु लिल्लाह 33 बार अल्लाहुअकबर 34 बार। 


📝 *सवाल :-* इस तस्वीह को तस्बीहे फातिमा क्यों कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* हुजूर सरवरे कायनात सल्लल्लाहुअलैहि वसल्लम ने अपनी प्यारी बेटी हज़रत फातिमा रज़ियल्लाहु तआला अन्हा को इस तस्बीह के लिये फ़रमाया था और इसकी बहुत सी फजीलत बयान फरमाई थी इसी वजह से इसको तस्बीहे फातिमा कहते हैं।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 27,28)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 18 📗​*

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              🌹 *नमाजे जनाज़ा* 🌹


 📝 *सवाल :-* नमाज़े जनाज़ा किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* मय्यत की मगफिरत के लिये जो नमाज पढ़ी जाती है उसे नमाज़े जनाज़ा कहते हैं। 


📝 *सवाल :-* नमाज़े जनाज़ा का क्या हुक्म है ? 

✍🏻 *जवाबः-* नमाज़े जनाज़ा फर्जे किफाया है यानी अगर एक शख्स भी नमाज़े जनाज़ा पढ़ लेगा तो तमाम लोग बरीउज्जिम्मा हो जायेंगे। वरना जिस जिस को खबर पहुंची थी और न पढ़े वह सब गुनहगार होंगे। 


📝 *सवाल :-* क्या नमाज़े जनाज़ा के लिये जमाअत शर्त है ? 

✍🏻 *जवाब :-* नहीं अगर एक शख्स भी पढ़ लेगा तो फ़र्ज़ अदा हो जायेगा। 


📝 *सवाल :-* नमाजे जनाज़ा के कितने अरकान हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* दो रुकन (ज़रूरी हिस्सा) हैं। अव्वल चार बार अल्लाहुअकबर कहना, दूसरा कियाम यानी खड़ा होना इस शर्त के साथ कि कोई उज़ (बहाना) न हो। 


*📝 सवाल :-* नमाज़े जनाज़ा में कितनी सुन्नतें हैं ? 

*✍🏻 जवाब :-* तीन हैं और वह यह हैं 

👉🏻 (1) अल्लाह की हम्द व सना करना 

👉🏻 (2) नबीए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दुरूद भेजना। 

👉🏻 (3) मय्यत के लिये दुआ करना। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 30)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 19 📗​*

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         🌹 *नमाजे जनाज़ा (2)* 🌹


 ✍🏻 *सवाल :-* नमाज़े जनाज़ा पढ़ने का क्या तरीका है ? 

*✍🏻 जवाब :-* नमाज़े जनाज़ा पढ़ने का तरीका यह है कि कान तक हाथ उठा कर अल्लाहु अकबर कहता हुआ हाथ नीचे लाये और नाफ के नीचे हस्बे - दस्तूर दोनों हाथ को बांध लें उसके बाद सना पढ़े यानी 

*सुबहा-न-कल्लाहुम्म व बिहमदि - क व तबा - र कस्मु - क व तआला जदु - क व जल्ल सनाउ - क व ला इला - ह गैरू - क.*


फिर बगैर हाथ उठाये दूसरी बार अल्लाहु अकबर कहे और दुरूद शरीफ पढ़े नमाज़ में अत्तहिय्यात के बाद जो दुरूद शरीफ़ पढ़ा जाता है उसी दुरूद का पढ़ना बेहतर है। फिर बगैर हाथ उठाये तीसरी बार अल्लाहु अकबर कहे और मय्यत के लिये दुआ मांगे। जब मय्यत के लिये दुआ मांग ले तो बगैर हाथ उठाये चौथी बार अल्लाहु अकबर कहे और उसके बाद बगैर कोई दुआ पढ़े हुए हाथ खोल कर सलाम फेर दे और सलाम में मय्यत व फरिश्तों और हाज़िरीने नमाज़ की नीयत करे। 


*📝 सवाल :-* नमाज़े जनाज़ा में कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए ? 

✍🏻 *जवाबः-* बालिग मर्द और औरत के लिए यह दुआ पढ़नी चाहिये।

*अल्लाहुम्मा - फिरलि हय्यिना व मय्यितिना व शाहिदिना व गाइबिना व सगीरिना व कबीरिना व ज - करिना व उन्साना. अल्लाहुम्म मन् अहयय - तहू मिन्ना फ़अहयिही अलल इस्लामि व मन् तवफ्फै - तहू मिन्ना फ़ - त- -वफ्फहू अलल ईमान.*


👉🏻 अगर नाबालिग लड़का है तो यह दुआ पढ़नी चाहिये। 


*अल्लाहुम्मज् - अलहु लना फ़रतंव् वज् अलहु लना अज्रंव व जुख्रंव व अलहु लना शाफिअंव व मुशफ्फ़ा.*


👉🏻 और अगर नाबालिग लड़की हो तो यह दुआ पढ़नी चाहिये। 

*अल्लाहुम्मज् - अलहा लना फर्तव् व अल्हा लना अज्रंव व जुख्रंव् वज् अल्हा लना शाफ़ि - अतंव व मुशफ्फिअह०*


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 30,31)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 20 📗​*

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*☝🏻 अल्लाह तआला के बारे में मुसलमानों के अकीदे*


(1) अल्लाह सबसे बड़ा है। 

(2) अल्लाह तआला एक है उसका कोई शरीक नहीं और वही पूजने के लाइक है। 

(3) वह हमेशा से है, और हमेशा रहेगा। 

(4) वह हर ऐब से पाक और साफ है, वह न झूट बोलता है न कोई ऐब करता है, न खाता है न पीता है न सोता है। 

(5) वही सारी मखलूकात का पैदा करने वाला है। 

(6) उसको किसी ने पैदा नहीं किया। 

(7) वह किसी का मुहताज नहीं। 

(8  वह हर बात को जानता है, उससे कोई बात पोशीदा (छुपी) नहीं। 

(9) न उसका बाप है, न बेटा, न बेटी, न बीवी, रिश्ता नाता से पाक साफ़ है। 

(10) वह नूर ही नूर है। 

(11) मखलूक जैसे हाथ पाँव, नाक, कान, शकल, सूरत से पाक 

(12  वही सब को रोजी देता है। 

(13) मौत और ज़िन्दगी सब उसी की कुदरत में है। 

(14) इज्जत, ज़िल्लत, अमीरी, गरीबी, दुख, सुख, अच्छी बुरी तक़दीर सब उसी की कुदरत में है। 


⚠️ *नोट :-* उसने इन्सानों की हिदायत के लिये अपने नबियों और रसूलों को भेजा है।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 32,33)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 21 📗​*

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*🌹 अम्बिया अलैहुमुस्सलाम यानी खुदा तआला के नबियों और रसूलों के साथ मुसलमानों को क्या अकीदे रखने चाहिये।* 


📝 रसूल अल्लाह तआला के बरगुजीदा (चुने हुए) और चहीते बन्दे होते हैं। अल्लाह तआला अपने बन्दों तक अहकाम पहुंचाने के लिये रसूलों को दुनिया में भेजता है। वह जो कुछ कहते हैं, सच कहते हैं। कभी झूट नहीं बोलते। अल्लाह तआला का पूरा - पूरा पैगाम बन्दों तक पहुंचाते हैं, न उसमें कमी करते हैं न ज्यादती करते हैं, अल्लाह तआला अपने रसूलों से मोअजेज़ा जाहिर फ़रमाता है। ? 


📝 *सवाल :-* मोअजेजा क्या है। 

✍🏻 *जवाब :-* नबी और रसूल का वह बुलन्द काम जो इन्सानी आदत के खिलाफ हो यह मोअजेज़ा है। 


📝 *सवाल :-* कोई मिसाल देकर समझायें ? 

✍🏻 *जवाब :-* जैसे हमारे पैग़म्बर हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने चाँद के दो टुकड़े कर दिये याआप के इशारे पर डूबा हुआ सूरज पलट आया, या अपनी उंगलियों की पाईयों से पानी के चश्मे (सोता) बहा दिये वगैरह वगैरह। 


📝 *सवाल :-* मोअजेज़ा और करामत में क्या फर्क है ? 

✍🏻 *जवाब :-* अगर ऐसे ही कोई बुलन्द काम अल्लाह के वली से होजाये जो इंसान की आदत के खिलाफ हो तो उसको करामत कहते हैं। (मोअजेजा नबी और रसूल से ज़ाहिर होता है और करामत वली से) जैसे हुजूर सय्यदना सरकार गौसुल आजम ने मुर्दे को ज़िन्दा कर दिया या सुल्तानुल हिन्द सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ की खड़ाऊँ हवा में उड़ी और जयपाल जोगी को लेकर आयी। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 32,33)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 22 📗​*

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📝 *सवाल :-* क्या कोई आदमी अपनी मशक्कत और इबादत से नबी बन सकता है ? 

✍🏻 *जवाब :-* हरगिज़ नहीं नबुव्वत और रिसालत अल्लाह की देन है, वह जिसको चाहता है अता फरमाता है, उसमें अपनी कोशिश का दखल नहीं। (नयुब्बत को कसबी मानना कुफ्र है) 


📝 *सवाल :-* अच्छा यह तो बताइये क्या कोई उम्मती अमल में अपने नबी से बढ़ सकता है ? 

✍🏻 *जवाब :-* नहीं, उम्मती अमल में नबी से बढ़ नहीं सकता, ख्वाह कितनी ही इबादत करे (जो ऐसा अकीदा रखे कि उम्मती अमल में नबी से बढ़ सकता है वह गुमराह और बे - दीन है)। 


*📝 सवाल :-* क्या किसी का इल्म हमारे पैगम्बर हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से ज्यादा है ? 

✍🏻 *जवाब :-* नहीं। अल्लाह तआला के बाद सबसे ज्यादा आप ही का इल्म है। 


📝 *सवाल :-* दुनिया में कितने नबी और रसूल आये ? 

✍🏻 *जवाब :-* इस का सही इल्म अल्लाह तआला को है। अलबत्ता हमारा अकीदा यह है कि अल्लाह तआला ने जितने भी नबी और रसूल भेजे हम उन सब को बरहक और नबी और रसूल मानते हैं। ख्वाह उनकी तादाद एक लाख चौबीस हज़ार हो या दो लाख चौबीस हजार हो या इससे कम या ज्यादा हो। 


📝 *सवाल :-* क्या हमारे पैगम्बर हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम गैब की बातें भी जानते थे ? 

✍🏻 *जवाब :-* जी हां। 


📝 *सवाल :-* क्या वह यह भी जानते थे कि बारिश कब होगी ? 

*✍🏻 जवाब :-* जी हां। इसके इलावा बारिश आपके हुक्म से हुई और आप के हुक्म से बन्द हुयी। अल्लाह तआला ने बारिश को आपके ताबेअ कर दिया है। 


📝 *सवाल :-* क्या रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यह भी जानते थे कि फलाँ शख्स की आमदनी कल क्या होगी ? 

✍🏻 *जवाब :-* जी हां अल्लाह के बताने से आप यह भी जानते थे। 


📝 *सवाल :-* क्या पैगम्बरे इस्लाम यह भी जानते थे कि माँ के पेट में क्या है ? 

✍🏻 *जवाब :-* जी हां। 


📝 *सवालः-* क्या रसूले खुदा यह भी जानते थे कि कौन कब मरेगा और कहां मरेगा। 

*✍🏻 जवाब :-* जी हां, जंगे बद्र में आपने फरमाया कि अबू जहल यहां मारा जायेगा और फलों काफिर यहां मारा जायेगा. चुनांचे वैसे ही हुआ जैसा कि रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया था। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 32,33)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 23 📗​*

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📝 *सवाल :-* क्या रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यह भी जानते थे कि कियामत किस दिन आयेगी ? 

✍🏻 *जवाब :-* जी हां। कियामत किस दिन आयेगी और कियामत में क्या क्या होगा सब कुछ जानते थे। और अगर न जानते तो कियामत की बातें किस तरह बताते। पैगम्बरे इस्लाम ने फरमाया है कि कियामत मुहर्रम की दसवीं तारीख जुमा के दिन होगी। 


📝 *सवाल :-* सबसे पहले और सबसे आखिरी पैगम्बर कौन है ? 

✍🏻 *जवाब :-* सबसे पहले हज़रत आदम अलैहिस्सलाम और सब से आखिर में हमारे पैगम्बर हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हैं. अब आपके बाद कोई नबी व रसूल न आयेगा। आप की इज्जत तमाम नबियों से अफजल है। अब अगर कोई नबुव्वत का दावा करे तो वह झूटा है या कोई यह कहे कि आप के बाद नबी आ सकते हैं तो वह शख्स कुरआन मजीद का इन्कार करता है। 


📝 *सवाल :-* क्या नबी व रसूल मासूम होते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* जी हां। 


📝 *सवाल :-* मासूम होने से क्या मुराद है ? 

✍🏻 *जवाब :-* मासूम होने से मुराद यह है कि गुनाहे सगीरा या गुनाहे कबीरा कस्दन या सहवन (जान बूझ कर या भूल चूक से) उन से जाहिर नहीं हो सकता। 


📝 *सवाल :-* क्या सहाबीए रसूल और अहले बैत को भी मासूम कह सकते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* जी नहीं।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 33)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 24 📗​*

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       📚 *आसमानी किताबें* 📚


*📝 सवाल :-* आसमानी किताबें किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब :-* खुदा तआला ने अपने रसूलों पर जितनी किताबें उतारी हैं उन्हीं को असमानी किताबें कहते हैं। 


*📝 सवाल :-* खुदा तआला की किताबें कितनी है ? 

✍🏻 *जवाब :-* इस का सही इल्म अल्लाह तआला को है, अलबत्ता चार किताबें बहुत मशहूर हैं। 


📝 *सवाल :-* उन चार किताबों का क्या नाम है और किन - किन पैगम्बरों पर नाज़िल हुईं ? 

✍🏻 *जवाब :-* (1) तौरेत- हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम पर नाज़िल हुई। 

(2) ज़ुबूर- हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम पर नाज़िल हुई। 

(3) इन्जील- हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम पर नाज़िल हुई। 

(4) कुरआन मजीद- हमारे पैगम्बर हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर नाज़िल हुई। 


📝 *सवाल :-* सहीफ़ा और किताब में क्या फर्क है ? 

✍🏻 *जवाब :-* बड़ी किताबों को किताब और छोटी को सहीफ़ा कहते हैं। 


📝 *सवाल :-* सहीफे कितने हैं और किन किन पैगम्बरों पर नाज़िल हुये ? 

✍🏻 *जवाब :-* सहीफों की सही तादाद तो मालूम नहीं कुछ सहीफे हज़रत आदम अलैहिस्सलाम पर और कुछ सहीफे हज़रत शीस अलैहिस्सलाम पर और कुछ हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम पर नाज़िल हुये। 


📝 *सवाल :-* क्या कुरआन मजीद के साथ हर आसमानी किताब पर ईमान लाना ज़रूरी है ? 

