शुक्रवार, 12 मार्च 2021

MERAJ UN NABI ﷺ.






MERAJ UN NABI ﷺ.

📑​पोस्ट➪​0⃣1⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌷प्यारे आक़ा का अज़ीम मोजिज़ा🌷_*

_“`💎👉🏽बिअसते नबवी के 12वे साल जब कि *प्यारे आक़ा ﷺ* की उम्र मुबारक 51 साल हो चुकी थी, *अल्लाह ने अपने महबूब ﷺ* को मेराज का अज़ीम मोजिज़ा अता फ़रमाया और आप को रात के एक हिस्से में न सिर्फ मस्जिदे हराम से मस्जिदे अक़्सा की बल्कि सातो आसमानों की भी सैर कराई, इलावा अजीं *अल्लाह ने हबिबे मुकर्रम ﷺ* को अपने अनवारो तजल्लियात के मुशाहदात कराए और अपने दीदार व हम कलामी से भी सरफ़राज़ फ़रमाया।_“`

*_👉🏽मेराज शरीफ का ये वाक़ीआ रजबुल मुरज्जब की 27 तारीख को पेश आया।_*

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 *_💔शक़्के सद्र💔_*

*_““💖👉🏽शबे मेराज हज़रते जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने नबीये पाक ﷺ के सिनए पुर सकीना को शक़ फ़रमाया। आप के कल्बे अतहर को बाहर निकाला और ज़मज़म शरीफ से भरे हुवे सोने के एक थाल में रख कर धोया। फिर हिक्मत, ईमान और नूरे नबुव्वत उसमे भरा और सिनए मुबारक में उसे रख कर सुई से सी दिया।_*“`

*🍃👉🏽उलमए किराम फरमाते है कि रसूले करीम की उम्र मुबारक में 4 मर्तबा शक़्के सद्र हुवा और मेराज की रात को पेश आने वाला इन में से चौथा था।*

_1⃣👉🏽पहली मर्तबा आप की विलादते बा सआदत के वक़्त_

_2⃣👉🏽दूसरी बार जब आप की उम्र मुबारक 10 बरस थी_

_3⃣👉🏽तीसरी बार गारे हिरा में क़ुरआने मजीद की पहली वही के मौके पर।_

*_📖हवाला_*

*_📘मेराज के वाक़ीआत, स. 3-4_*


📑​पोस्ट➪​0⃣2⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_👑मेराज के दूल्हा की सुवारी👑_*

*👉🏽हज़रते अनस رضي الله تعالي عنه से मरवी है कि हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :*

_👉🏽मेरे पास बुराक़ (जिसका नाम जारुद था) लाया गया, जो ग़धे से बड़ा और खच्चर से छोटा, इंतिहाई सफेद रंग का लंबे क़द वाला चौपाया था, उस का क़दम नज़र की इन्तिहा पर पड़ता था, में उस पर सुवार हो कर बैतूल मक़दस तक पंहुचा और जिस जगह अम्बियाए किराम अलैहिमुस्सलाम अपनी सुवारियो को बांधते थे, वहा में ने उस को बांध दिया, फिर में मस्जिदे अक़्सा में दाखिल हुवा और उस में दो रकअत नमाज़ अदा की।_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स. 4-5_*

*📑​पोस्ट➪​0⃣3⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌹अम्बियाए किराम की इमामत🌹_*

*♻Part~01*

_👉🏽इस नमाज़ में *आप ﷺ तमाम अम्बियाए किराम अलैहिमुस्सलाम के इमाम थे।* क्यू की प्यारे आक़ा की शाने आली के इज़हार के लिये बैतूल मक़दस में तमाम अम्बियाए किराम को जमा किया गया था जब आप यहाँ तशरीफ़ लाए तो इन सब हज़रात ने आप को देख कर खुश आमदीद कहा और नमाज़ के वक़्त सब ने आप को इमामत के लिये आगे किया, फिर जिब्राइल ने दस्ते मुबारक पकड़ कर आगे बढ़ा दिया और आप ने तमाम अम्बियाए किराम की इमामत फ़रमाई।_

*👉🏽हज़रते अल्लामा बुसैरि रहमतुल्लाह अलैह फरमाते है :*

_बैतूल मक़दस में तमाम अम्बिया व रसूल ने आप को आगे किया, जेसे मखदूम अपने खादिमो के आगे होता है।_

_☝🏽सुब्हान अल्लाह क्या खूब नमाज़ है कि *तमाम अम्बिया व रसूल मुक्तदि, हमारे आक़ा ﷺ* इमाम और पहला किब्ला जाए नमाज़ है, यक़ीनन कायनात में ऐसी नमाज़ पहले कभी नहीं हुई, फलक ने ऐसा नज़ारा कभी नहीं देखा। बहर हाल आज शबे आसरा के दूल्हा के अव्वल और आखिर होने का उक़दा भी खुल गया, इस के राज़ से भी पर्दा उठ गया और माना रोज़े रोशन की तरह वाज़ेह हो गए, क्यू की आज आप जो कि सब से आखरी रसूल है, पहले के अम्बिया और रसूलो की इमामत फ़रमा रहे है।_

 *इसी राज़ को बयान करते हुए आला हज़रत फरमाते है :*

_नमाज़े अक़्सा में था येही सिर्र, यहाँ हो मानए अव्वल आखिर_

_कि दस्त बस्ता है पीछे हाज़िर, जो सल्तनत आगे कर गए थे_

*✔शेर की वजाहत इन्शा अल्लाह कल की पोस्ट में*

*_🖊हवाला_* *_📚मेराज के वाक़ीआत, स. 5-6_*

*📑​पोस्ट➪​0⃣4⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌹अम्बियाए किराम की इमामत🌹_*

*♻Part~02*

*👉🏽आला हज़रते के शेर की वज़ाहत :*

_👉🏽शबे मेराज, मस्जिदे अक़्सा में *सय्यिदे अम्बिया ﷺ* ने सारे नबियो की इमामत फ़रमाई और उन को नमाज़ पढ़ाई, इस में राज़ ये था कि अव्वल आखिर का फ़र्क़ वाजेह हो जाए, ये वाज़ेह हो जाए कि सब नबियो के आखिर में तशरीफ़ लाने वाले नबी किसी नबी से शानो अज़मत में कम नहीं बल्कि शानो अज़मत में सब से बढ़ कर है,_

_इसकी दलील ये है कि वो सारे नबी जो पहले अपनी नबुव्वतो का एलान कर चुके वो सारे के सारे हाथ बांध कर मक्के मदीने के ताजवर के पीछे खड़े है।_

_👉🏽नमाज़ के बाद *हुज़ूर ﷺ* ने वहा मौजूद अम्बियाए किराम अलैहिमुस्सलाम से मुलाक़ात फ़रमाई तो सब ने अल्लाह की तारीफ़ व सना बयान की। चुनान्चे_

*👉🏽हज़रते इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया :*

_☝🏽तमाम खुबिया *अल्लाह عزوجل* के लिये जिसने मुझे खलील किया और मुझे मुल्के अज़ीम इनायत फरमाया नीज़ अपना फ़रमा बरदार और लोगो का इमाम बनाया कि मेरी इक़्तिदा की जाए और मुझे आग से बचाया और इसे मेरे लिये ठंडा और सलामती वाला कर दिया।_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स. 6-7_*

*📑​पोस्ट➪​0⃣5⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌹अम्बियाए किराम की इमामत🌹_*

*♻Part~03*

*👉🏽इसके बाद हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम खड़े हुवे और अपने रब की तारीफ़ फ़रमाई :*

_☝🏽तमाम खुबिया अल्लाह के लिये है जिस ने मुझे अपना कलीम बनाया और मेरे हाथो फिरऔन को हलाज किया और बनी इसराइल को नजात दी और मेरी उम्मत (के एक गुरौह) को ऐसी क़ौम बनाया कि वो हक़ की राह बताते है और हक़ के साथ इन्साफ करते है।_

*👉🏽फिर हज़रते दाऊद अलैहिस्सलाम ने अल्लाह की तारीफ़ बयान करते हुवे फ़रमाया :*

_☝🏽तमाम खुबिया अल्लाह के लिये है जिस ने मुझे बहुत बड़ी बादशाहत दी और मुझे ज़बूर का इल्म दिया और मेरे हाथ में लोहा नर्म किया और मेरे लिये पहाड़ो और परिन्दों को मुसख्खर किया जो मेरे साथ अल्लाह की पाकी बयान करते है और मुझे हिक्मत और क़ौले फैसल (फैसला करने वाला) अता फरमाया।_

*_✒हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स.7_*

*📑​पोस्ट➪​0⃣6⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌹अम्बियाए किराम की इमामत🌹_*

*♻Part~04*

*👉🏽फिर हज़रते सुलेमान अलैहिस्सलाम ने अल्लाह की तारीफ़ बयान करते हुवे फरमाया :*

_☝🏽तमाम खुबिया अल्लाह के लिये है जिस ने मेरे लिये हवाओ को मुसख्खर किया और जिन्नात को मेरा ताबेअ बना दिया, जो मेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ उचे उचे महल्लात और तस्वीरें और बड़े हौज़ो के बराबर लगन (तशत) और लंगर दार देगे बनाते है।_

_👉🏽इसी तरह मुझे परिन्दों की बोली सिखाई और अपने फ़ज़्ल से मुझे हर चीज़ अता की और अपने बहुत से ईमान वाले बन्दों पर फ़ज़ीलत बख्शी और मुझे ऐसी सल्तनत दी जो मेरे बाद किसी को लाइक न हो और मेरी बादशाहत को ऐसा कर दिया कि इस का कोई हिसाब नहीं।_

*⭕याद रहे हज़रते सुलेमान अलैहिस्सलाम की शरीअत में तस्वीर हराम न थी।*

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स. 7-8_*

*📑​पोस्ट➪​0⃣7⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌹अम्बियाए किराम की इमामत🌹_*

*♻Part~05*

*👉🏽इसके बाद हज़रते ईसा अलैहिस्सलाम ने अल्लाह तआला की तारीफ़ बयान करते हुवे फरमाया :*