✍🏻 *जवाब :-* जी हां ईमान सब पर लाया जायेगा लेकिन अब तो अमल कुरआन मजीद ही पर किया जायेगा। दीने इस्लाम दीने नासिख (मिटाने वाला) बन कर आया है। 


*📝 सवाल :-* क्या कुरआन मजीद की हर - हर आयत पर ईमान लाना जरूरी है ? 

*✍🏻 जवाब :-* जी हां। 


📝 *सवाल :-* अगर कोई शख्स कुरआन मजीद की किसी आयत का इन्कार करता है तो उसे क्या कहा जायेगा ? 

*✍🏻 जवाब :-* काफ़िर। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 33)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 25 📗​*

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👉🏻 *मलाइका यानी फरिश्तों का बयान*


 📝 *सवाल :-* फरिश्ते किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* फ़रिश्ते अल्लाह तआला की एक मखलूक हैं नूर से पैदा हुए। वह न मर्द हैं न औरत, हमारी निगाहों से गाइब हैं। अल्लाह तआला ने उन्हें जिस काम पर मुकर्रर कर दिया उसी में लगे रहते हैं। वह खुदा की नाफरमानी और गुनाह नहीं करते। 


📝 *सवाल :-* फरिश्ते कितने हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* इसका सही इल्म अल्लाह तआला को है। अलबत्ता अल्लाह तआला के चार फ़रिश्ते बहुत मशहूर हैं। 


📝 *सवाल :-* वह चार फरिश्ते कौन - कौन से हैं ? 

*✍🏻 जवाब :-* 

(1) हज़रत जिबरील अलैहिस्सलाम- जिन्होंने अल्लाह तआला की किताबों और उसके अहकाम को पैगम्बरों तक पहुंचाया। 

(2) हज़रत इसराफ़ील अलैहिस्सलाम- जो कियामत में सूर फूंकेंगे। 

(3) हज़रत मीकाईल अलैहिस्सलाम - जो बारिश और मखलूक को रोज़ी पहुंचाने पर मुकर्रर है। 

(4) हज़रत इज़राईल अलैहिस्सलाम - जो मखलूक की जान निकालने पर मामूर है। 


📝 *सवाल :-* जो फ़रिश्ते कब्र में सवाल करते हैं उनका क्या नाम है ? 

✍🏻 *जवाब :-* उनका नाम मुनकर नकीर है, (एक का नाम मुनकर दूसरे का नाम नकीर है)। 


📝 *सवाल :-* जो फरिश्ते लोगों का हिसाब किताब लिखते हैं उनका क्या नाम है ? 

✍🏻 *जवाब :-* उनको किरामन कातिबीन कहते हैं। 


📝 *सवाल :-* क्या फ़रिश्ते जमीन पर भी आते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* जी हां, रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के मज़ार शरीफ़ पर रोजाना सुबह से शाम तक हज़ारो फ़रिश्ते दुरूद व सलाम पढ़ने के लिए हाज़िर होते हैं। 


📝 *सवाल :-* जिन्न कौन हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* यह भी अल्लाह तआला की एक मखलूक है जो आग से पैदा की गई है। वह हमें नज़र नहीं आते, उनमें मर्द भी हैं और औरत भी और उन्हें औलाद भी होती है। खुदा तआला ने उन्हें ताकत दी है कि वह अपने को मुखतलिफ़ शक्ल में बदल लेते हैं, जिन्न मुसलमान भी हैं और काफ़िर भी। फ़रिश्ते नूर से पैदा किये गए हैं और जिन्न आग से।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 34)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 26 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


            ✍🏻 *तकदीर का बयान*


📝 *सवाल :-* तकदीर किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* मखलूक की नेकी, अच्छाई , बुराई और उसकी तमाम चीज़ों के मुताबिक खुदा के इल्म में एक तफसील है और हर चीज़ के पैदा करने से पहले खुदा तआला उसे जानता है। खुदा तआला के इसी तफ़सीली इल्म को तकदीर कहते हैं, कोई अच्छी बुरी बात अल्लाह तआला के इल्म से बाहर नहीं। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 35)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 27 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


        *⚡ कब्र का बयान (1) ⚡*


📝 *सवाल :-* जब आदमी की  लाश को कब्र में रख दिया जाता है तो उसके बाद क्या होता है ? 

✍🏻 *जवाब :-* कब्र में दो फरिश्ते आते हैं और उस से सवाल करते हैं। 


📝 *सवाल :-* वह दोनों फरिश्ते कौन हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* मुनकर, नकीर। 


📝 *सवाल :-* मुनकर नकीर किस शक्ल व सूरत के होते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* काले रंग, नीली आँख, डराऊनी शक्ल जिनको देख कर ख़ौफ़ और दहशत मालूम होती है। 


📝 *सवाल :-* कब्र में मुनकर नकीर क्या क्या सवाल करते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* पहला सवाल मन् रब्बु - क यानी *तुम्हारा रब कौन है ?*

दूसारा सवाल मा दीनु - क यानी *तुम्हारा दीन क्या है*

तीसरा सवाल मा तकूलु फ़ी शानि हाज़र रजुलि यानी *तुम क्या कहते हो इस मर्द की शान में।*


📝 *सवाल :-* फिर उसके बाद क्या होता है ? 

✍🏻 *जवाब :-* अगर वह सही जवाबात न देगा तो उस पर अज़ाबे कब्र मुसल्लत (लागू कर) दिया जायेगा। 


📝 *सवाल :-* सही जवाबात क्या हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* पहले सवाल का जवाब यह है *"मेरा रब अल्लाह है"* और दूसरे सवाल का जवाब यह है कि *"मेरा दीन, “दीने इस्लाम है"।* और तीसरे सवाल का जवाब यह है कि *“यह हमारे पैगम्बर हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हैं।"*


📝 *सवाल :-* अगर सही जवाबात दे दिये गये तो क्या होगा ? 

✍🏻 *जवाब :-* उसको आराम से मीठी नींद सुला दिया जायेगा यहां तक कि वह मैदाने हश्र में उठाया जायेगा। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 40,41)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 28 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


        *⚡ कब्र का बयान (2) ⚡*


📝 *सवाल :-* क्या रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सब की कब्र में तशरीफ लाते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* जी हां। 


📝 *सवाल :-* सारी दुनिया में एक ही वक्त में लाखों आदमियों को दफन किया जाता है तो क्या एक ही वक्त में रसूले खुदा हर जगह तशरीफ़ लाते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* अल्लाह तआला ने अपने फज्ल व करम से आप को ऐसी कुदरत बख़्शी है कि एक ही वक्त में रसूले खुदा हर जगह तशरीफ ला सकते हैं। 


📝 *सवाल :-* अच्छा यह बताइये कि कब्रों में भी नेअमतें मिला करती हैं अगर मिलती हैं तो किन को ?

✍🏻 *जवाब :-* अम्बिया और औलिया को कब्रों में नेअमतें मिला करती हैं। 


📝 *सवाल :-* क्या कुरआन ख्वानी, सद्का, खैरात वगैरह का सवाब मुर्दो को पहुंचता है ? 

✍🏻 *जवाब :-* ज़रूर पहुंचता है। 


📝 *सवाल :-* अगर किसी मुर्दे को जला कर राख कर दिया गया या उसको जानवरों ने खा लिया तो उस पर अज़ाब होगा या नहीं ? 

✍🏻 *जवाब :-* ज़रूर अज़ाब होगा। अल्लाह तआला उसके बदन को अपनी कुदरत से पैदा करके उस पर अज़ाब करता है (बशर्ते कि वह अज़ाब का हक़दार हो।) 


📝 *सवाल :-* जब रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दुरूद व सलाम भेजा जाता है तो क्या आप उस को सुनते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* जी हां सुनते हैं, (चाहे करीब से दुरूद व सलाम भेजा जाये या दूर से) दोनों सुनते हैं। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 40,41)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 29 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


*अलामाते कियामत (यानी कियामत की निशानियों का बयान) (1)*


 📝 *सवाल :-* कियामत की निशानियाँ क्या है ? 

✍🏻 *जवाब :-* सालेहीन व उलमा दुनिया से उत जायेंगे, जिना, शराब खोरी, जहालत वगैरह की ज़्यादती होगी, अच्छे लोग पस्ती में होंगे, फासिक व फाजिर सरदार होंगे, लोग मस्जिदों में झगड़ा करेंगे, अमानत में ख्यानत करेंगे. अदल व इन्साफ़ उठ जायेगा, बुजुर्गों को लोग बुरा कहेंगे, हर जगह क़त्ल व गारतगरी होगी, बीवी की फरमाबरदारी और माँ बाप पर जुल्म करेंगे, ज़कात न अदा करेंगे वगैरह वगैरह। 


📝 *सवाल :-* कियामत के करीब की अलामतें क्या हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* सूरज पश्चिम से निकलेगा, याजूज माजूज की जमाअत सद्दे सिकन्दरी (दीवारे सिकन्दरी) से निकलेगी. एक चौपाया ज़ाहिर होगा जो लोगों से बात करेगा। धुवाँ ज़ाहिर होगा जिससे आसमान और जमीन में अंधेरा छा जायेगा, फिर चालीस दिन के बाद आसमान साफ होगा और दज्जाल ज़ाहिर होगा। हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम आसमान से तशरीफ लायेंगे (इसके इलावा बहुत सारी अलामतें हैं।) 


*📝 सवाल :-* याजूज माजूज कौन हैं ? 

*✍🏻 जवाब :-* यह सब आदम - खोर थे। जब आदमियों को खाने लगे तो सिकन्दर जुल - करनैना ने एक बहुत मुस्तहकम (मज़बूत) दीवार दो पहाड़ी के दर्मियान (बीच) काइम करके उन लोगों को बन्द कर दिया। यह लोग एक सौ बीस गज़ के लम्बे चौड़े होते हैं। 

  

*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 42,43)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 30 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


*अलामाते कियामत (यानी कियामत की निशानियों का बयान) (2)*


📝 *सवाल :-* दज्जाल कैसा होगा ? 

✍🏻 *जवाब :-* दज्जाल एक आँख का काना होगा, गधे पर सवार होगा, उसकी पेशानी पर काफिर लिखा होगा, खुदाई का दावा करेगा, मक्का शरीफ और मदीना शरीफ के इलावा पूरी ज़मीन का गश्त (दौरा) करेगा जो उसको खुदा कहेगा उसको छोड़ देगा वरना कत्ल कर देगा। 


📝 *सवाल :-* दज्जाल कहां से निकलेगा ? 

✍🏻 *जवाब :-* खुरासान (ईरान) से।


📝 *सवाल :-* चालीस दिन के बाद दज्जाल कहां जायेगा ? 

✍🏻 *जवाब :-* हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम उसको कत्ल करेंगे। 


📝 *सवाल :-* हज़रत ईसा अलैहिस्सलामतो आसमान पर हैं वह किस तरह दज्जाल को कत्ल करेंगे ? 

✍🏻 *जवाब :-* दज्जाल के ज़ाहिर होने पर हाकिमे आदिल बन कर जाफ़रानी लिबास पहने ज़मीन पर तशरीफ़ लायेंगे। 


📝 *सवाल :-* इमाम मेहदी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का जुहूर पहले होगा या हजरत ईसा अलैहिस्सलाम आसमान से पहले तशरीफ लायेंगे ? 

✍🏻 *जवाबः-* इमाम मेहदी का जुहूर पहले होगा। 


📝 *सवाल :-* इमाम मेहदी का जुहूर दज्जाल से कितने पहले होगा ? 

✍🏻 *जवाब :-* सात साल पहले होगा।


📝 *सवाल :-* हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम कहां दफन किये जायेंगे ? 

✍🏻 *जवाब :-* सरकारे दो - आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के रौज़ - ए - मुबारक में। 


📝 *सवाल :-* याजूज माजूज की जमाअत दुनिया में क्या फसाद मचाएगी ? 

✍🏻 *जवाब :-* जिसको पायेगी नोच खायेगी। बड़े - बड़े दरिया का पानी खुश्क कर देगी। आसमान पर तीर चलायेगी। 


📝 *सवाल :-* याजूज माजूज का ज़ाहिर होना दज्जाल से पहले होगा या बाद में ? 

✍🏻 *जवाब :-* इमाम मेहदी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की वफात और दज्जाल के कत्ल के बाद होगा।

  

*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 43,44)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 31 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


       *🌖 कियामत का बयान* 🌖


*📝 सवाल :-* कियामत किस दिन को कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब :-* जिस दिन हज़रत इसराफ़ील अलैहिस्सलाम सूर फूकेंगे उसी दिन को कियामत कहते हैं। 


📝 *सवाल :-* सूर फूकने से क्या होगा ?

✍🏻 *जवाब :-* सूर फूंकने से यह होगा कि तमाम आदमी और हर जानदार मर जायेंगे, सारी दुनिया फ़ना (खत्म) हो जायेगी, पहाड़ रुई के गालों की तरह उड़ते फिरेंगे, सितारे टूट कर गिर पड़ेंगे यहां तक कि तमाम चीजें टूट फूट कर फना (ख़त्म हो जायेंगी)। 


📝 *सवाल :-* सूर किस तरह की चीज़ है ? 

✍🏻 *जवाब :-* सींग की शक्ल की एक चीज़ है। 


📝 *सवाल :-* सूर कितनी मर्तबा फूका जायेगा और किस लिये फूंका जायेगा ? 

✍🏻 *जवाब :-* तीन मर्तबा फूंका जायेगा। पहली मर्तबा तमाम ज़िन्दा बेहोश हो जायेंगे, जमीन कांपने लगेगी आसमान बहने लगेंगे, पहाड़ उड़ने लगेंगे, चाँद सूरज धुंधले हो जायेंगे और चालीस रोज़ तक ऐसा ही रहेगा। फिर दूसरी मर्तबा जब सूर फूंका जायेगा तो सब हलाक (मर) हो जायेंगे और कियामत आ जायेगी। 


📝 *सवाल :-* कियामत किस दिन आयेगी ? 

✍🏻 *जवाब :-* मुहर्रम की दसर्वी तारीख़ जुमे के दिन आयेगी।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 44,45)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 32 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


           ✍🏻 *मरने के बाद जिंदा*


📝 *सवाल :-* मरने के बाद जिन्दा होने से क्या मतलब है ? 

✍🏻 *जवाब :-* कियामत में हजरत इसराफील अलैहिस्सलाम जब दो मर्तबा सूर फूंकेंगे तो तमाम चीजें फ़ना हो जायेंगी। फिर तीसरी मर्तबा सूर फूकेंगे तो सब लोग हिसाब किताब के लिये जिन्दा किये जायेंगे और उनका हिसाब किताब लिया जायेगा। अल्लाह तआला के सामने सबकी पेशी होगी और हर शख्स को अच्छे बुरे कामों का बदला दिया जायेगा। उसी दिन को यौमुल हश्र, यौमुल जज़ा, यौमुद्दीन और यौमुल हिसाब कहते हैं। 


*📝 सवाल :-* हिसाब किस तरह होगा ? 