_☝🏽तमाम खुबिया अल्लाह के लिये है, जिसने मुझे अपना कलिमा क़रार दिया और इस बात में मुझे भी आदम अलैहिस्सलाम की तरह किया कि उन्हें मिटटी से बनाया और फ़रमाया “कुन” (होजा) तो वो हो गए_

_👉🏽और मुझे किताब व हिक्मत और तौरेत व इंजील का एल्म अता फरमाया_

_👉🏽और मुझे ये कमाल बख्शा कि में मिटटी से परन्द की सी सूरत बनाता हु, फिर उस में फुक मारता हु तो वो अल्लाह के हुक्म से फौरन परन्द हो जाती है_

_👉🏽और ये कमाल भी दिया कि में शिफ़ा देता हु मादर ज़ाद अंधे और सपेद दाग वाले को और मुर्दे जिलाता हु, अल्लाह के हुक्म से_

_और मुझे (बिगैर मौत के आस्मान पर) उठा लिया और मुझे पाक किया (काफ़िरो से) और मुझे और मेरी माँ को शैतान मर्दुद के शर से पनाह अता फ़रमाई,_

_👉🏽लिहाज़ा हमारे खिलाफ शैतान के लिये कोई रास्ता नहीं।_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स. 8_*

*📑​पोस्ट➪​0⃣8⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌹अम्बियाए किराम की इमामत🌹_*

*♻Part~06*

_👉🏽जब सब अम्बियाए किराम अलैहिमुस्सलाम अल्लाह की हम्दो सना और उस की वो नेमते बयान कर चुके जो उन्हें अता हुई थी, *तो नबिय्ये आखिरउज़्ज़मा खड़े हुवे और अल्लाह की हम्दो सना बयान करते हुवे इरशाद फ़रमाया :*_

_👉🏽तमाम खुबिया अल्लाह के लिए है, जिस ने मुझे सारे जहान के लिये रहमत बना कर भेजा और मुझे खुश खबरी सुनाने वाला और डर सुनाने वाला बना कर भेजा और मुझ और कुरआन नाज़िल किया, जिस में हर चीज़ का रोशन बयान है_

_👉🏽और मेरी उम्मत को तमाम उम्मतों से अफज़ल बनाया, मेरी उम्मत ही सब से आखिरी उम्मत है और (जन्नत में दाखिल होने वाली उम्मतों में) ये सबसे पहली उम्मत होगी_

_👉🏽और अल्लाह ने हिदायत व मारिफ़त और इल्मो हिक़मत के लिये मेरा सीना कुशादा किया और उम्मत के हक़ में मेरी शफ़ाअत क़बूल कर के मेरा बोझ उतार दिया और मेरे लिये मेरा ज़िक्र बुलंद कर दिया और मुझे आखरी नबी बना कर भेजा।_

_👉🏽 *नबिय्ये करीम ﷺ* की गुफ्तगू मुकम्मल होने के बाद *हज़रते इब्राहिम अलैहिस्सलाम* ने खड़े हो कर इरशाद फरमाया कि ये वो अज़ीमुश्शान अवसाफ् व कमालात है, जिन की वजह से *👉🏽खातमुन्नबीय्यिन का मर्तबा हम सब से अफज़ल व आला है।*_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स. 8-9_*

*📑​पोस्ट➪​0⃣9⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌹अम्बियाए किराम की इमामत🌹_*

*♻Part~07*

_👉🏽 अम्बियाए किराम अलैहिमुस्सलाम  से मुलाक़ात के बाद जब *हुज़ूरे अकरम ﷺ* बैतूल मक़दस से आगे आसमानों की तरफ रवाना हुवे तो आप की बारगाह में शराब और दूध का बर्तन पेश किया गया। चुनान्चे *दो जहां के आक़ा ने इरशाद फरमाया :*_

_👉🏽जिब्राइल मेरे पास एक बर्तन में शराब और एक बर्तन में दूध ले कर आए, मेने दूध ले लिया। इस पर हज़रते जिब्राइल ने कहा_

_☝🏽तमाम तारीफे अल्लाह के लिये जिसने फितरत की जानिब आओ की रहनुमाई फ़रमाई, आगत आप शराब का प्याला क़बूल फरमाते तो आप की उम्मत गुमराह हो जाती।_

_*🌴नबिय्ये करीम ﷺ* फरमाते है कि फिर मुझे आस्मान की तरफ ले जाया गया। जिब्राइल ने आसमान का दरवाज़ा खट खटाया। पूछा गया कि आल कौन है ? उन्होंने कहा : में जिब्राइल हु, पूछा गया : आप के साथ कौन है ? उन्होंने कहा : ये *हज़रत मुहम्मद ﷺ* है, पूछा गया : क्या इन्हें बुलाया गया है ? उन्होंने कहा : हा इन्हें बुलाया गया है।_

_*🌴हुज़ूर ﷺ* ने फ़रमाया फिर हमारे लिए दरवाज़ा खोल दिया गया, वहा हज़रते आदम अलैहिस्सलाम  से मेरी मुलाक़ात हुई, उन्होंने मुझे मरहबा कहा और दुआ दी।_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स.   10-11_*

*📑​पोस्ट➪​1⃣0⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌹फ़िक्रे औलाद में गिर्या व ज़ारी🌹_*

_*🌴हुज़ूर ﷺ* ने  *हज़रते आदम अलैहिस्सलाम* के दाए बाए कुछ लोगो को मुलाहज़ा फरमाया, जब आप अपनी दाई जानिब देखते तो हस पड़ते है और जब बाई जानिब देखते तो रो पड़ते है।_

_👉🏽हज़रते जिब्राइल ने अर्ज़ किया : इन के दाई और बाई जानिब जो ये सूरते है ये इनकी औलाद है, दाई जानिब वाली जन्नती है और बाई जानिब वाले जहन्नमी है।_

_👉🏽फरमाया फिर मुझे दूसरे आसमान पर ले जाया गया, जिब्राइल ने दरवाज़ा खट खटाया, पूछा गया आप कौन है ? *कहा: ये हज़रत मुहम्मद ﷺ है,* पूछा : क्या इन्हें बुलाया गया है ? कहा : हा इन्हें बुलाया गया है,_

_*👉🏽हुज़ूर ﷺ* ने फ़रमाया फिर हमारे लिये दरवाज़ा खोल गया और वहा दो खालाज़ाद भाइयो  “हज़रते ईसा बिन मरयम और हज़रते याहया बिन ज़करिय्या अलैहिस्सलाम ” से मेरी मुलाक़ात हुई, उन दोनों ने मुझे मरहबा कहा और दुआ दी।_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स.10_*

*📑​पोस्ट➪​1⃣1⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

_👉🏽फिर हमें तीसरे आसमान पर ले जाया गया, वहा मेरी मुलाक़ात *हज़रते युसूफ अलैहिस्सलाम* से हुई जिन्हें हुस्न का आधा हिस्सा अता किया गया है। उन्हों ने मुझे मरहबा कहा और दुआ दी।_

_👉🏽फिर चौथे आसमान पर ले जाया गया, वहा मेरी मुलाक़ात *हज़रते इदरीस अलैहिस्सलाम *से हुई उन्हों ने मुझे मरहबा कहा और दुआ दी। अल्लाह ने हज़रते इदरीस के बारे में फ़रमाया हम ने इन का बुलंद मक़ाम अता फरमाया है।_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स. 11_*

*📑​पोस्ट➪​1⃣2⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

_👉🏽फिर मुझे पाचवे आसमान की तरफ ले जाया गया, वहा मेरी मुलाक़ात *हारून अलैहिस्सलाम* से हुई उन्होंने मुझे मरहबा कहा और दुआ दी,_

_👉🏽फिर मुझे छटे आसमान पर ले जाया गया वहा मेरी मुलाक़ात *हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम* से हुई, उन्होंने मुझे खुश आमदीद कहा, और दुआ दी।_

*📨बाकि अगली पोस्ट में…*

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स. 11_*

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*📑​पोस्ट➪​1⃣3⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

_👉🏽फिर मुझे सातवे वासमान पे ले जाया गया, वहा मेरी मुलाक़ात  *हज़रते इब्राहिम* से हुई, जो बैतूल मामूर से टेक लगाए हुवे थे और उस बैतूल मामूर में हर रोज़ 70 हज़ार फिरिश्ते जाते और जो फिरिश्ता एक बार हो आए उसको दोबारा मौक़ा नहीं मिलता।_

*👉🏽हज़रते जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने हज़रते इब्राहिम अलैहिस्सलाम के बारे में हुज़ूरे अक़दस ﷺ से अर्ज़ किया :*  _ये आप के वालिद है, इन्हें सलाम कहिये आप ने सलाम कहा, उन्होंने सलाम का जवाब दिया,_

_फिर आप को खुश आमदीद करते हुवे कहा :सालेह बेटे और सालेह नबी को खुश आमदीद।_

_👉🏽सातवे आस्मां पर *हज़रते इब्राहिम अलैहिस्सलाम* से मुलाक़ात फरमाने के बाद आप *सिदरतुल मुन्तहा* के पास तशरीफ़ लाए। ये एक नूरानी बैरी का दरख्त है, जिस की जड़ छटे आसमान पर और शाखे सातवे आसमान के ऊपर है, इसके फल मक़ामे हिज़्र के मटकों की तरह बड़े बड़े और पत्ते हाथी के कानो की तरह है।_

*👉🏽हज़रते जिब्राइल ने अर्ज़ कीया :* ये *सिदरतुल मुन्तहा* है। _*प्यारे आक़ा ﷺ* ने यहाँ चार नहरे मुलाहज़ा फ़रमाई जो *सिद्रतुल मुन्तहा* की जड़ से निकलती थी, उनमे से दो तो ज़ाहिर थी और दो खुफया (पोशीदा)। आप ने *हज़रते जिब्राइल से दरयाफ़्त फरमाया* : _ऐ जिब्राइल ! ये नहरे केसी है ? अर्ज़ किया : खुफया नहरे तो जन्नत की है और ज़ाहिरी नहरे निल और फुरात है।_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स.12_*

*📑​पोस्ट➪​1⃣4⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌈मक़ामे मुरतवा🌈_*

_👉🏽जब प्यारे *आक़ा ﷺ* सिद्रतुल मुन्तहा से आगे बढ़े तो हज़रते जिब्राइल अलैहिस्सलाम वही ठहर गए और आगे जाने से माजिरत ख्वाह हुवे।_

*👉🏽शैख़ अब्दुहक़ मुहद्दिसे दहलवी अलैरहमा*  _फरमाते है कि बाज़ रिवायतों में आया है कि *हुज़ूर ﷺ* ने जिब्राइल से फ़रमाया_अगर तुम्हारी कोई हाजत है तो मुझसे अर्ज़ करो, में अल्लाह की बारगाह में पेश कर दूंगा।_

*👉🏽हज़रते जिब्राइल ने अर्ज़ किया :* _बारगाहे इलाही में मेरी ये तमन्ना बयान कर दीजियेगा कि वो रोज़े क़यामत मेरे बाज़ुओं को और भी ज़्यादा कुशादा फ़रमा दे ताकि में आप की उम्मत को अपने बाज़ुओं के ज़रिए पुल सिरात से गुज़ार सकु।_

*👉🏽आला हज़रत अलैरहमा फरमाते है :*

_अहले सिरात रूहे अमीं को खबर न करे_

          _जाती है उम्मते नबवी फर्श पर करे_

*👉🏽एक दूसरे मक़ाम पर इस से भी बढ़ कर फ़रमाया :*

_पुल से उतारो राह गुज़र को खबर न हो_

          _जिब्राइल पर बिछाए तो पर को खबर न हो_

_👉🏽फिर आप तनहा आगे बढ़े और बुलंदी की तरफ सफर फरमाते हुवे एक मक़ाम पर तशरीफ़ लाए, जिसे *मुस्तवा* कहा जाता है यहाँ आप ने कलमो की चर-चराहट समाअत फ़रमाई। ये वो क़लम थे जिन से फिरिश्ते रोज़ाना के अहकामे इलाहिय्या लिखते है और लोहे महफूज़ से एक साल के वाक़ीआत अलग अलग सहिफो में नक़ल करते है और फिर ये सहिफे शाबान की  *15वी शब्* मुतअल्लिक़ हुक्काम फिरिश्तो के हवाले कर दिये जाते है।_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स. 13_*

*📑​पोस्ट➪​1⃣5⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌈अर्शे ऊला से भी ऊपर🌈_*

*🌀हिस्सा~01*

_👉🏽फिर मुस्तवा से आगे बढ़े तो अर्श आया, आप इससे भी ऊपर तशरीफ़ लाए और फिर वहा पहुचे जहा खुदा “कहा” और “कब” भी खत्म हो चुके थे, क्यू कि ये अलफ़ाज़ जगह और ज़माने के लिये बोले जाते है और जहा हमारे *हुज़ूर ﷺ* रौनक अफ़रोज़ हुवे वहा जगह थी न ज़माना। इसी वजह से उसे “ला मकां” कहा जाता है।_

_👉🏽मीठे और प्यारे इस्लामी भाइयो ! यहाँ अल्लाह ने अपने *महबूब ﷺ*  क़ो क़ुर्बे ख़ास अता फरमाया कि न किसी को मिला न मिले। चुनान्चे *पारह 27 सुरतुन्नज्म की आयत 8-10 में इरशादे खुदावन्दि है :*_

_☝🏾फिर वो जलवा नज़्दीक हुवा फिर खूब उतर आया तो उस जलवे और उस महबूब में दो हाथ का फ़ासिला रहा बल्कि इस से भी कम। अब वही फ़रमाई अपने बन्दे को जो वही फ़रमाई।_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स.15_*

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*📑​पोस्ट➪​1⃣6⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌈अर्शे ऊला से भी ऊपर🌈_*

*♻हिस्सा~02*

*👉🏽सूरए नज्म की आयत 17 में इरशाद होता है*

_☝🏽आँख न किसी तरफ फिरि न हद से बढ़ी_

_*👉🏽हज़रते इमाम जाफर सादिक़ رضي الله تعالي عنه* ने फ़रमाया कि अल्लाह ने अपने बन्दे को वही फ़रमाई जो वही फ़रमाई ये वही बे वासिता थी कि अल्लाह और अल्लाह और उसके *हबीब ﷺ* के दरमियान कोई वासिता न था और ये *खुदा और रसूल ﷺ* के दरमियान के असरार है जिन पर उन के सिवा किसी को इत्तिला नहीं।_

_👉🏽(राज़ की बातो के इलावा) अल्लाह ने अपने महबूब से इरशाद फ़रमाया कि जिब्राइल की वो हाजत जिस के बारे में तुम से अर्ज़ किया था वो क्या है ? आप ने अर्ज़ किया : ऐ अल्लाह तू उसे खूब जानता है। अल्लाह ने फरमाया : ऐ महबूब ! मेने उस की हाजत क़बूल फ़रमाई लेकिन उन लोगो के हक़ में जो तुम से महब्बत करते, तुम्हे दोस्त रखते और तुम्हारी सोहबत में रहते है।_

*_📕मदारेजुन्नुबुव्वत 1/169_*

*📑​पोस्ट➪​1⃣7⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌈अर्शे ऊला से भी ऊपर🌈_*

*♻हिस्सा~03*

*🌴हुज़ुरे अकरम ﷺ ने फ़रमाया कि* : _अल्लाह ने मुझ पर एक दिन और रात में 50 नमाज़े फ़र्ज़ की, जब में हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम के पास पंहुचा तो उन्होंने कहा : आप के रब ने आप की उम्मत पर क्या फ़र्ज़ किया है ? मेने कहा 50 नमाज़े फ़र्ज़ फ़रमाई है।_

*👉🏽हज़रते मूसा ने कहा* : _अपने रब के पास जा कर कमी का सुवाल कीजिये, क्यूकी आप की उम्मत 50 नमाज़े न पढ़ सकेगी, में बनी इसराइल को आज़मा चूका हु।_

*🌴आक़ा ﷺ ने फ़रमाया* : _में अपने रब के पास लौट कर गया और अर्ज़ की : ऐ मेरे रब मेरी उम्मत पर कुछ कमी फ़रमा, अल्लाह ने 5 नमाज़े कम करदी,_

_👉🏽में मूसा के पास पंहुचा और कहा की 5 नमाज़े कम कर दी है।_

_मूसा ने कहा आप की उम्मत इतनी नमाज़े भी न पढ़ सकेगी जाइये और जा कर मज़ीद कमी का सुवाल कीजिये,_

*📨बाक़ी कल की पोस्ट में..इन्शा अल्लाह..*

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स.16_*

*📑​पोस्ट➪​1⃣8⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌈अर्शे ऊला से भी ऊपर🌈_*

*♻हिस्सा~04*

*🌴हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम* _के पास से अल्लाह की बारगाह में जाने आने का सिलसिला जारी रहा (यानी अल्लाह की बारगाह से हर बार नमाज़ों में कुछ कमी हो जाती मगर इस के बा वुजूद हज़रते मूसा मज़ीद कमी करवाने के लिये मुझे दोबारा अल्लाह की बारगाह में भेजते रहे) हत्ता कि जब सिर्फ 5 नमाज़े रह गई_

*☝🏽अल्लाह ने फ़रमाया* :

_ऐ मुहम्मद दिन और रात की ये 5 नमाज़े है और इन में से हर नमाज़ का 10 गुना अज्र मिलेगा लिहाज़ा (अज्रो षवाब के एतबार से) ये 50 नमाज़े हो जाएगी,_

_👉🏽और (मज़ीद फजलो करम ये है कि) जो शख्स नेक काम की निय्यत करे फिर वो नेक काम न कर पाए तो उसके लिये (सिर्फ अच्छी निय्यत की वजह से) एक नेकी लिख दी जाएगी और अगर वो उस नेकी को कर गुज़रे तो 10 नेकिया लिखी जाएगी_

_👉🏽और जो शख्स बुरे काम का क़स्द करे और वो बुरा काम न करे तो उस के नामए आमाल में (बुरी निय्यत के ज़ुर्म में) कोई गुनाह नहीं लिखा जाएगा। अलबत्ता अगर वो बुरा काम कर लेगा तो अब उस की एक बुराई लिखी जाएगी।_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स.17_*

*📑​पोस्ट➪​1⃣9⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*_🌈अर्शे ऊला से भी ऊपर🌈_*

*♻हिस्सा~05*

*🌴हुज़ूर ﷺ* _ने फ़रमाया इसके बाद में हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम के पास पंहुचा और उन को इन अहकाम की खबर दी तो उन्होंने अब की बार भी येही कहा कि अपने रब के पास जा कर मजीद तख़फ़ीफ़ का सुवाल कीजिये, हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : में ने हज़रते मूसा से कहा कि (नमाज़ों में कमी करवाने के लिये) में इतनी मर्तबा अपने रब की बारगाह में जा चूका हु कि अब (इस कम के लिये जाने में) मुझे हया आती है।_

_👉🏽कुरआन में 15वे पारे में सूरए इसराइल की पहली आयत में अल्लाह ने अपने महबूब ﷺ के इस सफ़रे मेराज के इब्तिदाई हिस्से का तज़किरा करते हुए फ़रमाया :_

_☝🏽पाकी है उसे जो रातो रात अपने बन्दे को ले गया मस्जिदे हराम से मस्जिदे अक़्सा तक।_

_👉🏽याद रहे कि *हमारे प्यारे आक़ा ﷺ* का सफ़रे मेराज मस्जिदे हराम से शुरू हो कर मस्जिदे अक़्सा पर खत्म नहीं हुवा था बल्कि कुरआनो हदिष से साबित है कि हुज़ूर ने मेराज शरीफ की रात न सिर्फ सातो अस्मानो की सैर फ़रमाई बल्कि इस से भी वराउल वरा (बहुत आगे) जहां तक अल्लाह ने चाहा तशरीफ़ ले गए।_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स. 18_*

*📑​पोस्ट➪​2⃣0⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌈अर्शे ऊला से भी ऊपर🌈_*

*♻हिस्सा~06*

*👉🏽आला हज़रत अलैरहमा फरमाते है*: _जब हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम को दौलते कलाम अता हुई, हमारे नबी ﷺ को वैसी ही शबे असरा मिली और क़ुर्बे खुदावन्दि की ज़्यादती और चश्मे सर से दीदारे इलाही। और भला कहा कोहे तुर जिस पर हज़रते मूसा से मुनाजात हुई और कहा अर्श से भी ऊपर जहा हमारे नबी ﷺ से कलाम हुवा।_