✍🏻 *जवाब :-* दुनिया में हर शख्स की नेकी बदी को फ़रिश्ते लिखते हैं मैदाने हश्र में वही दफ्तर पेश कर दिया जायेगा। 


📝 *सवाल :-* जो फ़रिश्ते नेकी लिखते हैं उनका क्या नाम है ? 

✍🏻 *जवाब :-* उनको किरामन कातिबीन कहते हैं। हर इन्सान के साथ दो फरिश्ते रहते हैं एक नेकी लिखता है दूसरा बदी। 


📝 *सवाल :-* नामए आमाल किस तरह दिया जायेगा ? 

✍🏻 *जवाब :-* मोमिन को सामने से दायें हाथ में और काफिर को पीछे से बायें हाथ में। 


📝 *सवाल :-* क्या अमल तौला भी जायेगा ?. 

✍🏻 *जवाब :-* जी हाँ। 


📝 *सवाल :-* किस तरह तौला जायेगा ? 

✍🏻 *जवाबः-* जिस तरह दुनिया में वज़नी चीजें तौली जाती हैं। ऐसे ही मैदाने हश्र में मीज़ान (तराजू) पर इन्सान का नामए आमाल तौला जायेगा।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 46)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 33 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


❤️ *शफाअत का बयान* ❤️


📝 *सवाल :-* शफाअत किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब :* गुनाहों की माफ़ी और दर्जात की बुलन्दी के लिये दरबारे इलाही में अर्ज करने को शफाअत कहते हैं। 


📝 *सवाल :-* क्या अम्बिया अलैहिमुस्सलाम गुनहगार मुसलमानों की शफाअत करेंगे ? 

✍🏻 *जवाब :-* ज़रूर करेंगे। 


*📝 सवाल :-* क्या नबी के इलावा दूसरों को भी सिफ़ारिश करने की इजाज़त होगी ? 

*✍🏻 जवाब :-* हां औलिया - ए - किराम, उलमा, शोहदा, सोलहा को भी गुनहगार मुसलमानों के हक में सिफारिश करने की इजाज़त होगी ? 


📝 *सवाल :-* सबसे पहले शफाअत कौन करेंगे ? 

✍🏻 *जवाब :-* सरकारे दो - आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और सबसे पहले आप ही की शफाअत कबूल की जायेगी। 


📝 *सवाल :-* गुनाहगारों की शफाअत का मामला कहां से साबित है ? 

✍🏻 *जवाब :-* कुरआन मजीद और हदीस शरीफ़ से। 


📝 *सवाल :-* शफाअते कुबरा किसको हासिल होगी ? 

✍🏻 *जवाब :-* हमारे आका व सरदार हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को। 


📝 *सवाल :-* पुल - सिरात से काफ़िर और मोमिन दोनों गुज़रेंगे या सिर्फ काफिर ? 

✍🏻 *जवाब :*- दोनों गुजरेंगे लेकिन मोमिन पार कर जायेंगे और काफिर जहन्नम में गिर जायेगा। 


📝 *सवाल :-* पुल - सिरात किस पर काइम होगा ? 

✍🏻 *जवाब :-* दोज़ख पर मगर जब जन्नती गुज़रेंगे तो उनके लिये आग ठंडी हो जायेगी।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 47)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 34 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


🔥 *दोजख का बयान*🔥


📝 *सवाल :-* दोज़ख क्या है ? 

✍🏻 *जवाब :-* गुनहगारों को सजा देने के लिये परवरदिगारे आलम ने जो आग भड़का रखी है उसी को दोज़ख या जहन्नम कहते हैं। 


*📝 सवाल :-* दोजख के कुल कितने तबके हैं ? 

*✍🏻 जवाब :-* सात तबके हैं। 


📝 *सवाल :-* दोजख की आग का रंग कैसा है ? 

✍🏻 *जवाब :-* काला, हज़ार बरस रौशन की गई तो लाल हो गयी, फिर हज़ार बरस रौशन की गयी तो सफेद हो गयी। फिर हजार बरस रौशन की गयी तो काली हो गयी वही स्याही काइम है। 


📝 *सवाल :-* दोज़ख़ की गहराई किस कदर है ? 

*✍🏻 जवाब :-* अगर कोई पत्थर दोज़ख की आग के ऊपर रख दिया जाये और वह पत्थर तेज़ी से नीचे को चले तो तह तक सत्तर बरस में पहुंचेगा। 


📝 *सवाल :-* दोज़खी का लिबास क्या होगा ? 

*✍🏻 जवाब :-* कुर्ता गन्धक या अलकतरा का होगा कि आग लगते ही खूब दहकेगाया पिघले हुए तांबे का होगा और ओढ़ना बिछौना आग का होगा। 


📝 *सवाल :-* दोज़ख़ की आग की तेजी दुनिया की आग से कितनी ज़्यादा है ? 

✍🏻 *जवाब :-* सत्तर गुना ज्यादा है। 


*📝 सवाल :-* क्या दोज़खी एक दूसरे को देखेंगे ? 

✍🏻 *जवाब :-* दोज़ख़ में इस कदर तारीकी होगी कि कोई किसी को न देख सकेगा। और आपस में एक दूसरे को नोच खाएगा। 


📝 *सवाल :-* दोज़ख़ का सबसे मामूली अज़ाब क्या होगा ? 

✍🏻 *जवाब :-* दोज़खी को आग का जूता पहनाया जायेगा जिस का तसमा भी आग ही का होगा। उस जूते को पहनने से दिमाग इस कदर खौलेगा कि जैसे चूल्हे पर हांडी या कढ़ाई में तेल खौलता है।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 48)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 35 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


            *🌟 जन्नत का बयान 🌟*


📝 *सवाल :-* जन्नत क्या है ? 

✍🏻 *जवाब :-* जन्नत एक मकान है कि अल्लाह तआला ने ईमान वालों के लिये बनाया है। 


📝 *सवाल :-* जन्नत के कुल कितने तबके हैं ? 

✍🏻 *जवाब :-* आठ। 


📝 *सवाल :-* जन्नत किस चीज़ से बनी है ? 

✍🏻 *जवाब :-* जन्नत की इमारत में एक ईंट सोने की एक ईंट, चाँदी की, गारा मुश्क का, मिट्टी ज़ाफरान की और कंकड़ियाँ मोती या याकूत की होंगी। 


📝 *सवाल :-* जन्नती की ज़बान क्या होगी ? 

✍🏻 *जवाब :-* अरबी ज़बान होगी। 


*📝 सवाल :-* क्या जन्नती बूढ़े होंगे ? 

*✍🏻 जवाब :-* नहीं। 


*📝 सवाल :-* क्या जन्नती बीमार होंगे ? 

*✍🏻 जवाब :-* नहीं।


*📝 सवाल :-* जन्नती का लिबास क्या होगा ? 

*✍🏻 जवाब : -* आला दर्जे का रेशमी बारीक व मोटा सब्ज लिबास होगा वह कभी न पुराना होगा और न फटेगा। 


*📝 सवाल :-* क्या जन्नत में अल्लाह तआला का दीदार होगा ? 

*✍🏻 जवाब :-* ज़रूर होगा। 


*📝 सवाल :-* क्या जन्नत में पेशाब और पाख़ाने की भी ज़रूरत होगी। 

*✍🏻 जवाब :-* नहीं, थूकने खंखारने की भी ज़रूरत न पड़ेगी। 


*📝 सवाल :-* क्या ऐसे लोग जो कलिमा पढ़ने के बावजूद पैग़म्बरे इस्लाम की तौहीन करते हैं वह भी जन्नत में जायेंगे। 

*✍🏻 जवाब :-* हरगिज़ नहीं। ऐसे लोगों की नमाज़ और रोज़े को उनके मुँह पर फेंक दिया जायेगा जैसा कि कुरआन मजीद में आया है कि ऐसे लोगों के आमाल को मलिया - मेट कर दिया जायेगा। 


*📝 सवाल :-* मुसलमान के बच्चे कहाँ रहेंगे ? 

*✍🏻 जवाबः-* जन्नत में। 


*📝 सवाल :-* कुफ्फार के बच्चे कहाँ रहेंगे ? 

*✍🏻 जवाब :-* जन्नत में मोमिनीन के ख़ादिम बनाये जायेंगे।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 49)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 36 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


*📝 औलिया- अल्लाह और सहाबा का बयान*


📝 *सवाल : -* सहाबा किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* सहाबी उस शख्स को कहते हैं जिसने ईमान की हालत में हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को देखा हो और उसी ईमान पर उसका इन्तेकाल हुआ हो। 


📝 *सवाल : -* सहाबा में सबसे अफ़ज़ल सहाबी कौन हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* अबू बकर सिद्दीक (पहले खलीफ़ा) उमर फारूक़ (दूसरे खलीफ़ा) उसमान ग़नी (तीसरे ख़लीफ़ा) अली मुर्तज़ा (चौथे खलीफ़ा) रज़ियल्लाहु अन्हुम। इन लोगों का मर्तबा तमाम सहाबा से अफ़ज़ल है। और इन्हीं चारों को खुलफ़ाए अरबआ, खुलफाए राशिदीन और चार यार भी कहते हैं।? 


📝 *सवाल : -* वली किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* खुदा तआला के ऐसे बरगुज़ीदा और मुकर्रब बन्दे जो अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हुक्म पर अपनी ज़िन्दगी गुज़ारते हैं और इत्तेबाए सुन्नत व रसूले करीम की मुहब्बत में ज़िन्दगी बसर करते हैं ऐसे ही लोगों को अल्लाह का वली कहते हैं। 


📝 *सवाल : -* क्या रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तौहीन व बेअदबी करने वाला शख्स वली हो सकता है ? 

✍🏻 *जवाब : -* हरगिज़ नहीं। 


📝 *सवाल : -* क्या कोई वली या सहाबी नबी के बराबर हो सकते हैं ?

✍🏻 *जवाब : -* हरगिज़ नहीं। 


📝 *सवाल : -* क्या औलिया - ए - किराम के मज़ारात पर फ़ातिहा या उर्स के लिये हाज़िर होना दुरुस्त है (ठीक है) ? 

✍🏻 *जवाब : -* जी हां, दुरुस्त है। औलिया - ए - किराम के दरबार में बहुत से फुयूज़ और बरकतें मिलती हैं। 


📝 *सवाल : -* क्या औलिया - ए - किराम के मज़ारात पर गुम्बद बनाना और उनकी कब्र पर चादर डालना या चराग जलाना यह सब बातें दुरुस्त हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* बेशक यह तमाम बातें दुरुस्त हैं। इसकी वजह से औलिया - ए - किराम की अज़मत व बुज़ुर्गी का इज़हार होता है। 


📝 *सवाल : -* क्या कोई वली जो सहाबी नहीं है वह सहाबी के बराबर हो सकता है ? 

✍🏻 *जवाब : -* नहीं


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 51,52)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 37 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


*🌼 कुफ्र व शिर्क व बिदअत का बयान* 


📝 *सवाल : -* कुफ्र किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* ज़रूरियाते दीन यानी जिन चीज़ों पर ईमान लाना ज़रूरी है उनमें से किसी एक का इन्कार करना कुफ्र है। जैसे खुदा तआला को न मानना, या फ़रिश्तों को न मानना या आसमानी किताबों को न मानना या तक़दीर का इन्कार करना वगैरह। 


📝 *सवाल : -* शिर्क किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* अल्लाह तआला की ज़ात या सिफात में किसी दूसरे को शरीक करने को शिर्क कहते हैं। 


*📝 सवाल : -* खुदा तआला की ज़ात में शरीक करने का क्या

मतलब है ? 

*✍🏻 जवाब : -* यानी अल्लाह तआला के इलावा और भी किसी को खुदा मानना जैसे ईसाई तीन खुदा मानते हैं, आग के पूजने वाले दो खुदा मानते हैं और हिन्दू बहुत से खुदा मानते हैं। ऐसे लोगों को मुशरिक कहते हैं। 


*📝 सवाल : -* और खुदा तआला की सिफात में दूसरे को शरीक करने से क्या मुराद है ? 

*✍🏻 जवाब : -* अल्लाह तआला की किसी सिफ़त को दूसरों में इस तरह मानना कि यह सिफ़त अल्लाह के बगैर दिये हुये उसको हासिल है इसी को शिर्क फिस्सिफ़ात कहते हैं। 


📝 *सवाल : -* मिसाल देकर समझाइये ? 

*✍🏻 जवाब : -* जैसे ये कहना कि फलां शख्स पानी बरसा सकता है बगैर अल्लाह के हुक्म के या यह कहना कि फलां शख्स गैब जानता है बगैर अल्लाह के बताये हुये, ऐसी बातों को शिर्क फिस्सिफात कहते हैं। 


⚠️ *नोट : -* लेकिन अगर इस तरह कहा जाये कि सरकारे दोआलम पानी बरसाते थे अल्लाह के हुक्म से, हुजूर गैब जानते थे अल्लाह के बताने से, हुजूर मुर्दो को ज़िन्दा कर देते थे अल्लाह की तौफीक से, हुजूर लोगों की मुरादें पूरी करते थे अल्लाह की दी हुई कुदरत से, तो यह बातें शिर्क नहीं हैं। ऐसा अक़ीदा रखना दुरुस्त (ठीक) है और यही सही अक़ीदा है। या ऐसा कहना कि अल्लाह तआला की बख़्शी हुई ताक़त से हुजूर दूर और नजदीक की बातें सुन लेते हैं, हमारी मदद फरमाते हैं तो यह तमाम बातें दुरुस्त हैं। इसको शिर्क नहीं कहते हैं।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 52,53)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 38 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


*🌼 कुफ्र व शिर्क व बिदअत का बयान (2)* 


*❇️ सवाल : -* बिदअत किसे कहते हैं ? 

✳️ *जवाब : -* दीन में किसी ऐसी चीज़ की ईजाद (चालू) करना जिसकी अस्ल शरीअत में मौजूद न हो उस को बिदअत कहते हैं। 


❇️ *सवाल : -* क्या हर बिदअत गुमराही है ? 

✳️ *जवाब : -* नहीं। हर बिदअत गुमराही नहीं है। 


❇️ *सवाल : -* क्या बिदअत की कई किस्में हैं ? 

✳️ *जवाब : -* जी हाँ। बिदअत की कई किस्में हैं। 

(1) बिदअते हसना। 

(2) बिदअते सैय्येआ। 


❇️ *सवाल : -* कौन सी बिदअत गुमराही है ? 

✳️ *जवाब : -* बिदअते सैय्येआ गुमराही है। 


❇️ *सवाल : -* बिदअते सैय्येआ किसे कहते हैं ? 

✳️ *जवाब : -* जो सुन्नत की ज़िद (खिलाफ) हो उसको बिदअते सैय्येआ कहते हैं।  


❇️ *सवाल : -* और बिदअते हसना किसे कहते हैं ? 

✳️ *जवाब : -* जो सुन्नत की ज़िद न हो। 


❇️ *सवाल : -* बिदअते हसना की मिसाल देकर समझाइये ? 