_👉🏽मजीद फरमाते है कि नबी ﷺ ने अपने जिसमे पाक के साथ बेदारी में मेराज की रात आसमानों पर तरक़्क़ी फ़रमाई, फिर सिद्रतुल मुन्तहा, फिर मक़ामे मुस्तवा, फिर अर्श व रफ-रफ व दीदारे इलाही तक।_

*_📒फतावा रज़विय्या, 30/646_*

_👉🏽अलबत्ता आयते मुबारका में जिस हिस्सए मेराज का बयान किया गया सिर्फ वोही हिस्सा भी ब ज़ाते खुद निहायत ही हैरत अंगेज़ मोजिज़ा है, क्यू की मस्जिदे हराम और मस्जिदे अक़्सा के दरमियान अच्छा खासा फ़ासिला था, लिहाज़ा किसी आम शख्स का मस्जिदे अक़्सा तक जाना और फिर रातो रत वापस भी आ जाना तो बहुत दूर की बात है एक रात में सिर्फ यक तरफा फ़ासिला तै करना भी मुम्किन न था।_

_👉🏽जैसा कि साहिबे रुहुल बयान हज़रते अल्लामा इस्माइल हक़्क़ी अलैरहमा फरमाते है : अक़्सा तक का ज़िक्र इस वजह से किया गया कि उस ज़माने में मस्जिदे अक़्सा से दूर कोई और मस्जिद न थी, मक्कए मुकर्रमा से सब से ज़्यादा दूर येही मस्जिद थी, मस्जिदे हराम व मस्जिदे अक़्सा के दरमियान एक महीने से भी ज़्यादा मसाफत का फ़ासिला था।_

*📔रुहुम बयान, पारा,15*

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स.  19_*

*📑​पोस्ट➪​2⃣1⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_🌹जिब्राइले अमिन के नज़्दीक सिद्दीक़🌹_*

*👉��हज़रते अबू हुरैरा رضي الله تعالي عنه से रिवायत है कि जब अल्लाह के महबूब ﷺ ने मेराज की रात जिब्राइल से इरशाद फ़रमाया :*

_👉🏽ऐ जिब्राइल ! मेरी क़ौम मुझ पर तोहमत लगाएगी और वो मेरी तस्दीक़ नहीं करेगी।_

*👉🏽जिब्राइल ने अर्ज़ की :* _अगर आप की क़ौम आप पर तोहमत लगाएगी तो क्या हुआ ? अबू बक्र तो आप की तस्दीक़ करेंगे क्यूकी वो तो सिद्दीक़ है !_

_👉🏽चुनान्चे ऐसा ही हुवा कि जब शबे मेराज की सुबह हतिमे काबा के पास खड़े हो कर हमारे आक़ा ﷺ ने लोगो के सामने इस सुहानीइराज का ज़िक्र किया तो अहले ईमान का ईमान तो और मजबूत हो गया मगर मुनाफ़िक़ीन व मुशरिकीन के तो गोया पाउ तले से ज़मीन निकल गई कि एक रात में इतना तवील सफर कैसे तै कर लिया।_

*👉🏽चुनान्चे मुशरिकीन दौड़ते हुवे हज़रते सिद्दिक رضي الله تعالي عنه के पास पहुचे..*

*_📨बाक़ी कल की पोस्ट में..इन्शा अल्लाह_*

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, 19_*

*📑​पोस्ट➪​2⃣2⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*👉🏽मुशरिकीन अबू बक्र सिद्दीक़ رضي الله تعالي عنه* _के पास पहुचे और कहने लगे क्या आप इस बात की तस्दीक़ कर सकते है जो आप के दोस्त ने कही है कि उन्हों ने रातो रात मस्जिदे हराम से मस्जिदे अक़्सा की सैर की ?_

*👉🏽आप ने फ़रमाया : क्या आप ﷺ ने वाक़ई ये बयान फ़रमाया है ?*

_लोगो ने कहा जी हा।_

_*👉🏽आप ने ये इरशाद फ़रमाया : अगर आप ﷺ*            ने ये इरशाद फ़रमाया है तो यक़ीनन सच फ़रमाया है।_

_लोगो ने कहा क्या आप इस हैरान कुन बात की भी तस्दीक़ करते है कि वो आज रात बैतूल मक़सद गए और सुबह होने से पहले वापस भी आ गए ?_

_*👉🏽आप ने फ़रमाया : जी हा ! में तो हुज़ूर ﷺ* की आसमानी खबरों की भी सुबहो शाम तस्दीक़ करता हु। यक़ीनन वो तो इससे भी ज़्यादा हैरान कुन और तअज्जुब वाली बाते होती है।_

*👉🏽पस इस वाकिए के बाद आप सिद्दीक़ मशहूर हो गए।*

_📨बाक़ी कल की पोस्ट में..इन्शा अल्लाह_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स. 20_*

*📑​पोस्ट➪​2⃣3⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

_👉🏽बाज़ बद बातिन लोगो ने आप के इस अज़ीम मोजिज़े को झुटलाने के लिये तरह तरह के सुवालात करना शुरू कर दिये। जैसा कि,_

_👉🏽हदीशे पाक में है अल्लाह के महबूब ﷺ ने इरशाद फ़रमाया : कुरैश मुझसे मेरे सफ़रे मेराज के मुतअल्लिक़ सुवालात कर रहे थे। तो उन्होंने मुझ से बैतूल मक़दस की ऐसी चीज़ों के मुतअल्लिक़ सुवालात किये, जिन्हें (गैर ज़रूरी होने की वजह से) मेने याद न रखा था। मुझे इस बात से इस क़दर गम हुवा कि इससे पहले में कभी इतना गमगीन न हुवा था, तो अल्लाह ने बैतूल मक़दस को मेरी खातिर उठा लिया और में उसे देखने लगा, लिहाज़ा कुरैश मुझसे जिस जिस चीज़ के बारे में पूछते गए, में उन्हें बताता गया।_

*📨बाक़ी कल की पोस्ट में..इन्शा अल्लाह*

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, 21_*

*📑​पोस्ट➪​2⃣4⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

_👉🏽मुफ़्ती अहमद यार खान मुशरिकीन मक्का के उन सुवालात के बारे में फरमाते है : वो सुवालात भी फ़ुज़ूल थे। मसलन ये कि बैतूल मक़दस में सुतून कितने है ? सीढिया कितनी है ? ज़ाहिर है की ये चीज़े तो बार बार देखने पर भी याद नहीं रहती तो एक बार देखने पर याद कैसे रहती ?_

_👉🏽कुफ़्फ़ार ने कहा की अर्श व कुरसी की बाते जो आप बयान कर रहे है, उनकी तो हम को खबर नहीं, बैतूल मक़दस हमने देखा हुवा है, वहा की निशानिया आप हम को बताए,_

_👉🏽इसी लिए रब ने इस मेराज के दो हिस्से किये (एक  मस्जिदे हराम) बैतूल मक़दस तक, फिर दूसरा वहा से अर्श के आगे तक, ताकि लोग इस पहले हिस्सए मेराज को बहुत दलाइल से मालुम कर ले। (लिहाज़ा जब बैतूल मक़दस की कैफिय्यत पुछि गई तो) नबी को कुछ तरद्दुद हुवा, क्यू की अगर्चे आप बैतूल मक़दस में दाखिल हुवे थे लेकिन आप ने इस की केफिय्यत के मुतालिक़ गहरी नज़र नहीं फ़रमाई थी, मजीद बर आ वो रात भी तारिक थी।_

_👉🏽अल्लाह ने हज़रते जिब्राइल अलैहिस्सलाम को हुक्म फ़रमाया तो उन्होंने अपने परो पर बैतूल मक़दस को उठा लिया और मक्कए मुकर्रमा में हज़रते अक़ील رضي الله تعالي عنه के घर के पास रख दिया, आप ﷺ उसे देखते जाते और उन के सुवालो के जवाबात देते जाते।_

_👉🏽याद रहे कि बैतूल मक़दस को उठा कर आप की खिदमत में हाज़िर किया जाना आप ﷺ का मोजिज़ा है, जिस तरह बिल्किस का तख्त (उठा कर दरबार में हाज़िर किया जाना) हज़रते सुलेमान अलैहिस्सलाम का मोजिज़ा है।_

*📨बाक़ी कल की पोस्ट में..इन्शा अल्लाह*

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज जे वाक़ीआत, स.21_*

*📑​पोस्ट➪​2⃣5⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

_👉🏽बहर हाल प्यारे आक़ा ﷺ ने जब बैतूल मक़दस के बारे में मुशरिकीने मक्का की तरफ से पूछे गए तमाम सुवालात के जवाबात अता फ़रमा दिये तो चुकि वो तो हुज़ूर ﷺ के इस अज़ीम मोजिज़े पर ईमान लाने के बजाए इसे अक़्ल की कसोटी पर परख रहे थे बल्कि अपने बुग्ज़ो इनाद की जगह से इस अज़ीमुश्शान मोजिज़े को झुटा साबित करने पर कमरबस्ता थे,_

_👉🏽लिहाज़ा बैतूल मक़्दस की निशानिया पूछने और इस पर मुह की खाने के बा वुजूद भी अपनी हटधर्मी से बाज़ न आए और इम्तिहान की गरज़ से उस क़ाफ़िले के बारे में सुवाल करने लगे जो मक्कए मुकर्रमा से तिजारत की गरज़ से शाम की जानिब गया था।_

_👉🏽चुनान्चे आप ने उन्हें बताया कि वो क़ाफ़िला मक्का शरीफ और शाम के दरमियान फुला जगह पर मिला था, उसमे इतनी तादाद में पैदल आदमी है और इतने ऊंट है।_

_उन्होंने फिर आप से सुवाल किया कि वो शाम से वापसी पर किस दिन मक्कए मुकर्रमा में दाखिल होगा, तो आप ने फ़रमाया की बुध के दिन इस माह की फुला तारीख को, उसके आगे आगे एक खाकिस्तरी रंग का ऊंट होगा जिस के पालयन् के निचे का टाट सियाह होगा और उस पर दो बोरे लदे होंगे,_

*_🌴हुज़ूर ﷺ ने जिस तरह फ़रमाया था बिएनीही उसी तरह हुवा, आप के मोजिज़ात के ज़ुहुर पर मुशरिकीन शर्मिन्दा हो गए लेकिन ईमान न लाए।_*

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स.22_*

*📑​पोस्ट➪​2⃣6⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_❗शबे मेराज के मुशाहदात❗_*

*♻हिस्सा~01*

_👉🏽शबे मेराज, मुस्तफा ﷺ ने करोड़ो अज़ाइबात मुलाहज़ा फरमाए, जन्नत में तशरीफ़ ले गए, अपने उम्मतियो के जन्नती महल्लात वग़ैरा देखे, जहन्नम को देखा और झन्नमियो के दर्दनाक अज़ाबात भी देखे, फिर इनमे से कुछ अपनी उम्मत की तरगिब् और तरहिब के लिये बयान फ़रमा दिया ताकि उम्मती जहन्नमियो के दर्दनाक अज़ाबात सुन कर एक और अच्छे आमाल के ज़रिए जहन्नम से बचने की तदाबिर करे और जन्नत की न खत्म होने वाली नेमतों का सुन कर  उम्मती उन नेमतों को पाने के लिये कोशिश करे।_

_*🌴हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :* में ने शबे मेराज जन्नत के दरवाज़े पर लिखा हुवा देखा “सदके का षवाब 10 गुना और क़र्ज़ का षवाब 18 गुना है” मोतियो से बने हुवे गुम्बद नुमा आलिशान ख़ैमे मुलाहज़ा फरमाए जो कि आप की उम्मत के इमाम और मुअज़्ज़िनिन के लिये है, चन्द बुलन्दो वाला महल्लात देखे जो कि गुस्सा पिने वालो और मुआफ़ करने वालो के लिये है, रेशम के पर्दो से सजा हुवा एक महल देखा जो हज़रते अबू बक्र सिद्दीक़ رضي الله تعالي عنه के लिये है, जन्नत की सैर के दौरान हज़रते बिलाल हबशी के क़दमो की आहट सुनी, इस रात जन्नती हूरो ने बारगाहे रिसालत में सलाम पेश किया, एक ऐसे शख्स के पास से गुज़र हुवा जो अर्श के नूर से छुपा हुवा था, ये वो खुश नसीब था कि दुन्या में जिस की ज़बान अल्लाह के ज़िक्र से तर रहती थी, इस का दिल मस्जिद में लगा रहता था, ये कभी अपने वालिदैन को बुरा कहे जाने या उन की बे इज़्ज़ती किये जाने का सबब न बना।_

*📨बाक़ी कल की पोस्ट में..इन्शा अल्लाह*

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स. 23_*

*📑​पोस्ट➪​2⃣7⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_✅शबे मेराज के मुशाहदात_*

*हिस्सा~02*

_👉🏽नबी ﷺ ने शबे मेराज जो सज़ा के इंतिहाइदर्दनाक अज़ाबात देखे उन में ये भी देखा कि किछ लोगो के जड़बे खोले जा रहे थे, उन का गोश्त काट कर खून के साथ ही उन्ही के मुह में धकेला जा रहा था, ये वो बद नसीब थे जो लोगो की ग़ीबते करते थे, लोगो के एब तलाशते थे,_

_👉🏽कुछ ऐसे मर्द और औरत के क़रीब से आप का गुज़र हुवा जो अपनी छातियो के साथ लटका दिये गए थे, यव एओ बद नसीब थे, जो मुह पर ऐब लगाते थे और पीठ पीछे बुराई करते थे,_

_👉🏽कुछ ऐसे लोगो को भी देखा जिन के पेट मकानों की तरह बड़े बड़े थे और उन के पेट के अन्दर साँप बाहर से नज़र आ रहे थे, ये बद नसीब सूदखोर थे,_

_👉🏽कुछ ऐसे लोगो को भी देखा के सर पथ्थरो से कुचले जा रहे थे वो बद नसीब जिन के सर नमाज़ से बोझल हो जाते थे,_

_👉🏽उम्मत के ख़ुत्बा और कहे पर अमल न करने वालो और क़ुरआन पढ़ कर उस पर अमल न करने वालो को देखा की उन के होट आग की केचियो से मुसलसल काटे जा रहे थे,_

_👉🏽कुछ लोगो को आग की शाखों के साथ लटका हुवा देखा, ये वो बद नसीब थे जो दुन्या में वालिदैन को गालिया देते थे,_

_👉🏽बदकारी करने वाली और फिर अवलाद को क़त्ल करने वाली औरतो को इस हाल में देखा कि उन्हें छातियो और पाउ से लटका दिया गया था।_

_👉🏽यतिमो का माल खाने वालो को इस हाल में देखा कि उनके होट पकड़ कर आग के बड़े बड़े पथ्थर उन के मुह में डाले जा रहे थे और ये पथ्थर उनके निचे से निकल रहे थे_

_👉🏽ज़कात अदा न करने वालो को इस हाल में देखा कि वो चोपायो की तरह जहन्नम के ज़हरीले पौदे और जहन्नम के गर्मा गर्म पथ्थर निगल रहे थे।_

*_🖊हवाला_*

*_📚मेराज के वाक़ीआत, स.24_*

*📑​पोस्ट➪​2⃣8⃣*

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      ​​ _*🇨🇨मेराज के वाक़ीआत🇨🇨​​*_

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*​🌷 الصــلوة والسلام‎ عليك‎ ‎يارسول‎ الله ﷺ​*

*_✔कर ले तौबा…! ! !_*

_👉🏽मीठे मीठे इस्लामी भाइयो ! कल की पोस्ट में जो अज़ाबात बयान हुए ज़रा गौर कीजिये उन पर और फिर अपनी नातुवानी व कमज़ोरी को देखिये, आह ! हमारी कमज़ोरी का हाल तो ये है कि हल्का सा सर दर्द या बुखार तड़पा कर रख देता है तो फिर आख़िरत के ये दर्दनाक अज़ाब क्यू कर बर्दाश्त किये जा सकते है,_

_👉🏽इस लिये अभी वक़्त है डर जाइये और जो फ़र्ज़ होने के बा वुजूद ज़कात अदा नही करते फौरन से पेशतर इससे तौबा करे और जितने सालो की ज़कात बाक़ी है, हिसाब कर के जल्द अज़ जल्द अदा करदे वरना अगर ये मौका हाथ से निकल गया और तौबा से पहले ही मौत ने आ लिया तो फिर मौक़ा नहीं मिलेगा।_

*_🖊हवाला_* *_📚मेराज के वाक़ीआत, स.25

पोस्ट मुकम्मल हुई 

POST END.......✍️

गुरुवार, 11 मार्च 2021

फातिहा का सुबूत क़ुरआन ओर हदीस की रौशनी में

 *🌹फातिहा का सुबूत🌹*

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*🌹 इस पोस्ट में आप फातिहा का सुबूत क़ुर्आनो हदीस व फुक़्हा और खुद वहाबियों की किताबों से पायेंगे,इसके अलावा फातिहा का तरीक़ा और फातिहा कौन दे सकता है और कौन नहीं,इसके अलावा फातिहा देने के क्या फायदे हैं वो भी दर्ज हैं*


*कंज़ुल ईमान* – और जो खर्च करते हैं उसे अल्लाह की नजदीकियों और रसूल से दुआयें लेने का ज़रिया समझें


📕 पारा 11,सूरह तौबा,आयत 99


*ⓩ तफसीर खज़ाईनुल इरफान में है कि यही फातिहा की अस्ल है कि सदक़ा देने के साथ खुदा से मग़फिरत की उम्मीद करें,अब क़ुर्आन की ये तीन आयतें देखिये*


*कंज़ुल ईमान* – और हम क़ुर्आन में उतारते हैं वो चीज़ जो ईमान वालों के लिए शिफा और रहमत है


📕 पारा 15,सूरह बनी इस्राईल,आयत 82


*कंज़ुल ईमान* – ऐ ईमान वालों खाओ हमारी दी हुई सुथरी चीज़ें


📕 पारा 2,सुरह बक़र,आयत 172


*कंज़ुल ईमान* – ऐ हमारे रब हमें बख्श दे और हमारे उन भाईयों को भी जो हमसे पहले ईमान ला चुके


📕 पारा 28,सूरह हश्र,आयत 10


*ⓩ मतलब क़ुर्आन पढ़ना जायज़,हर हलाल खाना जायज़,दुआये मग़फिरत करना भी जायज़,और इन सबको एक साथ कर लिया जो कि फातिहा में होता है तो हराम और शिर्क,वाह रे वहाबियों का दीन*


*हदीस* – सहाबिये रसूल हज़रत सअद की मां का इंतेक़ाल हो गया तो आप नबी सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम की बारगाह में पहुंचे और पूछा कि या रसूल अल्लाह सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम मेरी मां मर गई तो कौन सा सदक़ा उनके लिए अफज़ल है,तो हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि पानी,इस पर हज़रते सअद ने एक कुंआ खुदवाया और कहा कि ये उम्मे सअद के लिए है


📕 अबु दाऊद,जिल्द 1,सफह 266


*हदीस* – हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम दो क़ब्रों के पास से गुज़रे तो फरमाया कि इन क़ब्र वालों पर अज़ाब हो रहा है,और किसी बड़े गुनाह की वजह से नहीं बल्कि एक तो पेशाब की छींटों से नहीं बचता था और दूसरा चुगली करता था,फिर आपने एक तर शाख तोड़कर दोनों कब्रों पर रख दी और फरमाया कि जब तक ये टहनियां ताज़ा रहेंगी तब तक उन पर अज़ाब में कमी रहेगी


📕 मिश्कात,जिल्द 1,सफह 42


*ⓩ इससे कई बातें साबित हुई पहली ये कि हुज़ूर ग़ैबदां है जब ही तो कब्र के अंदर अज़ाब होता देख लिया और दूसरी ये कि क़ब्र पर फूल वग़ैरह डालना साबित हुआ और तीसरी ये कि जब तर शाख की तस्बीह से अज़ाब में कमी हो सकती है तो फिर मुसलमान अगर क़ुर्आन पढ़कर बख्शेगा तो क्यों कर मुर्दों से अज़ाब ना हटेगा*