✳️ *जवाब : -* जैसे मीलाद शरीफ़ करना, महफिले मीलाद में खड़े होकर सलाम व कियाम करना। औलिया - ए - किराम का उर्स करना, उनके मजारात पर गुम्बद बनाना, उनकी कब्र पर चादर डालना, उनके रौज़ा में चराग जलाना, ताकि उनकी अजमत और बुज़ुर्गी का इजहार हो। यह तमाम चीजें बिदअते हसना हैं, बिदअते हसना का करने वाला सवाब का हक़दार होता है। 


❇️ *सवाल : -* जो शख्स बिदअते हसना का इन्कार करे वह कैसा है ?

✳️ *जवाब : -* गुमराह है। 


⚠️ *नोट : -* जिन चीज़ों को रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नाजाइज़ नहीं फरमाया ऐसी चीज़ों को नाजाइज़ कहना या जिन चीजों से हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मना नहीं फरमाया उन चीज़ों से लोगों को मना करना यह दीन में ज्यादती और गुमराही की निशानी है। 


❇️ *सवाल : -* बिदअत की दो किस्में कहां से साबित हैं ? 

✳️ *जवाब : -* हदीस शरीफ़ से। हमारे आका व सरदार हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बिदअत को बिदअते सैय्येआ फ़रमाया है और दूसरी बिदअत को बिदअते हसना। बिदअते सैय्येआ को गुमराही करार दिया है और उसके ईजाद करने वाले और उस पर अमल करने वाले को मुस्तहिके अज़ाब फ़रमाया है। और बिदअते हसना के ईजाद करने वाले और उस पर अमल करने वाले को मुस्तहिके सवाब फरमाया है। 


*⚠️ नोट : -* अल्लाह तआला हम को सीधी राह दिखाये और अपने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बताये हुये हुक्म पर चलने की तौफीक अता फरमाये। आमीन।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 54,55)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 39 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


✍🏻 *नज्र और मन्नत, मुराद का बयान* 


❇️ *सवाल : -* मन्नत मानना कैसा है ? 

✳️ *जवाब : -* जाइज़ है। 


✳️ *सवाल : -* और मन्नत का पूरा करना कैसा है ? 

❇️ *जवाब : -* ज़रूरी है। 


✳️ *सवाल : -* क्या हर मन्नत का पूरा करना ज़रूरी है।

❇️ *जवाब : -* नहीं। बल्कि ऐसी मन्नत जो खिलाफे शरीअत न हो उसका पूरा करना ज़रूरी है। और जो मन्नत शरीअत के खिलाफ हो उसका पूरा करना नाजाइज़ है। 


✳️ *सवाल : -* क्या मस्जिद में चराग जलाने या किसी पीर या वली से मन्नत मानना मना है ? 

❇️ *जवाब : -* नहीं। जैसे मस्जिद में चराग जलाने या ताक भरने या फलां बुजुर्ग के मजार पर चादर चढ़ाने या ग्यारहवीं शरीफ़ की नियाज़ (फ़ातिहा) दिलाने या सय्यदिना सरकार गौसुल आजम रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का तोशा या सय्यदिना सरकार गरीब नवाज़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की नियाज़ या शाह अब्दुल हक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का तोशा करने या हज़रत जलाल बुख़ारी का कूडा करने या मुहर्रम की फ़ातिहा, या शरबत, या खिचड़ा, या सबील लगाने, या मीलाद शरीफ करने की मन्नत मानी तो यह शरी मन्नत नहीं मगर यह काम मना नहीं है, करे तो अच्छा है, अलबत्ता इसका ख्याल रहे कि कोई बात खिलाफे शरअ उस के साथ न मिलायें। और जो लोग इन बातों से मना करते हैं वह नेकियों से महरूम हैं। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 56)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 40 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


📝 *शरीअत के इस्तिलाहात (1)*


📝 *सवाल : -* फर्ज़ की क्या तारीफ़ है यानी फर्ज़ किस को कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* फर्ज़ उसे कहते हैं जिसकी दलालत (दलील) और सुबूत कतई हो यानी उसमें कोई शक न हो इसी लिये उसका इन्कार करने वाला काफिर हो जाता है। और बगैर किसी उज्र (मजबूरी) के छोड़ने वाला गुनहगार और मुस्तहिके अज़ाब होता है। 


*📝 सवाल : -* वाजिब किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* जो दलीले जन्नी से साबित हो उसको वाजिब कहते हैं, उसका इनकार करने वाला काफ़िर नहीं होता। अलबत्ता बगैर उर के छोड़ने वाला फ़ासिक (गुनहगार) और अज़ाब का मुस्तहिक (हक़दार) होता है। 


📝 *सवाल : -* सुन्नत किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* उस काम को कहते हैं जिसको रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम या सहाबए किराम ने किया हो या करने का हुक्म फ़रमाया हो। 


📝 *सवाल : -* नफ़्ल किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* जिसकी फजीलत (बुजुर्गी, बड़ाई) शरीअत में साबित हो उनके करने में सवाब हो और छोड़ने में अज़ाब न हो और इसको मुस्तहब भी कहते हैं। 


📝 *सवाल : -* फ़र्ज़ की कितनी किस्में हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* फर्ज की दो किस्में हैं। 

(1) फ़र्जे ऐन। 

(2) फर्जे किफ़ाया। 


📝 *सवाल : -* फर्जे ऐन किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* जिसका अदा करना हर शख्स पर ज़रूरी हो और बगैर उन छोड़ने वाला फ़ासिक और गुनहगार हो। 


📝 *सवाल : -* फ़र्जे किफाया किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* फ़र्जे किफ़ाया उसे कहते हैं जो दो एक आदमी के करने से सबके ज़िम्मे से उतर जाये और अदा न करे तो सबके सब गुनाहगार होंगे, जैसे नमाज़े जनाज़ा।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 57)*


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📝 *शरीअत के इस्तिलाहात (2)*


*📝 सवाल : -* सुन्नत की कितनी किस्में हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* सुन्नत की दो किस्में हैं। सुन्नते मोअक्कदा और सुन्नते गैर मोअक्कदा। 


*📝 सवाल : -* सुन्नते मोअक्कदा किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* जिस काम को रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमेशा किया हो या करने का हुक्म दिया हो ऐसी सुन्नतों को सुन्नते मुअक्कदा कहते हैं, उनको बगैर उज़र छोड़ देना बुरा है। 


*📝 सवाल : -* सुन्नते गैर मुअक्कदा किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* जिस काम को सय्यदे आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अक्सर व बेश्तर किया हो लेकिन कभी - कभी छोड़ भी दिया हो। ऐसी सुन्नतों को सुन्नते गैर मुअक्कदा कहते हैं। 


*📝 सवालः-* मुस्तहब किसे कहते हैं ?

*✍🏻 जवाब : -* जिसके करने में सवाब है और न करने में गुनाह नहीं। 


*📝 सवाल : -* हराम किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* हराम उसको कहते हैं, जिसकी मनाही दलीले कती (ठोस दलील) से साबित हो और उसका करने वाला फासिक और अज़ाब का हक़दार है और उसका इन्कार करने वाला काफ़िर है। 


*📝 सवाल : -* मकरूहे तहरीमी किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* उस काम को कहते हैं जिसकी मनाही दलीले जन्नी से साबित हो उसका इन्कार करने वाला काफ़िर नहीं होता मगर करने वाला गुनाहगार होता है।


*📝 सवाल : -* मकरूहे तन्जीही किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* मकरूहे तन्जीही उस काम को कहते हैं जिसके छोड़ने में सवाब है और करने में अज़ाब तो नहीं है मगर मअयूब बुरा है। 


*📝 सवाल : -* मुबाह (जाइज) किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* जिसका करना न करना दोनों बराबर हो, यानी करने में न तो सवाब है नहीं करने में अज़ाब व गुनाह नहीं। 


📝 *सवाल : -* दलीले कतई किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* जिसका सुबूत कुरआन शरीफ़ और हदीस मोतवातिर से हो। 


*📝 सवाल : -* दलील जन्नी किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* जिसका सुबूत हदीसे मशहूर से हो।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 58,59)*


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           *वजू का बयान*


*📝 सवाल : -* वजू किसे कहते हैं ? और उसका क्या तरीका है । 

*✍🏻 जवाब : -* वजू का बयान शुरू में आ चुका है लिहाज़ा पहले देखा जाये।


*📝 सवाल : -* वजू में कुल कितने फ़र्ज़ हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* चार फर्ज हैं। 

(1) पूरे मुँह का धोना यानी पेशानी के बालों से ठोड़ी के नीचे तक और एक कान की लौ से दूसरे कान की लौ तक। 

(2) दोनों हाथों को केहुनियों समेत धोना। 

(३) चौथाई सर का मसह करना। 

(4) दोनों पाँव टखनों समेत धोना। 

*जैसा कि कुरआन मजीद में अल्लाह तआला ने फरमाया* या अय्युहल्लज़ी - न आमनू इजा कुस्तुम इलस्सलातिः फसिलू वुजू - हकुम व ऐदि - यकुम इलल मराफिकि वम् - सहू बि - रऊसिकुम् व अर्जु - लकुम इल्ल कअबैनि. 

📖 *तर्जुमाः-* ऐ ईमान वालो ! जब तुम नमाज़ का इरादा करो तो धोओ अपने चेहरों को और हाथों को कुहनियों समेत और मसह करो अपने सर का और धोओ पाँव को टखनों समेत। 


📝 *सवाल : -* वजू में कितनी सुन्नतें हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* 

(1) नीयत करना। 

(2) बिस्मिल्लाह पढ़ना। 

(3) तीन दफा दोनों हाथ गट्टों तक धोना। 

(4) मिस्वाक करना। 

(5) तीन बार कुल्ली करना। 

(6) तीन बार नाक में पानी डालना।

(7) दाढ़ी का ख़िलाल करना। 

(8) हाथ पाँव की उंगलियों में खिलाल करना। 

(9) हर उज्व (हिस्सा) को तीन बार धोना। 

(10) एक बार तमाम सर का मसह करना। 

(11) दोनों कानों का मसह करना। 

(12) तरतीब से वजू करना यानी जिस तरह कुरआन शरीफ में वजू का बयान आया है। 

(13) लगातार धोना यानी एक हिस्सा सूखने न पाये कि दूसरा हिस्सा धो डालें। 


📝 *सवाल : -* वजू में मुस्तहब कितने हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* (1) गर्दन का मसह करना। 

(2) वजू के काम खुद अपने से कर लेना। 

(3) किबले की तरफ मुँह करके बैठना। 

(4) पाक और ऊँची जगह पर बैठ के वजू करना। 


📝 *सवाल : -* वजू में कितनी चीजें मकरूह हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* (1) नापाक जगह पर बैठ कर व.जू करना। 

(2) वजू में सीधे हाथ से नाक साफ करना। 

(3) दुनिया की बातें करना। 

(4) खिलाफे सुन्नत वजू करना। 


📝 *सवाल : -* वजू कितनी चीज़ों से टूट जाता है ? 

*✍🏻 जवाब  : -* आठ चीज़ों से। 

(1) पेशाब पाखाना करना, या इन दोनों रास्तों से किसी और चीज़ का निकलना। 

(2) हवा का खारिज होना। 

(3) बदन के किसी जगह से खून या पीप का बह जाना। 

(4) मुँह भर के कै (उल्टी) होना। 

(5) गफलत से सो जाना। 

(6) बेहोशी का तारी होना। 

(7) मजनूं या दीवाना होना। 

(8) रुकूअ और सज्दा वाली नमाज़ में कहकहा मार कर हंसना। 


📝 *सवाल : -* क्या सो जाने से रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का भी वजू टूट जाता था ?

*✍🏻 जवाब : -* नहीं। हमारे हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की नींद हम लोगों जैसी न थी। आपकी आँखें बन्द रहतीं मगर दिल आप का बेदार रहता। आप सिर्फ देखने में इन्सानों जैसे थे मगर आप हकीकत में नूरे मुजस्सम थे। यहां तक कि ज़मीन पर आप का साया (परछाईं) न पड़ता था। आप के बदन पर मक्खी न बैठती थी इसलिये रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अपने जैसा बशर न कहना चाहिये। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 60,61)*


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*💧 तयम्मुम का बयान 💧*


📝 *सवाल : -* तयम्मुम कहाँ से साबित है ? 

*✍🏻 जवाब : -* कुरआन मजीद से! जैसा कि कुरआन शरीफ़ ने फरमाया है ।

*फलम तजिदू माअन् फ़ - त - यम्ममू सईदन्तय्यिबन* 


(यानी जब तुम लोग पानी न पाओ तो पाक मिट्टी से तयम्मुम करो।) 


*📝 सवाल.-* तयम्मुम किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* पाक मिट्टी या ऐसी चीज़ जो मिट्टी के हुक्म में हो उससे बदन को नजासते हुक्मिया से पाक करने को तयम्मुम कहते हैं। 


📝 *सवाल : -* तयम्मुम किस वक़्त जाइज़ होता है ? 

✍🏻 *जवाबः-* जब पानी न मिले या पानी मौजूद हो मगर उसके इस्तेमाल से मर्ज़ बढ़ जाने का अन्देशा हो या मरीज़ हो जाने का तो तयम्मुम करना जाइज़ है। 


📝 *सवाल : -* तयम्मुम में कितने फ़र्ज़ हैं ?

*✍🏻 जवाब : -* तीन हैं। 

(1) नीयत करना। 

(2) दोनों हाथ मिट्टी पर मार कर मुँह पर फेरना। 

(3) दोनों हाथों को मिट्टी पर मार कर दोनों हाथों को कुहनी समेत मलना। 

और यही तयम्मुम करने का तरीका भी है। यानी नीयत करके दोनों हाथ मिट्टी पर मार कर पूरे मुँह पर फेरें फिर दोबारा दोनों हाथ मिट्टी पर मार कर दायें हाथ को बायें हाथ से और बायें हाथ को दायें हाथ से कुहनी समेत मल लें इस तरह कि कोई हिस्सा छूटने न पाये। तयम्मुम में सर का मसह करना या पाँव पर हाथ का मलना यह सब कुछ नहीं है। 


📝 *सवाल : -* वजू और गुस्ल दोनों का तयम्मुम जाइज़ है या सिर्फ वजू का ? 

✍🏻 *जवाब : -* दोनों का तयम्मुम जाइज़ है। 


📝 *सवाल : -* वजू और गुस्ल दोनों का तयम्मुम एक ही तरह किया जाएगा या दोनों में फर्क है ? 

✍🏻 *जवाब : -* दोनों का तयम्मुम एक ही तरह है, कोई फर्क नहीं। 


📝 *सवाल : -* तयम्मुम किन चीजों पर करना जाइज़ है ? 

*✍🏻 जवाबः -* पाक मिट्टी, पाक गुबार, गर्द, रेत, पत्थर, चूना, गेरू, मुल्तानी मिट्टी, मिट्टी के कच्चे या पक्के बरतन, मिट्टी की कच्ची या पक्की ईंटें और मिट्टी, ईंट या पत्थर की दीवार वगैरह से तयम्मुम जाइज़ है। 


*📝 सवाल : -* तयम्मुम किन चीज़ों से नाजाइज़ है ? 