*हदीस* – एक शख्श नबी सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम की बारगाह में हाज़िर हुआ और कहा कि या रसूल अल्लाह सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम मेरी मां का इंतेक़ाल हो गया है और उसने कुछ वसीयत ना की अगर मैं उसकी तरफ से कुछ सदक़ा करूं तो क्या उसे सवाब पहुंचेगा फरमाया कि हां


📕 बुखारी,किताबुल विसाया,हदीस नं0 2756


*फुक़्हा* – हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम हर साल दो बकरे क़ुर्बानी किया करते जो कि चितकबरे और खस्सी हुआ करते थे एक अपने नाम से और एक अपनी उम्मत के नाम से


📕 बहारे शरियत,हिस्सा 15,सफह 130


*ⓩ अब इस रिवायत से क्या क्या मसले हल हुए ये भी समझ लीजिये पहला ये कि अगर सवाब नहीं पहुंचता तो नबी सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम क्यों अपनी उम्मत के नाम से बकरा ज़बह कर रहे हैं दूसरा ये कि जो लोग ग्यारहवीं शरीफ के जानवर को हराम कहते हैं कि ग़ैर की तरफ मंसूब हो गया तो फिर क़ुर्बानी भी ना करनी चाहिए कि वहां भी हर आदमी अपने या अपने अज़ीज़ों के नाम से ही क़ुर्बानी करता है और तीसरा ये कि क़ुर्बानी के लिए नबी सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम ने जिन बकरों को काटा वो खस्सी थे ये भी याद रखें*


*हदीस* – जंगे तबूक के मौके पर जब खाना कम पड़ गया तो हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम ने जिसके पास जो था सब मंगवाकर अपने सामने रखा और दुआ फरमाई तो खाने में खूब बरक़त हुई


📕 मिश्कात,जिल्द 1,सफह 538


*ⓩ वहां कुंआ भी सामने ही मौजूद था और यहां खाना भी और दोनों जगह दुआ की गई मगर ना तो कुंअे का पानी ही हराम हुआ और ना ही खाना*


*फुक़्हा* – हज़रते इमाम याफई रज़ियल्लाहु तआला अन्हु अपनी किताब क़ुर्रतुल नाज़िर में लिखते हैं कि एक मर्तबा सरकारे ग़ौसे आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने 11 तारीख को हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम की बारगाह में नज़्र पेश की,जिसको बारगाहे नब्वी से क़ुबूलियत की सनद मिल गई फिर तो सरकारे ग़ौसे आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु हर महीने की 11 तारीख को हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम की बारगाह में नज़राना पेश करने लगे,चुंकि आपका नज़्रों नियाज़ का मामूल हमेशा का था सो मुसलमानों ने इसे आपकी तरफ ही मंसूब कर दिया जिसे ग्यारहवीं शरीफ कहा जाने लगा,खुद सरकार ग़ौसे आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का फरमान है कि मैंने कितनी ही इबादात और मुजाहिदात किये मगर जो अज्र मैंने भूखों को खाना खिलाने में पाया उतना किसी अमल से ना पाया काश कि मैं सारी ज़िन्दगी सिर्फ लोगों को खाना खिलाने में ही सर्फ कर देता


📕 हमारे ग़ौसे आज़म,सफह 282


*🌹 क्या ये दलील कम है कि खुद हुज़ूर ग़ौसे पाक रज़ियल्लाहु तआला अन्हु हर महीने हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम की नज़्र यानि फातिहा ख्वानी का एहतेमाम करते थे,और आपके बाद भी पिछले 800 साल से ज़्यादा के बुज़ुर्गाने दीन और उल्माये किराम का अमल इसी पर रहा है सिवाए मुट्ठी भर वहाबियों को छोड़कर,और ज़रूरत पड़ने पर खुद उनके यहां भी फातिहा होती है जैसा कि अब मैं उनकी किताबों से ही दलील देता हूं*


*वहाबी* – इस्माईल देहलवी ने लिखा कि पस जो इबादत कि मुसलमान से अदा हो और इसका सवाब किसी फ़ौत शुदा की रूह को पहुंचाये तो ये बहुत ही बेहतर और मुस्तहसन तरीक़ा है…..और अमवात की फातिहों और उर्सों और नज़रो नियाज़ से इस काम की खूबी में कोई शक़ व शुबह नहीं


📕 सिराते मुस्तक़ीम सफह 93


*🌹 वाह वाह,एक तरफ तो लिख रहे हैं कि फातिहा अच्छी चीज़ है और दूसरी तरफ हराम और शिर्क का फतवा भी,इन वहाबियों की अक़्ल पर पत्थर पड़ गये हैं*


*वहाबी* – क़ासिम नानोतवी ने लिखा कि हज़रत जुनैद बग़दादी रहमतुल्लाह अलैहि के किसी मुरीद का रंग यकायक बदल गया,आपने सबब पूछा तो कहने लगा कि मेरी मां का इंतेक़ाल हो गया है और मैं देखता हूं कि फरिश्ते मेरी मां को जहन्नम की तरफ लिए जा रहे हैं,तो हज़रत जुनैद के पास 1 लाख या 75000 कल्मा तय्यबह पढ़ा हुआ था आपने दिल ही दिल में उसकी मां को बख्श दिया,फिर क्या देखते हैं कि वो जवान खुश हो गया,फिर आपने पूछा कि अब क्या हुआ तो वो कहता है कि अब मैं देखता हूं कि फरिश्ते मेरी मां को जन्नत की तरफ लिए जा रहे हैं,तो हज़रत जुनैद बग़दादी फरमाते हैं कि आज दो बातें साबित हो गई पहली तो इसके मुक़ाशिफा की इस हदीस से और दूसरी इस हदीस की सेहत इसके मुक़ाशिफा से


📕 तहज़ीरुन्नास,सफह 59


*🌹 ये रिवायत बिलकुल सही व दुरुस्त है मगर सवाल ये है कि ईसाले सवाब की ये रिवायत इन वहाबियों ने अपनी किताब में क्यों लिखी,क्या उनके नज़दीक भी ईसाले सवाब पहुंचता है और अगर पहुंचता है तो फिर मुसलमानों पर इतना ज़ुल्म क्यों,क्यों जब कोई सुन्नी फातिहा ख्वानी का एहतेमाम करता है तो उस पर हराम और शिर्क का फतवा लगाया जाता है*


*वहाबी* – रशीद अहमद गंगोही ने लिखा कि एक बार इरशाद फरमाया कि इक रोज़ मैंने शेख अब्दुल क़ुद्दूस के ईसाले सवाब के लिए खाना पकवाया था


📕 तज़किरातुर्रशीद,जिल्द 2,सफह 417


*वहाबी* – खाना तारीखे मुअय्यन पर खिलाना बिदअत है मगर सवाब पहुंचेगा


📕 फतावा रशीदिया,जिल्द 1,सफह 88


*🌹 बिदअत है मगर सवाब पहुंचेगा,अरे वाह,जब बिदअत है तो तुम्हारे यहां तो हर बिदअत गुमराही है फिर गुमराही पर सवाब कैसे पहुंचेगा,और पहुंचा भी किसे रहे हैं जनाब उन्हें जो मर कर मिटटी में मिल गए मआज़ अल्लाह,मगर ये लिखने से पहले थोड़ याद कर लेते कि आपने अपनी इसी फूहड़ किताब में ये लिख मारा है*


*वहाबी* – वास्ते मय्यत के क़ुर्आन मजीद या कल्मा तय्यबह वफात के दूसरे या तीसरे रोज़ पढ़ना बिदअत व मकरूह है शरह में इसकी कोई अस्ल नहीं


📕 फतावा रशीदिया,जिल्द 1,सफह 101


*🌹 अंधेर हो गई खाने का सवाब पहुंचेगा मगर क़ुर्आन का नहीं,क्या अजीब मन्तिक है,और देखिये*


*वहाबी* – एक मर्तबा अशरफ अली थानवी ने रशीद अहमद गंगोही से पूछा कि क्या क़ब्र में शज़रह रखना जायज़ है और क्या सवाब पहुंचता है इस पर उन्होंने जवाब दिया हां जायज़ है और सवाब पहुंचता है


📕 तज़किरातुर्रशीद,जिल्द 2,सफह 290


*🌹 इन वहाबियों के गुरू घंटाल इमामों के ईमान का जनाज़ा तो पहले ही उठ चुका है मगर जो बद अक़ीदह अभी जिंदा हैं उनके लिए तौबा का दरवाज़ा खुला हुआ है,लिहाज़ा एैसी दोगली पालिसी से तौबा करें और अहले सुन्नत व जमाअत के सच्चे मज़हब पर कायम हो जायें इसी में ईमान की आफियत है,अब मैं नीचे मैं फातिहा देने का तरीक़ा दर्ज कर रहा हूं मगर उससे पहले ये भी जान लीजिये कि जो भी पढ़ा जाये सही पढ़ा जाये ये बात मैं हमेशा ही कहता रहता हूं,और ये सही पढ़ना सिर्फ फातिहा देने की ज़रूरत नहीं है बल्कि नमाज़ तिलावत वज़ायफ सब ही की क़ुबूलियत सही अदायगी पर मौक़ूफ है,मिसाल के तौर पर ये रिवायत पढ़िये*