✍🏻 *जवाब : -* तरीका यह है कि जो चीजें आग में पिघल जायें या आग से जल कर खाक हो जायें जैसे गल्ला, कपड़ा, राख, लकड़ी, लोहा, आलमूनियम, सीसा, जस्ता, सोना, चाँदी, पीतल, ताँबा, राँगा इस तरह की चीज़ों पर नाजाइज़ है।


*📝 सवाल : -* जिन चीजों पर तयम्मुम नाजाइज़ है अगर उन पर गुबार, गर्द, हो तो तयम्मुम जाइज़ है या नहीं ? 

✍🏻 *जवाबः-* जाइज़ है जब कि गुबार (धूल) इतना हो कि हाथ मारने से उसका असर हाथ में ज़ाहिर हो। 


📝 *सवाल : -* तयम्मुम किन चीज़ों से टूटता है। 

✍🏻 *जवाब : -* जिन चीजों से वजू टूट जाता है। इनके इलावा जब पानी पर कुदरत हो गयी तब भी तयम्मुम टूट जायेगा या बीमारी की वजह से तयम्मुम किया और अब बीमारी खत्म हो गई हो तो भी तयम्मुम टूट जायेगा। अलबत्ता गुस्ल का तयम्मुम हदसे अकबर से टूटता है। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 62,63,64)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 44 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


             *💧 गुस्ल का बयान 💧*


📝 *सवाल : -* गुस्ल किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* गुस्ल कहते हैं नहाने को इसका तरीका यह है कि कुल्ली करना, नाक में पानी डालना, पूरे बदन पर पानी बहाना। 


📝 *सवाल : -* गुस्ल में कितने फ़र्ज़ हैं ? 

*✍🏻 जवाबः-* तीन फ़र्ज़ हैं- (1) कुल्ली करना (2) नाक में पानी डालना (3) और पूरे बदन पर पानी बहाना, इस तरह कि बदन का कोई हिस्सा छूटने न पाये। 


📝 *सवाल : -* गुस्ल में कितनी सुन्नतें हैं ? 

*✍🏻 जवाबः-* पांच हैं। (1) गुस्ल से पहले इस्तिन्जा करना और उस जगह काधोनाजहां पर नजासत (गन्दगी) लगी हो। 

(2) दोनों हाथ गट्टों तक तीन बार धोना। 

(3) नापाकी दूर करने की नीयत करना। 

(4) गुस्ल से पहले वजू करना। (5) तमाम बदन पर तीन बार पानी बहाना। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 65)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 45 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


            *✍🏻 इस्तिन्जा का बयान*


 *📝 सवाल : -* इस्तिन्जा किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* पेशाब पाखाना करने के बाद जो नापाकी बदन पर लगी रहती है उसे पाक करने को इस्तिन्जा कहते हैं। 


*📝 सवाल : -* इस्तिन्जा किस हाथ से करना चाहिये ? 

*✍🏻 जवाब : -* बायें हाथ से (दायें हाथ से मकरूह है)। 


*📝 सवाल : -* इस्तिन्जा किन चीजों से करना चाहिये ? 

✍🏻 *जवाबः-* मिट्टी के पाक ढेलों से या पत्थर से या सिर्फ पानी से मगर ढेलों के बाद पानी से बेहतर है। 


*📝 सवाल : -* इस्तिन्जा किन चीज़ों से मकरूह है ? 

*✍🏻 जवाब : -* कोयला, कागज, कपड़ा, हड्डी, लीद, गोबर और खाने की चीज़ों से। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 66)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 46 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


                     💧 *रोजे का बयान*


📝 *सवाल : -* रोज़ा क्या है ? 

*✍🏻 जवाब : -* रोजा भी अरकाने इस्लाम का एक रुक्न है। (फ़र्ज़ है।) 


📝 *सवाल : -* रोज़ा कहां से साबित है ? 

*✍🏻 जवाब : -* कुरआन मजीद और हदीस शरीफ से। 


*📝 सवाल : -* रोज़ा किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* नीयत के साथ सुबहे सादिक से सूरज डूबने तक खाने पीने और नफसानी ख्वाहिशों को छोड़ देने को रोज़ा कहते 


📝 *सवाल :* फ़र्ज़ रोज़े कितने हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* साल भर में एक महीने के यानी रमज़ान शरीफ़ के रोज़े फर्ज हैं। 


*📝 सवाल : -* कौन से रोजे सुन्नत हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* आशूरा का, अरफ़ा यानी नवीं ज़िलहिज्जा और अय्यामे बीज़ यानी हर माह की तेरहवीं, चौदहवीं, पन्द्रहवीं के रोज़े मसनून हैं। हदीस शरीफ में अय्यामे बीज़ के रोज़ों की बहुत फजीलत आई है। 


*📝 सवाल : -* क्या शरीअत में रोज़े मकरूह भी हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* जी हां। जैसे जुमेरात या सनीचर का रोज़ा मिलाये बगैर सिर्फ जुमा के रोजा का एहतेमाम से रखना मकरूह है। 


📝 *सवाल : -* क्या रोज़े हराम भी हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* जी हां। साल भर में पाँच रोज़े हराम हैं। ईदुल फित्र (ईद) ईदुल अज़हा (बकर ईद) के दो रोजे और तीन रोजे अय्यामे तशरीक के हराम हैं। 


*📝 सवाल : -* अय्यामे तशरीक किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* ज़िलहिज्जा की ग्यारहवीं, बारहवीं, तेरहवीं तारीख को अय्यामे तशरीक कहते हैं। 


*📝 सवाल : -* किन लोगों पर रमज़ान शरीफ़ के रोज़े फ़र्ज़ हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* मुसलमान आकिल, बालिग, मर्द औरत पर (इस शर्त के साथ कि कोई उजे शरी न हो)। 


*📝 सवाल : -* क्या बगैर नीयत के रोज़ा हो जायेगा ?

*✍🏻 जवाब : -* नहीं, रोजा के लिये नीयत शर्त है। 


*📝 सवाल : -* क्या ज़बान से नीयत करनी ज़रूरी है ? 

*✍🏻 जवाबः-* नहीं दिल से नीयत कर  लेना काफी है साथ मे जबान से भी कहले यानी निय्यत कर ले।


📝 *सवाल : -* कौन - कौन सी चीजें रोज़े में मुस्तहब हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* 

( 1 ) सहरी खाना। 

( 2 ) सहरी आखिर वक्त में खाना। 

( 3 ) रात से नीयत करना। 

( 4 ) इफ्तार में जल्दी करना। 

( 5 ) छुहारे या खजूर और अगर यह न हो तो पानी से इफ्तार करना। 

( 6 ) ज़बान को बुरी बातों से बचाना। 


*📝 सवाल : -* अच्छा यह बताइये रोजा किन चीजों से मकरूह नहीं होता ? 

*✍🏻 जवाब : -* 

( 1 ) मिस्वाक करना। 

( 2 ) बदन पर या सर पर तेल की मालिश करना । 

( 3 ) सुर्मा लगाना । 

( 4 ) खुशबू सूंघना या लगाना। 

( 5 ) ठन्डक के लिये गुस्ल करना

( 6 ) बिला इरादा के हो जाना। 

( 7 ) मक्खी या धुवाँ का अनजाने में हलक से उतर जाना। 

( 8 ) भूले से किसी चीज़ का खा लेना या पी लेना इन चीजों से रोज़ा न तो टूटता है और न तो मकरूह होता है। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 67,68)*


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*📃🖌️📃🕌 ﴾ ﷽ ﴿ 🕋📃🖌️📃*


    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 47 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


          *💵 जकात का बयान 💵* 


*📝 सवाल : -* ज़कात का क्या हुक्म है ? 

*✍🏻 जवाब : -* ज़कात भी अरकाने इस्लाम से एक रूक्न है (यानी फर्ज है)। इसका इन्कार करने वाला काफ़िर है और ज़कात का न देने वाला फ़ासिक और क़त्ल का मुस्तहिक और ज़कात की अदाइगी में देर करने वाला गुनहगार व मरदूदुश्शहादत (जिसकी गवाही न मानी जाये) है।


📝 *सवाल : -* जकात कहां से साबित है ? 

✍🏻 *जवाब : -* कुरआन मजीद और हदीस शरीफ से 


📝 *सवाल : -* ज़कात किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाबः-* शरीअत कानून के मुताबिक़ माल का जो हिस्सा किसी मुहताज, फ़कीर को देकर उसे मालिक बना दिया जाता है उसी को ज़कात कहते हैं। 


📝 *सवाल : -* क्या ज़कात हर मुसलमान पर फर्ज है या उसके लिए कुछ शर्ते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* ज़कात फर्ज होने की चन्द शर्ते हैं और वह यह हैं : 

( 1 ) मुसलमान। 

( 2 ) आकिल। 

( 3 ) बालिग 

( 4 ) आज़ाद। 

( 5 ) मालिके निसाब होना। 

( 6 ) निसाब का हाजते असली और कर्ज से ज़्यादा होना। 

( 7 ) मालिक होने के बाद निसाब पर एक साल का गुजर जाना। 


📝 *सवाल : -* इस्लामी शरीअत में निसाब किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* हमारी शरीअत ने जिन मालों में ज़कात फर्ज किया है, उनमें ज़कात फर्ज होने के लिये अलग - अलग एक मिकदार मुकर्रर कर दी है। जब इतनी मिकदार पूरी हो जाये तो उसको निसाब कहते हैं और ज़कात फ़र्ज़ हो जाती है। 


📝 *सवाल : -* ज़कात किस - किस माल में फर्ज़ है ? 

✍🏻 *जवाबः-* सोना, चाँदी और हर किस्म के माले तिजारत में जकात फ़र्ज़ है। 


📝 *सवाल : -* चाँदी का निसाब क्या है ? 

✍🏻 *जवाब : -* दो सौ दिरम यानी साढ़े बावन तोला चाँदी। 


📝 *सवाल : -* सोने चाँदी की ज़कात में वज़न का एतेबार है या कीमत का ? 

✍🏻 *जवाब : -* वज़न का एतेबार है कीमत का नहीं। यानी वज़न से मुराद वह तोला जिस से यह राइज (चालू) रुपया सवा ग्यारह माशा है। 


📝 *सवाल : -* सोने का निसाब क्या है ? 

✍🏻 *जवाब : -* सोने का निसाब बीस मिस्काल है यानी साढ़े सात तोला सोना। 


📝 *सवाल : -* अगर सोना व चाँदी बकदरे निसाब हो तो उस पर कितनी ज़कात फर्ज है। 

*✍🏻 जवाबः-* साढ़े सात तोला सोने की ज़कात सवा दो माशा सोना है और साढ़े बावन तोला चाँदी पर एक तोला तीन माशा छः रत्ती चाँदी वाजिब है या इन दोनों की कीमत। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 68,69)*


*📬 पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*

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*📃🖌️📃🕌 ﴾ ﷽ ﴿ 🕋📃🖌️📃*


    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 48 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


       *💵 जकात का बयान(2) 💵* 


📝 *सवाल : -* मसरफे ज़कात क्या है ? 

*✍🏻 जवाब : -* जिस शख्स को ज़कात शरअन दी जा सकती है उसी को मसरफे ज़कात कहते हैं। 


📝 *सवाल : -* मसारिफे ज़कात कितने हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* (1) फकीर (2) मिस्कीन (3) कर्जदार (4) मुसाफिर, इस्लाम के इबतिदाई जमाने में काफिरों को भी जकात देना जाइज़ था लेकिन अब जाइज़ नहीं है ? 


📝 *सवाल : -* फ़कीर और मिस्कीन में क्या फ़र्क है ? 

✍🏻 *जवाब : -* फकीर वह है जिसके पास थोड़ा सा माल व असबाब हो लेकिन निसाब के बराबर न हो। और मिस्कीन वह शख्स है जिसके पास कुछ भी न हो। और कर्जदार से वह शख्स मुराद है जिसके पास कर्ज से बचा हुआ कोई माल निसाब की मिकदार में न हो। 


📝 *सवाल : -* किन लोगों को जकात देना अफजल (बेहतर) है ? 

✍🏻 *जवाब : -* (1) अपने रिश्तेदारों को जैसे भाई बहन भांजी वगैरह जिनको जकात देना मना नहीं है। फिर अपने पड़ोसी को उसके बाद अपने मुहल्ले के जरूरतमन्द को या फिर जहां पर दीन का ज्यादा फाइदा हो। 


📝 *सवाल : -* क्या इस्लामी मदरसे को भी ज़कात दे सकते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* हाँ, इस शर्त के साथ कि इन्तेज़ाम करने वाले मसरफे जकात में खर्च करें। 


📝 *सवाल : -* रिश्तेदार तो माँ बाप भी हैं क्या उन्हें भी ज़कात दी जा सकती है ? 

✍🏻 *जवाब : -* नहीं ! बाप, माँ, दादा, दादी, नाना, नानी और (ऐसे ही और ऊपर तक) बेटा, बेटी, पोता, पोती. नवासा, नवासी, (ऐसे ही और नीचे तक) इन्हें ज़कात नहीं दी जा सकती है. ऐसे ही सय्यद और मालदार, और काफ़िर और मालदार आदमी की नाबालिग औलाद को भी ज़कात देना जाइज़ नहीं और शौहर अपनी बीवी और बीवी अपने शौहर को भी ज़कात नहीं दे सकती। 


📝 *सवाल : -* ज़कात का माल किन चीजों में खर्च करना जाइज़ नहीं है ? 

✍🏻 *जवाब : -* मस्जिद की तामीर, या मस्जिद की दूसरी ज़रूरीयात में। ऐसे ही मय्यत के कफ़न, दफन में या मय्यत के कर्ज अदा करने में खर्च करना जाइज़ नहीं। 

✍🏻 *काइदाः-* यह है कि जिन चीजों में ज़कात की रकम का कोई हकदार मालिक न बनाया जा सके उन चीज़ों में ज़कात की रकम का खर्च करना जाइज़ नहीं।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 69,70)*


*📬 पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*

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*📃🖌️📃🕌 ﴾ ﷽ ﴿ 🕋📃🖌️📃*


    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 49 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


         🕋 *हज का बयान* 🕋


📝 *सवाल : -* हज क्या है ? 

✍🏻 *जवाब : -* अरकाने इस्लाम का पांचवां रुक्न है (फ़र्ज़ है)। 


📝 *सवाल : -* हज कहां से साबित है ? 

✍🏻 *जवाबः-* कुरआन शरीफ़ और हदीस शरीफ से। 


📝 *सवाल : -* हज किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* एहराम बाँध कर नवीं जिल्हिज्जा को अरफ़ात के मैदान में ठहरने और काबा शरीफ के तवाफ़ करने को हज कहते हैं। और इसके लिये एक खास बक्त मुकर्रर है कि उसमें यह अफआल किये जायें तो हज है। हज का इन्कार करने वाला काफ़िर है।  


📝 *सवाल : -* हज कब फर्ज हुआ ? 

✍🏻 *जवाब : -* सन् १ हिजरी में। 


📝 *सवाल : -* हज उम्र में कितनी बार फ़र्ज़ है ? 

✍🏻 *जवाब : -* सिर्फ एक बार। 


📝 *सवाल : -* हज की क्या फजीलत है ? 

✍🏻 *जवाब : -* हज के बहुत से फ़ज़ाइल हैं। जैसे सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि हज गुनाहों को इस तरह दूर कर देता है जैसे आग की भट्टी लोहे. सोने, चाँदी के मैल को दूर कर देती है। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि हाजी अपने घर वालों में से चार सौ की शफाअत करेगा, वगैरह वगैरह।


📝 *सवाल : -* हज के वाजिब होने की कितनी शर्ते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* आठ शर्ते हैं। (1) इस्लाम। (2) हज फर्ज होने का शरी इल्म। (3) बालिग होना। (4) आकिल होना। (5) आज़ाद होना। (6) तन्दुरुस्त होना। (7) सफर - खर्च का मालिक और सवारी पर कादिर हो। (8) वक्त (यानी हज के महीने में तमाम शर्ते पायी जायें। 


📝 *सवाल : -* हज में कितनी चीजें फर्ज हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* सात चीजें फर्ज हैं। (1) एहराम ( यह शर्त है)। 

(2) वक़्फे अरफा यानी नवीं ज़िलहिज्जा के आफताब (सूरज) ढलने से दसवीं तारीख की सुबहे सादिक से पहले तक किसी वक्त अरफ़ात में ठहरना। 

(3) तवाफे जियारत। 

(4) नीयत। 

(5) तर्तीब यानी पहले एहराम बांधना फिर वकूफ फिर तवाफ। 

(6) हर फ़र्ज़ का अपने वक्त पर होना 

(7) मकान यानी ठहरने की जगह अरफ़ात में हो। 


📝 *सवाल : -* हज में कितने वाजिबात हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* अट्ठाईस हैं : - 

( 1 ) जैसे मीकात से एहराम बांधना। 

( 2 ) सफा और मरवा के दरमियान दौड़ना। 

( 3 ) दौड़ को सफ़ा से शुरू करना। 

( 4 ) उज् न हो तो पैदल दौड़ना। 

( 5 ) तवाफ हतीम के बाहर से हो। 

( 6 ) दाहिने तरफ़ से तवाफ़ करना। 

( 7 ) एहराम में जिन चीजों से मना किया गया है, उन से बचना। 

( 8 ) मुज़्दल्फा में ठहरना। 

( 9 ) मगरिब और इशा की नमाज़, इशा के वक्त मुज्दल्फा में पढ़ना। इनके इलावा और भी बहुत से वाजिबात हैं।


1. शरयी इल्म का तरीका दारुलहरब के रहने वालों के लिए एक आदिल या कम से कम दो मस्तूरुलहाल की भी खबर काफी है, और दारुलइस्लाम में रहने वालों के लिए दारुलइस्लाम में इनका वजूद ही हुक्मी है। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 69,70)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 50 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


     🕋 *नमाजे जुम्मा* 🕋


📝 *सवाल : -* नमाज़े जुमअ: फ़र्ज़ है या वाजिब ? 

*✍🏻 जवाब : -* नमाजे जुमअ: फ़र्जे - ऐन है। और इसकी फजीलत की ताकीद जुहर से ज्यादा है। और इसका इन्कार करने वाला काफिर है। 


📝 *सवाल : -* क्या नमाजे जुमअः हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है ? 

*✍🏻 जवाब : -* जुमअ: की नमाज़ आज़ाद, आकिल, बालिग, तन्दुरुस्त, मुकीम मर्दो पर फर्ज़ है, नाबालिग और गुलामों और बीमारों, अपाहिजों, अन्धों, दीवानों और ऐसे ही उन वालों और मुसाफिरों और औरतों पर जुमअ की नमाज़ फ़र्ज़ नहीं है 


*📝 सवाल : -* नमाजे जुमअ: पढ़ने के लिये कितनी शर्ते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* छः शर्ते हैं। 

(1) शहर या शहर की तरह कस्बा वगैरह में होना। 

(2) जुहर का वक्त होना। 

(3) नमाज़ से पहले खुतबा पढ़ना। 

(4) जमाअत। 

(5) आम इजाज़त। 

(6) सुलताने इस्लाम या उसका नाइब, जिसे जुमा काइम करने का हुक्म दिया। 


*📝 सवाल : -* अगर छोटे देहातों में नमाजे जुमः होती हो तो उसे बन्द करा देना चाहिये या बाकी रखना चाहिये ? 

*✍🏻जवाब : -* बन्द नहीं कराना चाहिये। 


*📝 सवाल : -* उर्दू में खुतबा पढ़ना या बीच में उर्दू के शेर पढ़ना कैसा है ? 

*✍🏻 जवाब : -* मकरूह है (खिलाफे सुन्नत)। 


*📝 सवाल : -* खुतबा की अजान किस जगह होनी चाहिये ?

*✍🏻 जवाब : -* खतीब के सामने मजिस्द के बाहर होनी चाहिये। मस्जिद के अन्दर अज़ान कहने को कहाए किराम ने मकरूह बताया है। 


*📝 सवाल : -* नमाजे जुमअः की जमाअत के लिये कम से कम कितने आदमियों का होना जरूरी है ? 

*✍🏻 जवाब :-* जुमअ : की नमाज़ में इमाम के इलावा कम से कम तीन आदमी होने ज़रूरी हैं। अगर तीन आदमी भी न होंगे तो जुमः की नमाज़ सही न होगी। 


*📝 सवाल : -* जुमअः की कितनी रकअतें फर्ज हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* दो रकअतें। 


*📝 सवाल : -* नमाजे जुमअः के मुस्तहब्बात क्या - क्या हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* 

(1) मिस्वाक करना। 

(2) नमाजे जुमअः के लिये पहले से मस्जिद जाना। 

(3) अच्छे और सफेद कपड़े पहनना। 

(4) तेल और खुशबू लगाना। 

(5) पहली सफ़ में बैठना मुस्तहब है। और गुस्ल सुन्नत है। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 71,72)*


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     *🌙 चाँद देखने का बयान* 🌙


📝 *सवाल : -* चाँद देखने का क्या हुक्म है ? 

✍🏻 *जवाब : -* पांच महीनों के चाँद देखना वाजिबे किफ़ाया है। 

( 1 ) शबान। 

( 2 ) रमज़ान।

( 3 ) शव्वाल। 

( 4 ) जीकअदा। 

( 5 ) ज़िलहिज्जा। 


📝 *सवाल : -* रमज़ान शरीफ के चाँद के लिये मोअतबर (एतेबार वाली) शहादत क्या है ? 

✍🏻 *जवाब : -* अगर आसमान साफ़ न हो यानी बादल गर्दो गुबार

वगैरह नहीं हो तो रमजान शरीफ़ के चाँद के लिये एक दीनदार परहेज़गार मुसलमान की गवाही मोअतबर है। चाहे मर्द हो या औरत, आजाद हो या गुलाम, अलबत्ता फ़ासिक की गवाही रमज़ान शरीफ़ के चाँद के लिये भी काबिले कबूल नहीं है। 


📝 *सवाल : -* ईद के चाँद के लिये मोअतबर गवाही क्या है ? 

✍🏻 *जवाब : -* अगर मतलअ (यानी आसमान) साफ न हो तो ईदुल फित्र और ईदुल अज़हा के चाँद के लिये दो परहेज़गार दीनदार मर्द या इसी तरह एक मर्द और दो औरतों की गवाही शर्त है। 


📝 *सवाल : -* और अगर मतलअ साफ हो तो कितने आदमियों की गवाही मोअतबर है ? 

✍🏻 *जवाब : -* अगर मतलअ साफ हो तो रमजान शरीफ और ईदुल फ़ित्र व ईदुल अजहा के चाँद के लिये कम से कम इतने आदमियों की गवाही जरूरी है कि उतने आदमियों के झूट बोलने पर दिल को यकीन न आ सके। बल्कि उन लोगों की सच्चाई और चाँद देखे जाने का गुमाने ग़ालिब हो जाये। 


📝 *सवाल : -* अगर चाँद देखने की खबर किसी दूर दराज़ शहर से आये तो मोअतबर होगी या नहीं। 

✍🏻 *जवाब : -* शरीअत ने जो तरीके बताये हैं अगर उन तरीकों से खबर आई है तो उसका एतेबार किया जायेगा चाहे कितनी ही दूर से आई हो। 


📝 *सवाल : -* अगरतार, टेलीफोन, रेडियो या टेलीवीज़न वगैरह से खबर दी जाये तो यह खबर मोअतबर होगी या नहीं ? 

✍🏻 *जवाब : -* इस किरम की खबरों का कोई एतेबार नहीं। 

⚠️ *नोट :* हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है !

 चाँद देखकर रोज़ा रखो और चाँद देखकर इफ्तार करो। अगर 29 शअबान को चाँद नज़र न आये तो रोज़ा रखना मकरूह है, 29 शअबान को रमज़ान का चाँद देखने की कोशिश करना वाजिब है और 29 रजब को शअबान का चाँद देखना मुस्तहब है।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 72,73)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 52 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


        🌹 *नमाजे ईदुल फित्र*


*📝 सवाल :-* ईदुल फित्र की नमाज़ फ़र्ज़ है या वाजिब ? 

*✍🏻 जवाब : -* ईद की नमाज़ सिर्फ उन लोगों पर वाजिब है जिन पर जुमः फर्ज है। और इसकी अदा की वही शर्ते हैं जो जुमः के लिये हैं। सिर्फ इतना ही फर्क है कि जुम में खुतबा शर्त है और ईदैन (यानी ईद - बकरईद) में सुन्नत। और दूसरा फ़र्क यह है कि जुमः का खुतबा नमाज़ से पहले है और ईदैन का नमाज़ के बाद। और ईदैन में न अज़ान है न इकामत, सिर्फ दो बार इतना कहने की इजाजत है अस्सलातु जामिअतुन बगैर किसी उज्र के ईदैन की नमाज़ छोड़ना गुमराही और बिद्अत है। 


*📝 सवाल : -* ईदै के दिन कौन से काम मसनून और मुस्तहब हैं ? 

*✍🏻 जवाबः-* ( 1 ) हजामत बनवाना। 

( 2 ) नाखुन कटवाना। 

( 3 ) गुस्ल करना। 

( 4 ) मिस्वाक करना। 

( 5 ) अच्छे कपड़े पहनना। 

( 6 ) अंगूठी पहनना। 

( 7 ) खुशबू लगाना। 

( 8 ) फ़ज़्र की नमाज़ मुहल्ले की मस्जिद में पढ़ना। 

( 9 ) ईदगाह जल्द चले जाना। 

( 10 ) नमाज़ से पहले सद्कए - फित्र अदा करना। 

( 11 ) ईदगाह पैदल जाना। 

( 12 ) दूसरे रास्ते से वापस आना। 

( 13 ) नमाज़ के लिये जाने से पहले कुछ खजूरें या किसी और मीठी चीज़ का खाना। 

( 15 ) खुशी का इज़हार करना। 

( 16 ) ज़्यादा से ज़्यादा सद्का करना। 

( 17 ) ईदगाह को इत्मीनान और इज्जत व वकार के साथ नीची निगाह किये जाना। 

( 18 ) आपस में मुबारकबाद देना मुस्तहब है। 


*📝 सवाल : -* ईदुल फित्र की नमाज़ के लिये जाते हुए रास्ते में तकबीर कहना कैसा है ? 

*✍🏻 जवाब : -* ईदुल फित्र में अगर धीरे - धीरे तकबीर कहता हुआ जाये तो कोई हर्ज नहीं है अलबत्ता ईदुल अज़हा में बुलन्द आवाज़ से तकबीर कहते हुए जाना मुस्तहब है। 


📝 *सवाल : -* ईदैन की नमाज़ों की कितनी रकअतें हैं और उसके पढ़ने की क्या तर्कीब है ? 

✍🏻 *जवाब : -* दोनों ईदों की नमाज़ दो रकअत है। 

पहले इस तरह नीयत करनी चाहिये। 

*नीयतः-* नीयत की मैंने दो रकअत नमाजे ईदुल फित्र की वाजिब ज़ाइद छःतकबीरों के साथ, वास्ते अल्लाह तआला के इस इमाम के पीछे मुँह मेरा कअबा शरीफ़ की तरफ़। 

नीयत के बाद तकबीरे तहरीमा कह कर हाथ बांध ले और सना पढ़े फिर दोनों हाथ कानों तक उठाते हुए अल्लाहु अकबर कह कर दोनों हाथ छोड़ दे। फिर दूसरी बार हाथ कानों तक उठा कर अल्लाहु अकबर कहे और हाथ छोड़ दे। फिर तीसरी बार हाथ कानों तक उठा कर अल्लाहु अकबर कहे और हाथ बांध ले। फिर हस्बे मामूल पहली रकअत पूरी करे। फिर जब दूसरी रकअत में इमाम किराअत से फ़ारिग हो जाये तो रुकूअ से पहले कानों तक हाथ उठा कर तकबीर कहे और हाथ छोड़ दे। फिर कानों तक हाथ उढ़ा कर दूसरी तकबीर कहे और हाथ छोड़ दे। फिर कानों तक हाथ उठा कर तीसरी तकबरी कहे और हाथ छोड़ दे। और फिर बगैर हाथ उठाये चौथी तकबीर कह कर रुकूअ में जाये और बताये हुये काइदे के मुताबिक नमाज़ पूरी करे। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 75,76,77)*


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*📃🖌️📃🕌 ﴾ ﷽ ﴿ 🕋📃🖌️📃*


    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 53 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*


          *💵 सदकए - फित्र 💵*


📝 *सवाल : -* सदक़ए - फ़ित्र किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* अल्लाह तआला ने अपने बन्दों पर एक सदका मुकर्रर फ़रमाया है जो रमज़ान शरीफ के खत्म होने की खुशी में बतौरे शुक्रिया अदा किया जाता है। इसी को सदक़ए - फ़ित्र कहते हैं और वह दिन चूंकि खुशी का होता है इसी लिये इस दिन को ईदुल फित्र कहते हैं। 


📝 *सवाल : -* सदक़ए - फ़ित्र के कुछ फाइदे बयान कीजिये ? 

✍🏻 *जवाब : -* हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि बन्दा का रोज़ा आसमान और ज़मीन के बीच मुअल्लक रहता है उस वक़्त तक कि वह सदक़ए - फ़ित्र अदा न करे।


📝 *सवाल : -* सदकए - फित्र किन लोगों पर वाजिब होगा ? 

✍🏻 *जवाब : -* सदकए - फ़ित्र हर मुसलमान आज़ाद मालिके निसाब पर वाजिब होता है चाहे उसने रोज़े रखे हों या न रखे हों। 


📝 *सवाल : -* सदक़ए - फित्र की सबसे बेहतर अदाइगी का वक्त्त क्या है ? 