*फुक़्हा* – एक बहरा शख्स था,उसके पड़ोस में कोई बीमार हो गया तो उसने सोचा कि चलो उसकी इयादत कर लिया जाए,फिर सोचा कि मैं वहां क्या करूंगा कि मैं जो बोलूंगा वो तो सुनेगा मगर वो जो बोलेगा मैं तो सुन ही नहीं पाऊंगा,ये सोचकर उसने खुद से ही कुछ सवाल जवाब गढ़ लिए कि मैं कहूंगा कि आप कैसे हैं तो वो ज़रूर कहेगा कि ठीक ही हूं तो मैं शुक्र अदा करूंगा,फिर मैं कहूंगा कि आपका इलाज कौन हकीम कर रहा है तो वो किसी का नाम बताएगा तो मैं कहूंगा कि बहुत अच्छा हकीम है उसका इलाज ना छोड़िएगा,फिर मैं पूछूंगा कि खाने में क्या ले रहे हैं तो वो ज़रूर कोई हल्का फुल्का खाना बतायेगा तो मैं कहूंगा कि इसी को खाते रहियेगा,ये सब तैयार करके वो बीमार के पास गया और जाकर पूछा कि आप कैसे हैं तो उसने कहा कि मर रहा हूं तो बहरा बोला कि अल्लाह का शुक्र है, मरीज़ को बड़ा गुस्सा आया फिर बहरे ने अगला सवाल दाग दिया कि आपका इलाज कौन कर रहा है मरीज़ ने झल्लाते हुए कहा कि हज़रत इज़राईल का तो बहरा बोला कि सुब्हान अल्लाह वो तो बहुत अच्छे हकीम है उनका इलाज जारी रखियेगा,फिर बहरे ने सवाल किया कि आप खाने में क्या ले रहे हैं तो उसने गुस्से में कहा कि ज़हर खा रहा हूं तो बहरा बोला कि मा शाअ अल्लाह बहुत अच्छा हां थोड़ा बहुत खाते रहियेगा,अब ये खुश होकर वहां से चल दिया कि मैंने उसकी इयादत करली हालांकि उसको ज़रा भी ख़बर नहीं थी कि वो बीमार को नाराज़ करके लौटा है


📕 हमारे ग़ौसे आज़म,सफह 284


*🌹 इस रिवायत को पढ़कर आप समझे नहीं होंगे मैं समझाता हूं,बअज़ मुसलमान जो कि इल्म से बहुत दूर हैं ना तो कभी मदरसे गए और ना ही कभी कोशिश की कि इल्मे दीन हासिल करें,एैसे लोग नमाज़ पढ़कर तिलावत करके वज़ायफ पढ़कर खुद ही खुश हो लेते हैं कि चलो हमने पढ़ तो लिया हालांकि वो इस बात से बिलकुल बे खबर हैं कि उनके गलत पढ़ने पर उल्टा वो रब को नाराज़ कर चुके हैं,एक सवाल पूछता हूं ये बताइये कि जो बच्चा कभी स्कूल नहीं गया अगर उससे A B C D लिखकर पूछा जाए कि बेटा क्या लिखा है तो क्या वो बता पायेगा,नहीं कभी नहीं,तो फिर हम बग़ैर इल्मे दीन सीखे नमाज़ कैसे पढ़ सकते हैं क़ुर्आन कैसे पढ़ सकते हैं,मेरे अज़ीज़ों मेरी इस बात का गलत मतलब ना निकालें कि फि क्या हम नमाज़ ना पढ़ें या हम क़ुर्आन न पढ़ें,यक़ीनन पढ़ें और ज़रूर पढ़ें,मगर जैसे अल्लाह ने पढ़ने का हुक्म दिया है वैसे पढ़ें अपनी मर्ज़ी से गलत सलत नहीं,इसे बहुत ही क़ायदे से समझिये कि क़ुर्आन पढ़ने के लिए मखरज की अदायगी बहुत बहुत बहुत ज़रूरी है,मसलन *ا ع . ح ه . ث س ص ش .غ. ق ك . ز ذ ظ . د ض* ये वो हुरूफ़ हैं जिन्हें अगर सही से अदा ना किया जाए तो बजाये फायदे के नुकसान उठाना पड़ सकता है जैसे कि इस्म يا بدوح जो कि कशाइशे रिज़्क़ व हुसूले बरक़त के लिए पढ़ा जाता है अब इसमें बड़ी ح है अब इसको अगर छोटी ه से यानि يا بدوه पढ़ दें तो जिस जगह पढ़ा जायेगा वो जगह वीरान हो जायेगी घर में आग लग जायेगी आबादी बर्बादी में तब्दील हो जायेगी,इसको पढ़ने के बाद शायद आपको अंदाज़ा हो गया हो कि क्यों मुसलमान नमाज़ रोज़ा और इतने वज़ीफे पढ़ने के बाद भी परेशान रहता है क्योंकि ज़्यादातर लोग सही पढ़ते ही नहीं हैं,तो जब सही पढेंगे ही नहीं तो क़ुबूल क्यों होगा और जब क़ुबूल ही ना होगा तो उसका फायदा क्यों कर मिलेगा,इसको युं भी समझिये कि एक कारतूस से आदमी मर सकता है मगर तब जबकि उसे बन्दूक में रखकर चलाया जाए अगर युंही हाथ से किसी को कारतूस खींचकर मारें तो क्या आदमी मरेगा,हरगिज़ नहीं,बस उसी तरह कोई भी वज़ीफा या तिलावत कारतूस है और आपका मुंह बन्दूक,जब बन्दूक सही होगी तो कारतूस भी चलेगी और असर भी करेगी,बेशक नमाज़ रोज़ा हज ज़कात फर्ज़ है मगर उन सबको अमल में लाने के लिए इल्मे दीन सीखना भी हर मुसलमान मर्द व औरत पर फर्ज़ है,आज इल्म की कमी ही तो है जो भोला भाला मुसलमान बद अक़ीदों के चंगुल में फंस जाता है अगर उसे अपने अक़ाइद का इल्म होता तो किसी की क्या मजाल थी कि उसे ज़र्रा बराबर भी बहका सकता,हो सकता है कि आपमें बहुत से ऐसे लोग होंगे जो अब मदरसे नहीं जा सकते मगर मेरे दोस्तों अपने घर में किसी हाफ़िज़ को बुलाकर तो पढ़ ही सकते हैं,आज मौक़ा है कुछ भी करने का अगर ये सांस टूट गयी तो फिर सिर्फ हिसाब देना पड़ेगा मौक़ा नहीं मिलेगा,बड़ी बड़ी बात करने से कोई फायदा नहीं है फायदा तो इसमें है कि हम अमल करें अगर मेरी कोई बात कड़वी लगी हो तो माफी चाहूंगा मगर बात है सच्ची कि दीन वही सीखेगा जिसमे सलाहियत होगी,बात भी क्या होती है कहां से कहां चली आई,खैर अपने किसी भी नेक अमल मसलन क़ुर्आन की तिलावत या ज़िक्र या वज़ायफ यहां तक कि अपने फरायज़ जैसे नमाज़ रोज़ा हज ज़कात का भी सवाब किसी खास की रूह को पहुंचाना उर्फ़े आम में यही फातिहा कहलाता है,आम मुसलमान की रूह को बख्शा गया अमल फातिहा और किसी बुज़ुर्ग या वली या नबी की बारगाह में यही काम किया जाए तो नज़रों नियाज़ कहलाता है लेकिन अगर हुज़ूर या किसी वली की नज़्र को भी अगर फातिहा कह दिया जाए तो कोई हराम या नाजायज़ नहीं है,और फातिहा पढ़ने में कुछ भी जो याद हो और सही पढ़ सके पढ़े और बख्श दें और जो मआज़ अल्लाह अब तक क़ुर्आन को मख़रज से नहीं सीख पाये हैं वो कुछ ऐसे वज़ायफ पढ़ा करें जिन्हे कच्ची ज़बान वाले भी आसानी से सही पढ़ सकते हैं मसलन “या करीमू या अल्लाहु” तो वो इसी को अपना वज़ीफा बना लें और फातिहा में 100 बार या 500 बार या 1000 बार पढ़कर इसका और जो कुछ नज़रों नियाज़ पेश हो उन सबका सवाब बख़्श दें बख्शने का तरीका नीचे लिखा है,वैसे तो फातिहा पढ़ने के कई तरीक़े हैं मगर मेरे आलाहज़रत के खानदान से जो तरीक़ा बताया गया वही आपको बताता हूं और ये भी याद रहे कि फातिहा मर्द व औरत में कोई भी दे सकता है*

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शनिवार, 6 मार्च 2021

Hazrat Ameer muaviya Fazail wa manaqib

 

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    Hazrat Ameer muaviya Fazail wa manaqib

    Hazrat Ameer muaviya Fazail wa Manaqib


    Hazrat Ameer Muaviya Hazrat ibne Abbas ki Nazar mein

    Hazrat Ibne Abbas say Pocha Gaya Kay Aap Hazrat  Ameer ul Mominin Ameer Muaviya Kay Baare Mei Kya Raaye  Hai Jab Ki Wo witar KI Ek hi Rakaat Padhtay Hain Hazrat Ibne Abbas Nay Farmaya BE shak Wo Faqeeh Hain

    *Bukhari Shareef vol 2 page 436*


    Jaame Tirmizi mein Baab ul Manaqib Hazrat Ameer Muaviya

    *Huzoor ﷺ Hazrat Ameer Muaviya Kay liye Jannat ki Basharat Farmaye Hain*
    Nabi Karim irshad Farmate Hain meri ummat mein say Jo giroh Sab Say Pahle Bahri Jihad Kare ga Un kay Liye Jannat Wajib Hogai bukhari sahrif vol 2 page107 Bukhari sharif Hi mein Dusri Jaga Riwayat Milti Hai ki sahaba kiram Nay Hazrat Ameer Muaviya Kay Sath milkar Sab Say pala Bahri Jihad kiya Bukhari sharif vol 2 page 66,67



    *Huzoor ﷺ Nay Hazrat Ameer Muaviya Ko Duayen Di Haain

    Huzoorﷺ Nay Hazrat Ameer Muaviya kay LIye Dua farmai ki “ aye Allah is {Ameer muaviya} ko ilm Ata Farma isko Hidayat Ka Rasta Dikhane Wala Aur Hidayat Yaafta Bana Aur Isko Hidayat Ata Farma Aur Iskay Zariye  Dusron Ko Hidayat Ata Farma
     *{kanzul umal vol13 page 349}*



    5

    Tirmizi Ki Bab ul Manqib Mein Hadees Hai ki”Hazrat Omer Bin KHattab nay Hamas bin Umair bin Sa,ad Ko Maazol Kar Kay Hazrat Ameer Muaviya ko Waali Banaya tu Logon Nay kaha Aap Nay Umair  Ko Maazol Kar Kay Hazrat Ameer Muaviya ko Ameer  Muqarar Farma Diya is per Hazrat Umair Nay Kaha Hazrat AmeerMuaviya Ka zikr Khair say Hi Kiya Karo Kiyun Kay Main Nay Nabi Karim Ko Farmate Suna Ya Allah in {Ameer Muaviya }Kay Zariye Logon ko Hidayat Day [Jame Tirmizi vol 2 page755]