✍🏻 *जवाब : -* नमाज़े ईद के लिए जाने से पहले अदा कर देना बेहतर है और उसके बाद भी जाइज़ है। 


*📝 सवाल : -* अगर सदकए - फ़ित्र अदा न कर सका तो उसका क्या हुक्म है ?

*✍🏻 जवाब : -* सदकए - फित्र उम्र भर में वाजिब रहता है वक्त के गुजर जाने से साकित (जिम्मे से हटा हुआ) नहीं होता उस वक्त तक कि अदा न कर दे और जब भी अदा करेगा अदा ही होगा कज़ा न होगा। 


*📝 सवाल : -* सदक़ए - फ़ित्र का अदा करना अपनी ही तरफ़ से वाजिब है या दूसरों की तरफ से भी ? 

*✍🏻 जवाब : -* जो मालिके निसाब है उसको अपनी तरफ से और अपनी नाबालिग औलाद की तरफ़ से सदकए - फ़ित्र वाजिब है इस शर्त के साथ कि नाबालिग औलाद का अपना जाती माल न हो वरना उन्हीं के माल से अदा किया जायेगा। 


*📝 सवाल : -* सदक़ए - फ़ित्र के वाजिब होने का क्या वक्त है ? 

*✍🏻 जवाब : -* ईद के दिन सुबहे सादिक तुलूअ होते ही सदकए - फित्र वाजिब होता है। लिहाजा जो शख्स इससे पहले मर गया उस पर सदकए - फित्र वाजिब नहीं होता। जो बच्चा इससे पहले पैदा हुआ उसकी तरफ से दिया जायेगा। 


*📝 सवाल : -* सदकए - फ़ित्र किन लोगों को देना ज़रूरी है ? 

*✍🏻 जवाब : -* जिन लोगों को ज़कात देना वाजिब है। 


📝 *सवाल : -* सदकए - फित्र की मिकदार क्या है ? 

✍🏻 *जवाब : -* गेहूँ या उसका आटा या सत्तू आधा साअ और खजूर या मुनक्का या जौ या उसका आटा या सत्तू एक साअ। 


*📝 सवाल : -* साअ का वज़न क्या है ? 

*✍🏻 जवाबः-* साल का वज़न तीन सौ इक्यावन रुपया भर है। और निस्फ़ साअ एक सौ पचहत्तर रुपये अठन्नी भर ऊपर। जिसकी मिकदार अस्सी रुपये के सेर से दो.सेर तीन छटांक अठन्नी भर ऊपर होती है । या इस ज़माने के लिहाज से दो किलो 45 ग्राम गेहूँ। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 78,79)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 54 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*

 

       *🕋 नमाजे ईदुल अजहा 🕋*


 📝 *सवाल : -* ईदुल अजहा की नमाज़ कब पढ़ी जाती है ? 

*✍🏻 जवाब : -* जिल्हिज्जा की दसवीं तारीख़ को। 


📝 *सवाल : -* और ईदुल फित्र की नमाज़ कब पढ़ी जाती है ? 

*✍🏻 जवाब : -* रमज़ान शरीफ़ ख़त्म होने के बाद ईद की पहली तारीख को। 


📝 *सवाल : -* यौमे अरफ़ा और यौमे नहर किसको कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* ज़िलहिज्जा की नवीं तारीख को यौमे अरफ़ा कहते हैं और दसवीं तारीख़ को यौमे नहर कहते हैं। 


*📝 सवाल : -* ईदुल अजहा की नमाज़ वाजिब है या सुन्नत और उसके अहकाम क्या हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* नमाज़े ईदुल अज़हा भी नमाजे ईदुल फित्र की तरह वाजिब है इसकी भी दो रकअत हैं और ईदुल अजहा के अहकाम भी वही हैं जो नमाज़े ईदुल फित्र के हैं। सिर्फ कुछ बातों में फ़र्क है। ईदुल अज़हा में मुस्तहब यह है कि नमाज़ से पहले कुछ न खाये। चाहे कुरबानी करनी हो, या न करनी हो। और रास्ते में बुलन्द आवाज़ से तकबीर कहता जाये। और ईदुल अज़हा की नमाज़ उज्र की वजह से ज़िलहिज्जा की बारहवीं तारीख तक बिला कराहत पढ़ सकते हैं। बारहवीं के बाद फिर नहीं हो सकती है। और बगैर उज़् दसवीं के बाद मकरूह है। और अगर कुरबानी करनी है तो मुस्तहब यह है कि ज़िलहिज्जा की पहली तारीख से दसवीं तारीख तक न हजामत बनवाये न नाखुन कटवाये। 


*📝 सवाल : -* नमाजे ईदुल अजहा की नीयत किस तरह करनी चाहिये ? 

*✍🏻 जवाब :-* ईदुल फित्र की जगह ईदुल अज़हा कहकर उसी तरह नीयत करनी चाहिये जिस तरह ईदुल फित्र की नीयत की जाती है। 


*📝 सवाल : -* ईदैन की नमाज़ के बाद मुसाफ़हा व मुआनका करना जैसा कि मुसलमानों में राइज है कैसा है ? 

*✍🏻 जवाब : -* मुसाफ़हा व मुआनका करना बेहतर है क्यों कि इस में खुशी का इजहार है। और ईदैन की खुशी का इजहार करना दुरुस्त है। 


*📝 सवाल : -* तकबीरे तशरीक किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* तकबीर तशरीक यह है ? 

अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर ला इला - ह इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर व लिल्लाहिल हम्द 


📝 *सवाल : -* तकबीरे तशरीक का कहना क्या है और किन - किन तारीखों में कहनी चाहिये ? 

*✍🏻 जवाब : -* नवीं ज़िलहिज्जा की फज्र से तेरहवीं की अस्र तक हर नमाजे फ़र्ज़ पंजगाना के बाद जो जमाअते मुस्तहब्बा से अदा की गयी एक बार तकबीर बुलन्द आवाज़ से कहना वाजिब है और तीन बार कहना अफ़ज़ल है।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 79,80)*


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*📃🖌️📃🕌 ﴾ ﷽ ﴿ 🕋📃🖌️📃*


    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 55 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*

 

          *🐑 कुरबानी का बयान*


📝 *सवाल : -* कुरबानी क्या है ? 

✍🏻 *जवाब : -* दीन और मिल्लत की निशानी और हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की मुकद्दस सुन्नत है। 


*📝 सवाल : -* कुरबानी में क्या सवाब है ? 

✍🏻 *जवाब : -* हर बाल के बदले एक नेकी है ? 


📝 *सवाल : -* कुरबानी न करने वाले के लिए क्या वईद (सजा देने का वादा) है ? 

✍🏻 *जवाब : -* सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है जिस शख्स को कुरबानी करने की हैसियत हो और वह कुरबानी न करे तो वह हमारी ईदगाह के करीब न आये। 


📝 *सवाल : -* कुरबानी किस पर वाजिब है ?

✍🏻 *जवाब : -* मालिके निसाब पर। 


📝 *सवाल : -* जिस पर क़ुरबानी वाजिब है उसने दूसरे की तरफ से क़ुरबानी कर दी तो वाजिब अदा हुआ या नहीं ? 

✍🏻 *जवाब : -* नहीं। 


📝 *सवाल : -* कुरबानी के दिन कितने हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* दसवीं ज़िलहिज्जा से बारहवीं के सूरज डूबने तक। 


📝 *सवाल : -* किन जानवरों की कुरबानी दुरुस्त नहीं है ? 

✍🏻 *जवाब : -* बीमार, बहुत कमज़ोर या अन्धा, काना, लंगड़ा या नाक, कान सींग, थन का कोई हिस्सा तिहाई से ज़्यादा कटा हुआ हो तो ऐसे जानवरों की कुरबानी दुरुस्त नहीं। 


📝 *सवाल :-* ज़बह करने से पहले कौन सी दुआ पढ़नी चाहिये ?

*✍🏻 जवाब :* इन्नी वज्जहतु वहि - य लिल लज़ी फ़ - त - रस्समावाति वल अर्ज हनीफंव वमा अना मिनल मुश्रिकीन, इन्न सलाती व नुसुकी व मह्या - य व ममाती लिल्लाहि रब्बिल आ - लमीन व बिज़ालि - क उमिर्तु व अना मिनल मुस्लिमीन, 


📝 *सवाल : -* जानवर जबह करने का क्या तरीका है ? 

✍🏻 *जवाब : -* जानवर को बायें पहलू पर किबला की तरफ़ लिटायें और दाहिना पाँव उसके शाने पर रख कर जबह करना चाहिये। 

*⚠️ नोट : -* जानवर के सामने न छूरी तेज़ करनी चाहिये और न जानवर को भूका प्यासा ज़बह करना चाहिये। 


📝 *सवाल : -* अच्छा अब यह बताइये कि ज़बह के वक्त कौन सी दुआ पढ़नी चाहिये ? 

✍🏻 *जवाब : -* अल्लाहुम्म ल - क व मिन् - क बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर . 


*📝 सवाल : -* और जबह के बाद कौन सी दुआ पढ़नी चाहिये ? 

*✍🏻 जवाब : -* अल्लाहुम्म त - कब्बल मिन्नी कमा त - कब्बल - त मिन् खलीलि - क इब्राही - म व हबीबि - क मुहम्मदिन् सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम. (और अगर क़ुरबानी दूसरे की तरफ से हो तो मिन्नी के बजाये उस शख्स का नाम लेना चाहिये।) 


📝 *सवाल : -* कुरबानी के गोश्त का मसरफ़ क्या है। (यानी किन लोगों पर गोश्त खर्च किया जाये ?) 

*✍🏻 जवाब : -* गोश्त के तीन हिस्से किये जायें। दो हिस्से अपने और अपने अजीज़ों और दोस्तों के लिये रखना चाहिये। और एक पूरा हिस्सा फ़कीरों पर तकसीम करना चाहिये। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 82,83,84)*


*📬 पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*

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*📃🖌️📃🕌 ﴾ ﷽ ﴿ 🕋📃🖌️📃*


    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 55 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*

 

        *🌹 एतेकाफ का बयान*


📝 *सवाल : -* एतेकाफ़ किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* मस्जिद में अल्लाह के लिये नीयत के साथ ठहरने को एतेकाफ़ कहते हैं। 


*📝 सवाल : -* एतेकाफ़ के कुछ फ़ज़ीलतें बयान कीजिये ? 

*✍🏻 जवाबः-* इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जिसने रमज़ान में दस दिनों का एतेकाफ़ किया तो वह ऐसा है कि जैसे कि उसने दो हज और दो उमरे किये इसके इलावा और बहुत सी फजीलतें हैं। 


*📝 सवाल : -* एतेकाफ की कितनी किस्में हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* तीन किस्में हैं- वाजिब, सुन्नते मोअक्कदा और मुस्तहब। नज़र और मन्नत का एतेकाफ वाजिब है। रमजान शरीफ़ के आखिरी अशरा (हिस्सा) यानी दस दिन का एतेकाफ़ सुन्नते मोअक्कदा है इसके इलावा सब एतेकाफ मुस्तहब हैं। (सुन्नते मोअक्कदा से मुराद सुन्नते किफ़ाया है)। 


*📝 सवाल : -* रमज़ान शरीफ के एतेकाफ़ की इब्लेदा (शुरू) और इन्तेहा (खत्म) क्या है ? 

✍🏻 *जवाब : -* रमज़ान की बीस तारीख को सूरज डूबने से पहले शुरू होगा और ईद का चाँद देख कर एतेकाफ़ खत्म होगा ख्वाह चाँद उन्तीस का हो या तीस का ? 


*📝 सवाल : -* औरत कहां एतेकाफ करे। 

✍🏻 *जवाब : -* औरत अपने घर में एतेकाफ़ करे जिस जगह नमाज़े पंजगाना पढ़ती है। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 84,85)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 57 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬* 


   *🕌 एतेकाफ के मुस्तहब्बात*


 *📝 सवाल : -* एतेकाफ़ के मुस्तहब्बात क्या - क्या हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* कुरआन शरीफ़ की तिलावत करना, अच्छी और नेक बातें करना, जामे मस्जिद में एतेकाफ़ करना, दुरूद शरीफ़ पढ़ते रहना, इस्लामी दीनी किताबें पढ़ना और पढ़ाना वअज़ (तकरीर) और नसीहत करना। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 85)*


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*✍🏻 एतेकाफ के मकरूहात व मुफसिदात*


📝 *सवाल : -* एतेकाफ़ में कौन सी बातें मकरूह हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* इबादत समझ कर बिल्कुल ख़ामोश रहना, लड़ाई झगड़ा या बेशर्मी की बातें करना, सामान मस्जिद में लाकर खरीदना या बेचना। 


*📝 सवाल : -* एतेकाफ़ किन चीजों से फ़ासिद (टूट) हो जाता है ? 

✍🏻 *जवाब : -* ( 1 ) बीमारी की वजह से मस्जिद से बाहर निकलना 

( 2 ) बगैर उज्र मस्जिद से जानबूझ कर या गल्ती से बाहर निकलना। 

( ३ ) एतेकाफ़ की हालत में सोहब (हमबिस्तरी) करना। 

( 4 ) किसी उज्र से बाहर निकल कर ज्यादा देर तक ठहरना। इन तमाम सूरतों में एतेकाफ़ फ़ासिद हो जाता है। 

*⚠️ नोट : -* पेशाब पाख़ाने के लिये या फ़र्ज़ गुस्ल के लिये या नमाजे जुमः के लिये एतेकाफ करने वाले का मस्जिद से बाहर जाना जाइज़ है। इसी तरह मस्जिद में खाना पीना सोना भी जाइज़ है। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 85,86)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 59 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬* 


*🕋 नमाजे तरावीह और नमाजे वित्र का बयान*


📝 *सवाल : -* नमाजे तरावीह कब पढ़ी जाती है ? 

*✍🏻 जवाब : -* रमज़ान शरीफ के महीने में बाद नमाजे इशा (तरावीह का वक्त फ़र्ज़ इशा के बाद से तुलू फज्र तक है।) 


📝 *सवाल : -* नमाजे तरावीह कितनी रकअत पढ़नी चाहिये ? 

✍🏻 *जवाब : -* बीस रकअत। 


*📝 सवाल : -* नमाजे वित्र कितनी रकअत पढ़नी चाहिये ? 

*✍🏻 जवाब : -* तीन रकअत (तीसरी रकअत में रुकूअ से पहले दुआए कुनूत पढ़नी चाहिये)। 


📝 *सवाल : -* नमाजे वित्र का पढ़ना कैसा है ? 

✍🏻 *जवाब : -* वाजिब (रमज़ान शरीफ़ में वित्र जमाअत के साथ पढ़ना अफ़ज़ल है)।


*📝 सवाल : -* और नमाजे तरावीह पढ़ना कैसा है ? 

*✍🏻 जवाब : -* सुन्नते मोअक्कदा है (मर्द और औरत दोनों के लिये)।


📝 *सवाल : -* तरावीह में कुरआन मजीद का खत्म करना कैसा है ? 