    Huzoor ﷺ irshad Farmate Hain Aye Allah {Hazrat} Ameer Muaviya ؓ Ko Quran Aur Hisab Ki Taleem  Daye Use Zameen Ki Badshahi Ata Farma Aur Use Azab Say Azab Say Bacha

    {Al Muajjam ul Kabeer vol 19 page 439}





    Nabi Karim ﷺIrshad Farmate Hain “Mere Raaz Muaviya Bin Abu Sufiyan ؓHain Tu Jis Nay in Say Mohabbat Ki Wo Najat Pa Gaya Aur Jis Nay in Say Bugaz Rakha Halak Hogaya”

    {Al Riyaz Ul Nazra Page 218}

    Is Hadees Ko Imam Ibne Hujar Haitmi Nay Apni Kitab Tathir ul Jinan mEin Bhi Naqal kiye Hain









    *Fazai’ Wa Manaqib Hazrat Ameer Muaviya*

     Huzoor ﷺ irshad Farmate Hain abubakar Meri Ummat Mein Sab Say Bada Naram Dil Aur Meharban Hai Phir Aap Nay Baqiya Manaqib Khulafa e Araba Zikr Farmaye Uskay Bad Sahaba Ki Dusri Jamat Ka Aap Nay Tazkira Farmaya  Aur Aap Nay Hazrat Ameer  Kay Mutaliq Farmaya  Muaviya Bin Abi Sufiyan Meri Ummat Mein Sab Say Ziyada Burdbaar Aur Sakhi Hai

    *Al Mukhtar Fi Usol sunnah  page 154)*




    Ibne Asakir Riwayat kartay hain

     Ki Arwa bi Roveem say kaha

    Ek Airabi Nabi karim ﷺ kay paas aaya aur bola kay mujh say khushti lado Tu ussay Hazrat Ameer Muaviya Radi Allah Anha Nay kaha main Tujh say Khushti Ladta hun tu (isper) Nabi karim ﷺ  Nay irshad Farmaya kay(Hazrat Ameer) Muaviya Kabhi Maglob Na hun gay chunancha Hazrat Ameer muaviya Nay us Airabi Ko pachad diya Jab Jange siffain Ho chuki Tu Hazrat Ali Radi Allah Anah Nay (Arwa say) kaha kay Agar tum is Hadees zikar Kar Detay Tu Main Muavuya radi allah anah say Jang Na karta

    *izalatul khulafa vol 4 page 516*




    Hazrat Ali ki wafat aur imam Hasan ki khilafat say Daatbardari Kay baad Hazrat Ameer muawiya Kay liye khilafat Bilitefaq Sahih Sabit Hai Kiyun Kay Hazrat Hasan Radiallahuanha Nay khoon Rezi Say Bachaw Ki Maslihat Ko Madden Nazar Rakhtay howe Khilafat Hazrat Ameer Muaviya Kay Sapurd kardi Aur is Tarah Rasool Allah Ki Hazrat Hasan Kay Bare Mein Peshangoi Bhi Sahih Hogai Kay mera ye Beta Sardar Hai Aur Allah iskay  Zariye 2 Jamaton mein Surah Farmaya Day Ga istarah Hazrat Hasan Radiallahuanha Ki Dastbardari Say Hazrat Ameer Muaviya Radiallahuanha ko Khilafat Tafweez Howi Aur is Saal Ka Naam Hi Aam ul Jamaa ( ijtema wa itefaq wala saal) Mashoor Hogaya Kiyun Kay is saal Tamam Sahaba Kay ikhilafat Kahatam hogaye Aur Sab Nay Hazrat Ameer Muaviya Radiallahuanha ko Khalifa Taslim Kar Liya Kiyun Kay is wafat (Hazrat Ameer Muaviya aur Hazrat imam Hasan Radiallahuanha Kay Alawa ) Koi Teesara Mudai Khilafat Nahi tha

    MAZEED Aage Irshad Farmate Hain

    *”Ahle sunnat Ka muttafiqa Faisal Hai kay sahaba Kiram Kay Bahami Ikhtelafat per Bahas Wa Mubahisa Na kiya Jaye unki Burai Say Zubane Rok li Jayen unaky Fazail Wa Mahasin Ka izhar Kiya Jaye  jo Waqiyat Aur ikhtelafat Ronuma Howe Uneh Allah Kay Sapurd Kiya Jaaye jaisa kay Hazrat Ali Hazrat Talha Hazrat Zuber Hazrat Aaisha Hazrat Ameer muaviya Radi allah anha wagera kay ikhtelafat ka zikar kiya gaya hai*

    *_Ghuniyat ul Talibeen _*

    *Note* Sarkar Ghause Azam ki Talim tu ye Hai kay sahaba kay Apasi ikhtelafat mushjirat per Zuban band rakhi jaaye magar Afsos kay baaz log Sahaba kiram ko radi allah anah bhi kehte Hain Aur Unki Zaat per Aitraz Bhi kartay Hain Afos Hai Aise logon per Jamate Ahle sunnat Ki Rawish Say Hat kar Rafziyat Ki Taraf chal pade Hain

    Allah Tala Hame Ghause Azam kay Rastay Per Chalne ki Taufiq Ata farmaye.







    *Huzoor ﷺ Hazrat jibrael Alehsalam kay Mashware say Hazrat Ameer Muaviya ko Apna katinmb Banaya*
    Ibne Kaseer Albadaya Wan Nahaya {Tareekh Ibne kaseer} Mein Riwayat Naqal Farmate Hain

    Hazrat Ibne Abbas Bayan farmate hain Kay Jibrael Alehsalam Rasol Allah ﷺ Kay Paas Tashrif Laye Aur kaha Ya Rasool Allah ﷺ Muaviya Radi allah Anhu  Ko Salam Kahiye Aur Uneeh Bhalai Ki Wasiat kijiye Bila Shuba Wo Katib Aur Wahi Per Ameen Hain Aur Bahut Ache Ameen hain

    Mazeed Aage Ek Aur Riwayat Ibne Asakir say naqal Karte hain Kay “Rasool Allahﷺ Nay hazrat Amer muaviya Ko Apna Katib Banane Kay Liye Hazrat Jibrael Alehsalam Say Mashwara Kiya Tu Unhaun Nay kaha Uneeh Katib Bana Lijiye

    *Tareekh Ibne Kaseer Vol 5 page 158*



    Imam ibne hujar makki Likhtay hain

    “Hazrat Ameer muaviya  ki khilafat aur  unka musalmano kay umoor ki Nigrani karna aur Khilafat Kay Taqazon Kay Mutabiq  Tasarrif Karna Dusrust Tha Aur Ye sab Batain us Sulah Per Muratib Hoti Hain (Jo imam Hasan radi allah anah Aur Hazrat Ameer muaviya Radialla anah) Pas Us waqat Say Hazrat Ameer Muaviya Ki Khilafat Ka Saboot Ban Gaya Aur iskay Baad wo Imam Bar Haq Aur Sache imam Ban Gaye”

    *Al Sawaiq Ul Muharriqa mutarjim page 721*





    Imam ul Hind Hazrat Shah Wali Ullah Muhaddis Dehlvi Rahmatullaha Aleh Riwayat Naqal Farmatay Hain
    Hazrat Ali shere Khuda Radi allah anah say Ahle jamal kay Taluk say Sawala kiya gaya

    Kaha ki

    *kiya wo Mushrik Hain ye log(yani Ahle jamal Hazrat Ameer muaviya aur unki Fauj)?*
    Hazrat Ali radi Allah anah nay farmaya Ye log Shirk Say Bhagtay Hain

    *Pocha gaya kiya Munafiq Hain Ye Log?*

    (Hazrat Maula Ali nay farmaya) Munafiq Allah Ka zikr Nahi Kartay Magar Kam(yaani Ahle jamal tu Allah ka zikr Kasrat say karnay wale hain Munafiq tu zikr kartay hain magar bahut kam kartay hain)

    *Pocha gaya Phir Ye Log Kiya Hain?*

    Hazrat Ali Shere Khuda Nay irshad Farmaya *Ye Hamare Bhai Hain* unaho nay Hus say Bagawat ki Aur Hazrat Maula Ali nay Farmaya main Umeed Karta Hun Hum Misal Un Logon kay Ho Jaayen Gay jin Kay Bary mein Allah Tala ka farman Hai ونزعنا ما فى صدورهم

    Aur jo khuch Unkay Dilon mein Gubar Tha Hum usko Door karen Dain gay ki Sab Bhai Bahi Ki Tarah (Ulfat wa Muhabbat) Say Rahen Gay

    *izalatul Khifa Vol 4 page 522*




    Imam Rabbani Hazrat Mujaddid Alf e Saani Jin kay Taluk say Dr iqbal nay Kaha tha
    Hazir Huwa Main Sheikh-e-Mujadid Ki Lehad Par

    Woh Khak Ke Hai Zair-e-Falak Matla-e-Anwar
    Iss Khak Ke Zarron Se Hain Sharminda Sitare

    Iss Khak Main Poshida Hai Woh Sahib-e-Asrar
    Gardan Na Jhuki Jis Ki Jhangeer Ke Agay

    Jis Ke Nafs-e-Garamond​ Se Hai Garmi-e-Arhar
    Woh Hind Mein Sarmaya-e-Millat Ka Negheban

    Allah Ne Barwaqt Kiya Jis Ko Khabardar
    Hazrat Mujaddid Alfe Sani likhtay hain

    Qazi Ayaz Nay kitab Shifa Mein Likha Hai imam Malik Farmatay Hain kay Jis Shaks Nay Huzoor ﷺ Kay Ashab Mein Say Kisi Ko Yani Hazrat Abubakar Hazrat Omer Hazrat Usman Hazrat Ameer muaviya  aur Hazrat Umroo Bon Aas Razi allah Tala anahum Ko Gali Di kah ki wo kufr Aur Gumrahi Per Thy tu wo Wajib ul Qatal Hai Aur iskay Alawa Aur Koi Sab wa shatam ka lafaz istemal kiya jis Tarah Log Ek dusre Ko kahtay Hain Tu isko Sakht Saza di Jaaye

    *maktobat imam Rabbani Daftar Awal Hissa Duam page 188*