✍🏻 *जवाब : -* तरावीह में एक बार कुरआन शरीफ का खत्म करना सुन्नते मोअक्कदा है। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 86,87)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 61📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬* 


      🚶🏻‍♂️ *मुसाफिर की नमाज* 🚶🏻‍♂️


📝 *सवाल : -* शरीअत में मुसाफ़िर किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* शरीअत में मुसाफिर वह है जो तीन दिन की राह तक जाने के इरादे से बस्ती से बाहर हो। 


📝 *सवाल : -* तीन दिन की राह से कितने मील मकसूद है ? 

✍🏻 *जवाब : -* खुशकी में मील के हिसाब से उसकी मिकदार 57 मील है। 


📝 *सवाल : -* मुसाफ़िर और मुकीम की नमाज में क्या फ़र्क है ? 

✍🏻 *जवाब : -* मुसाफ़िर ज़ुहर अस्र और इशा की नमाज़ बजाये चार रकअत के दो रकअत पढ़ता है और बाकी नमाजें अपने हाल पर रहती हैं। 


📝 *सवाल : -* चार रकअतों वाली नमाज़ में जो दो रकअत की कमी हो गयी उस कमी को क्या कहते हैं। 

*✍🏻 जवाब : -* उसको कस्र कहते हैं यानी मुसाफ़िर चार रकअतों वाली नमाज में नमाज़े कर पढ़ता है। 


📝 *सवाल : -* मुसाफिर किस वक्त से नमाज़े कस शुरू करेगा और कब तक पढ़ेगा ? 

*✍🏻 जवाब : -* जब अपनी बस्ती की आबादी से बाहर निकल जाये तो उस वक्त से कस करने लगे। और उस वक़्त तक क पढ़े जब तक सफर में रहे और पन्द्रह दिन ठहरने की नीयत न करे। और अगर किसी जगह इकट्टा पन्द्रह दिन ठहरने की नीयत कर ले तो कस्र न पढ़े बल्कि पूरी पढ़े। 


*📝 सवाल : -* इकट्ठा पन्द्रह दिन की नीयत से क्या मुराद है ? 

*✍🏻 जवाब : -* इसके माने यह हैं कि अगर किसी मुसाफ़िर ने चौदह दिन ठहरने की नीयत की और किसी वजह से फिर रुकना पड़ा तो दस दिन ठहरने की नीयत की। इसी तरह एक साल गुज़र गया लेकिन इकट्ठा पन्द्रह दिन की नीयत न की तो वह मुसाफ़िर ही रहेगा और क़स्र ही पढ़ता हरेगा। 


*📝 सवाल : -* अगर मुसाफिर मुकीम के पीछे नमाज़ पढ़े तो क्या हुक्म है ? 

*✍🏻 जवाब :* मुकीम के पीछे मुसाफ़िर को पूरी चारों रकअतें पढ़नी होंगी। 


📝 *सवाल : -* और अगर मुसाफ़िर इमाम है तो क्या हुक्म है ? 

✍🏻 *जवाब : -* मुसाफिर दो रकअत पढ़कर सलाम फेर दे और मुकीम मुकतदी अपनी चार रकअत पूरी करें। और मुसाफिर को मुसाफ़िर के पीछे कस करना होगा।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 87,88)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 62 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬* 


         📢 *इस्तिस्का की नमाज* 📢


 📝 *सवाल : -* नमाजे इस्तिस्का किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* बारिश के लिये खुदा वन्दे करीम से दुआ करने व बख्शिश चाहने को नमाजे इस्तिस्का कहते हैं। 


*📝 सवाल : -* क्या रसूले खुदा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी नमाज़े इस्तिस्का पढ़ी है ? 

*✍🏻 जवाबः-* जी हां सय्यदे आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पढ़ी है। और हुजूर के बाद सहाबा ने भी पढ़ी है। बुखारी शरीफ की हदीस में हज़रत अनस से रिवायत है कि अमीरुल मोमिनीन हज़रत फ़ारूके आज़म, हज़रत अब्बास रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के वसीले से बारिश तलब फ़रमाते और यह अर्ज (दुआ) करते कि ऐ अल्लाह तेरी तरफ हम अपने नबी का वसीला किया करतेथेऔर तू पानी बरसाता था। अब हम तेरी तरफ नबीए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चचा को वसीला करते हैं, तू बारिश नाज़िल फरमा। 

चुनांचे फ़ारूके आज़म जब ऐसा करते तो बारिश होती यानी हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी ज़ाहिरी हयात में आगे होते और सहाबा पीछे सफें बांध कर दुआ मांगते और हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद आपके चचा को वसीला बना कर दुआ मांगते और अल्लाह तआला उनके वसीले से दुआयें कबूल फरमाता।


📝 *सवाल : -* क्या नबीए करीम या सहाबा या अहले - बैत या औलियाए - किराम वगैरह को वसीला बनाना दुरुस्त है ? 

*✍🏻 जवाब : -* यक़ीनन दुरुस्त है। ऐसी दुआयें जो उन लोगों के वसीले से मांगी जाती हैं वह जल्द कबूल होती हैं।


*📝 सवाल : -* नमाजे इस्तिस्का जमाअत से पढ़नी चाहिये या बगैर जमाअत ? 

*✍🏻 जवाब : -* जमाअत से पढ़ना जाइज है मगर इख्तेयार है ख्वाह जमाअत से पढ़ी जाये या बगैर जमाअत के !


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 90,91)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 63 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬* 


          *🌒 ग्रहन की नमाज* 🌒


*📝 सवाल : -* सूरज ग्रहन की नमाज़ क्या है ? 

*✍🏻 जवाब : -* सुन्नते मोअक्कदा है (और जमाअत से पढ़नी मुस्तहब है)।


📝 *सवाल : -* चाँद ग्रहन की नमाज़ क्या है ? 

✍🏻 *जवाबः-* मुस्तहब है (और चाँद ग्रहन की नमाज़ में जमाअत नहीं है)। 


📝 *सवाल : -* अगर ऐसे वक्त ग्रहन लगा कि उस वक्त नमाज़ पढ़ना मना है तो क्या करना चाहिये ? 

✍🏻 *जवाब : -* दुआ करनी चाहिये नमाज़ नहीं पढ़नी चाहिये। 


📝 *सवाल : -* ग्रहन की नमाज़ कितनी रकअत पढ़नी चाहिये ? 

✍🏻 *जवाब : -* दो रकअत और उससे जाइद भी पढ़ सकते हैं। ग्रहन की नमाज़ में न अजान है और न ही इकामत, न बुलन्द आवाज़ से किराअत। नमाज के बाद दुआ करनी चाहिये यहां तक कि ग्रहन खत्म हो जाये।


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 92)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 64📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬* 


              ✍🏻 *मुसीबत की नमाज़*


*⚠️ नोट : -* तेज़ आंधी आये या दिन में सख्त अधेरा छा जाये, या रात में खौफनाक रौशनी हो जाये, या लगातार बहुत ज्यादा पानी बरसे, या बहुत ज्यादा ओले पड़ें, या आसमान सुर्ख (लाल) हो जाये, या बिजलियाँ गिरें, या बहुत ज़्यादा तारे टूटें, या ताऊन (महामारी) वगैरह वबा फैले, या ज़लज़ले आयें, या दुश्मन का खतरा हो, या और कोई दहशतनाक बात पाई जाये तो इन सबके लिये दो रकअत नमाज़ मुस्तहब है। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 92)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 65 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬* 


      🕋 *सज्दए - सहव का बयान*


 *📝 सवाल : -* सज्दए - सहव किसे कहते हैं ? 

*✍🏻 जवाब : -* सह्व कहते हैं भूल जाने को भूलने से कभी - कभी नमाज़ में कमी या ज्यादती की वजह से नुकसान आ जाता है, उसी को दूर करने के लिये नमाज़ के आखरी कअदा में एक तरफ सलाम फेर कर दो सज्दे किये जाते हैं उसी को सज्दए - सह्व कहते हैं। 


*📝 सवाल : -* सज्दए - सह्व करने का क्या तरीका है?

*✍🏻 जवाब : -* कअदए आख़ीरा में तशहहुद पढ़ने के बाद एक तरफ सलाम फेर कर तकबीर कहता हुआ सज्दा करे फिर सज्दे से सर उठाये और सीधा बैठ कर तकबीर कहता हुआ दूसरा सज्दा करे। फिर सज्दे से सर उठा कर सीधा बैठ कर अत्तहियात और दुरूद शरीफ़ और दुआ पढ़कर दोनों तरफ़ सलाम फेर दे। 


*📝 सवाल : -* सज्दए - सह्व किन सूरतों में वाजिब होता है ? 

*✍🏻 जवाब : -* किसी फर्ज़ में ताखीर होने या किसी वाजिब के छूट जाने, वाजिब के ताखीर हो जाने, या किसी वाजिब की कैफियत बदल देने, या फर्ज को मुकर्रर (दो - तीन बार) कर देने से सज्दए - सब वाजिब होता है। 


*📝 सवाल : -* सज्दए - सह्व सिर्फ फर्ज नमाज़ों में वाजिब होता है या हर नमाज़ों में ? 

*✍🏻 जवाब : -* तमाम नमाज़ों में सज्दए - सहव का हुक्म एक ही तरह है। 


*📝 सवाल : -* अगर सलाम फेरे बगैर सज्दए - सह्व कर लिया तो क्या हुक्म है ? 

*✍🏻 जवाब : -* सज्दए - सह्व तो काफी है मगर ऐसा करना मकरूह तन्जीही है। 


*📝 सवाल : -* अगर एक नमाज में कई बार ऐसा सब हो जाये जिस से सज्दए - सहव लाजिम आये तो कितने सज्दे करें ? 

*✍🏻 जवाब : -* सिर्फ एक दफा दो सज्दए सह्व कर लेना काफ़ी है। 


*📝 सवाल : -* जिन चीज़ों को भूल कर करने से सज्दए - सह्व वाजिब होता है, अगर उन्हें जान बूझ कर किया जाये तो क्या हुक्म है ? 

✍🏻 *जवाब : -* ऐसी सूरत में सज्दए - सहव काफ़ी न होगा बल्कि नमाज़ को लौटाना वाजिब है। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 93)*


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    *📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 66 📗* *▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬* 


   🕋 *सज्दए - तिलावत का बयान*


📝 *सवाल : -* सज्दए - तिलावत किसे कहते हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* कुरआन शरीफ़ के पढ़ने को तिलावत कहते हैं कुरआन शरीफ में चन्द ऐसे मकाम (जगह) हैं जिनके पढ़ने या किसी को पढ़ते हुये सुनने से सज्दा करना वाजिब हो जाता है। इसी को सज्दए - तिलावत कहते हैं। 


📝 *सवाल : -* सज्दए - तिलावत के कुछ फाइदे बयान कीजिये ? 

✍🏻 *जवाबः-* हुजूर सरवरे आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि जब बन्दा आयते - सज्दा पढ़ कर सज्दा करता है तो शैतान हट जाता है और रोकर कहता है हाये मेरी बरबादी कि इब्ने आदम (आदम की औलाद) को सज्दे का हुक्म हुआ, उसने सज्दा किया, उसके लिये जन्नत है और मुझे हुक्म हुआ मैंने इन्कार किया मेरे लिये दोजख है। 


📝 *सवाल : -* वह कितनी जगहें हैं जिनको पढ़ने से या सुनने से सज्दा करना पड़ता है ? 

✍🏻 *जवाबः-* पूरे कुरआन शरीफ़ में चौदह (14) जगहें हैं। 


📝 *सवाल : -* आयते सज्दा के पढ़ने या सुनने में एक सज्दा वाजिब होता है या दो ? 

✍🏻 *जवाब : -* सिर्फ एक सज्दा। 


📝 *सवाल : -* सज्दए - तिलावत करने का क्या तरीका है ? 

*✍🏻 जवाबः-* नमाज़ से बाहर सज्दा करने का बेहतर तरीका यह है कि खड़े होकर तकबीर कहता हुआ सज्दा करे और तकबीर कहता हुआ उठ खड़ा हो। 


📝 *सवाल : -* अगर कोई शख़्स क़ुरआन की तिलावत में आगे पीछे से पढ़ ले और सिर्फ आयते सज्दा छोड़ दे तो क्या हुक्म हैं ? 

✍🏻 *जवाब : -* ऐसा करना मकरूह है। 


*📝 सवाल : -* अगर एक मजलिस में एक आयते सज्दा कई बार पढ़ी जाये तो क्या हुक्म है ? 

✍🏻 *जवाब : -* उन पर एक ही सज्दा वाजिब है।


📝 *सवाल : -* एक मजलिस में सज्दे की दो आयतें पढ़ी गयीं या एक आयत दो मजलिसों में पढ़ी गयी तो क्या हुक्म है ? 

*✍🏻 जवाब : -* एक मजलिस में जितनी मुख़्तलिफ (अलग - अलग) सज्दों की आयतें पढ़ीं या एक आयत जितनी मजलिसों में बार - बार पढ़ी है उतने सज्दे वाजिब होंगे। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 94,95)*


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*📗 इस्लामी तालीम, पोस्ट नं. : 67 📗*

                       *आखिरी*

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       *🕋 इस्लाम के कलिमे 🕋*


1️⃣ *कलिमा तय्यबाः-* लाइला - ह इल्लल्लाहु मुहम्मदुर रसूललुल्लाह। 


2️⃣ *कलिमए शहादतः -* अश् - हदु अल्लाइला - ह इल्लल्लाहु व अश - हदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू 


3️⃣ *कलिमए तमजीद : -* सुब्हानल्लाहि वल् - हम्दु लिल्लाहि व ला - इला - ह इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबरु व ला हो - ल व ला कुव्वतः इल्ला बिल्लाहिल अली इलअज़ीम. 


*4️⃣ कलिमए तौहीद :* ला इला - ह इल्लल्लाहु वह - दहू ला शरी - क लहू लहुल - मुल्कु व लहुल - हम्दु युहूयी व युमीतु बि - यदिहिल खैरु वहु - व अला कुल्लि शैअिन कदीर , 


5️⃣ *कलिमए रद्दे कुफ्र*

अल्लाहुम्म इन्नी अऊ.जुबिक मिन् अन् उशरि - क- बि - क शयअंव - व अना अअ - लमु बिही व अस्तफिरु - क लिमा ला अअ - लमु बिही तुब्तु अन्हु व त- -बर्रातु मिनल कुफरि वल मआसी कुल्लिहा अस्लम्तु व आमन्तु व अकूलु ला इला - ह इल्लल्लाहु मुहम्मदुर रसूलुल्लाह, 


6️⃣ *ईमाने मुजमल : -* आमन्तु बिल्लाहि कमा हु - व बि - अस्माएही व सिफातिही व क्बिल्तु जमी - अ अह्कामिही . 


*7️⃣ ईमाने मुफस्सल :* आमनतु बिल्लाहि व मलाए - कतिही व कुतुबिही व रुसुलिही वल - यौमिल आखिरि वल - कदरि खैरिही व शरिही मिनल्लाहि तआला वल - बअसि बअदल - मौत.


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 95,96)*


         *📬 पोस्ट मुकम्मल...✍🏻*

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